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Showing posts from August, 2016

"कारोबार !! समस्याओं का" !!? - पीताम्बर दत्त शर्मा (लेखक-विश्लेषक) मो.न. +9414657511

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जी हाँ , मित्रो !! आप बिलकुल सही पढ़ रहे हैं ! जहां आजकल हर उस कारोबार में भारी मन्दी छायी हुई है जो पूर्व में प्रचलित हैं ! लेकिन एक नया कारोबार बहुत बढ़िया चल निकल है जिसका नाम है , "समस्या"पैदा करो और अपनी "रोटी"कमाओ ! "आधुनिकता और स्वार्थ " की देन है,ये आज का  नया व्यवसाय !!जो जितना "कमीना" होगा वो उतना  ज्यादा फायदा इसमें उठाएगा "जी"! इस कारोबार को पहले अफसरों ने अपनाया,फिर ये "धंधा"नेताओं और ठेकेदारों के पास पहुंचा और अब ये हर चतुर और ढीठ आदमी का मन-पसन्द व्यपार है !
               माननीय केजरीवाल जी एवम उनके सहयोगी इस धंधे के गोल्ड मेडलिस्ट हैं ,झूठे समाजसेवी संगठन और आधुनिक क्लासिफाइड पत्रकार भी इस कार्य में निपुण हैं "जी" !!आप ज़रा भारत में पिछले 10 वर्षों से घट रहे "घटनाक्रमों"की और ध्यान दीजिये ! तो आप पाएंगे कि हर सप्ताह देश में कोई ना कोई ऐसा "घट"जाता है जो "असम्भव"सा लगता है ,लेकिन हमारा मीडिया उसे अपनी आमदनी अनुसार उसे इतना "खेंचता"है कि मानों विश्व में उसके सिवा…

अधरं मधुरं वदनं मधुरं नयनं मधुरं हसितं मधुरम् ........।

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अधरं मधुरं वदनं मधुरं नयनं मधुरं हसितं मधुरम् ।
हृदयं मधुरं गमनं मधुरं मधुराधिपतेरखिलं मधुरम् ॥१॥
(हे कृष्ण !) आपके होंठ मधुर हैं, आपका मुख मधुर है, आपकी ऑंखें मधुर हैं, आपकी मुस्कान मधुर है, आपका हृदय मधुर है, आपकी चाल मधुर है, मधुरता के ईश हे श्रीकृष्ण! आपका सब कुछ मधुर है ॥१॥ 

वचनं मधुरं चरितं मधुरं वसनं मधुरं वलितं मधुरम् ।
चलितं मधुरं भ्रमितं मधुरं मधुराधिपतेरखिलं मधुरम् ॥२॥आपका बोलना मधुर है, आपके चरित्र मधुर हैं, आपके वस्त्र मधुर हैं, आपका तिरछा खड़ा होना मधुर है, आपका चलना मधुर है, आपका घूमना मधुर है, मधुरता के ईश हे श्रीकृष्ण! आपका सब कुछ मधुर है ॥२॥ 

वेणुर्मधुरो रेणुर्मधुरः पाणिर्मधुरः पादौ मधुरौ ।
नृत्यं मधुरं सख्यं मधुरं मधुराधिपतेरखिलं मधुरम् ॥३॥आपकी बांसुरी मधुर है, आपके लगाये हुए पुष्प मधुर हैं, आपके हाथ मधुर हैं, आपके चरण मधुर हैं , आपका नृत्य मधुर है, आपकी मित्रता मधुर है, मधुरता के ईश हे श्रीकृष्ण! आपका सब कुछ मधुर है।

गीतं मधुरं पीतं मधुरं भुक्तं मधुरं सुप्तं मधुरम् ।
रूपं मधुरं तिलकं मधुरं मधुराधिपतेरखिलं मधुरम् ॥४॥
आपके गीत मधुर हैं, आपका पीना मधुर है, आपका खाना मधुर है, आ…

"सकरात्मक सोच वाला बनना चाहता हूँ लेकिन "...... ???

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रिश्तेदार,दोस्त,पडोसी,अफसर,पोलिस,न्याय-व्यवस्था वाले,शिक्षक,सन्त,महिलाएं,पुरुष और  नेता गन इतने "तेज़"हो गए हैं कि मैं चाहते हुए भी सकरात्मक सोच वाला बन नहीं पा रहा हूँ ! सच मानिये मित्रो ! मैं हर सुबह को सूर्य भगवान से हाथ जोड़ कर प्रार्थना करता हूँ कि हे साक्षात देवता ! सत्य के प्रतीक दिनकर जी ! कृपा करके आज से मुझे उन व्यक्तियों से ही मिलवाइए जो विश्वास पात्र हों !ताकि मैं "सकरात्मक"सोच के साथ अपना जीवन व्यतीत कर सकूं !
                                लेकिन कुछ ना कुछ ऐसा घट ही जाता है जिसके कारण से मैं नाकारात्मक सोच वाला फिर से हो जाता हूँ !शायद मेरे मन-मस्तिष्क में ही कुछ कमी होगी ऐसा सोच कर मैं हर रात्रि को सो जाता हूँ !लेकिन जैसे ही मैं प्रातः समाचार पत्र पढ़ना शुरू करता हूँ , वैसे ही आभास होने लगता है कि "ये दुनिया,ये महफ़िल मेरे काम की नहीं ....मेरे काम की नहीं !!!अब मनुष्य एक सामाजिक प्राणी है मित्रो ! अकेला तो जीवन व्यतीत कर नहीं सकता ना !इसलिए चाहे कोई जैसा भी है उसे रहना तो इसी व्यवस्था में है ना !ना जाने कितने आधुनिक सोच वाले  पढ़े-लिखे विशेषज्ञ आदि आ…

दे सलामी इस तिरंगे को जिस से तेरी शान हैं !! -पीताम्बर दत्त शर्मा (लेखक-विश्लेषक)

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मुकम्मल है इबादत और मैं वतन ईमान रखता हूँ,
वतन के शान की खातिर हथेली पे जान रखता हूँ !!
क्यु पढ़ते हो मेरी आँखों में नक्शा पाकिस्तान का ,
मुस्लमान ..हूँ मैं सच्चा, दिल में हिंदुस्तान रखता हूँ !!

हिंदुस्तान ज़िंदाबाद, ...जय हिन्द, जय भारत
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संस्कार और संस्कृति की शान मिले ऐसे,
हिन्दू मुस्लिम और हिंदुस्तान मिले ऐसे
हम मिलजुल के रहे ऐसे की
मंदिर में अल्लाह और मस्जिद... में राम मिले जैसे.


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दे सलामी इस तिरंगे को
जिस से तेरी शान हैं,
सर हमेशा ऊँचा रखना इसका
जब तक दिल में जान हैं....
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गंगा यमुना यहाँ नर्मदा,
मंदिर मस्जिद के संग गिरजा,
शांति प्रेम की देता.. शिक्षा,
मेरा भारत सदा सर्वदा.
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ज़माने भर में मिलते हे आशिक कई ,
मगर वतन से खूबसूरत ...कोई सनम नहीं होता ,
नोटों में भी लिपट कर, सोने में सिमटकर मरे हे कई ,
मगर तिरंगे से खूबसूरत कोई कफ़न नहीं होता


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मैं भारत बरस का हरदम... अमित सम्मान करता हूँ
यहाँ की चांदनी मिट्टी का ही गुणगान करता हूँ,
मुझे चिंता नहीं है स्वर्ग जाक…

"कली को छोड़ो,काश्मीर के काँटों की ओर ध्यान दो"! - पीताम्बर दत्त शर्मा (लेखक-विश्लेषक) मो.न. +9414657511

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आज संसद में काश्मीर पर चर्चा हो रही है ! इसके द्वारा विपक्ष के वो नेता अपना महत्व विश्व के सामने बढ़वाना चाहते हैं जिनको भारत की जनता ने नकार दिया है ! कोई कह रहा है कि मेरे मुख्यमंत्री रहते हुए काश्मीर में इतना काम हुआ तो कोई पूर्व प्रधानमंत्रियों मनमोहन सिंह और अटल जी के कार्यों को याद कर रहा था !लेकिन किसी भी विपक्षी नेता ने यह नहीं बताया कि सर्वदलीय कमेटियों के सुझावों को upa सरकार पूरा क्यों नहीं कर पायी ?ये नेता अब एकबार फिर से उग्रवादियों से बातचीत की मांग उठाना चाह रहे हैं ताकि मौजूदा सरकार भी उन्हीं उलझनों में फंस कर रह जाए जिनमे पूर्व सरकारें फंसी रहीं !
                  कोंग्रेस और बहुजन समाजवादी पार्टी के सांसद तो अपनी रोटियां सेकते ही नज़र आये उनको समस्या से कोई सरोकार या गंभीरता से लेने की ज़रूरत महसूस नहीं हुई ऐसा उनके भाषणों से मुझे लगा !काश्मीर से आये हुए सांसदों ने समस्या की गहराइयों में जाने का  किया लेकिन कोई पुख्ता हल वो भी नहीं सूझा पाए !सभी दल केवल प्लेटगन को बन्द करवाने,अलगाववादियों से बात करने पत्थरबाज़ युवाओं हेतु करोड़ों का बजट देने की बात करते ही दिखाई दिए …

"वो लाये थे , तूफ़ान से कश्ती , निकाल के "... !! - पीताम्बर दत्त शर्मा (लेखक-विश्लेषक) मो.न. +9414657511

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सन 1857 के मंगल पांडे से लेकर महात्मा गांधी तक ना जाने कितने लोगों के दिलो-दिमाग पर भारत माता के रूप में छायी हुई थी ! किसी ने उग्र संघर्ष से तो किसी ने अपने शान्ति से असहयोग करके अपनी भारत माता को अंग्रेजों की जंजीरों से मुक्त करवाया था !ऐसे जांबाज़ देश भक्तों की संख्या लाखों में थी , लेकिन आज हम मात्र 20-50 लोगों के  ही जानते हैं !बाकियों को हमने अपने राजनितिक दलों के नेताओं की संकीर्ण सोच के कारण याद  रख पाए हैं !चाचा नेहरू जी और शास्त्री जी के शासन तलक तो 5000 शहीदों का रिकार्ड हमारी सरकार के पास था ! आज भी इंडिया गेट पर उनके नाम अंकित हैं !लेकिन उसके बाद हमारे नेताओं ने शहीदों को भी अपनी  लिया !क्योंकि इस देश पर ज्यादा कोंग्रेस ने शासन किया इसीलिए आज देश केवल कोंग्रेसी देश भक्तों के बारे में ज्यादा जानता है !
                                    आज देश के कई प्रदेशों को भी इन नेताओं ने अपनी जागीर मान लिया है ! उत्तर प्रदेश को मायावती और मुलायम जी ने ,बिहार को लालू और नितीश जी ने ,पंजाब को बादल साहिब ने,उड़ीसा को नवीन पटनायक जी ने और ऐसे ही बहन ममता , कॉमरेड, जयललिता,और चँद्रबाबू ना…

बुलंदशहर बलात्कार कांड को यह ‘मौन समर्थन’ क्यों! ??वरिष्ठ पत्रकार विकास मिश्रा - :साभार -सधन्यवाद !

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डेढ़ दशक पुरानी बात है। अमर उजाला मेरठ में उपसंपादक ने एक खबर संपादित की। हेडिंग लगाई- दलित लड़की से बलात्कार। संपादक जी ने पूछा-इस हेडिंग का क्या मतलब है। उपसंपादक ने कहा-सर, इसमें गलत क्या है। संपादक बोले-क्या बलात्कार की वजह लड़की का दलित होना है। उपसंपादक बोला- जी सर, किस साले में दम है जो ब्राह्मण-ठाकुर की बेटी की तरफ आंख उठाकर भी देखे। संपादक जी मौन हो गए। ये नजीर मैंने जानबूझकर रखी है। शुरू में ही कहा कि ये घटना डेढ़ दशक से ज्यादा पुरानी है। तबसे बहुत कुछ बदला है देश में। तबसे यूपी में बीजेपी की एक, बीएसपी की एक सरकार चली गई और समाजवादी पार्टी की दूसरी सरकार चल रही है। बहरहाल अभी समाज इस सवाल का जवाब देने में उलझा है कि ‘आतंकवादियों का कोई धर्म नहीं होता’ । तो क्या बलात्कारियों की कोई जाति होती है, कोई धर्म होता है..? मेरी राय में तो बलात्कारियों की कोई जाति नहीं होती, कोई धर्म नहीं होता, लेकिन बलात्कार पर समाज कैसे रिएक्ट करेगा, जब ये देखता हूं तो लगता है कि बलात्कारियों की हो न हो, लेकिन बलात्कार के शिकारों की जाति जरूर होती है।

बुलंदशहर में नेशनल हाइवे 91 पर की 29 जुलाई की रा…

"कैसे कैसे काम करने लग गए हैं हमारे राजनीतिज्ञ "?- पीताम्बर दत्त शर्मा (लेखक-विश्लेषक) मो.न. +9414657511

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परिवर्तन इन्सान की ही नहीं बल्कि प्रकृति के भी स्वभाव में है !जो अपने अंदर समय एवं परस्थितियों के अनुसार परिवर्तन नहीं ला पाता वह एक ठहरे हुए बदबूदार तालाब की भाँती है !जिस प्रकार ज़मीन पर पड़ा हुआ पत्थर किसी को ठोकर लगने के काम तो आ सकता है ,लेकिन कोई भला नहीं कर सकता ! उसी  प्रकार मनुष्य को भी गतिमान और परिवर्तन शील होना आवश्यक है !लेकिन अगर यही परिवर्तन गलत दिशा में होने लगे तो परिणाम भयंकर रूप ले सकते हैं !हमारे राजनेता , जिनके आचरण को देख समझ कर देशवासी अपने विचार एवं भावनाएं निर्धारित कर अपने जीवन के लक्ष्य को प्राप्त करते हैं !उनको तो हर कदम सोच समझ कर ही उठाना चाहिए !उनको अपनी वाणी पर भी संयम रखना आवश्यक है !
                           मोदी जी की नयी सरकार बनी तो जनता की अपेक्षाएं भी आसमान छूने लगीं !अब जब दो वर्ष इस सरकार को हो गए हैं तो विपक्षी दल तो मौके की फ़िराक में रहते हैं क्योंकि उनका  काम है , लेकिन भारत की जनता भी अब मन ही मन मोदी सरकार के मंत्रियों,राज्यसरकारों के कामों को तोलने लगी है !भाजपा के  पैतृक संगठन RSS के क्रियाकलापों को भी देखा और समझा जा रहा है !हर भारतवा…