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Showing posts from September, 2016

"अखियों"से नहीं बातों से गोली मारे नेता हमार ! - पीताम्बर दत्त शर्मा (लेखक-विश्लेषक)मो.न. +9414657511

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पाकिस्तान के खिलाफ जब जनता गोली का जवाब गोली से चाहती है तो हमारे विपक्षी और सरकारी नेता केवल बातों से ही गोलियां चला कर अपना काम निकाल रहे हैं !और उस पर तुर्रा ये कि हम सब उनको "समझदार" भी कहें !नेता जी !!"उल्लू ना बनायिंग"!!
                        "पुत्तर-प्रदेश"में मुलायम नेता जी से जब पार्टी नहीं चली और पुत्तर अखिलेश से सरकार नहीं चली तो पहले तो नेता जी ने शिवपाल और अखिलेश जी को स्वयं धमकाया , जब काम नहीं बनता दिखा तो लड़ाई-मार कुटाई से भरपूर एक ड्रामा भी किया गया !सबको दोबारा से "सेट"करने के बाद नेता जी ने अपने "अमर सिंह"को पार्टी का राष्ट्रिय महासचिव बनाकर सबको चौन्का दिया ! उन्होंने अमर सिंह को प्यार और लाड से उनकी छिपी हुई शक्तियों के बारे में बताया जैसे रामायण में हनुमान जी को उनकी शक्तियां याद करवाई गयीं थीं !वे बोले हे अमर सिंह -:
                     उठ सुस्ती छोड़ !खटिया उठा राहुल की !खुद को"मुलायम"बना !कोई चक्कर चला !जोड़कर तोड़कर !पनघट देख लार संभाल !मुखोटा लगा मौका ताड़ !चूक मत ! साइकिल उठा !! कोई करतब दिखा !सत…

"पाक"से युद्ध चाहने वाले देश भक्त हैं या नहीं चाहने वाले ?? - पीताम्बर दत्त शर्मा (लेखक-विश्लेषक) मो.न. - +9414657511

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56"का सीना जो आजकल नापने वाले लोग हैं,उनके चाल,चेहरे और चरित्र की परीक्षा-समीक्षा शायद ही किसी पुरूस्कार वापिस करने वाले लेखकों, असहिष्णु बताने वाले अभिनेताओं,कामरेडों और समझदार दिखाई देने वाले पत्रकारों ने करने की कोशिश करि हो !कोशिश इसलिए लिख रहा हूँ क्योंकि ऐसा करने का "दम" तो कभी उनमें था ही नहीं !
                    जब से ये पकिस्तान नाम का देश पैदा हुआ है तभी से इसने हमें ना केवल परेशान किया है बल्कि पूरा-पूरा नुक्सान पहुँचाया है !इसीलिए भारत की जनता ने तो हर उस निर्णय का समर्थन ही किया है, जो इस निकम्मे पडोसी को सबक सिखाने वाला हो ! वो निर्णय चाहे पंडित जवाहर लाल नेहरू ,लाल बहादुर शास्त्री या फिर इंदिरा गांधी जी ने ही क्यों ना लिया हो !ना किसी ने पार्टी देखी और ना ही किसी ने अपना धर्म देखा ! लेकिन बड़े ही अफ़सोस के साथ ये कहना पड़ता है कि भारत में रहने वाले कुछ अफसर,नेता,अभिनेता,बौद्धिक लोगों ने चाहे अनचाहे , सीधे तरीके से या अनैतिक तरीके से पाकिस्तान का धन खाया हुआ है ,  उनकी कोई करतूतें पाकिस्तान के शरारती प्रशासक के पास रिकार्ड पड़ी हैं, जो वो ही कहते बोलते सु…

"मोदी जी !सख्त कदम उठाने से पहले विपक्षियों से लिखित में समर्थन ले लेना "!- पीताम्बर दत्त शर्मा (लेखक-विश्लेषक) मो.न. + 9414657511

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भारत की भावुक जनता,मीडिया और नेता आज भी और जब भी पहले कभी भारत के जवान शहीद हो जाते हैं ,तब कड़ी कार्यवाही करने हेतु बड़े जोर-शोर से कहने लगते हैं लेकिन जैसे-जैसे दिन बीतने लगते हैं वैसे-वैसे तथाकथित "विश्लेषक और विशेषज्ञ"लोग संभावित कठोर कार्यवाही के "साईड-इफेक्ट"बताने लगते हैं और विपक्षी नेता उनकी आड़ में सरकार को चेताने भी लगते हैं !अपना समर्थन देते वक़्त बड़े अगर-मगर लगाने लग जाते हैं ! इसीलिए हमारे अटल जी बॉर्डर पर फौजें भेजकर भी  हमला नहीं कर पाए थे जब संसद पर हमला किया गया था !आज भी हमारे देश में ना जाने कौन कौन से "भेष" में पाकिस्तान के समर्थक छिपे बैठे हैं ! इसलिए मैं भारत के लोकप्रिय प्रधानमंत्री जी को सचेत करना चाहता हूँ कि  "मोदी जी !सख्त कदम उठाने से पहले विपक्षियों से लिखित में समर्थन ले लेना "!युद्ध के इलावा जो भी विकल्प हों उनको अवश्य अपनाकर देख लिया जाना चाहिए ! जैसे "हुक्का-पानी बन्द कर देना"!बाकि आप समझदार हो जी !
                      मेरी मित्र लेखिका श्रीमती साधना वैद जी ने प्रधानमंत्री जी से एक मार्मिक अपील आज की …

राजनीतिक सत्ता में समाया भारत का लोकतंत्र !!

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राजनीतिक सत्ता में देश की जान है तो ये देश के लोकतंत्र का राजनीतिक सच है। जहां संसद में लोकसभा और राज्यसभा के कुल सदस्य 786 हैं। तो देश में विधायकों की तादाद 4120 है। देश में 633 जिला पंचायतों के कुल 15 हजार 581 सदस्य हैं। तो ढाई लाख ग्राम सभा में करीब 26 लाख सदस्य हैं। यानी सवा सौ करोड़ के देश को चलाने वाले यही लोग है, जिनकी तादाद मिला दी जाये ये ये 26,20,487 है। और इससे सौ गुना ज्यादा यानी 36 करोड 22 लाख, 96 हजारलोग गरीबी की रेखा से नीचे हैं। जो उन्हीं गांव, उन्हीं शहरों में रहते हैं जिन गांवों से जिला और शहर दर शहर से लेकर दिल्ली की संसद में बैठने के लिये हर सीट पर औसतन 10 से बारह लोग चुनाव लड़ने के लिये मैदान में उतरते ही हैं। यानी जितने लोग राजनीतिक तौर पर सक्रिय होते है, उनकी तादाद करीब तीन करोड़ 20 लाख तक होती है। और हर चुनाव लड़ने वाले के पीछे अगर दो लोग भी मान लिये जाये तो करीब साढे छह करोड़ लोगों की रुचि राजनीतिक सत्ता पाने की होड़ में जुटने की होती है। यानी देश के लोकतंत्र का दो ही सच है। एक तरफ राजनीतिक सत्ता पाने की होड में सक्रिय छह करोड़ लोगों से चुनाव के वक्त पैदा होने…

"जल हेतु जलाया जायेगा हमारा भारत"!क्यों ? - पीताम्बर शर्मा (लेखक-विश्लेषक) + 9414657511

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मित्रो ! हमारे भारतीय संविधान में ये स्पष्ट रूप से लिखा गया है कि जितने भी खनिज पदार्थ हमारी धरती के गर्भ में हैं , जितने भी और जीवन स्रोत हैं , सब पर पूरे देश के वासियों का अधिकार है ! और तो और हमारे भारत के अंदर जो भी चीज़ है चल-अचल,जीवित या बेजान सब पर पहला हक़ हमारी भारत सरकार का है !
                                    लेकिन हमारे देश के राजनेता अपने स्वार्थ सिद्धि हेतु हर कायदा-कानून तोड़ने से ज़रा सा गुरेज़ भी नहीं करते !अभी हाल ही में उपद्रवियों ने कर्नाटक में करोड़ों का नुक्सान कर दिया जबकि पानी के बंटवारे हेतु सर्वोच्च-न्यायालय ने स्पष्ट निर्णय दे रक्खा है !देश में सक्रिय देशद्रोही जो हमारे बीच में ही छिपे हुए रहते हैं !वो इसी तरह के मौकों की ताक में रहते हैं !उनका भरण-पोषण विदेशी ताकतों के धन से पनप रहे कुछ समाजसेवी संगठनों और भ्रष्ट नेताओं द्वारा किया जाता है ! ये सब बेहद शर्मनाक कार्य है !
                              पिछले कुछ दिनों से पंजाब के टीवी चेनलों पर पानी पर ऐसे ही भड़काने वाले विज्ञापन भी दिखाए जा रहे हैं !उन्हें ना तो राज्य सरकार बन्द करवा रही है और ना ही केंद्…

क्या हिन्दू धर्म में जाती प्रथा सही है ?| जानिये क्यों ????

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पहले हम जानते हैं इसके बारे में अंग्रेजों द्वारा फैलाई गयी आम धारणा क्या है वह यह है के हिन्दू समाज से मनुस्मृति में लिखा है ४ तरह की जाती होती हैं ब्राह्मण , क्षत्रिय , वैश्य , शुद्र इनमे ब्रह्मा जी के सिर से ब्राह्मण , छाती ,बाजुओं से क्षत्रिय , पेट से वैश्य तथा पैरों से शुद्र पैदा हुए हैं और हिन्दू धर्म में शूद्रों पर सदियों से बहुत अत्याचार हुए हैं और उन्हें पढने भी नहीं दिया गया और गुलाम बनाकर रखा गया इसलिए अब इन्हें आरक्षण दे दिया गया ताकि ये अत्याचार का बदला ले सकें | संक्षिप्त भाषा में यही अधिकतर भारतीय भी आज समझते हैं जो मेकाले की शिक्षा पद्दति से पढ़े हुए हैं पर सच क्या है आइये जानते हैं :-
सबसे पहली बात जाती और वर्ण दो अलग अलग चीजे हैं जातियां वर्णों में आती हैं जैसे की कुम्हार , सुतार , बढ़इ, लोहार , नाइ, धोबी , पंडित आदि कई जातियां हैं तथा वर्ण चार हैं ब्राह्मण , क्षत्रिय , वैश्य , शुद्र अब जिन मूर्खों ने इन्हें जाति या कास्ट कहा , वो यहीं गलत साबित हो गए | अगली बात ये चार वर्ण हर देश हर समाज में होते हैं और इन्ही से समाज चलता है ये सिर्फ हिन्दुओं में नहीं हैं सब जगह हैं, …

"अच्छा !! तो"आप" ऐसे थे"!!??- पीताम्बर दत्त शर्मा (लेखक-विश्लेषक)मो.न. +9414657511

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सच्च बात है केजरीवाल जी !"किसी के माथे पर नहीं लिखा होता कि कौन चोर है और कौन शरीफ ! आप कह रहे हो कि हमने तीन स्तर पर जांच करवाकर ही टिकट दी थी !क्या पता वो मंत्री बनने के बाद बुरा बन गया हो" !क्या आप अपनी "वो"जांच रिपोर्ट"जनता के सामने प्रस्तुत कर सकते हैं ? आप कहते हैं संदीप कुमार को मैंने आधे घण्टे में हटा दिया, लेकिन वो कहते हैं कि "मैंने नैतिकता के आधार पर त्याग-पत्र दिया है ! उनका तो ये भी कहना है कि दलित होने के कारण उन पर ये षड्यन्त्र से भरा हमला हुआ है"!कहाँ हैं आज देश के तथाकथित "दलित रक्षक"? वो कब संदीप कुमार बाल्मीकि के घर जाकर अपनी संवेदनाएं और दस-बीस लाख रुपया देंगे ?केजरीवाल जी की महिला अधिकारों से लड़ने वाली स्वाति मालीवाल, कन्हिया कुमार राहुल गांधी ,बरखा दत्त,अभय दूबे,रविश कुमार,अंजना,पूण्य प्रसुन वाजपेयी और स्वयम केजरीवाल जैसे छिपे हुए कॉमरेड क्यों नहीं एक दलित को बचाने हेतु आगे आ रहे ?
           संजय सिंह ने तो और भी ज्यादा हद्द क्र दी जब उन्होंने अटल जी को भी नहीं बक्शा अभद्र टिप्पणी करने से !कुल छह मंत्रियों में से तीन …