Thursday, June 30, 2016

कश्मीर में गिलानी-यासिन से बाद की पीढ़ी का आतंक


श्रीनगर से 3 से 6 घंटे की दूरी पर कूपवाडा का केरन, तंगधार,नौ गाम और  मच्चछल ऐसे क्षेत्र है जहा से लगातार घुसपैठ होती है । पहली ऐसी घुसपैठ बांदीपुरा के गुरेज सेक्टर से होती थी । लेकिन सेना ने वहा चौकसी बढाई को घुसपैठ बंद हो गई । तो यह सवाल हर जहन में आ सकता है कि सेना चाहे तो ठीक उसी तरह इन इलाको में घुसपैठ रोक सकती है । लेकिन पहली बार वादी में सवाल सीमापार से घुसपैठ से कही आगे देश के भीतर पनपते उस गुस्से का हो चला है जिसकी थाह कोई ले नहीं रहा । और जिसका लाभ आंतकवादी उठाने से नहीं चूक रहे । क्योकि जिस तरह कूपवाडा में मारा गया आतंकवादी समीर अहमद वानी के जनाजे में शामिल होने के लिये ट्रको में सवार होकर युवाओ क् जत्थे दर जत्थे सोपोर जा रहे है । उसने यह नया सवाल खड़ा कर दिया है कि क्या आंतक की परिभाषा कश्मीर में बदल रही है या फिर आतंक का सामाजिकरण हो गया है । क्योंकि नई पीढी को इस बात का खौफ नहीं कि मारा गया समीर आंतकवादी था और वह उसके जनाजे में शामिल होंगे तो उनपर भी आतंकी होने का ठप्पा लग सकता है । बल्कि ऐसे युवाओं को लगने लगा है कि उनके साथ न्याय नहीं हो रहा है । और हक के लिये हिंसा को आंतक के दायरे में कैसे रखा है। 

जाहिर है यह एेसे सवाल है जो 1989 के उस आंतक से बिलकुल अलग जो रुबिया सईद के अपहरण के बाद धाटी में शुरु हुआ । दरअसल 90 के दशक में आंतक से होते हुये आलगाववाद की लकीर कश्मीरी समाज में खौफ पैदा भी कर रही थी । और आंतक का खौफ कश्मीरी समाज को अलग थलग भी कर रही था । लेकिन अब जिस तरह सूचना तकनीक ने संवाद और जानकारी के रास्ते खोले है । दिल्ली और धाटी के बीच सत्ता की दूरी कम की है । राजनीतिक तौर पर सत्ता कश्मीर के लिये शॉ़टकट का रास्ता अपना रही है । उसने धाटी के आम लोगो और सत्ता के बीच भी लकीर किंच दी है । और यह सवाल दिल्ली के उस नजरिये से कही आगे निकल रहा है जहा खुफिया एजेंसी सीमा पार के आंतक का जिक्र तो कर रही है लेकिन घाटी में कैसे आतंक को महज हक के लिये हिसां माना जा रहा है और उसी का लाभ सीमापार के आंतकवादी भी उठा रहे है इसे कहने से राजनीतिक सत्ता और खुफिया एजेंसी भी बच रही है । यानी घाटी गिलानी और यासिन मलिक के आंतक से कही निकल कर युवा कश्मीरियों के जरीये आतंक का सामाजिकरण कर रही है।

लेकिन दिल्ली श्रीनगर का नजरिया अभी भी घाटी में आंतक को थामने के लिये बंधूक की बोली को ही आखिरी रास्ता मान कर काम रहा है । इसीलिये कश्मीर को लेकर हालात कैसे हर दिन हर नयी धटना के साथ सामने आने लगे है यह कभी पंपोर तो कभी कूपवाडा तो कभी सोपोर से लेकर घाटी के सीमावर्ती इलाकों में गोलियों की गूंज से भी समझा जा सकता है और श्रीनगर में विधानसभा के भीतर बीजेपी विधायकों का पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर में आतंकवादी कैपो पर हवाई हमले करने की तक की मांग से भी जाना जा सकता है । तो दिल्ली में गृहमंत्री राजनाथ सिंह की तमाम खुफिया एजेंसियों के प्रमुखो के साथ राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार और गृह सचिव के बीच इन हालातों को लेकर मंथन की कैसे आतंकी हमलो से सीआरपीएफ बचे । और उपाय के तौर पर यही निर्णय लेना कि सीआरपीएफ भी बख्तरबंद गाडी में निकले । सेना के साथ घाटी में मूवमेंट करसे आगे बात जा नहीं रही है । तो क्या दिल्ली और श्रीनगर के पास घाटी में खड़ी होती आंतक की नयी पौघ को साधने के कोई उपाय नहीं है ।

या फिर घाटी को देखने समझने का सरकारी नजरिया अब भी 1989 के उसी आतंकी घटनाओं में अटका हुआ है जब अलगाववादी नेताओ की मौजूदा फौज युवा थी । यानी तब हाथों में बंदूक लहराना और आंतक को आजादी के रोमान्टिज्म से जोडकर खुल्ळम खुल्ला कानून व्यवस्था को बंधूक की नोक पर रखना भर था । अगर ऐसा है तो फिर कश्मीर में आतंक के सीरे को नहीं बल्कि आतंक से बचने के उपाय ही खोजे जा रहे है । और आतंक पर नकेल कसने का नजरिया हो क्या इसे लेकर उलझने ही ज्यादा है। क्योंकि विधानसभा में जम्मू कश्मीर की सीएम महबूबा पाकिस्तान से बातचीत की वकालत करती है । और सत्ता में महबूबा के साथ बीजेपी के विधायक रविन्द्र रैना पीओके के मिलिटेंट कैप पर हवाई हमले की मांग करते है । और दिल्ली में उसी बीजेपी की केन्द्र सरकार सीमा पर सेना को खुली कार्रवाई की इजाजत देने की जिक्र कर खामोश हो जाती है । यानी घाटी में जो पांच बड़े सवाल है उसपर कोई नहीं बोल रहा । क्योकि वह सत्ता के माथे पर शिकन पैदा करते है । पहला सवाल तो बढती बोरजगारी का है । दूसरा सवाल कश्मीर के बाहर कश्मीरियो के लिये बंद होते रास्तों का है । तीसरा सवाल दफ्न कश्मीरियो की पहचान का है। चौथा सवाल किसी भी आतंकी भेड़ के बाद उस इलाके के क्रेकडाउन का है जिसके दायरे में आम कश्मीरी फंसता है । और चौथा सवाल सेना से लेकर अद्दसेनिक बलो में श्रेय लेने की होड है । जिसमें मासूम फंसता है या आपसी होड कश्मीर को बंदूक के साये में ही देखना पसंद करती है । यह ठीक उसी तरह है जैसे कूपवाडा में दो आतंकवादियों को मारा किसने इसकी होड़ सेना और सीआरपीएफ में लग गई । दोनो की तरफ से ट्विट किये गये । लेकिन सीआरपीएफ ने जब विडियो फुटेज दिखायी तो सेना ने माना कि सीआरपीएफ ने ही आतंकवादियों को मारा । और इस बहस में यह सवाल गौण हो गया कि कैसे हमले से पहले आंतकवादी -पंपोर में हमले से पहले आतंकी करीब छह घंटे तक श्रीनगर शहर में घूमते रहे,जबकि पुलिस हाईअलर्ट पर थी । कैसे जिस कार में आतंकवादी सवार थे,उसने कई नाके क्रॉस किए लेकिन हमले के बाद कार मौका-ए-वारदात से फरार होने में कामयाब रही । कैसे सीआरपीएफ की रोड ओपनिंग पार्टी यानी आरओपी हाईवे को सुरक्षित करने में विफल रही और आतंकी हमले का जवाब नहीं दे पाई । कैसे सीआरपीएफ की बस,जिसमें जवान जा रहे थे,वो अलग थलग चल रही थी । कैसे सेना के काफिले में आगे और पीछे की गाड़ी में हथियारबंद जवानों का होना जरुरी है लेकिन ऐसा पर में नहीं हुआ । कैसे ट्रैफिक के दौरान सीआरपीएफ की गाड़ियां आगे-पीछे हो गई,जिसका मतलब है कि उनके बीच सामंजस्य नहीं था । यानी एक तरफ रवैया ढुलमुल तो दूसरी तरफ आधुनिक तकनीक के आसरे दुनिया से जुडता पढा लिखा कश्मीरी । जिसके सामने कश्मीर से बाहर दुनिया को जानने का नजरिया इंटरनेट या सोशल मीडिया ही है । जो भारत को कहीं तेजी से समझता है यानी दिल्ली जबतक कश्मीर को समझ उससे काफी पहले समझ लेता है।

Saturday, June 25, 2016

"धूर्तों का नार्को टेस्ट करा दो न्यायाधीश जी" !! पीतांबर दत्त शर्मा लेखक-विश्लेषक) मो.न. - +9414657511

  पाठक मित्रो ! पिछले कुछ दिनों से मैं आपके साथ अपने विचार सांझे नहीं कर सका क्योंकि मेरी बेटी सुकृति शर्मा हेतु एक लड़का देखकर उसकी सगाई कर दी है !बस उसी में व्यस्त था ! 
                अब विषय पर आते हैं ! पिछले एक पखवाड़े में कई घटनाक्रम ऐसे हुए जो देखने में तो छोटे थे लेकिन उनमे "दुष्टता,धृष्टता,स्वार्थ,वैरभाव और देश के प्रति गद्दारी"कूट-कूट कर भरी हुई दिखाई दी !इसीलिए आज हम उन सभी छोटे लेकिन देश के लिए गम्भीर विषयों पर चर्चा करेंगे ! सबसे पहले मथुरा के "राम-वृक्ष यादव" की बात करते हैं !जितने जोरशोर से मीडिया ने इस मामले को उठाया उतनी ही जल्दी वो इस विषय को भूल भी गयी !आज कोई खबरनवीस इसपर बात ही नहीं करता दिखाई दे रहा क्यों??"जांच से  हमेशां "निकला"है वही तो इसमें निकलेगा ना !!
                        "उड़ता--पंजाब"जैसी फ़िल्में पता नहीं किस उद्देश्य से कौन किसके पैसों से बनाता आ रहा है , ये भी एक बड़ी जांच का विषय है !पिक्चर के प्रमोशन हेतु कितने "नीच"तरीके आजमाने में भी जब सलमान को शर्म नहीं आती तो भला दुसरों को  कैसे शर्म आये ?ये धंधा ही गंदा कहा जाता है तो इनसे "मूल्यों"की आस भला कैसे की जा सकती है ?
किसके पीछे कौन है ?किसका रुपया और किसकी चाल चली जा रही है ये तो नवजोत सिंह सिद्दू ही जानते हैं !
                       अब आते हैं यादव जाती के "चाचा-भतीजे की लड़ाई पर !अगले साल होने वाले विधानसभा चुनाव के संभावित नतीजे उत्तर-प्रदेश के सभी नेताओं को डरा रहे हैं ! चाचा ने तुष्टिकरण का पुराण फार्मूला चला चाहा तो बलराम यादव को मंत्री मंडल से बाहर कर वीटो का प्रयोग कर दिया ! आज का ताज़ा समाचार  की बलराम जी बहाल हो गए हैं और अंसारी बंधुओं को कोई दूसरा ठिकाना ढूंढना होगा ! उन्हें घबराना नहीं चाहिए राहुल की कांग्रेस का हाथ ऐसे ही लोगों के साथ ही तो है यारो !!??
                  उधर  बहन मायावती जी को भी कोई भाव नहीं दे रहा दिखता !उनके एक मजबूत सिपाही जब उन्हें छोड़ कर चले गए तब बहन जी ने नींद से जागते हुए बताया कि उन्हें तो खुद ही निकालना चाहते थे ! मज़ा तब आया जब अखिलेश द्वारा "अच्छे-आदमी"का प्रमाण पत्र उन्होंने निरस्त कर दिया !सुना है भाजपा के साथ भी उनकी बात पट नहीं रही है ! लेकिन "विशेष गुणों वाला मीडिया"उनके खूब इंटरव्यूू ले रहा है और कार्यक्रम बना रहा है !क्यों??पता नहीं !
उधर मोदी जी के अथक प्रयासों के बावजूद  जब भारत nsg का सदस्य नहीं बन पाया तो "ताक"में बैठे भेड़िये नुमा विपक्षी नेता अजीब-अजीब सवाल करके अपनी देश भक्ति दिखाने को तैयार होगये ! शुक्र है की अमेरिका के एक अधिकारी ने ढाढस बंधा दिया की साल खत्म होते होते एकबार फिर इसके लिए प्रयास होंगे !
                    इंग्लॅण्ड को 43 सालों के बाद ये आभास हुआ कि उनके घरों में घुसे "विदेशी-चूहे"उनके अधिकारों सहित उनके  खा रहे हैं तो उन्होंने एक बड़ा फैसला लिया कि वो यूरोप यूनियन में अब नहीं रहेंगे !तो इस फैसले से ndtv के रविश कुमार जैसे पत्रकारों को बहुत बुरा लगा क्योंकि अगर ये बात भारत में उठ गयी तो उनके मुताबिक "दक्षिण-पंथी वामपंथियों और छद्म-सेकुलरों "की दुकानदार कंही बंद  दें ! इसीलिए वो "प्राइम-टाइम"गलत फैसला और मुर्ख अंग्रेज की माला सी जपते दिखाई दे रहे थे !ग्लोबल व्यपार की वकालत कर रहे थे ! अगर उनके घर में  उनके साधनों में 10 20 %का हिस्सा मिलाकर वो कहें की रविश का घर सबका है किसी के बाप का नहीं तो उनकी क्या हालत होगी ?
                    अंत में नतीजा ये निकल रहा है की आज भारत में कोई भी अपना काम ईमानदारी से नहीं कर रहा !मूल्यों-सिद्धांतों पर चलना तो ख्वाबों बातें हो गयी हैं जी आज ! इसीलिए मेरी भारत के प्रधान-न्यायाधीश जी से ये करबद्ध प्रार्थना है की वो एक-एक को लंबा डाल कर उसका नार्को टेस्ट करवाएं और जो तथ्य निकलें उनपर कार्यवाही करके पर्याप्त दण्ड देवें !
जय - भारत !!! जय - हिन्द !!
  1.  रोजाना पढ़ें " 5th pillar corrouption killer "
  2. www.pitamberduttsharma.blogspot.com.




Wednesday, June 8, 2016

मेरे ट्वीट आपके लिए हाज़िर हैं !


  1. दिल्ली में युवाओं के नशे के बारे में क्यों चिन्तित नहीं हैं ये केजरीवाल जैसे नकसली लोग !!??
  2. "बुद्धा इन ट्रेफिक जाम"नामक फिल्म के jnu में प्रदर्शन नहीं होने देते वक़्त ये "अभिव्यक्ति की आज़ादी"वाले सब कहाँ "सो"रहे थे ?
  3. क्याफिल्मों में गंदेडायलॉग,गाने औरकहानियों सेही समस्याएं बताई जासकती है?अच्छे शब्दों काप्रयोग ज्ञानीजन ही करसकते हैं !दाऊद के गुर्गे नहीं?
  4. अच्छी फिल्म इंडस्ट्रीज में बुरे लोग और बुरा पैसा भी व्यापक रूपमें बरसों से हैतो ऐसों की "निष्ठा"क्यों ना चैक करी जाए ?डरना तो आपको पड़ेगा !
  5. Sonia Gandhi Christian conversion yojana..............

  6. टीवी चैनलों पर"स्तरहीन"बहसों का दौर मन को भटकाने लगता है,बोर हो जातेहैं!पैनल में शामिल लोग,प्रवक्ता भी निचले स्तर के होते हैं !विषय भी....?
  7. 5TH Pillar Corruption Killer: पिछले दरवाजे से सियासी लूट का लोकतंत्र .....??????...
  8. स्विट्जरलैंड के निवासियों से भारतीयों को भी कुछ सीखना चाहिए !उन्होंने बेरोजगारी भत्ते में हज़ारों रूपये हर महीने लेना अस्वीकार कर दिया !!
  9. कोई भी विषय चाहे क्यों ना हो ?जनता और कार्यकर्ताओं को तो बस नेताओं का भाषण ही सुनना पड़ेगा !हे भगवान् !हमें बचाओ !!इस भाषण नामक बीमारी से !
  10. मोदी सरकार भी अगर दुसरे राजनीतिक दलों कीतरह अपने नेताओं को बचाने हेतु "जांचें"ही करवाएगी तोफिर उनमे-हममे अंतरही क्या?समय सीमा क्यों नहीं ?
  11. हे विष्णु जी !!आप हर युग में एक-दो पापियों का वद्ध करके भगवान् बने फिरते हो ?मैं आपको तब मानूं जब आप भारत को "नेताओं"से मुक्त करा पाओ !!








अंग्रेजी सभ्यता के समर्थकों पहले भारत की संस्कृति-सभ्यता को जानो फिर बोलो-लिखो !!भारत आपका भी है !"5th पिल्लर करप्शन किल्लर"वो ब्लॉग जिसे आप रोज़ाना पढ़ना,बाँटना और अपने अमूल्य कॉमेंट्स देना चाहेंगे !
लिंक- www.pitamberduttsharma.blogspot.com.!









"मेरी राजस्थान के आगामी विधानसभा चुनाव लड़ने हेतु आरम्भ हुई "चुनाव-अभियान यात्रा"सूरतगढ़ विधानसभा क्षेत्र हेतु !! आपका साथ आवश्यक है !

मुझे राजस्थान का अगला विधानसभा चुनाव सूरतगढ़ विधानसभा से लड़ना होगा ,क्योंकि जनता भाजपा से रूठकर वापिस कांग्रेस के पास ना जा पाए !मुझे य...