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Showing posts from November, 2013

" तेजपाल की तरुणाई देखिये , सेकुलरों का अपने आदमी को बचाना देखिये और साम्प्रदायिक शक्तियों का माफीनामा देखिये" ...!!!!

" कोंग्रेस्सी मंत्रियों,वकील और नेताओं के बाद अब एक सेकुलर पत्रकार कि पोल" खुल चुकी है ! वैसे इस तरह के आरोप महात्मा गांधी , जवाहर लाल नेहरू और श्री मति इंदिरा गांधी जी के ऊपर भी लग चुके हैं लेकिन आजकल के नेता तो नेता लेकिन उनके टुकड़ों पर पलने वाले बिकाऊ पत्रकार भी ऐसे केसों में पकडे जेन लगे हैं !! संगत के असर के कारण ऐसे मामले सामने आते हैं !!
         तेजपाल ने बड़ी कोशिश की कि इस मामले को भावुक बातों से दबाया जा सके , लेकिन जब उन्हें इस मामले को दबाने में कामयाबी नहीं मिली तो उन्होंने अपना सारा माल समेटा और तहलका नाम कि पत्रिका से स्तीफा देकर तहलका मचाकर चलते बने !! आम आदमी अगर कोई ऐसा अपराध करता तो क्या उसे इस तरह कि रियायतें दी जातीं ??? उसकी तो प्राथमिकी दर्ज़ होने से पहले ही ग्रिफ्तारी हो जाती और पिटाई भी हो चुकी होती !कमाल तो देखिये कि पीड़ित महिला पत्रकार के साथ कोई पत्रकार और नाही कोई पत्रकारों की  संस्था खड़ी दिखायी दे रही है !! सब तरुण तेजपाल को भाजपा से बचने में लगे हुए हैं !! पहले तो पत्रकारों ने दिल्ली के एक छोटे नेता " जॉली " को उकसाकर शोमा के घर के…

इस शून्यता से कैसे उबरेंगे ?(साभार )

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क्या यह वाकई इतना मुश्किल दौर है जब स्थापित मूल्यों की जड़ें हिल रही हैं और विकल्प की समझ मौका मिलते ही व्यवस्था का हिस्सा बनने को बेताब हो रही है। एक साथ तीन पिलर डगमगाये हैं। समाज को गूथे हुये परिवार । पत्रकारिता के जरीये सत्ता से टकराने का जुनून। राजनीतिक व्यवस्था पर अंगुली उठाकर बदलने का माद्दा। सीधे समझें तो आरुषि हत्याकांड, तरुण तेजपाल और आम आदमी पार्टी। आरुषि हत्याकांड ने परिवार की उस धारणा से आगे निकल कर भारत के उस पारंपरिक और मजबूत रिश्तों की डोर पर ना सिर्फ सीधा हमला किया जो समाज के गूंथे हुये हैं बल्कि आधुनिक भारत के उस परिवेश पर भी सवालिया निशान लगा दिया जो सरोकार और संबंधों को लगातार दरकिनार कर संवेदनाओं का तकनीकीकरण कर रहा है। वहीं तरुण तेजपाल का मतलब महज तहलका का मालिक होना या संपादक होते हुये अपने सहकर्मी या खुद के नीचे काम करने वाली पत्रकार का यौन शौषण भर नहीं है बल्कि जिस दौर में पत्रकारीय मूल्य खत्म हो रहे हैं। पत्रकारिता पेड न्यूज से आगे निकल कर कॉरपोरेट और राजनीति के उस कठघरे का हिस्सा बनने को तैयार है, जहां चौथा खम्बा तीन खम्बो पर खबरो की बेईमानी का लेप इस तरह चढ…

" मतदाताओं को उलझाया जा रहा है लालच और झाँसे देकर ,तो दूसरी तरफ जीतने वाले के इर्द-गिर्द मण्डराने लगे हैं तरह-तरह के माफ़िया लोग " !!

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चुनाव आयोग के अफसर बड़े ही मज़बूर दिखायी पड़ रहे हैं क्योंकि उन्हें पता है कि जो ताकत संविधान ने उन्हें दी है वो केवल चुनाव संपन्न होने तलक ही है उसके बाद तो इन्ही नेताओं के नीचे ही उन्हें काम करना है ! इसी डर के चलते हुए ज्यादातर अफसर अपना कर्तव्य नहीं निभा पाते हैं !!सिर्फ खानापूर्ती होती ही दिखायी दे रही है !!
                   दूसरी और कई प्रत्याशियों ने अपने मतदाताओं को लुभाना - बहकाना और झांसे में लाकर फँसाना भी शुरू कर दिया है !! कंही शराब पकड़ी जा रही है तो कंही नकदी बांटी जा रही है !! आरोप एक दुसरे पर लगाये जा रहे हैं ! अपनी गलती कोई नहीं मान रहा , सब अपने आपको पाक-साफ़ और दुसरे को दोषी बताने में लगे हुए हैं !!
            तीसरी तरफ जो माफिया के लोग कोंग्रेस सरकार के रहते अपनी झोलियाँ भर रहे थे , वो ही लोग अब भाजपा और अन्य पार्टियों के प्रत्याशीयों के इर्द-गिर्द मंडराते दिखायी पड़ते हैं ! कोई भी प्रत्याशी उन लोगों को अपने से दूर रहने हेतु नहीं बोल रहा क्यों ?? मेहनत तो पार्टी के निष्ठावान कार्यकर्त्ता करते नज़र आते हैं लेकिन उनकी विज्ञप्तियों में उनके नाम नज़र ही नहीं आते और न…

मैं भी बन सकता हूं पीएम? -अशोक मिश्र !! ( saabhaar )

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मैं आफिस में बैठा कतरब्योंत कर रहा था कि एक आदमी मेरे पास आया और बोला, ‘भाई जी! मुझे आपसे कुछ सलाह करनी है। सुना है कि आप सलाह बहुत अच्छी देते हैं। आपकी जो भी फीस होगी, मैं भुगतने को तैयार हूं।’ मैंने उसे ऊपर से नीचे तक देखा और धीरे से उसके कान में फुसफुसाया, ‘आप आफिस के बाहर चाय की दुकान पर पहुंचिए, मैं आता हूं।’ थोड़ी देर बाद मैंने चाय की दुकान पर पहुंचकर उससे कहा, ‘हां..अब बताइए, आपकी क्या प्रॉब्लम है?’
                                 उस आदमी ने चाय सुड़कते हुए कहा, ‘भाई जी..मैं पार्टी बनाना चाहता हूं। राष्ट्रीय स्तर की राजनीतिक पार्टी..क्या मैं बना सकता हूं?’ मैंने भी चाय जोर से सुड़कते हुए कहा, ‘हिंदुस्तान में चोरों को पार्टी बनाने का हक है, छिछोरों को है, बटमारों और लुटेरों को भी यह हक हासिल है। दागियों को है, बेदागियों को है, तो फिर आपको यह हक क्यों नहीं है। आप तो भले मानुष दिखते हैं। होंगे भी, ऐसा कम से कम मुझे तो विश्वास है। ऐसे में भला आपको कौन रोक सकता है। आप शौक से बनाएं पार्टी, मुझसे भी जो मदद हो सकेगी, मैं करूंगा।’
                                      उस आदमी ने मेरी ओर…

" अफवाहों के भरोसे क्या जीत पाएंगे गंगाजल मील " ????

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जब अपने साथ उन्हें कोई चलता नज़र नहीं आया तो उनके चेलों ने सुझाया मील साहिब को " अफवाहों " का टोटका , परन्तु वो भी चलता नज़र नहीं आ रहा है !!
               क्योंकि जो भी अफवाह सूरतगढ़ के कोंग्रेस्सी समर्थकों द्वारा फैलायी जाती है दुसरे ही दिन भादू और गेधर के समर्थकों द्वारा गलत साबित कर दी जाती है !!
                              पहले तो ये खबर फैलायी गयी कि भादू जी के समर्थन में नगर मंडल के नेता नहीं हैं लेकिन आम जनता के सामने सभी एक मत हो कर चलते नज़र आये जनता को सारे भाजपा के पदाधिकारी !
                          फिर उड़ाई गयी कि श्री अशोक नागपाल भादू के साथ नहीं है तो वो भी बाज़ार में उनके साथ वोट मांगते नज़र आये !
                          फिर कॉंग्रेस्सियों ने ये अफवाह फैला दी कि गावों में श्री राजिंदर भादू का बिलकुल भी प्रभाव नहीं है लेकिन जिस भी गाँव में भादू जी ने नुक्कड़ सभा की वंहा-वंहा हज़ारों की भीड़ देखी गयी और सबने उनको वोट देने हेतु आश्वस्त भी किया !!
                  जब केंद्र में श्री नरेंद्र मोदी जीके प्रभाव और परदेश में श्रीमती वसुंधरा राजे जी के प्रभाव के…

कंहाँ गए भाजपा के वो नेता जो पद बांटते थे निष्ठावानों को और कंहा गए वो कार्यकर्त्ता जो निस्वार्थ भाव से पार्टी हेतु काम करते थे ???

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" बेतरतीब चुनाव प्रबन्धन , भाजपा के संगठन पदाधिकारियों के चुनाव में दिखायी ना देने , भाजपा देहात मंडल के कार्यकर्ताओं का कंहीं अता - पता न होने और प्रत्याशियों के नज़दीकियों का चुनाव प्रक्रिया से अनजान होना " जीत से दूर कर रहा है विधायक पद से प्रत्याशियों को !
 कंहाँ गए भाजपा के वो नेता जो पद बांटते थे  निष्ठावानों को और कंहा गए वो कार्यकर्त्ता जो निस्वार्थ भाव से पार्टी हेतु काम करते थे ???
             आज जन-जन के मस्तिष्क में यही प्रश्न कौंध रहा है !!क्योंकि जनता भी भाजपा की रीतियों-नीतियों को पसंद करती है और पार्टी व  संगठन की सभी गतिविधियों पर अपनी पैनी नज़र बनाये रखती है !! वो चाहती है कि और चाहे जो पार्टी या उसके नेता कितने भी भ्रष्ट हों या निकम्मे हों लेकिन भाजपा के तो बिलकुल भी भ्रष्ट और निकम्मे ना हों चाहे जनता उसे चुने या ना चुने क्योंकि सत्य को हमेशां अपना अस्तित्व बनाये रखना पड़ता है चाहे वो सतयुग हो या कलयुग !!


                 देश में पांच राज्यों के विधान-सभाओं के चुनाव हो रहे हैं जनता सब राजनितिक दलों व उनके नेताओं को तोल - परख रही है ! लेकिन सिक्के का एक दूसरा…

साभार !! पत्रकारिता का संकटकाल नहीं, संपादकों और पत्रकारों का संकटकाल.......!!

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-दिलीप सी मंडल||
यह पत्रकारिता का संकटकाल नहीं है. यह संपादकों और पत्रकारों का संकटकाल है. उन महान संपादकों का दौर गया जो गलत खबर दिखाकर दंगा करा पाते थे, छात्रों को आत्मदाह के लिए उकसा पाते थे, जो यह दंभ पाला करते थे कि वे सरकारें बना और बिगाड़ सकते हैं.
प्रिंट और टीवी मीडिया में आई बहुलता तथा सोशल मीडिया और इंटरनेट के विस्फोट ने पत्रकारिता को सूचनाओं और समाचारों के लाखों स्रोतों के दौर में पहुंचा दिया है. अब प्रश्न यह नहीं है कि पत्रकार कौन है, बल्कि सवाल यह है कि पत्रकारिता कौन कर रहा है. अगर आप सूचनाएं और समाचार लोगों तक पहुंचा रहे हैं, तो आप पत्रकारिता की नौकरी न करते हुए भी पत्रकार हैं.
अब लागों के पास सच जानने के सैकड़ों-हजारों तरीके हैं. पाठक और दर्शक लगातार सीख रहा है और मैच्योर हो रहा है कि विश्वसनीय समाचार कहां से ले. पत्रकारों के लिए विश्वसनीय बने रहने और विश्वसनीय दिखने की गंभीर चुनौती है.
खासकर इसलिए भी कि मीडिया की आंतरिक संरचनाएं और इसके अपने खेल-तमाशे अब लोक-विमर्श के दायरे में हैं. लोग यह मीमांसा करने लगे हैं कि ऐसी खबर क्यों दिखाई जा रही है और कोई खबर क्यो नहीं दिखाई जा…

राजस्थान भाजपा, गहलोत सरकार कि गलतियाँ - घोटालों को, आमजन तक पंहुचाने में नाकाम साबित हुई !! क्या सभी दलों के नेता आपस के सम्बन्धों को ज्यादा महत्त्व देने लगे हैं ??

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               नेताओं को अपने " राजनितिक - धर्म "  का पालन अवश्य करते रहना चाहिए ! सत्ता पक्ष को जनहित की योजनाएं बनाने , उनको सही रूप में लागू करने के साथ-साथ बढ़िया विदेश नीति  , शिक्षा नीति  और वित् व्यवस्था एवं सुरक्षा व्यवस्था के प्रति हमेशां जागरूक रहना चाहिए ! तो वंही विपक्ष का भी ये धर्म है कि वो सरकार में काम करने वाले नेता या उसे लागू करने वाले प्रशासन में कंही कोई कमी या कोई बड़ा घोटाला नज़र आता है तो वो ना सिर्फ उसको उजागर करे बल्कि लोकतंत्र के नियमों अनुसार दोषियों को सज़ा दिलाने हेतु धरने प्रदर्शन करती रहे और दोषियों को " बे - नक़ाब " करने का काम करे !!
                         दोनों पक्षों को अपने सहयोग हेतु मिडिया का भी भरपूर इस्तेमाल करना चाहिए !! लेकिन आजकल जो देखने में आ रहा है वो ये कि मिडिया सत्ता पक्ष कि मदद उसके घोटाले छिपाने में ज्यादा सहयोग कर रहा है और विपक्ष को आपस में लड़ाने के प्रयास में ही रहता है ! इस कार्य हेतु वो सरकारी अनुदान प्राप्त करने वाले N.G.O.और पत्रकारों का उपयोग भी बड़ी चतुराई से करता है ! जिनके उदहारण हमें रोज़ाना टीवी चेन…

" चुनावी दंगल सूरतगढ़ विधानसभा का , 19 नेता व हज़ारो कार्यकर्त्ता मिलकर करेंगे अपना अपना प्रदर्शन और जनता करेगी सही निर्णय 1 दिसम्बर 2013 को " ???

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पूरे राजस्थान में सूरतगढ़ विधानसभा का चुनाव अपना एक विशेष महत्त्व रखता है !!क्योंकि यंहा पर चुनावों में राजनीती अपने चरम पर रहती है ! लोगों का कहना है कि मीलों और वसुंधरा जी में श्री राजिन्द्र राठोड़ के कारन 36 का आंकड़ा है ,शायद इसीलिए इसबार पूरे राजस्थान में ये चर्चा का विषय है ! शायद यही कारण था कि यंहा के भाजपा नगर और देहात्मंडल के अध्यक्षों ने श्रीमती वसुंधरा जी को ही आमंत्रित कर डाला वो तो उन्होंने समझदारी से काम लिया कि छोटे झमेले में वो नहीं पड़ीं !
                       कोंग्रेस पार्टी के प्रत्याशी श्री गंगाजल मील के इलावा यंहा से भाजपा के श्री राजिंदर भादू, बसपा के श्री डूंगर राम गेदर , जमींदारा पार्टी के श्री अमित कड़वासरा , राष्ट्रीय जनता पार्टी के श्री पवन सैनी , शिव सेना के श्री ओम प्रकाश राजपुरोहित , जागो पार्टी से श्री पवन कुमार मिश्र , भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी से श्री महावीर प्रसाद तिवाड़ी , मेघदेशम् पार्टी के श्री मोहनलाल , राष्ट्रवादी कोंग्रेस पार्टी से जनाब अब्दुल गफ्फार , बहुजन संघर्ष दल से श्री मनसुख , और राजस्थान विकास पार्टी से श्री देवेन्द्र सिंह सहित 7उमीदवार…