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Showing posts from May, 2016

भूल गए हम दोहे,चौपाइयां और छन्द !! - पीतांबर दत्त शर्मा (लेखक-विश्लेषक) मो.न. - +9414657511

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वो भी क्या ज़माना था जब हर दसवां भारतवासी अपनी आम बात में भी कोई न कोई कविता का प्रकार प्रयोग किया करता था !हमारे कवि लोग भी इनका भरपूर प्रयोग अपनी कविताएं गढ़ने में किया करते थे ! फिर भारत में अंग्रेज़ आये,मुसलमान आये तो कुछ लोग बहुत ही बढ़िया शेयर और ग़ज़ल कहने लगे ! जो दिल के पार हो जाय करती थीं ! 1980 तलक किसी बुरे शब्द का प्रयोग शायद ही की शायर,गीतकार या ग़ज़ल के लिखने वाले ने किया हो !
              लेकिन आज हालात ये हैं कि कवि हो या शायर,ग़ज़लकार हो या कोई गीतकार ,मशहूर होने के लिए वो द्विअर्थी शब्दों या गंदे शब्दों का प्रयोग करने को सफलता का आसान रास्ता मानता है ! आज कल कई चैनलों पर जो कॉमेडी शो दिखाए जा रहे हैं वो तो फूहड़ता की हद ही पार करते नज़र आते हैं !अभी कलर चैनल के कॉमेडी शो में कृष्णा ने राम गोपाल वर्मा को "नल्ला-अवार्ड"देने की कोशिश की , तो उनकी आँखों का गुस्सा देख कर मीका सिंह ने मौका सम्भाल लिया !वरना कुछ भी हो सकता था !
                  "AIB "नामक हास्य वीडिओ में "तन्मय भट्ट नामक कथित हास्य कलाकार ने अपनी "गन्दी-कला" का प्रदर्शन करते हुए लता …

एक खुला पत्र - श्री अशोक परनामी (प्रदेशाध्यक्ष भाजपा राजस्थान)के नाम - पीतांबर दत्त शर्मा

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माननीय प्रदेशाध्यक्ष परनामी जी , सादर नमस्कार !
कुशलता के आदान-प्रदान पश्चात समाचार ये है कि हमने जैसे ही आपके श्रीगंगानगर जिले में आगमन और कार्यकर्ताओं के मिलन समाचार अख़बारों में पढ़ा , तभी से हमारा मन तरह-तरह के विचारों से उद्वेलित होने लगा !आपको अपने सुझाव संगठन को मजबूत करने हेतु दूँ या ना दूँ !वैसे तो हमने एक जनवरी 2016 से सक्रिय राजनीती और समाजसेवा से अपनेआप को अलग कर लिया है ! क्योंकि हमें 30 वर्षों के राजनितिक और समाजसेवी जीवन से ये अनुभव प्राप्त हुआ है कि आज की जनता को ना तो ईमानदार नेता चाहिए और नाही सच्चा समाजसेवी !  इसीलिए हमने अपना सारा ध्यान केवल लेखन पर ही लगा दिया है !इंटरनेट पर "फिफ्थ पिल्लर करप्शन किल्लर"नामक ब्लॉग मुझे सम्पूर्ण संतुष्टि देता है !
मान्यवर !
                    भाजपा के सभी नेता मंत्री अपनी अपनी क्षमता अनुसार बढ़िया काम कर रहे हैं !इनके पास कार्यकर्ताओं से मिलने का समय नहीं है और ना ही उनको ये संतुष्ट कर पाये हैं !आम जनता और पार्टी कार्यकर्ताओं को एक ही तराजू में तो नहीं तोला जा सकता ?लेकिन हमारा संगठन जैसे कुम्भकर्णी नींद सो गया लगता है !राजनिति…

"मंहगाई कम करने में बाधक ये "व्यपारी"!! - पीतांबर दत्त शर्मा (लेखक-विश्लेषक) मो.न. +9414657511

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आलू, हो या प्याज ,दाल हो या घी-तेल और मिर्च हो या मसाले , इनमे से किसी का भी अगर दाम बढ़ जाता है तो बेचारे मध्यम दर्जे के आदमी का बुरा हाल हो जाता है ! क्योंकि वो पहले ही "गरीब-अमीर"के दो पाटन के बीच में पिस रहा जो होता है ! निष्चय ही सभी सरकारों को इस विषय पर सबसे पहले विचार करके तुरंत ही उपाय करने चाहिए महंगाई रोकने हेतु , लेकिन कोई भी सरकार सफल नहीं हो पाती है !मैंने अपने जीवन के अनुभव से जो समझा और जाना है , वो ये है कि जब भी किसी फसल के आने का समय होता है तब व्यापारी लोग बेचारे किसान को कम मूल्य देते हैं ,और जब साड़ी फसल आ चुकी होती है तब ये व्यापारी लोग उस माल को किसी जगह छिपा लेते हैं और फिर महंगे दामों पर बेचते हैं !
                                  ये भी देखने में आया है कि आजकल भारत के लोगों का रहने का स्तर भी "ऊंचा" हो गया है !सैंकड़ों कमाने वाला आज हज़ारों कमा रहा है , हजारों कमाने वाला आज लाखों और लाखों वाला करोड़ों कमा रहा है ! सब्जी बेचने वाले रेहड़ी वालों से लेकर बड़े-बड़े मॉल के शो-रूमों वालों को भी इसका एहसास हो चुका है,इसलिए सब 10/- रूपये वाली वस्तु के 5…

जब बात हिन्दू-मुसलमान की नहीं इंसान की होगी तब कांग्रेस-बीजेपी भी नहीं होगी !! -- साभार श्री पूण्य प्रसुन्न वाजपेयी जी !!

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निगाहों में सोनिया गांधी और निशाने पर राहुल गांधी। वार भी चौतरफा। कहीं अंड़गा लगाने वालों की हार का जिक्र तो कहीं कांग्रेस मुक्त भारत का फलसफा। कोई अखक्कडपन से नाराज। तो कोई बदलते दौर में कांग्रेस के ना बदलने से नाराज। किसी को लगता है सर्जरी होनी चाहिये। तो कोई फैसले के इंतजार में। लेकिन क्या इससे कांग्रेस के अच्छे दिन आ जायेंगे। यकीनन यह सवाल हर कांग्रेसी को परेशान कर रहा है होगा कि चूक हो कहां रही है या फिर कांग्रेस हाशिये पर जा क्यों रही है। तो सवाल तीन हैं। पहला,क्या बदलते सामाजिक-आर्थिक हालातों से कांग्रेस का कोई जुडाव है। दूसरा, क्या सड़क पर सरोकार के साथ संघर्ष के लिये कद्दावर नेता बचे हैं। तीसरा, क्या एक वक्त का सबसे महत्वपूर्ण कार्यकत्ता "वोट क्लेक्टर " को कोई महत्व देता है। यकीनन गांधी परिवार के सियासी संघर्ष में कोई बडा अंतर नहीं आया। लेकिन गांधी परिवार यह नहीं समझ पाया कि समाज के भीतर का संघर्ष और तनाव बदल चुका है । राजनीति को लेकर जनता का जुडाव और राजनीति के जरीये सत्ता की समझ भी आर्थिक सुधार के बाद यानी 1991 के बाद यानी बीते 25 बरस में खासी तेजी से बदली है। और …

" सर्जरी कांग्रेस की " - पीतांबर दत्त शर्मा (लेखक-विश्लेषक) मो.न. +9414657511

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सच यही है कि जितने भी आज बड़े नेता भारत में हैं , वो या उनका कोई बुज़ुर्ग कॉंग्रेसी अवश्य रहा होगा ! इसीलिए हम चाहे कांग्रेस के कितने भी विरोधी क्यों ना हों , लेकिन जब भी उस पर कोई कष्ट आता है तो सबसे पहले हम ही उन्हें अपना "इलाज" करवाने की सलाह दे देते हैं ! महाभारत का युद्ध भी जब हो रहा था तब भी दिन में "भाई-भाई"लड़ा करते थे और शाम को उस पक्ष से अफ़सोस भी प्रकट करने पंहुच जाया करते थे ,जिसके किसी सदस्य को उन्होंने ही मारा होता था !
                             ठीक इसी तरह हमारे जेटली जी ने भी अपने ब्लॉग में ये लिख दिया है कि "कॉंगर्स को अपनी सर्जरी करवा लेनी चाहिए "!! सिर्फ जेटली जी ही नहीं बल्कि दुसरे दलों के नेता,कई कांग्रेस के नेता और हमारे जैसे लेखक-पत्रकार भी पूरे जोर-शोर से "सलाह"दे रहे हैं कि कांग्रेस अपनी सर्जरी अवश्य करवाए ! ये शायद इसीलिए हो रहा है क्योंकि हमारे इस "शरीर"के अंदर आज भी कोई "कॉंग्रेसी" छिपा बैठा है !ऐसा नहीं है कि सिर्फ यही एक कारण है हम सबके ऐसा बोलने का ! कुछ ना कुछ हमारे मनों में "और भी साज़िशें&q…

कांग्रेस के प्रिय " रघुराम राजन " क्या देश के प्रिय नहीं ?- पीतांबर दत्त शर्मा - +9414657511

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रिजर्व बैंक के गवर्नर रघुराम राजन बीजेपी नेता सुब्रह्मण्यन स्वामी के टारगेट पर हैं। हर किसी के मन में यह सवाल आ रहा है कि आखिर क्या वजह है कि स्वामी ने राजन के खिलाफ इतने सख्त कमेंट्स किए हैं। हम आपको बताते हैं रघुराम राजन पर स्वामी का शक सही होने की 5 बड़ी वजहें।
1. वर्ल्ड बैंक की पसंद हैं रघुराम राजन
कुछ दिन पहले ही वर्ल्ड बैंक ने यह कहा कि अगर राजन को आरबीआई के गवर्नर पद से हटाया गया तो इसका रुपये की कीमत पर बुरा असर पड़ेगा। इसे एक तरह से विश्व बैंक की धमकी की तरह माना जा रहा है। यहां तक कहा जाता है कि विश्व बैंक की सलाह पर ही मनमोहन सरकार के वित्त मंत्री पी. चिदंबरम ने रघुराम राजन को आरबीआई का गवर्नर बनाया था। इससे पहले वो विश्व बैंक और अमेरिका के फेडरल रिजर्व बैंक के बड़े पदों पर रह चुके थे।
2. ‘मेक इन इंडिया’ का विरोध किया था
जब ‘मेक इन इंडिया’ को लेकर देश भर में चर्चा थी, तो राजन ने कहा कि हमें मेक फॉर इंडिया पर ज्यादा जोर देना चाहिए। इसका मतलब हुआ कि कंपनियां भारत में सामान न बनाएं, बल्कि वो दूसरे देशों से बनाकर भारत को बेचें। बस इतना ध्यान रखें कि वो सामान भारत के लोगों की जरूरत …

फर्जी पढ़ाई को रोकें तो बात हो !!!!!

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तो प्रधानमंत्री मोदी की डिग्री फर्जी नहीं है इस पर दिल्ली यूनिवर्सिटी ने भी मुहर लगा दी । लेकिन फर्जी डिग्री के सवाल ने यह सवाल तो खड़ा कर ही दिया कि जब देश के डीम्ड यूनिवर्सिटी की डिग्री को लेकर फर्जी का सवाल दिल्ली के सीएम उठाने लगे तो फिर फर्जी शब्द डिग्री के साथ कहे अनकहे देश में चस्पा तो है ही । क्योंकि फर्जी डिग्री का खेल खासा बड़ा है । क्योंकि देश में पढाई नौकरी के लिये होती है । नौकरी पढाई पर नहीं डिग्री पर मिलती है । और इसी का असर है कि एसोचैम की रिपोर्ट कहती है मैनेजमेंट की डिग्री ले चुके 93 फिसदी नौकरी लायक नहीं है । और नैसकाम की रिपोर्ट कहती है कि 90 फिसदी ग्रेजुएट और 70 फिसदी इंजीनियर प्रशिक्षण के लायक नहीं है । और देश में फर्जी डिर्गी बांटना ही कैसे सबसे बडा बिजनेस या नौकरी हो चली है इसका आंकड़ा 2012 के सरकारी रिपोर्ट से समझा जा सकता है । जिसके मुताबिक देश में 21 यूनिवर्सिटी फर्जी डिग्री बांटते हैं । दस लाख से ज्यादा छात्र बिना कालेज गये डिग्रीधारी बन जाते है। और शायद यही वजह है कि हर राज्य में नौकरी के लिए डिग्री पढाई से ज्यादा महत्वपूर्ण है। और जब सवाल डिग्री की जांच क…

उनका "देशप्रेम", हमारे देशप्रेम से बड़ा कैसे ?? - पीतांबर दत्त शर्मा (लेखक-विश्लेषक) मो.न. - +919414657511

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आजकल भारत में "सच्चे इतिहास"और अपने आपको सच्चा देश-भक्त दिखाने का मौसम सा चल है जैसे ! जिसे देखो वो ही अपने मर्ज़ी के आदमियों को आजादी का सच्चा सिपाही बता रहा है !और अपनेआपको सच्चा देश भक्त बताकर दोबारा से इतिहास लिखने-पढ़ाने की बातें कर रहा है !उस वक़्त के इनके बुज़ुर्ग तो भाव वश जेल  चले गए और अपने प्राणों को भी देश पर न्योछावर कर गए ,लेकिन वो अंग्रेज़ों की उस विशेष "डायरी" में अपना नाम अंकित नहीं करवा पाये ,जिसको देखकर तत्कालीन वामपंथियों ने इतिहास लिखा था !अब बाद में पछताने से क्या होता है जब "चिड़िया"चुग गयी खेत !!
           आज जिन लोगों की इस देश में सरकार चल रही है , वो लोग इतने भोले और अपरिपक्व हैं कि हर काम को वो तुरंत कर देना चाहते हैं !जिस बात को काम पूरा होने तलक "गुप्त"रखना चाहिए , उसका ढिंढोरा ये लोग पहले ही स्वयं पीटने लग जाते हैं !जिससे वो लोग चोकन्ने हो जाते हैं जिन्होंने उस समय अपनी "सत्ता"का फायदा उठाकर अपनी मर्ज़ी से कॉमरेडों से भारत का "विशेष इतिहास "लिखवाया और 67 वर्षों तलक पढ़वाया था !
                      जो म…

मोदी के दो बरस होने से पहले ही संघर्ष की मुनादी के मायने.......???

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मोदी सरकार के दो बरस पूरे होने से ऐन पहले ही राजनीतिक संघर्ष की मुनादी सड़क पर खुले तौर पर होने लगी है। यानी अगस्ता हेलीकाप्टर की उड़ान ने यह संकेत दे दिये हैं कि अब सवाल संसद के जरिये देश चलाने या विपक्ष को साथ लेकर सरकार चलाने का वक्त नहीं रहा । वक्त सियासी जमीन बचाने या सियासी जमीन बनाने के आ गया है। इसीलिये एक तरफ प्रधानमंत्री मोदी अब चुनावी सभाओं में गांधी परिवार को सजा दिलाने का जिक्र करने से नहीं चूक रहे हैं तो सोनिया गांधी मोदी सरकार को मिट्टी में मिटाने के तंज कसने से नहीं चूक रही है। और यह तकरार संसद के भीतर नहीं बल्कि चल रही संसद के बाद सड़क से हो रही है। और इस संघर्ष में तीसरा कोण बने नीतिश कुमार भी संघ और बीजेपी मुक्त सत्ता का ख्वाब यह सोच कर संजो चले हैं कि जब कांग्रेस हर राज्य में अपने हर विरोधियों को साध कर मोदी सरकार को हराने के लिये झुकने को तैयार है तो फिर लड़ाई अभी से 2019 को लेकर बनने लगे हैं, इससे इंकार भी नहीं किया जा सकता ।
लेकिन सवाल यही है कि क्या जिस अगस्ता हेलाकाप्टर को बोफोर्स तोप की तर्ज पर मोदी सरकार रखना चाह रही है क्या वह अतीत दुबारा उभर पायेगा । या फिर…
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भ्रष्टाचार के गर्त में डूबे देश में "हेलीकाप्टर" की क्या औकात? 462 बिलियन डालर, आजादी के बाद से साठ बरस के भ्रष्टाचार की यह रकम है। यह रकम ऐसे कालेधन की है जो टैक्स चोरी, अपराध और भ्रष्टाचार के जरीये निकली। वाशिंगटन की ग्लोबल फाइनेनसियल इंटीग्रेटी की रिपोर्ट के मुताबिक आजादी के बाद से ही भ्रष्टाचार भारत की जड़ों में रहा जिसकी वजह से 462 बिलियन डालर यानी 30 लाख 95 हजार चारसौ करोड रुपये भारत के आर्थिक विकास से जुड़ नहीं पाये। और 1991 के आर्थिक सुधार ने इस रकम का 68 फिसदी हिस्सा यानी करीब 21 लाख करोड अलग अलग तरीकों से विदेश चला गया । यानी जो सवाल आज की तारिख में कालेधन से लेकर भ्रष्टाचार को लेकर उसकी नींव आजादी के वक्त ही देश में पडी और भ्रष्टाचार को लेकर जो सवाल हेलीकाप्टर घोटाले के जरीये संसद में उठ रहे है उसका असल सच यही है कि रक्षा सौदौ में घोटाले देश के अन्य क्षेत्रो के घोटालो में काफी पीछे हैं। और इसे हर राजनेता बाखूबी समझता है।

यानी भ्रष्टाचार को लेकर संसद में चर्चा भी कोई नयी ईबारत नहीं लिखी जा रही है । बल्कि नेहरु के दौर में जीप घोटाले से लेकर मुंदडा घोटाला, इंदिरा के द…

तो ये है देश का इकनॉमिक मॉडल....???? "5th पिल्लर करप्शन किल्लर"वो ब्लॉग जिसे आप रोज़ाना पढ़ना,बाँटना और अपने अमूल्य कॉमेंट्स देना चाहेंगे !लिंक- www.pitamberduttsharma.blogspot.com.

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गुजरात में पाटीदारों ने आरक्षण के लिए जो हंगामा मचाया- जो तबाही मचायी । राज्य में सौ करोड़ से ज्यादा की संपत्ति स्वाहा कर दी उसका फल उन्हें मिल गया। सरकार ने सामान्य वर्ग में पाटीदारों समेत आर्थिक रुप से पिछड़े लोगों के लिए दस फीसदी आरक्षण की व्यवस्था कर दी। तो विकास की मार में जमीन गंवाते पटेल समाज के लिये यह राहत की बात है कि जिनकी कमाई हर दिन पौने दो हजार की है उन्हे भी आरक्षण मिल गया । यानी सरकारी नौकरी का एक ऐसा आसरा जिसमें नौकरी कम सियासत ज्यादा है । यानी आरक्षण देकर जो सियासी राजनीतिक बिसात अब बीजेपी बिछायेगी उसमें उसे लगने लगा है कि अगले बरस गुजरात में अब उसकी हार नहीं होगी । और इससे पहले कुछ ऐसा ही हाल हरियाणा के जाट आंदोलन का है। आरक्षण इन्हें भी चाहिए था । और आरक्षण की मांग करते हुये करीब 33 हजार करोड़ की संपत्ति स्वाहा इस आंदोलन में हो गई ।धमकी सरकार गिराने की दे दी गई तो आरक्षण भी मिल गया । लेकिन यह सवाल दोनों जगहों पर गायब है कि नौकरी है कितनी। और जिस जमीन और खेती को गंवाकर आरक्षण की राजनीति के रास्ते देश निकल रहा है उसका सच आने वाले वक्त में ले किस दिशा में जायेगा । क्…

आज अगर "नारद"होते तो क्या वो "सत्य"बोल पाते ? - पीतांबर दत्त शर्मा (लेखक-विश्लेषक) मो.न. -+919414657511

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सतयुग,त्रेता और द्वापर तक तो सभी देवताओं का इस धरा पर आना जान था , पृथ्वी मात भी अपना दुःख सुनाने भगवन विष्णु के लोक में पंहुच जाया करती थी ! यहां तलक कि ऋषि-मुनि भी अपनी बात सीधे तौर परकिसी भी देवता से कर सकते थे ! कोई "बिचोलिया"या नेता बीच में नहीं होता था ! कोई कोर्ट या वकील नहीं करना पड़ता था और ना ही कोई धरना-प्रदर्शन करना पड़ता था !! समस्या का समाधान सीधे देवता लोग कर दिया करते थे !कलयुग आने के बाद प्रभु जी ने अपना सिस्टम पता नहीं क्यों बदल दिया ? 
                       कलयुग के आने पर भगवान् को पता था कि अगर वे "प्रत्य्क्ष"इस कलयुगी जनता को दिखाई दे गए तो ना तो उनकी इतनी "इज्जत"रहेगी और ना ही उनका ये परमात्मा वाला पद बचेगा ! सो उन्होंने कुछ देवताओं को तो जनता के सामने प्रत्य्क्ष आने दिया , जैसे जल देवता, वायु देवता,सूर्य देवता और पृथ्वी माता आदि !और कुछ देवताओं को आकाश में ग्रहों के रूप में स्थापित करदिया गया ! जैसे  शुक्र-शनि,बृहपति और राहु केतु आदि !बाकि सब अपने अपने अपने गृह-स्थानों की और रवाना हो गए ! संसार को सात जन्मों के और चौरासी लाख योनियों …