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Showing posts from June, 2015

"अगर जीना है तो क्या हमें लकीर का फ़क़ीर बनना जरूरी है "? - पीताम्बर दत्त शर्मा - 9414657511

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हमारे बज़ुर्गों ने अपने जीवन के अनुभव से हमारे लिए आसानी हो जाये , इसलिए कई लकीरें खींच दी हैं ! जिन पर चलकर हज़ारों लोगों ने अपने जीवन    में बड़ी-बड़ी सफलताएं पायीं हैं ! निस्संदेह ये हमारे लिए शॉर्टकट साबित हुई हैं ! जिन्होंने इन पर विश्वास नहीं किया उन्होंने कड़े कष्ट ही झेले हैं अपने जीवन में सफलताएं पाने में ! 
                   लेकिन फिर भी कई ऐसी खैंची गयी लकीरें हैं जिनको समय के फेर अनुसार बदलना भी पड़ता है !प्रकृति भी  को समय-समय पर बदलती है , तो इन्सान के नियम क़ानून बदलने में क्या बुराई है जी ? बल्कि बदलना ही चाहिए !हमारे सामजिक नियम हों या फिर सरकारी नियम , हमारे अपने रीती-रिवाज़ हों या राष्ट्रिय-मान्यताएं ! सबका हर दशक बीत जाने पर मूल्यांकन उचित व्यक्तियों द्वारा होना ही चाहिए !हमारे कवि और लेखक लोग अपनी रचनाओं के माध्यम से ये महान कार्य करते ही रहते हैं !
                   व्यक्तिगत इच्छाओं को पूर्ण करने हेतु तो हम अपनी बुद्धि और मन का आदेश मानते हैं ! लेकिन हमें क्या बनना है अपने जीवन में ?, क्या पढ़ना है ?और कैसे रहना है ?इसके लिए हमें समाज और देश के कानूनों का पालन करना पड़ता …

ध्यान बँटाने और भटकाने में सफल हज़ारों मारीच... मारेंगे इनको भगवन राम ! होगा भारत का कल्याण !

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“मारीच” नामक स्वर्णमृग की कथा हम सभी ने रामायण में पढ़ रखी है. मारीच का उद्देश्य था कि किसी भी तरह भगवान राम को अपने लक्ष्य से भटकाकर रावण के लिए मार्ग प्रशस्त करना. मारीच वास्तव में था तो रावण की सेना का एक राक्षस ही, लेकिन वह स्वर्णमृग का रूप धरकर भगवान राम को अनावश्यक कार्य में उलझाकर दूर ले गया था... नतीजा सीताहरण. वर्तमान नरेंद्र मोदी सरकार को एक वर्ष से अधिक हो गया है. लेकिन इस पूरे साल में लगातार यह देखने में आया है कि भारत के तथाकथित मुख्यधारा के मीडिया के रवैये में कोई बदलाव आना तो दूर, वह दिनोंदिन गैर-जिम्मेदार, ओछा एवं मोदी-द्वेष की अपनी पुरानी बीमारी से ही ग्रसित दिखाई दे रहा है. भारत का मीडिया भी इस समय स्वर्णमृग “मारीच” की तरह व्यवहार कर रहा है. पिछली पंक्ति में मैंने मीडिया के लिए “तथाकथित” इसलिए लिखा, क्योंकि यह मीडिया कहने के लिए तो खुद को “राष्ट्रीय” अथवा नेशनल कहता है, लेकिन वास्तव में इस नॅशनल मीडिया (खासकर चैनलों) की सीमाएँ दिल्ली की सीमाओं से थोड़ी ही दूरी पर नोएडा, गुडगाँव या अधिक से अधिक आगरा अथवा हिसार तक खत्म हो जाती है... इसके अलावा मुम्बई के कुछ फ़िल्मी भाण्ड…

"गोवंश के नाम पर चल रहे हैं कई तरह के व्यापार और सध रहे कइयों के गैरवाजिब हित "!! - पीताम्बर दत्त शर्मा (लेखक-विश्लेषक)-मो. न. -9414657511

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चोर चोरी करे तो ज्यादा दुःख नहीं होता उसे समझाया जा सकता है , सज़ा देकर सुधारा जा सकता है ! लेकिन अगर कोई पुण्यकर्म  आड़ में अपनी रोटियां सेकें , सरकार द्वारा प्राप्त सहूलियतों का नाज़ायज़ फायदा उठाये और समाज में अपना एक विशेष स्थान बनाने की कुचेष्टा करे, तो इसे  आप लोग क्या कहेंगे ??घोर कलयुग ही कहेंगे ना मित्रो !
                       पूरे भारत में करोड़ों गोशालाएं चल रही हैं ! सभी ऐसी हों ऐसा तो नहीं हैं ! लेकिन कहावत है ना कि "एक गन्दी मछली , सारे तालाब को ही गन्दा कर देती है !ज्यादा समय नहीं गुज़रा है जब लोग पाप करने से डरते थे , किसी और के हक़ व धन को हड़पते नहीं थे ! हराम समझा जाता था किसी के धन पर नज़र रखने को ! लेकिन आजकल पता नहीं लोगों को क्या हो गया है ?जिसे देखो वो ही गलत तरीके से धनवान बनने की योजनाएं बनाता नज़र आ रहा है !जिसके दो आसान तरीके आजकल प्रचलन में हैं ! पहला तरीका तो नेतागीरी और दूसरा तरीका समाजसेवी संस्था बनाकर चंदा हड़पना !
                         मोदी सरकार ने इस और ध्यान देना शुरू किया है और इस मौजूदा सरकार ने 4075 समाजसेवी संस्थाओं के लाइसेंस रद्द कर दिए हैं !लेक…

"चुनावों में लगाते हैं,ये सफ़ेद वर्दी धारी नेता अपनी काली कमाई ! क्या जनता अबके करेगी इनकी धुलाई "?-पीताम्बर दत्त शर्मा ( लेखक-विश्लेषक )-मो. न. -9414657511

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लीजिये मित्रो !! अपने राजस्थान में एकबार फिर नगरपालिकाओं के चुनाव होने वाले हैं ! पिछलीबार जिन नगर-निगमों और पालिकाओं में चुनाव हुए थे उनमे भाजपा ने बहुत बढ़िया प्रदर्शन किया था !क्योंकि उस समय देश में मोदी जी और वसुंधरा जी का प्रभाव जनता के मनो-मस्तिष्क पर पूरी तरह से छाया हुआ था !कांग्रेस संसद और विधानसभा में बड़ी बुरी तरह से हार कर हताश हो चुकी थी ! उसे चुनाव में खड़े करने हेतु प्रत्याशी तक भी नहीं मिल पा रहे थे !इसीलिए कई प्रत्याशी तो अपनी जमानत तक भी नहीं बचा पाये थे !
                     लेकिन अब 18-20 महीनों में ही पांसा पलट गया लगता है !कांग्रेस बड़े जोश में दिखाई दे रही है ! कहीं भी , कोई भी चुनाव चाहे क्यों ना हो ! चुनाव छोटा हो या बड़ा कांग्रेस अपनी पूरी ताक़त उसमे झोंक रही है !इसका एक बड़ा कारण ये भी है की राहुल गांधी 56 दिनों का जो विदेश में अवकाश काट कर आये हैं , उसके बाद उनमे एक नयी स्फूर्ति दिखाई देती है !इसे देख कर सोनिया जी भी जोश में हैं ! वो भी पहले पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह जी के घर तक और फिर पूरे विपक्ष के साथ राष्ट्रपति भवन तक मार्च कर चुकी हैं !दिल्ली में केजरीवा…
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मौजूदा मीडिया बनाम आपातकाल के दौर की पत्रकारिता
क्या मौजूदा वक्त में मीडिया इतना बदल चुका है कि मीडिया पर नकेल कसने के लिये अब सरकारों को आपातकाल लगाने की भी जरुरत नहीं है। यह सवाल इसलिये क्योंकि चालीस साल पहले आपातकाल के वक्त मीडिया जिस तेवर से पत्रकारिता कर रहा था आज उसी तेवर से मीडिया एक बिजनेस मॉडल में बदल चुका है, जहां सरकार के साथ खड़े हुये बगैर मुनाफा बनाया नहीं जा सकता है। और कमाई ना होगी तो मीडिया हाउस अपनी मौत खुद ही मर जायेगा। यानी 1975 वाले दौर की जरुरत नहीं जब इमरजेन्सी लगने पर अखबार के दफ्तर में ब्लैक आउट कर दिया जाये। या संपादकों को सूचना मंत्री सामने बैठाकर बताये कि सरकार के खिलाफ कुछ लिखा तो अखबार बंद हो जायेगा। या फिर पीएम के कसीदे ही गढ़े। अब के हालात और चालीस बरस पहले हालात में कितना अंतर आ गया है।

यह समझने के लिये 40 बरस पहले जून 1975 में लौटना होगा। आपातकाल लगा तो 25 जून की आधी रात के वक्त लेकिन इसकी पहली आहट 12 जून को तभी सुनायी दे गई जब इलाहबाद हाईकोर्ट ने इंदिरागांधी के खिलाफ फैसला सुनाया और समाचार एजेंसी पीटीआई ने पूरे फैसले को जस का तस जारी कर दिया। यानी शब्दो…

राजनीती-कूटनीति भारत की दिल्ली में , क्रिकेट की दलदल सहित साभार मनीष जी एवं गगन जी से !

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दूध का दूध और पानी का पानी ! आप भी पढ़िए और फिर समझिए मीडिया एवं  नेताओं की "सर्कस" का खेल !
1. पहली बात ललित मोदी न अपराधी हैं और न ही भगोड़ा |

2. ललित मोदी पर मनीलांड्रिंग का चार्ज प्रचारित किया जा रहा है | दरअसल मनिलांड्रिंग का चार्ज केवल ललित मोदी पर नहीं, बल्कि पूरे बीसीसीआई पर है |

3. दक्षिण अफ्रीका में आईपीएल ले जाने समय बिना रिजर्व बैंक आॅफ इंडिया से आदेश लिए, दक्षिण अफ्रीका में बैंक एकाउंट खोला गया था, जिसमें सारे पैसे जमा कराए गए थे | इसमें पूरा बीसीसीआई एक्‍जक्‍यूटिव कमेटी शामिल है | इसके लिए तत्‍कालीन बीसीसीआई अध्‍यक्ष, कोषाध्‍यक्ष, महासचिव या जो भी पदाधिकारी हैं, वह सभी समान रूप से शामिल हैं | शरद पवार, श्रीनिवासन, अरुण जेटली, शशांक मनोहर, राजीव शुक्‍ला- यानि इसमें से जो भी पदाधिकारी उस वक्‍त थे, उन सभी पर मनी लॉंडिंग का केस दर्ज होना चाहिए था |

4. तो प्रश्न उठाता है कि केवल ललित मोदी का नाम क्‍यों समाने आया | दरअसल ललित मोदी ने कोच्चि टीम में तत्‍कालीनन यूपीए के मंत्री शशि थरूर के शेयर की जानकारी सार्वजनकि कर दी थी | और यह आप जानते हैं कि यदि आपने इस देश के राजनीतिक…

"मौजूदा मानवीय-आधार"का ये चेहरा देख कर,इस देश की किस्मत पर रोना आता है " साहेब "!!?- पीताम्बर दत्त शर्मा (लेखक-विश्लेषक )

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कितना सुन्दर शब्द है ये "मानवीय-आधार" ? मन गद-गद हो उठता है इसे सुन कर ! जब भी ये शब्द हमारे कानों में सुनाई पड़ता है , तब ऐसे लगता है जैसे हमारे "जीवन-आधार" अभी जीवित हैं ! ये लेखक-कवि और पत्रकार लोग ऐसे ही शोर मचाये रहते हैं कि मानवता खत्म हो गयी और घोर कलयुग आ गया आदि-आदि  क्या-क्या कहते रहते हैं ??
          हमारे संयुक्त राष्ट्र संघ ने भी एक "मानव-अधिकार-आयोग"बना रख्खा है , जिसकी शाखाएँ लगभग हर बड़े देश में हैं !ये साधारण आदमी को कब और कैसे मदद पंहुचाते हैं,ये तो आम-आदमी को पता नहीं चलता,लेकिन इनके स्वयं-सेवक कब इस पुण्य कार्य की आड़ में कब कहीं धरना-प्रदर्शन करते हैं , वो अवश्य पता चल जाता है ! या फिर ये घनघोर अपराधियों का बचाव करते दिखाई दे जाते हैं !
              इन्हीं से प्रेरित होकर और कुछ अपने निजी रिश्तों के चलते भारत की विदेश मंत्री ने एक महिला के आपरेशन हेतु उसके पति को उसके पास होने के लिए, वहाँ जाने की इजाज़त क्या दिलवादी ? एक "आस्तीन के सांप"ने विपक्षी लीडरों के साथ मिलकर ऐसा हंगामा खड़ा करवा दिया कि हमारे प्रधानमंत्री जी तक दोषारोपण…
अब होगी एक और " सरल सनातन धर्म वेब- ग्रन्थ " की रचना !! - पीताम्बर दत्त शर्मा ( लेखक-विश्लेषक) मानव जाति को सच्चा रास्ता दिखाने हेतु समय समय पर पहले ऋषियों मुनियों ने फिर कई धर्म-गुरुओं ने कई ग्रन्थ लिखे हैं जिनमे सनातन-धर्म के बारे में विस्तार से बताया गया है !उनका अनुभव हमारे लिए रास्ता आसान करता है ! लेकिन पहले वाले धर्म-ग्रन्थ संस्कृत, फ़ारसी और अन्य कई भाषाओँ में लिखे गए थे ! जिनको पढ़ने हेतु ना तो आज के इन्सान के पास इतना भाषा-ज्ञान है और ना ही इतना समय ! लेकिन वो ईश्वर को प्राप्त तो करना चाहता है लेकिन जल्दी ! इसी बात का फायदा उठाकर इस कलयुग में कई स्वयंभू भगवान बन बैठे हैं ! वो आम जनता को भगवान की फोटो दिखाकर स्वयं को ही पुजवाते हैं ! इसीलिए मैंने ये सोचा है कि आप जैसे विद्वान मित्रों के सहयोग से एक वेबसाईट बनायीं जाए , जिसमे सनातन धर्म से सम्बंधित सभी मुख्य देवी-देवताओं की जन्म से लेकर देवलोक गमन तक की सच्ची गाथाएं और परमात्मा को पाने की प्रमाणिक विधियां लिखी हुई हों ! उसमे जीवन के आदर्शों और संस्कारों का भी पूर्ण विवरण हो ! सृष्टि की रचना और प्रलय के बारे में भी विस्…