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Showing posts from March, 2015

" आप " का क्या होगा जनाबे आली ??-पीताम्बर दत्त शर्मा (लेखक-विश्लेषक)

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" घाघ " समाजसेवियों ने देखा कि नेता लोग जनता को बेवकूफ बनाकर बहुत " कमाईयाँ " कर रहे हैं , तो उन सबने सोचा कि चलो हम भी कमाई करलें !! बिल्कुल वैसे ही जैसे आज से कुछ वर्ष पहले गुण्डे-बदमाशों ने सोचा था और वो आजकल पूरे नेता ही लगते हैं , गुण्डे बिलकुल भी नहीं लगते जी !उसी तरह से इन पत्रकार+समाजसेवियों ने ऐसे चक्कर और स्टिंग चलाये कि जो  आपको " तीसमारखां" समझ रही थी वो ज़मीं पर धुल चाटती नज़र आई ! 125 वर्ष पुरानी कांग्रेस ने तो पानी भी नहीं माँगा !! समाजवादियों और कॉमरेडों को भाजपा वाले बुरी तरह से " धो " चुके थे !




बहुत स्टिंग आपरेशन चल रहा है, दोस्तों..!! पत्रकारिता, राजनीति या मीडिया में ‘स्टिंग’ का मतलब तो हम सब खूब जानते-देखते हैं. अक्सर यह प्रायोजित और सोची समझी योजना के साथ किसी व्यक्ति या घटना के साथ आडियो या वीडियो उपकरणों को छुपा कर चुपके से किया जाता है. इन दिनों ‘स्टिंग तकनोलाजी’ का विकास भी बहुत हो गया है. जेब में रखे पेन, कार की चाभी या शर्ट की ऊपरी बटन में फिट लेंस के कई उपकरण बाज़ार में हैं. वैसे ‘स्टिंग’ का हिन्दी में साधारण अर्थ ‘डं…

" हैप्पी-बर्थडे टू यू "!! मेरे राम जी ! मेरे बिगड़े बनाओ सब काम जी !!-पीताम्बर दत्त शर्मा ( लेखक-विश्लेषक)

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लो जी पाठक मित्रो !! आपको भी बधाइयां !! कल हमारे राम जी का जन्म दिन है जी ! जिसे हम ख़ुशी-ख़ुशी मनाएंगे ! आप भी सब भाई-बहन बड़े ही चाव से मनाना जी !आप भी उनको शुभकामनाएं देना जी !! स्वयं भी लड्डू खाना और दूसरों को भी लड्डू खिलाना जी !! एक-दुसरे को बधाइयाँ देना और बलैयां लेना जी ! उनके आशीर्वाद से  हमारा भला होगा जी !
                        उस समय जन्म दिन मनाया जाता था या नहीं, हमें ये तो नहीं पता नहीं जी , लेकिन ये अवश्य पता है कि जब तलक उनकी शादी नहीं हुई थी तब तलक वो बड़े प्रसन्न रहा करते थे , खेल-कूद किया करते थे और रिश्तेदारों को मिलने अपने ननिहाल वगेरह भी चले जाया करते थे ! लेकिन जैसे ही शादी कर घर लौटे बस जी तभी से जीवन में कष्ट ही कष्ट आ गए ! हमारे एक परम मित्र जी ने आज एक बड़ी ही सुन्दर कविता अपने ब्लॉग में लिखी है शादी ना करने के बारे में , ! बड़ी ही मज़ेदार ढंग से अपनी व्यथा कवि ने लिखी है जिसे वो सब पर लागू करवाना चाहते हैं ! आप भी देखिये और पढ़कर आनंदित होइए जी !

यारों ! शादी मत करना, ये है मेरी अर्ज़ी
                                  फिर भी हो जाए तो ऊपर वाले की मर्ज़ी ? ल…

" रिश्ते ",नाम,परिभाषाएं पुरानी और " इच्छाएं " नईं !! - पीताम्बर दत्त शर्मा (लेखक-विश्लेषक)

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लीजिये पाठक मित्रो ! कल यूनाइटिड नेशन में रिश्तों से सम्बंधित एक प्रस्ताव गिर गया , इस प्रस्ताव को गिराने में अमेरिका सहित विश्व के 80 देश थे , 30  देशों ने वोट ना करके तठस्थ रहने का निर्णय किया और भारत - पाकिस्तान सहित 40 देशों ने इस प्रस्ताव का समर्थन किया कि " जो फायदे विश्व में किसी महिला को पुरुष से शादी करके मिलते हैं , वोही  फायदे उनको भी मिलने चाहियें जो " सम्लेंगिक " शादियां करते हैं " ! भारत,पाकिस्तान और रूस ने इस प्रस्ताव  खिलाफत की थी !इन  सहित 40 देश समलैंगिकों को ये फायदा देने के पक्ष में नहीं थे ! लेकिन हम ये प्रस्ताव हार गए ! इस तरह से अब समलैंगिकों की शादियों को भी u.n.का समर्थन मिल गया है !
                       भारत में तो पहले से ही लिबरल-सेकुलरों और फिल्मों-नाटकों ने रिश्तों के महत्त्व को ना केवल घटा दिया है बल्कि  बना दिया है ! रिश्तों का आधार , भावनाएं और उनकी परिभाषाएं भी बदल दी हैं !आजकल के युवा रिश्तों को भी "यूज़ एंड थ्रो "  समझते हैं ! जो बढ़िया लगे उसे अपना लो , जो नापसंद हो उसे छोड़ दो !! क्या इतना काम महत्त्व है रिश्तों का ह…

" कुछ कहते हैं ये चित्र - कुछ गाते हैं ये चित्र "- पीताम्बर दत्त शर्मा (लेखक-विश्लेषक)

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बच्चों में भगवान इसलिए विराजते हैं क्योंकि वे कोमल और निर्मल हृदय के होते हैं !

जल ही जीवन  है ! जो ज्यादा देर नहीं चलने वाला !! जागते रहो !!






हाथों में कर्म करने की शक्ति होती हैं , जिससे दुनिया की हर वस्तु और भगवान तक मिल सकते हैं !




ये कैमरामैन कहाँ घुस गया ???




एकता में बल है ! आप स्वयं देख लीजिये !!

ये सरकार हमें जबरदस्ती हँसाना चाहती है !! मित्रो !!

आज मैं कौन सा चेहरा लगाकर बाहर जाऊं ???

आज-आएगी - अपने हाथ में , वो चिड़िया !!!

ये भी अच्छे करम करके आये हैं जी !

प्यार ही जीने की चाहत है , सबसे बड़ी जरूरत है !

सेवा करोगे तो मेवा मिलेगा हज़ूर !!

आवाज़ दबाने में सहयोग करता है भारत सरकार का " तंत्र " ???

हम अपनी मौत से कितने अनभिज्ञ हैं , जबकि वो हमारे इतने क़रीब है !!







जय श्री राम !!!!
आपसे मित्रता करके मुझे अत्यंत प्रसन्नता हो रही है ! आपके जनम दिन की आपको हार्दिक बधाई और शुभ कामनाएं !! कृपया स्वीकार करें ! आपका जीवन सदा खुशियों से भरा रहे !! मेरा फेसबुक,गूगल+,ब्लॉग,पेज और विभिन्न ग्रुपों की सदस्य्ता ग्रहण करने का एक ख़ास उद्देश्य है ! मैं एक लेखक-विश्लेषक और एक समीक्षक हूँ ! …

" मेरे देश का व्यापारी किसान आज सोना ही नहीं बल्कि ज़हर भी उगाता है "-पीताम्बर दत्त शर्मा (लेखक-विश्लेषक)

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पाठक मित्रो !! आजकल किसान की बहुत चर्चा हो रही है हमारे भारत में !कोई " मन की बात " उसे सुना रहा है तो कोई अपने भाषण सुनाकर,धरने देकर और  जगह-जगह  दौरे करके उसे रिझा रहा है ! कोई उसे गरीब बता रहा है तो कोई उसे भगवान का दर्जा देकर अपना आदर भाव दिखा रहा है ! कोई उसे रियायतें देना चाहता है तो कोई उसकी बची-खुची ज़मीन भी छीन लेना चाहता है ! इन सब बातें करने वालों के मन में अपने-अपने स्वार्थ छिपे हैं , इसलिए लोग अपनी-अपनी बात अपने-अपने ढंग से कहते रहते हैं ! आज मैं बिना स्वार्थ के कुछ सच्ची बातें किसानों के बारे में बताना चाहता हूँ ! शायद .....आपको पसंद आ जाएँ ! शायद इसलिए क्योंकि सच्च जल्दी से किसी को भाता नहीं है क्योंकि वो कड़वा होता है ! लेकिन फिर भी कुछ लोग सच्च  और कुछ लोग सच्च को पसंद भी करते हैं !
                        जो भाव किसानो के प्रति लोगों के मन में पहले होता था , उसमें आज भारी कमी आई है ! क्योंकि आज का किसान ना तो स्वयं उतनी मेहनत  करता है और नाही आज वो अपनी फसल हेतु मौसम पर पूरी तरह से निर्भर रहता है !आज का किसान अपनी फसल को एक व्यपारी की तरह ही बेचता है ! बल्कि…

क्रिकेट का " विश्व-कप " हमारा या तुम्हारा ? ये तो समय ही बताएगा !!-पीताम्बर दत्त शर्मा (लेखक-विश्लेषक)

क्रिकेट के आंकड़ों के मकड़जाल में नहीं फंसते हुए मैं आपका ध्यान, इस खेल की रोचकता के साथ - साथ इससे फैलती हुई बुराइयों की और लेजाना चाहता हूँ ! मित्रो !! वो भी क्या समय था जब भारतीय खेल इस हिन्दुस्तान में खेले जाते थे ! जिनके द्वारा भारतीय जवान पुरुषार्थ और वीर्यता से भर जाते थे ! ये क्रिकेट नाम का खेल केवल इंग्लैण्ड ऑस्ट्रेलिया के साथ खेल करता था ! सफेद कपड़ों में पाँच दिन तक बड़े ही व्यवस्थित तरीकों और नियमों से खेल जाता था !तब भी इसमें हराने के लिए तेज़ गेंदबाज बैट्समैनों को घायल कर दिया करते थे ! ये खेल उस समय केवल राज घरानों या उनके समकक्ष अमीरों हेतु ही हुआ करता था जैसे कि पोलो, लान-टेनिस,बिलियर्ड या फिर घुड़-दौड़ आदि ! लेकिन ये सब इतने मशहूर नहीं हो सके जबकि इनमें पैसा भी लगाया जाता था !
                               5 दिनों के टेस्ट-मैच से ये खेल 20 - 20 तक पँहुच गया है ,तो आज ये लोगों की पहली पसंद बन चूका है पूरे विश्व में ! सिर्फ फूटबाल का खेल ही इसका मुकाबला कर सकता है ! इस क्रिकेट खेल की अनिश्चितता ही इसको एक महान खेल बनाती है ! किस गेंद पर कैसा खेल खेल जायेगा कुछ भी पता न…

"कल की मार्च में कांग्रेस ने किया मनमोहन सिंह का अपमान "!!-पीताम्बर दत्त शर्मा (लेखक-विश्लेषक)

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पाठक मित्रो ! अभी दो दिन पहले जो कांग्रेसी पूर्व प्रधानमंत्री सरदार मनमोहन सिंह जी को सन्मान देने हेतु उनके घर तक मार्च करती हुई गयी थी और कहा गया था की सारी कांग्रेस पार्टी इस संकट की घडी में आपके साथ खड़ी है , उसी कांग्रेस पार्टी और u.p.a. के नेताओं ने किसानों के पक्ष में मार्च निकालते वक़्त हमारे पूर्व प्रधानमंत्री जी को न  केवल धकियाया, बल्कि जब सोनिया जी पत्रकारों को सम्बोधित करने लगीं, तो कई नेताओं ने फोटो खिंचवाने की चाह में , उन्हें धकियाते हुए बड़ी ही बेशर्मी से पांचवी छठी लाईन में पीछे कर दिया ! वो तो सोनिया जी ने उन्हें बुलाया तो कंही जाकर उन्हें थोड़ा आगे खड़ा किया गया , उचित स्थान उन्हें फिर भी नहीं मिला ! जबकि उन्हें भी सम्बोधित करने का अवसर मिलना चाहिए था ! आखिर वो हमारे पूर्व प्रधानमंत्री हैं यारो !! 
                        मित्रो !! मुझे तो अपुष्ट सूत्रों से ये भी सुचना मिली है कि सोनिया और राहुल जी में भी सत्ता संघर्ष चल रहा है ! इसीलिए राहुल भैया अज्ञातवास पर गए हुए हैं और आज तक वो कब वापिस आएंगे किसी को कुछ पता नहीं है !राहुल जी के साथ जहां युवा नेता खड़े हैं तो सोनिया ज…