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Showing posts from January, 2016
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अकेला मोदी और दुश्मन हजार :- नरेन्द्र मोदी का नाम ही दुश्मनों के होश उड़ाने को काफी हैं | लेकिन जबसे मोदी जी देश के प्रधानमंत्री बने हैं | तब से दुश्मनों की संख्या दिन दुगनी बढती ही जा रही है.इन दुश्मनों की कतार में आप दुश्मन देश पाकिस्तान के साथ-साथ लश्कर, ISIS जैसे कई आतंकी संगठनों और भारत के अधिकांश राजीनीतिक दल जैसे कांग्रेस, राजद, जदयू, सपा, कजरी गैंग्स, वामपंथी दलों को भी रख सकते हैं |

मित्रों, नरेन्द्र मोदी एक एैसा व्यक्तित्व है, जिसकी सोच ही देश की शक्ति और विकास से शुरू होता है | यह व्यक्ति अपने परिवार को देश नहीं, बल्कि समूचे देश को ही अपना परिवार मान रहा है | देश की उन्नति के लिए दी रात एक कर देने वाला ये नेता आज अन्तर्राष्ट्रीय स्तर पर भारत की खो चुकी ख्याति को पुनः प्रतिष्ठित कर चुका है | हाँ, इस व्यक्ति से आतंकी सोच वाले मुसलमानो की जरुर सुलगने लगती है, क्यूकि आतंकी सोच के मुस्लिमों के लिए मोदी का नाम एक काल के समान है |

अगर बीते हुए एक वर्ष में मोदी के क्रिया कलापों को देखा जाए तो उसके दुश्मनों के शब्दों में मोदी ने खूब विदेश दौरा किया है, लेकिन आप भारत के औद्योगिक प्रगति …

पत्रकारिता करते हुये भी पत्रकार बने रहने की चुनौती..,......!!!!???

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पत्रकारिता मीडिया में तब्दील हो जाये। मीडिया माध्यम माना जाने लगे। माध्यम सत्ता का सबसे बेहतरीन हथियार हो जाये। तो मीडिया का उपयोग करेगा कौन और सत्ता से सौदेबाजी के लिये मीडिया का प्रयोग होगा कैसे? जाहिर है 2016 में बहुत ही पारदर्शिता के साथ यह चुनौती पत्रकारिता करने वालेमीडियाकर्मियों के सामने आने वाली है। चुनौती इसलिये नहीं क्योकि पत्रकारिता अपने आप में चुनौतीपूर्ण कार्य है । बल्कि चुनौती इसलिये क्योंकि राजनीतिक सत्ता खुद को राज्य मानने लगी है। संस्थानों के राजनीतिकरण को राज्य की जरुरत करार देने लगी है। चुनावी जीत को संविधान से उपर मानने लगी है। यानी पहली बार संविधान के दायरे में लोकतंत्र का गीत राजनीतिक सत्ता के लोकतंत्रिक राग के सामने बेमानी साबित हो रहा है। जाहिर है ऐसे में हर वह प्रभावी खिलाडी मीडिया को अपने अनुकूल बनाने की मशक्कत करने लगा है जिसे अपने दायरे में सत्ता का सुकून चाहिये। और सत्ता को जहा लगे कि वह कमजोर हो रही है तो मीडिया से नहीं बल्कि मीडिया को माध्यम की तरह संभाले प्रभावी खिलाडियो से ही सीधे सौदा हो जाये। कह सकते है कि सबकुछ इतना सरल नहीं है। और जो खतरे पत्रकारि…

संघ-सरकार के बीच अमित शाह फिर अध्यक्ष ..........!!!!???

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जोश-हंगामा, खामोशी-सन्नाटा और उम्मीद । दिल्ली के 11 अशोक रोड पर मौजूद बीजेपी हेडक्वार्टर का यह ऐसा रंग है जो बीते दो बरस से भी कम वक्त में कुछ इस तरह बदलता हुआ नजर आया । जिसने मोदी की चमक तले अमित शाह की ताकत देखी । तो जोश-हंगामा दिखा । फिर सरकार की धूमिल होती चमक तले अमित शाह की अग्निपरीक्षा के वक्त खामोशी और सन्नाटा देखा । और अब एक उम्मीद के आसरे फिर से अमित शाह को ही प्रधानमंत्री मोदी का सबसे भरोसेमंद-जरुरतमंद अध्यक्ष के तौर पर नया कार्यकाल मिलते देखा । तो क्या सबसे बडी सफलता से जो उड़ान बीजेपी को भरनी चाहिये थी वह अमित शाह के दौर में जमीन पर आते आते एक बार फिर बीजेपी को उड़ान देने की उम्मीद में बीजेपी की लगाम उसी जोडी के हवाले कर दी गई है । जिसके आसरे बीजेपी ने 16 मई 2014 को इतिहास रचा था । इतिहास रचने के पीछे मनमोहन सिंह की सत्ता का वह काला दौर थाि जिससे जनता नाखुश थी । लेकिन अब इतिहास संभालने का दौर है जब सत्ता भी है । सबसे बडा संगठन भी है । सबसे बडी तादाद में पार्टी सदस्य भी है । फिर भी उम्मीद की आस तले भविष्य की हार का भय है। क्योंकि जीत के दौर में चुनावी जीत ही अमित शाह ने पह…

-पाकिस्तान के भारतबीच एलओसी का सच........!!!!!

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लश्कर-ए-तोएबा , जैश-ए मोहमम्द, हिजबुल मुज्जाहिद्दीन ,हरकत-उ मुज्जाहिद्दीन , पाकिसातन तालिबान और इस फेरहिस्त में 19 से ज्यादा और नाम । इन नामो से जुडे दफ्तर की संख्या 127 । जो कि पीओके में नहीं बल्कि कराची, मुल्तान, बहावलपुर, लाहौर और रावलपिडी तक में । जबकि ट्रेनिंग सेंटर मुज्जफराबाद और मीरपुर तक में । यानी पाकिस्तान के एक छोर से दूसरे छोर तक आंतकवादियो की मौजूदगी । भारत के लिये हर नाम आंतक का खौफ पैदा करने वाला लेकिन पाकिस्तान के लिये पाकिस्तान के भीतर आंतक के इन चेहरोपर कोई बंदिश नहीं है । तो सबसे बडा सवाल यही है कि जिस आतंकवाद पर नकेल कसने के लिये भारत पाकिसातन से बार बार बातचीत करता है जब वहीं अपनी जमीन पर आतंक को आतंक नहीं मानता तो पठानकोट हमले के बाद ऐसा माहौल क्यो बनाया गया कि पाकिस्तान पहली बार पठानकोट के दोषियो के खिलाफ कारर्वाई कर रहा है ।तो सवाल है कि पहली बार किसी आंतकी हमले को लेकर भारत ने यह दिखला दिया कि पाकिस्तान आतंकियों के खिलाफ कार्रवाई करें नही तो उसका रुख कडा हो जायेगा । या फिर पठानकोट हमले को ही बातचीत का आधार बनाया जा रहा है । क्योकि मोदी सरकार भी इस सच को समझती …
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ऐ भाई!तू भारत माँ के सीने की घबराहट सुन, सोमनाथ पर हावी होती गजनबियों की आहट सुन,


नारा ए तकबीर लगाती भीड़ देख लो लाखों की, जिन आँखों में राम कृष्ण हैं,खैर नही उन आँखों की,


पहले पढ़ी नमाज़ बाद में आगजनी-बम-गोली थी, लगता है पूरी की पूरी तालिबान की टोली थी,


ये भारत के मुसलमान हैं,या गुंडे अफगानी हैं इनके आगे संविधान,कानून सभी बेमानी हैं,


माना ये गुस्सा हो बैठे,उस बयान कमलेशी पर, बंद हुआ वो आज जेल में,खड़ा हुआ है पेशी पर,


सजा अदालत देगी,ये भी छोड़ें आज अदालत पर, रखो शरीयत घर में,ऐसे उतरें नही बगावत पर,


लेकिन ये तो टोपी जालीदार पहनकर कूद गए, अमन शांति भाईचारे पर अपनी आँखे मूँद गए,


दरवाज़ों पर ॐ लिखा ,तो वही घराना फूंक दिया, इतने थे बेख़ौफ़ मियां जी,पूरा थाना फूंक दिया,


सिर्फ निशाना हिन्दू ही क्यों,चुन चुन कर के पीटे थे, और मुसाफिर बस के नीचे कॉलर पकड़ घसीटे थे,


फौजी वाहन से भी नफरत?क्यों कर आग लगाई थी? पूरी भीड़ अचानक कैसे एक साथ बौराई थी,


अगर वजह कमलेश रहा है,सारे हिन्दू दोषी क्यों? तो फिर अफजल भटकल दाऊद पर छायी ख़ामोशी क्यों?


क्या हम भी ये चेहरे लेकर इनके घर पर टूट पढ़ें? और एक गुजरात बना दें,भगवा लेकर छूट पढ़े…

संघ मान रहा है बीजेपी को परिपक्व नेतृत्व चाहिये ?

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बीजेपी अधय्क्ष को लेकर जलगांव में मंथन
एक तरफ प्रधानमंत्री मोदी तो दूसरी तरफ लालकृष्ण आडवाणी और मुरली मनोहर जोशी । और बीच में अमित शाह के अध्यक्ष पद की कुर्सी । जिस पर फैसले की घड़ी अब आ चुकी है और कल से जलगांव में दो दिनों तक राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की कोर कमेटी इसी पर मंथन करेगी की अमित शाह को दोबारा बीजेपी का अध्यक्ष बनाया जाये कि नहीं। बैठक में संघ के मुखिया मोहन भागवत समेत भैयाजी जोशी, सुरेश सोनी , दत्तात्रेय होसबोले, कृष्ण गोपाल, सह कार्यवाहक विभाग्या और बौद्दिक प्रमुख स्वांत रंजन समेत दर्ज भर अधिकारी चिंतन मनन करेंगे। और चिंतन मनन सिर्फ इस बात को लेकर नहीं होगा कि अमित शाह का क्या किया जाये बल्कि मंथन इस बात को लेकर ज्यादा होगा कि जब केन्द्र में संघ के राजनीतिक संगठन बीजेपी की सरकार है । प्रधानमंत्री स्वयंसेवक है । तो फिर बीजेपी के चुनावी जीत के विस्तार पर दिल्ली और बिहार में ब्रेक क्यों लग गयी । और संघ के सैद्दांतिक मुद्दों से इतर मोदी सरकार निर्णय ले रही है और फिर चुनावी जीत नहीं मिल रही है तो यह रास्ता कब तक अपनाया जा सकता है । यानी अमित शाह को दोबारा बीजेपी अध्यक्ष बनाने के …
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मेरे प्रिय मित्रजनो ! प्यार भरा नमस्कार ! कुशलता के आदान-प्रदान पश्चात विषय ये है कि मेरी बेटी सुकुमारी सुकृति शर्मा जो पिछले 3 - 4 वर्षों से ज़ी पंजाब हरियाणा हिमाचल,टीवी 24 और इंडिया-क्राइम चैनलों में , एंकर कम असोसिएट प्रोड्यूसर के तौर पर कार्य कर चुकी है !इसके इलावा कई समाचार पत्रों में और विद्वित पत्रकारों एवं एडिटरों के साथ भी कार्य कर चुकी है !उसने जर्नलिज़्म एंड मॉस कम्युनिकेशन में मास्टर तक की शिक्षा ग्रहण की हुई है !
               पारिवारिक कारणों के चलते अब हम उसे जयपुर में शिफ्ट करवाना चाहते हैं ! अतः जो भी मेरा मित्र इस काम में मेरी मदद कर सकता हो वो अवश्य करे !सधन्यवाद !! आपका अपना मित्र - पीताम्बर दत्त शर्मा - (लेखक-विश्लेषक) मो.न. - 9414657511
sukriti sharma12:57 PM (14 minutes ago)
Dear Sir/Mam
First of all, Greetings for the day and a very happy new year to you and family.

Further, I am sharing my profile to you for any suitable opening. Presently i am  working with India Crime News Channel, Meerut as an Associate Producer and have 2.5 years of rich experience with Zee M…