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Showing posts from June, 2012

" आज 45. नक्सली मारे गए , मैं खुश हौऊं या रौऊँ "....?????

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" प्रिय मित्रो , नमस्कार !! आज समाचार कि छतीसगढ़ के राजनांनन्द जिले से 40.किलोमीटर दूर डोंगरगढ़ तहसील में पुलिस और नक्सलियों में एक जबर्दस्त मुठभेड़ हुई जिसमे 45. नक्सली मारे गए और 20. भागने में सफल रहे !! जाते - जाते वो अपना सामान वन्ही छोड़ गए जिसमे आधुनिक तकनीक वाला प्रिंटर लैपटॉप टेंट बोर्ड और बोतलें आदि थीं , यानी वंहा पर वो अपनी सभा कर रहे थे और आगामी योजनायें बना रहे थे !!
                               इससे पहले इन नक्सलियों ने और पुलिस ने ना जाने कितनी बार ऐसे ही नर संघार किया है !! ये एक बदले की भावना से भरी कोई कड़ी सी लगता है जैसे कभी भी ख़तम नहीं होगी !! इससे पहले 1983 से 1999 तक ऐसा ही पंजाब में चला , पूर्वी भारत में भी ऐसे ही देशवासी मरते रहे और काश्मीर में तो आज तक चल ही रहा है !! स्थान बदल जाते हैं , मरने वाले और मारने वाले के नाम बदल जाते हैं इसके साथ - साथ मारने वालों के उद्देश्य भी बदल जाते हैं , नहीं बदलता तो वो ये की चाहे जान का नुक्सान हो या माल का वो सिर्फ और सिर्फ " भारत " का ही हो रहा है 1945 से लेकर आज तक !! मरने वालों की संख्या लाखों में है और ध…

" ई लोग कार्यकर्त्ता हैं , तो का हम नेता हैं ,ससुर का नाती " ???

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" सभी कार्यकर्ता मित्रों को मेरा सादर प्रणाम !! कल संसदीय कार्य मंत्री श्री मान पवन जी बंसल साहिब फ़रमा रहे थे कि प्रणब डा जैसा छोटा सा कार्यकर्त्ता भारत का राष्ट्रपति बन रहा है , ये सिर्फ कोंग्रेस में ही संभव है !! इस से पहले श्री मान नितिन जी गडकरी साहिब जोर से भाषण देते हुए कह रहे थे की ये कोई सुषमा जेटली और अटल जी की पार्टी नहीं है ये " मुझ " जैसे साधारण कार्यकर्त्ता की पार्टी है जो नीचे से चल कर राष्ट्रीय अध्यक्ष पद तक आ सकता है !! उस से भी पहले श्री मति वसुंधरा जी जब जयपुर में एक मीटिंग से रूठ कर बाहर निकलीं थीं तो उन्हों ने भी अपनी और इशारा करते हुए कहा था की " कार्यकर्ताओं " का अपमान हम बिल कुल नहीं सहेंगे !!
                                  दोस्तों ऐसे बयां सभी दलों के नेता देते रहते हैं जब भी उनको अपना " उल्लू सीधा करना होता है " !! लेकिन क्या किसी भी पार्टी के किसी भी नेता को अपने कार्यकर्ता की कभी भी कोई चिंता रही है ????? मुझे तो नहीं लगता की हमारे नेता सचमुच में इतने संवेदन शील हैं ??? 40 साल से मैं भी राजनीती में हूँ लगभग सभी राजनितिक …

" माननीय सांसदों ! राष्ट्रपति चुनने में स्वविवेक से काम लोगे या .. भेड़े बनोगे "????

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" स्वविवेकी मित्रों को मेरा आदर सहित प्यार , कृपया स्वीकार करें !!
                               जब भी हम अपना सांसद चुनते हैं तो यही सोचकर ज्यादातर लोग अपना वोट देते हैं की यह सज्जन हमारी आकांक्षाओं पर खरा उतरेगा और अपनी बुध्धि और विवेक से लोक सभा में जनहित के प्रस्ताव आने पर निर्णय करेगा !!! लेकिन देखने में भी और वास्तव में भी लगभग सारे सांसद अपनी पार्टी के अनुशासन के नाम पर या अपने दल के नेता की बुध्धि को अपनी बुध्धि से बड़ा मान कर ( सीधी भाषा में कंहूँ तो चमचागिरी के कारन ) सारे महत्वपूर्ण फैसले उसी पर छोड़ देते हैं .. 
क्यों ??? 
                     अब जैसे हमारे राष्ट्र - पति का चुनाव नजदीक आ गया है , सभी राजनितिक दलों ने अपने सांसदों और विधायकों से कोई राय नहीं की बल्कि सबने अपने अधिकार अपने नेताओं को ही सौंप दिए क्यों ??? क्या ये जनता के साथ धोखा नहीं ???हाँ पार्टी के अन्दर का कोई निर्णय करना हो और उसमे सांसद - विधायक निर्णय का फैसला अपने नेता को  सौंपें तो कोई बात समझ में आती है लेकिन जो मुद्दा सीधे - सीधे जनता से जुदा हुआ हो भला उसे जनता कैसे स्वीकार करले की हमारे सांसदों…

" सीखो भारतीय नेताओं !! सोनिया जी से कुछ सीखो " !! ???

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" सीखने - सिखाते रहने " वाले मित्रो और देवियों , मास्टर जी वाला बहुत सारा प्यार और नमस्कार स्वीकार कीजिये !! 
                             ये मास्टर जी का प्यार भी बहुत गज़ब का प्यार होता है जी , मुझे ये तो नहीं पता की आपके जीवन में कब - कब , कितना - कितना और किस - किस मास्टर जी ने कैसे - कैसे प्यार प्रकट किया है ??? उससे आपको आनंद मिला हो या दुःख , लेकिन मेरा दावा है की आपको वो प्यार याद अवश्य होगा ??? इसलिए मैं ही अपना तुज़ुरबा बताता हूँ !! मेरे पिता श्री भी अध्यापक रहे हैं , पूरे शहर के अध्यापक - अध्यापिकाएं उनका सन्मान करते थे और हैं , बचपन में वो मुझे जिस - जिस विद्यालय में दाखिल करने जाते वन्ही वो उन मास्टर जी को ये अवश्य कहते की गुरु जी इसका थोडा "ध्यान " रखना जी , सामने वाले गुरु जी कहते की अवश्य ये मेरे ही बच्चों जैसा है इसका तो मैं विशेष ध्यान रखूँगा आप निश्चिन्त हो जाइए !! लेकिन दुसरे ही दिन से मेरा ऐसा ध्यान रख्खा जाता की बस पूछो मत !! सबसे पहले मुझे ही सारे प्रश्नों के उत्तर देने हेतु कहा जाता , सबसे पहले मुझे ही होम वर्क दिखने हेतु कहा जाता !! ओरों को …

" ससुरा भी कभी जँवाई था , बकरा भी कभी कसाई था " !!!!????

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" रिश्तों की इज्ज़त करने वाले मित्रो ", लाड भरा नमस्कार स्वीकारें !!
                                वैसे तो भारत में बहुत सारी ऐसी चीजें हैं जिनसे विश्व आश्चर्य चकित हो कर दांतों तले उंगलियाँ दबा ले जैसे भारतियों का खान - पान , पहनावा , बोल - चाल आदि आदि । लेकिन मैं आपको भारत के एक प्यारे से रिश्ते के बारे में आज बताना चाहता हूँ ! हालाँकि " मुन्नी - एकता कपूर " जी ने मेरे इस रिश्ते की बराबरी वाले रिश्ते पर एक लम्बा सारा नाटक भी बना डाला और उसने भी भारत में एक नया रिकार्ड कायम कर दिया , प्यार से मैं उसे भी आशीर्वचन देता हूँ !!  तो चलिए और ज्यादा आपको इंतजार नहीं करवाता हूँ आपको बता ही देता हूँ , वो रिश्ता है " ससुर व्  जंवाई का और बकरे एवं  कसाई का " !! 
                                      जी हाँ इन दोनों रिश्तों के बारे में जितना कहा और लिखा जाये वो कम ही होगा क्योंकि जब भी ये दोनों एक दुसरे के सामने होते हैं , तभी एक नया वाकया घट जाता है जो की ऐतिहासिक ही होता है !!?? यही एक रिश्ता है जो हर दिन अपनी नयी उचाईयां स्थापित करता है !! क्योंकि ये रोज़ गिरता भ…

" राजनितिक थाली के बेन्गुन " लुढकने को बैचेन..???

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" बेन्गुनों की पहचान रखने वाले प्रिय मित्रो ", " भरते और तंदूरी रोटी - रोटी सहित मीठी लस्सी " वाला नमस्कार कबूल फरमाएं !! 
                अब इसमें बेचारे बेन्गुनों का क्या कसूर जो उन पर किसी विद्वान ने कहावत बना दी , गोल तो बहुत सारी  चीजें होती है मसलन कोलकते का रस - गुल्ला , वो तो कब मुंह से पेट के अन्दर चला जाता है की पता ही नहीं चलता । बिलकुल अपने प्रणब दा की तरह ?? चार दिन पहले तक तो कह रहे थे की मैं राष्ट्रपति बनना ही नहीं चाहता , मेरा नाम मत उछालो प्लीज वगेरह वगेरह ??? और अब जोर शोर से दोस्तों और दुश्मनों से समर्थन भी मांग रहे हैं !!? क्योंकि रसगुल्ला पेट में जाने के बाद वापिस नहीं आ सकता बेन्गुन घूम कर वापिस वंही आ सकता है इस लिए कहावत में बेन्गुन लिखा गया है !!
                         जब भी देश में चुनाव होने का समय नज़दीक आता है तब - तब ऐसी प्रकृति के लोग देखना - जांचना और परखना शुरू कर देते हैं की आने वाला कल कौन से दल के पक्ष में जाने वाला है ...बस उसी और जाने को मन ललचाने लगता है !! अगर सामने वाला दल भी स्वागत करता दिखाई देता है तो ऐसे लोग कोई बहाना बना…

" मोरे सैयां - भये .....डाकू तो , अब चोरी - डकैती कानूनी है " ! ! ? ?

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" सैयां " रखने वाले सभी मित्रों को मेरा प्रणाम !! आप कहोगे हमेशा तो प्यार भरा नमस्कार और न जाने कैसे - कैसे नमस्कार करता रहता है आज " प्रणाम " याद आ रहा है, तो मित्रो जो " सैयां को रख सकते हैं वो ताकत वर ही होते हैं चाहे फिर वो स्त्री लिंग हों या पुलिंग !! ऐसे महानुभावों के तो चरण ही स्पर्श करने से जान छूटती है जी नहीं तो इनकी नज़र " वक्र ' हो जाए तो " अल्लाह " भी हाथ जोड़ कर खडा हो जाता है और कहता है की यार अपना घर का मामला खुद ही सुलट  लो , मुझे बीच मैं कंहाँ घसीट रहे हो यार ??? आपने वो कहावत तो सुनी ही होगी की " मोरे सैयां भये कोतवाल , तो अब डर  काहे का " ! और जिसका सैंयाँ  " डाकू " बन जाए तो चार चाँद लग जाते हैं जी छोटे - मोटे थानेदार तो डाकुओं के चरणों में रोज़ हाजरी लगाते हैं !! है की नहीं ...? अब वो डाकू चाहे पुराने हों या चल - चित्र पान सिंह वाले वाक्यानुसार आजकल के " नेता रुपी मोद्रण डाकू हों ...बेचारे दरोगा जी को तो " हाजरी और प्रबंधन " करना ही पड़ता है न ...????
                        आज मुझे  राज…

" भारतीय संस्कृति की दुश्मन , ये सोनिया - मनमोहनी सरकार "???

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" पानी पिलाने वाले मेरे प्रिय मित्रो , सावन सी फुहारों से भरा नमस्कार स्वीकार कीजिये !! पानी पिलाना एक मुहावरा है जिसका अर्थ हम सब जानते हैं की दुश्मन को चित कर देना ! दोस्तों हमारी सरकार ही हमें चित्त करने पर उतारू है वो भी विदेशी कम्पनियों के कहने पर !! ये तो हद ही हो गयी ! की इतनी बड़ी खबर को इलेक्ट्रोनिक मिडिया ने तो दिखाया ही नहीं क्योंकि उसको तो देश की जनता का ध्यान बंटाने का काम ही करने के पैसे मिलते हैं !!   प्यासे को पानी पिलाना तो भारतीय संस्कृति का एक हिस्सा है उसे किसी कानून के तहत कैसे समाप्त किया जा सकता है ??? लेकिन इस विदेशी हाथों और साँसों से पलने वाली संप्रग सरकार ने वर्षों पुराना " सराय - कानून " समाप्त कर दिया है !! जिसके अन्दर अब ये होगा की कोई भी किसी को मुफ्त में पानी नहीं पिला सकेगा !
                           आप आने वाली परस्थितियों का अंदाज़ा भली - भाँती लगा सकते हैं ! की इस देश में ये सरकार पानी की कमी जान बूझ कर बनाएगी और विदेशी कम्पनियों के मालिक या माफिया के लोग अपने खजाने भरेंगे जिसमे निश्चित रूप से नेताओं का भी हिस्सा होगा !!कब तक सोते रह…
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" खिलाडी पिंकी " निकला " पिन्का " ?? गयी नौकरी !
 प्यारे मित्रो , नमस्कार !! इस कलयुग में हर रोज़ हैरान कर देने वाली ख़बरें आ ही जाती हैं ! जैसे ही मैंने ये खबर पढ़ी माथा सन्न सा रह गया !! क्या होगा इस देश का ???? समझ ही नहीं आ रहा मुझे तो , आप ही इस समाचार को पढ़ कर मुझे बताइए !! आपको मेरे ब्लॉग और ग्रुप का नाम तो पता ही है ना ...!! " 5TH PILLAR CORROUPTION KILLER " इसे खोलने हेतु रोजाना लोग आन करें जी www.pitamberduttsharma.blogspot.com.
शुक्रवार, जून 15, 2012,16:36 [IST]
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" हंस चुगेगा , दाना तिनका , कौआ मोती खायेगा " ?????

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मेरे प्रिय " हंस - हंस्नियो मित्रो , धवल - शुद्ध नमस्कार !!!
                          दलीप कुमार साहिब की एक फिल्म थी ,जिसमे हिन्दू ग्रंथों से प्रेरित होकर और भविष्य की दिक्कतों से जनता को सावधान करने हेतु एक धार्मिक गीत डाला गया था , क्योंकि उस समय के फिल्मकार अपनी फिल्मों में मनोरंजन के साथ साथ कोई न कोई सन्देश भी दिया करते थे , उस गीत के बोल इस प्रकार से थे की " राम चन्द्र कह गए सिया से , ऐसा कलयुग आएगा , हंस चुगेगा  दाना तिनका ,कौआ मोती खायेगा !! बहुत मशहूर भी हुआ था ये गीत !! हर धार्मिक आयोजन में अवश्य बजाया जाता था - है और बजाया जाता रहेगा !! क्योंकि जैसे - जैसे कलयुग अपनी चरम सीमा पर जाएगा तब - तब इस गीत को बजने की इच्छा " हंस रुपी " इंसानों में ज्यादा जागेगी !! हंस रुपी इंसान का मतलब है की ऐसे पुरुष और महिलायें जो इमानदारी , सामाजिक और धार्मिक नियमानुसार ही अपना जीवन व्यतीत करने में ही अपना सुख देखते हैं !! और जो लोग समय रुपी बहाव के साथ अपने आदर्श तोड़ कर बहते हैं वो .......कौए हैं !!!!
                          पैसा , स्वार्थ और झूठी शान हेतु जो व्यक्ति अप…

" बैजा - बैजा " हो गयी जे , मनमोहन जी ...!!??

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होर भाई बेलियो , ते मेरी प्यारी - प्यारी सहेलियो , सब नु प्यारा - प्यारा सत श्री अकाल , राम - राम ते हेल्लो - शेल्लो !!
                        सुनाओ जी की हाल - चाल है तुहाडा ??? सब ठीक - ठाक है न ...??? गर्मी दियां छुट्टियां म्नाईया जा रहियां ने ?? या हिल स्टेशना ते सैर सपाटा किता जा रिहा है ? कुझ देश बारे वि कोई फिकर है की नहीं तुहानू ....??? आपने शरीफ ते अर्थ - शास्त्री प्रधान मंत्री जी दियां नीन्दां हराम होइयां पैयां ने !! इस गठबंधन दी सरकार विच भेड़े - भेड़े बने मंत्रियाँ ने आपने सरदार दी इज्ज़त मिटटी विच मिला दित्ती है !! जिवें की तुहानू पता है की पंजाबी विच कोई कम वधिया कर देवे ताँ आप्पां कहने हाँ की " बैजा - बैजा हो गयी है " !! ते जे कोई कम घटिया हो जाए ताँ आप्पां कहने हाँ के " ओसदी बैजा ओये - बैजा ओये " हो गयी !! यानी मिटटी पलीत हो गयी !!
                                 कल यारो दो खबरां आइयाँ , 1. देश दे दो वड्डे उद्योग पतियाँ ने किहा के देश बिना प्रधानमंत्री दे ही चल रिहा है !! 2. विदेशी संस्था जो संसार दे देशां दी तरक्की दा पैमाना तैयार करदी है उसने वि क…
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" भारत में फैलता - - राजनितिक राजशाही " ???


दिल्‍ली: उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री अखिलेश यादव की पत्नी डिंपल यादव के लोकसभा के लिए चुने जाने के साथ ही राजनीति में वंशवाद का मुद्दा एक बार फिर चर्चा में आ गया है। डिंपल सपा प्रमुख मुलायम सिंह यादव के परिवार की छठी सदस्य हैं जो राजनीति में हैं और निर्वाचित पद पर हैं। 

मुलायम खुद लोकसभा के सदस्य हैं। उनके भतीजे धर्मेंद्र यादव भी लोकसभा के सदस्य हैं। राम गोपाल यादव राज्यसभा के सदस्य हैं जबकि मुलायम के छोटे भाई उत्तर प्रदेश में वरिष्ठ मंत्री हैं। लेकिन भारतीय राजनीति में पुत्र और पुत्री तथा बहू अब मुद्दा नहीं रह गए हैं।

देश की सबसे प्रभावशाली नेता व कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी दिवंगत प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की बहू हैं। भाजपा नेता मेनका गांधी के साथ भी ऐसा ही मामला है हालांकि वह कांग्रेस की प्रतिद्वंद्वी पार्टी में हैं। दो और गांधी राहुल तथा वरूण लोकसभा के सदस्य हैं। वर्ष 2004 में संसदीय चुनावों के दौरान राहुल को टिकट दिए जाने पर संवाददाताओं ने सोनिया गांधी से सवाल किया था कि क्या वह ऐसा कर परिवार को बढ़ावा नहीं दे रही हैं, इस पर ना…

" जा - नी वैरने , तू साडे वी पसंद नहीं सरकार ".....!!!!

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" सभी सरकारी " हाथ "को सक्रिय करने में सहयोगी मित्रो , राम - राम !! वो वाली ......??????
         भारत में लाखों ऐसे लोग हैं जो सरकारी निर्णयों को क्रियान्वित करने में महत्व पूर्ण भूमिका निभाते हैं , और लाखों ऐसे हैं जो उनका सहयोग करते हैं । तब कंही जाकर एक निर्णय जनता पर लागू हो पाता  है । कई अफसर , राजनेता( पक्षी - विपक्षी दोनों ) और न्यायालय निर्णय कैसा हो कैसा ना हो ये भी तय करने में अहम् भूमिका निभाते हैं । अकेली सरकार ही दोषी या शाबाश की हकदार नहीं होती !!बहुत से सलाहकार भी होते हैं !! इस निक्कम्मी सरकार के ना जाने कौन से सलाहकार है ....इन्होने जनता को पिछले 10 सालों से नाकों चने चबवा रखें हैं !!वो चाहे फिर देश निति हो या विदेश निति !!! सब तरफ तौबा - तौबा हो रही है !! सरकार जनता को कह रही है की आप हमें पसंद नहीं और जनता सरकार को कह रही है की जा नी वैरने , तूं साडे वी पसंद नहीं ..!!!
                       देश में नज़र घुमाएँ तो हम पाएंगे की हर आदमी परेशान है किसान अपने अनाज के पहले से दोगुने दाम वसूल रहा है , कर्मचारी दोगुना तनख्वाह ले रहे हैं , मजदूर तीन गुना मजदूरी…

" हैवी - डाईट , वाले सरकारी चूहे ".....????

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" हैवी - डाईट " वाले मित्रो , भारी - भरकम नमस्कार !! कृपया स्वीकार करें !! 
                                आपको जान कर अति प्रसन्नता होगी की भारत के " इमानदार खाद्य - अफसरों " ने सरकार को बताया की 50,000 टन अनाज जो गोदामों में रख्खा था और जिनकी रक्षा हेतु चौकीदार भी नियुक्त थे, के बावजूद एक वर्ष में " हैवी - डाईट " वाले चूहे खा गए !! लेकिन उन शरीफ़ अफसरों की " सच्ची- बात " बड़े साहिबों को पसंद नहीं आई या यूँ क्न्हें की उन्हें विश्वास नहीं हुआ तो उन " इमानदार छोटे अफसरों"  पर थाणे  में  रपट लिखा दी गयी ।। इतना ही नहीं बल्कि उस अनाज की कीमत इन्ही अफसरों से वसूलने की कार्यवाही करदी ....!! है ना मित्रो " घोर अन्याय " ...????? 
                                 इन अफसरों का अनाफिश्यली ये कहना है की यही काम अगर नेताओं ने किया होता तो ना जाने कितनी देर तो आरोप - प्रत्यारोप चलते , चेनलों पर बहस होती , फिर संसद ठप्प होती तब कंही जाकर रपट दर्ज होती और फिर 10.- 20. सालों में जाकर निर्णय आता और वो शर्तिया ये निर्णय तो हरगिज़ नहीं होता की उस…

किसको कह रहे हो .......प्रधानमंत्री जी ...????

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" कहने - सुनने " वाले सभी मित्रों को, मेरा कर्ण - प्रिय नमस्कार !! स्वीकार करें !! 
             कल हमारे प्रधानमंत्री जी ( जो चालक व्यक्तियों के प्रिय हैं ) ने कांग्रेस की मंथन बैठक में दो बड़ी अजीब बातें कंही ...!! 1. " देश खतरे मैं है " और 2. अफवाह फैलाने वालों के खिलाफ सख्ती की जरूरत है !! उन्होंने ये नहीं बताया की वो ये उपरोक्त बातें ,किसके लिए , क्यों और किसे बता रहे हो !! क्या उनको जो आपकी उस मीटिंग में बैठे थे , जो आप के पूछे बिना पानी भी नहीं पीते ???( आप यानी सोनिया जी ) या भारत की जनता को जो आपको भुगत रही है ??? जनता तो आपसे पूछ रही है की अगर देश की ये हालत है तो इसके लिए जिम्मेदार कौन है ???? आपके मंत्री और अन्य लोग संगठन और सरकार की कुर्सियां क्यों तोड़ रहे हैं ???? रही अफवाह फैलाने की बात , तो श्रीमान जी ये समस्या तो एक थाणे दार हल कर सकता है की जो अफवाह फैला रहे हैं उनको अन्दर करके ??? और अगर अन्ना - बाबा का आन्दोलन आपको अफवाह फ़ैलाने वाला लग रहा है तो महाराज आप अपनी सफाइयां क्यों देते फिर रहे हैं ????
                               बात दरअसल मैं ये है क…

" कांग्रेस का मंथन - - - विष कौन पिएगा " ...????

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अमृत पीने वाले मित्रो , रस भरा  नमस्कार स्वीकार करें !! सदियों पहले या तो देवताओं और राक्षसों ने मिलकर सागर मंथन किया था या फिर आजकल हमारे राजनितिक दल कर रहे हैं ! फर्क सिर्फ इतना है कि उन्होंने समुद्र में जाकर , और मिलकर ये काम किया था लेकिन हमारे नेता पांच सितारा सुविधाओं से युक्त स्थान पर मुर्गे - सोमरस के साथ करते हैं अनाफिश्याली !! उस समय में जो वस्तु मंथन से निकलती थी उसका तुरंत निवारण या वितरण कर दिया जाता था ! कई बार तो ये समस्या पैदा हुई कि दोनों झगड़ने लगे कि सारी वस्तु हम लेंगे और कई दफा  हर कोई दुसरे को कहता कि ये वस्तु तुम लेलो !! लेकिन आज जनता रुपी समुद्र में न जाकर बंद कमरों में मंथन किया जाता है ! देवता तो कोई है नहीं इस कलयुग में सारे राक्षस ही  हैं ,कोई  छोटा तो कोई बड़ा !! अमृत के बारे में तो कोई जनता को बताता ही नहीं , विष रुपी मुसीबतें जनता को गिनाई जाती हैं और जनता का ही गला कटा जाता है !!
                                             अभी कुछ समय पहले मुख्या विपक्षिदल भाजपा ने ये काम किया और अब सत्ता में मुख्य भूमिका निभाने वाली कांग्रेस कर रही है !! दोनों में मुख्य…

" bharat ki sanvedhaanik sansthaaon main baithe vishesh chor ????

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" bharat ki sanvedhanik sansthaaon me baithe......vishesh -- chor "..????        priya mitro , saadar namaskaar !! aaj mera " transletar khraab hai , pichle 3-4 dino se main koshish kar raha hoon ise durust karne hetu lekin mujhse ye theek nahi ho paya hai , isliye kripya aap is " fouji " type ki inglish se kaam chlaa len . 4 dino se main koi lekh aap tak nahi panhuchaa paya , to maine doosron ki kating se kaam chlaayaa , lekin fir bhi mujhe ek azib si ghabrahat si mahsoos hoti rahi ki main aap tak apni baat nahi bhej sakaa . jaise koi chugal khor do din koi chugli kisi ki naa kare to use pet dard hone lagta hai waise hi mujhe ho raha thaa . to aaj maine faisla kar liya ki chaahe jaise bhi ho , main apni baat aap tak awshya panhuchaaunga. to hazir hai aaj ki baat . yaani anna hazaare or babaram dev ji ki baat ! yaani team kezriwal ki baat !! or ant main hmari shreef sarkaar ke ujle prdhanmantri ji ki baat !!!! bharat sarkaar ke prwkta ji farmate hain ki kuch log…