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Showing posts from September, 2015

पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (PoK) में भारी तादाद में लोगों ने सड़क पर उतरकर पाकिस्तान के ख‍िलाफ नारेबाजी की.!!!

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अवाम आजादी और बुनियादी हक की मांग कर रही थी.
बुनियादी हक दिए जाने की मांग
विरोध प्रदर्शन कर रहे लोग इलाके में विकास का काम न होने से नाराज थे. लोगों रोजगार और बुनियादी हक दिए जाने की मांग करते नजर आए.

विरोध-प्रदर्शन के बाद तनाव
PoK के कई इलाकों में इस तरह के प्रदर्शन हुए. मुजफ्फराबाद, गिलगित और कोटली सहित कई इलाकों में भारी विरोध-प्रदर्शन के बाद तनाव का माहौल है.

बेनकाब हुआ पाकिस्तान
एक तरफ पाकिस्तान कश्मीर में अलगावादियों को शह देता है, सीमा पार से आतंकियों की खेप भेजता है और भारत पर लोगों की भावनाओं को दबाने का आरोप लगाता है, दूसरी तरफ PoK में अवाम की आवाज को खामोश करने की साजिश रचता है. अब PoK के लोग पाकिस्तान की साजिश के खिलाफ सड़क पर उतर आए हैं, तो वह बेनकाब हो गया है.

पाकिस्तान की पुलिस व सेना पर जुल्म के आरोप
पाकिस्तान की बेड़ियों में जकड़े PoK की अवाम लूट-खसोट और बर्दाश्त के बाहर जुल्म के खिलाफ सड़कों पर उतर आई. गुलाम कश्मीर के बाशिंदे पाकिस्तानी पुलिस और सेना पर अपनी मां-बहनों को उठाकर कैंपों में ले जाने का सनसनीखेज आरोप लगा रहे हैं. इन कैंपों में ऐसे-ऐसे जुल्म किए जाते हैं, जिन्हे…

ज्यादा से ज्यादा भारतियों को इंटरनेट से जोड़ने की एक पहल - 1 करोड़ रेल यात्रियों प्रतिदिन से शुरुआत !! - सुन्दर पिचई, सीईओ, गूगल

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जब मैं एक छात्र था, मैं चेन्नई सेंट्रल स्टेशन (तब मद्रास सेंट्रल के रूप में जाना जाता था) से आईआईटी खड़गपुर की दिन की रेल यात्रापसंद करता था । मुझे विभिन्न स्टेशनों पर उन्मत्त ऊर्जा की याद आज भी ताजा है और मैं भारतीय रेल के अविश्वसनीय स्तर और विस्तार पर अचम्भा करता था ।

मुझे यह घोषणा करते हुए बहुत गर्व हो रहा है कि ये भारत के रेलवे स्टेशन हैं जो करोड़ों लोगों को ऑनलाइन लाने में मदद करेंगे । पिछले साल, भारत में 10 करोड़ लोगों ने पहली बार इंटरनेट उपयोग शुरू किया है । इसका मतलब यह है कि भारत में अब चीन को छोड़ कर हर देश से अधिक इंटरनेट उपयोगकर्ता हैं । पर चौंकाने वाली बात ये है की भारत में अभी भी 100 करोड़ से ज़्यादा लोग ऑनलाइन नहीं हैं । 

हम इन 100 करोड़ भारतवासियों को ऑनलाइन लाने में मदद करना चाहते हैं - ताकि उन्हें पूरे वेब तक पहुँच मिल सके, और वहां मौजूद जानकारी और अवसर भी । और किसी पुराने कनेक्शन से नहीं - तेज़ ब्रॉडबैंड से ताकि वे वेब का सबसे अच्छा अनुभव कर सकें । इसलिए आज, भारत के प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी के हमारे U.S. मुख्यालय में उपस्थित होने के अवसर पर, और उनकी डिजिटल इंडिया पह…

या........इलाहा इल्लाह !!! कातिल भी ‪#‎मुसलमान‬, और मकतूल भी #मुसलमान.!!!

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या अल्लाह
सोचता हूँ कि ‪#‎परिन्दे‬ क्यू नही आते,
‪#‎कंकर‬ क्यू नही गिराते.
देखता हूँ कि ‪#‎बन्दूक‬ उठती है,गोली चलती है,
चलाने वाले की आवाज़ आती है.
‪#‎ला_इलाहा_इल्लल्लाह‬...
‪#‎गोली‬ जिस्म के पार हो जाती है,
मरने वाले की सदा आती है.
#ला_इलाहा_इल्लल्लाह....
परिंदे क्यू नही आते,
कंकर क्यू नही गिराते.
जब ‪#‎कातिल‬ का भी वही ‪#‎नारा‬,
जो ‪#‎मकतूल‬ का नारा.
कातिल का भी वही ‪#‎काबा‬,
जो मकतूल का काबा.
कातिल का भी वही ‪#‎रब‬,
जो मकतूल का रब.
कातिल का भी वही ‪#‎मज़हब‬,
जो मकतूल का मज़हब.
कातिल का भी वही ‪#‎ईमान‬,
जो मकतूल का ईमान.
कातिल का भी वही ‪#‎कुरान‬,
जो मकतूल का कुरान.
कातिल भी ‪#‎मुसलमान‬,
और मकतूल भी #मुसलमान.
कातिल कहलाये ‪#‎मुंसिफ‬,
और मकतूल ‪#‎शहीद‬.
तो #परिन्दे किसकी मदद को आयें,
#कातिल

मीडिया समझ ले , सत्ता ही है पूर्ण लोकतंत्र और पूर्ण स्वराज - साभार - श्री पुण्य प्रसन्न वाजपेयी

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तो मौजूदा दौर में मीडिया हर धंधे का सिरमौर है। चाहे वह धंधा सियासत का की क्यों ना हो। सत्ता जब जनता के भरोसे पर चूकने लगे तो उसे भरोसा प्रचार के भोंपू तंत्र पर ही होता है। और प्रचार का भोंपू तंत्र कभी एक राह नहीं देखता। वह ललचाता भी है । डराता भी है । साथ खड़े होने को कहता भी है। साथ खड़े होकर सहलाता भी है और सिय़ासत की उन तमाम चालों को भी चलता है, जिससे समाज में यह संदेश जाये कि जनता तो हर पांच बरस के बाद सत्ता बदल सकती है। लेकिन मीडिया को कौन बदलेगा। तो अगर मीडिया की इतनी ही साख है तो वह भी चुनाव लड़ ले । राजनीतिक सत्ता से जनता के बीच दो दो हाथ कर ले। जो जीतेगा उसी की जनता मानेगी। इस अंदाज को 2014 के लोकसभा चुनाव के बाद बीजेपी ने कहना चाहा। मोदी सरकार ने अपनाना चाहा। इसी राह को केजरीवाल सरकार कहना चाहती है। अपनाना चाहती है । और पन्नों को पलटें तो मनमोहन सरकार में भी आखिरी दिनों यही गुमान आ गया था जब वह खुलै तौर पर अन्ना आंदोलन के वक्त यह कहने से नहीं चूक रही थी कि चुनाव लड़कर देख लीजिये। अभी हम जीते हैं तो जनता ने हमें वोट दिया है, तो हमारी सुनिये । सिर्फ हम ही सही हैं। हम ही सच कह …

"सनातन धर्म "और ये छद्म धर्मनिरपेक्ष एवं पैसों पर नाचने वाले,नेता व पत्रकार !! - पीतांबर दत्त शर्मा (लेखक-विश्लेषक) मो. न. - 9414657511

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देश के गद्दार कितने प्रकार के हो सकते हैं , इस विषय पर भी देश में विस्तार से चर्चा होनी चाहिए जी ! ये इस लिए आवश्यक है क्योंकि देश के दुश्मन नित नए प्रयोग करते रहते हैं !क्या पत्रकारों और नक़ली नेताओं के रूप में देश द्रोही देश को नुक्सान नहीं पंहुचा सकते ?जबकि हम पिछले कुछ समय से देख रहे हैं कि कुछ टीवी एंकर-पत्रकार कई पार्टियों में शामिल होकर अपना "ढीठ-पुना"दिखा रहे हैं !जो नहीं शामिल हो पा रहे वो बहस कराने के नाम पर अपने कार्यक्रम में ऐसे विषय लेकर बहस करते हैं जिनसे दंगे फैलें,धर्मांतरण हो,और जाति-धर्म के नाम पर फूट फैले ! इसी उद्देश्य से पत्रकारिता कर रहे रविश कुमार ने ndtv के प्राइम-टाइम में कल एक बहस की जिसमे खूब नाटक किये गए !
                            कहने को तो उन्होंने अलग-अलग प्रवक्ता बुला रख्खे थे , लेकिन वो सब एक नाटक का हिस्सा मात्र थे !!इन सब ने ये साबित करने की नाकाम कोशिश की ,कि "सनातन-धर्म", जो अरबों वर्ष पुराना है,जिसे किसने शुरू किया ,कोई नहीं जानता,इसे कौन चला रहा है कोई पता नहीं और इसका कौन मालिक था-है या होगा कोई नहीं जानत…

"कोई सेक्स के लिए बलात्कार कर देता है ,तो किसी से सेक्स होता नहीं ", दोनों हालात घातक हैं !- पीताम्बर दत्त शर्मा (लेखक-विश्लेषक) मो. न. - 9414657511

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अन्याय कैसा भी हो दुःखदायी होता है ! समाज ने अन्याय न होने पाएं , उसके लिए कुछ नियम बनाये हुए हैं ! जैसे हमारा संविधान कुछ समय पश्चात अधूरा लगने लगता है , बिल्कुल वैसे ही सामाजिक व्यवस्था भी पुरानी होती है !इसीलिए समय-समय पर दोनों में संशोधन होते रहते हैं ! लेकिन दोनों व्यवस्थाओं में संशोधन करने के तरीके बिलकुल ही अलग-अलग हैं ! जहाँ क़ानून में संशोधन तो हमारे साँसद "महोदय" ही कर सकते हैं वहीँ सामाजिक बुराइयों को दूर करने हेतु संशोधन करना उन्हीं लोगोंका काम होता है , जो उस "बीमारी"से पीड़ित हों !
                           "सती सावित्री"जैसी भारतीय नारी को "सरिता-मनोरमा-गृह शोभा-साप्ताहिक हिंदुस्तान और धर्मयुग" जैसी पत्रिकाओं में प्रकाशित कहानियों और लेखों ने "पश्चिमी-संस्कृति"अनुसार आधुनिक और बिकाऊ-मॉल बना दिया !इस सबके पीछे छिपे पैसे की चमक ने भी इस काम में अपना अहम रोल निभाया ! वैश्याओं का "गन्दा-धन्धा" दोनों संस्कृतियों में पुरातन काल से है ! केवल तरीकों का अंतर मात्र है !इसीलिए भारत में खुले सेक्स को बुरी चीज़ बताया गया ले…

"तलाक-तलाक-तलाक बोलिए-और काम पे चलिए" !! - पीताम्बर दत्त शर्मा (लेखक-विश्लेषक) - 9414657511

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लो जी !! पाठक मित्रो !! आज के इस भाग दौड़ के ज़माने में हमारे एक मुस्लिम भाई ने बड़े ही तुरत-फुरत तरीके से अपनी तथाकथित तंग करने वाली पत्नी जी से निजात पा ली है ! वो भी "जायज़" तरीके से ! कोई न्यायालय उसे ख़ारिज नहीं कर सकता !
            हुआ यूूँ कि "पुत्तर-प्रदेश"नहीं-नहीं "उत्तर-प्रदेश के बुलन्दशहर में अलीगढ शहर का फहीम खान नामक युवक अपनी पत्नी और बच्चों के संग इस्लामाबाद मोहल्ले में किसी रिश्तेदार को मिलने आया हुआ था ! वहाँ उसका अपनी पत्नी के संग किसी छोटी सी बात को लेकर बहस हो गयी ! रूठ कर जनाब बस अड्डे पंहुच गए तो बीवी भी पीछे आ गयी तो वहाँ भी बहस शुरू हो गयी ! बात इतनी बढ़ गयी की जनाब ने बीच सड़क पर ही तीन बार तलाक-तलाक - तलाक बोला और चल दिया अकेले अपने अलीगढ को ! "शायद बेचारी "बीवी उसकी खडी सोचती ही रह गयी कि या खुद ये क्या ज़ुल्म हो गया ?? अब मेरे तीन बच्चों का क्या होगा ?सात साल से दोनों बड़े प्यार से रह रहे थे ना जाने किसका मुंह देख कर चले थे कि ज़ुल्मी तलाक ही दे गया मामूली सी नहस पर ! तीनो बच्चे और वो महिला बस अड्डे पर जोर-जोर से रो रहे थे तो…

"अबला क्या ऐसे सबला बनेगी "?? - पीताम्बर दत्त शर्मा (लेखक-विश्लेषक) मो. न. - 9414657511

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पाठक मित्रो ! कल से दो समाचार ऐसे आ रहे हैं , जिनमें एक महिला देहरादून में और एक महिला हरियाणा में "सोमरस"पीकर आम जनता और पोलिस वालों को अपना सबला होना दिखा रही हैं ! ऐसा नहीं है कि ये पहली बार हुआ हो ! हम अपने इतिहास में अगर "गहरी-नज़र" डालें तो विभिन्न कालान्तरों में कई महिलाओं ने अपने अबला होने के लेबल को हटाने की कोशिश की है ! पुरातन काल में जब माँ दुर्गा जी को क्रोध आया था तो उन्होंने माँ काली का रूप धार लिया था ! फिर उन्होंने जो राक्षसों को मारा , तो देवताओं को भी लगने लगा की हमारा भी नंबर आ सकता है तो वो भगवान शंकर से प्रार्थना करने लगे कि प्रभो आप ही हमें बचाओ ! विनती सुन भोलेनाथ माता के गुजरने वाले रास्ते में लेट गए और जैसे ही काली के पैर उनपर पड़े तो उनका क्रोध शांत हुआ और वो वापिस साधारण रूप में आये !
                         ऐसे ही कई माननीय महिलाएं अपने आपको "माता" घोषित कर देती हैं ! शुरुआत उनके घर से ही होती है उसके बच्चे , सब बड़े छोटे उसको "माताजी-माता जी "बुलाने लग जाते हैं और पत्र-पुष्प-दक्षिणा और प्रशाद चढाने लगते हैं !यहाँ तलक क…

"अब चुनावों तक तो बिहार में "बहार"आएगी ही,अल्लाह जाने क्या होगा आगे"?! - पीताम्बर दत्त शर्मा (लेखक-विश्लेषक) मो. न. - 9414657511

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भारत के बिहार प्रान्त में "लोकतान्त्रिक प्रक्रिया" के अधीन चुनावों का बिगुल बज गया है !लोकतान्त्रिक प्रक्रिया भी बड़ी अजीब चीज़ है साहिब ! अगर सारे बुद्धु इकठ्ठे होकर कोई फैसला करदें तो उस निर्णय पर कोई सवाल तो खड़े कर सकता है लेकिन कोई कुछ कर नहीं सकता ! नहीं ऐतबार आता तो माननीय अन्ना हज़ारे से जाकर पूछ लो !भारत के लोकतंत्र का क़ानून भी चन्द "समझदार"लोगों ने बना दिया और उसमें चंद समझदार लोग संशोधन भी करते रहते हैं ,उसे देश के 125 करोड़ लोगों को मानना ही  पड़ता है !चाहे वो उस निर्णय से सहमत हो या ना हो !अगर कोई देशवासी उस निर्णय को नहीं मानेगा तो उसे भारतीय पोलिस और न्याय-प्रणाली मिलकर "दण्ड" भी दे सकते हैं ! ये सब इसलिए होता क्योंकि हमने हमने " वोट" देकर उन  सब महानुभावों को चुना होता है !
                            ऐसी ही महान प्रक्रिया अब हमारे देश के बिहार प्रांत में होने जा रही है !जहां से बड़ी ही महान विभूतियाँ  हमें मिली हैं !सारे समाचार पत्रों, चैनलों और सोशियल मीडिया ने सभी राजनितिक दलों के "चुनावी-क्षत्रप्पों"के बारे में आपको  विस्ता…

हम तो पूछेंगे कि ....पानी-बिजली के अफसर , नेताओं को "मैनेज" कैसे कर लेते हैं ??? - पीताम्बर दत्त शर्मा (लेखक-विश्लेषक) मो. न. - 9414657511

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पाठक मित्रो ! हमारे लोकतंत्र ने केवल हमारे नेताओं को ही "बुद्धिमान" नहीं बनाया है , बल्कि हमारे अफसरों को भी "स्मार्ट" बना दिया है ! अब हमारे बिजली और पानी सप्लाई विभाग के अफसर भली-भाँति से ये जानते हैं कि मोहल्ले से लेकर मंत्री तक से कैसे "निबटना"है ! चाहे ये नेता लोग कितने भी बड़े जन-समूह के साथ आएं , या फिर किसी मंत्री जी की कोई सिफारिश के साथ आएं , ये ऐसा "मायाजाल" बुनते हैं कि प्रार्थी अफसर की समस्या को भली-भाँति समझकर और संतुष्ट हो कर अपने घर को लौट जाता है ! काम तभी होता है जब अफसर चाहता है !

                 हालात तो यहां तलक पंहुच चुके हैं कि किसी भी सरकारी दफ्तर में चले जाएँ , देखने में यही मिलेगा कि कर्मचारी जो भी कार्य कर रहा है , वो ऐसे काम कर रहा है जैसे किसी पर कोई एहसान कर रहा है ! शायद इसीलिए मोदी जी ने शपथ लेने के बाद आज की अफसर शाही को "शाबाश" दे कर और उनमें अपना विश्वास जताकर ही कार्यकाल शुरू किया !आज जिस भी युवा को देख लीजिये , वो सिर्फ अच्छी नौकरी ही चाहता है !जबकि पहले किसी भी प्रकार की नौकरी को "दोयम"दर्…