Saturday, May 16, 2020

"हाँ .. ! इक बुद्धिमान नेता चाहिए .....! भारतीय विपक्ष के लिए !! - पीताम्बर दत्त शर्मा { लेखक-विश्लेषक } मो. न. - 9414657511


स्वस्थ लोकतंत्र का ये पहला नियम है कि विपक्ष समझदार,निस्वार्थी,राष्ट्रभक्त और मजबूत होना चहिये !लेकिन भारत का दुर्भाग्य है जब से सत्ता मोदी जी के हाथ आयी है तभी से कम अनुभवी कांग्रेस विपक्ष में बैठी है ,जो ज्यादातर सत्ता में या तो स्वयं रही है या फिर इस पर "आश्रित"छोटी और प्रादेशिक पार्टियां सत्ता में रही हैं ! कांग्रेस ने उनको तब तलक ही अपना समर्थन दिया जब तलक कांग्रेस स्वयं सत्ता पाने के काबिल नहीं होती थी !इस दौरान खुलकर सोदेबाजियां हुईं ,ब्लैकमेलिंग हुई और भारत के संविधान के साथ "खेला" गया ! मंडल आयोग की सिफारशें लागू करके एक किसान नेता को पटखनी दी गयी ,चाहे सारा देश टुकड़े टुकड़े क्यों न हो गया हो !!आजादी के समय अवश्य कांग्रेस में समझदार नेता थे !धीरे धीरे कांग्रेस में तानाशाही बढ़ती गयी,केवल गाँधी परिवार का ही वर्चस्व रहने के कारन समय समय पर "समझदार" नेता कांग्रेस से अलग होने लगे ! उन्होंने अपने अलग राजनीतिक दल बना लिए ! लेकिन वे ज्यादातर समय कांग्रेस पर ही आश्रित रहे ,अपनी पैठ में नहीं बना पाए !
                          कई बार इन्होने इकट्ठे होकर मोर्चे भी बनाना चाहे,लेकिन स्वार्थ इन पर भारी पड़ा और लालच वश ये विपक्षी नेता सत्ता हासिल नहीं कर सके !आज भी भारत का विपक्ष न केवल बिखरा हुआ है बल्कि दिशाहीन और निरुद्देश्य भी है ! इसीलिए आज का भारतीय विपक्ष देश के दुश्मन देशों के हाथों में खेलता दिखाई पद रहा है !सभी विपक्षी नेता अपना मान और आभा खो चुके हैं !भारत की जनता को इन पर रत्ती भर भी विश्वास नहीं रहा !कांग्रेस के पास गाँधी परिवार के बाद कोई दूसरा ऑप्शन नहीं है !भूतकाल में नरसिम्हाराव और सीताराम केसरी पर "दाव " खेला गया लेकिन उन्होंने गाँधी परिवार को ही किनारे करने के प्रयास किये ! बड़ी मुश्किल से गाँधी परिवार के पास वापिस कांग्रेस का कंट्रोल सोनिया के हाथ में आया !सत्ता भी मिली ,यकीन विदेश नागरिक होने की वजह से वे प्रधानमंत्री नहीं बन पायीं तो उन्होंने विश्वासपात्र मनमोहन सिंह को चुना ! लेकिन मनमोहन के शासन में हर कोई घोटाले करने लगा तो जनता ने उनको भी बड़ी बुरी तरह सत्ता से उतार फेंका ! 
                         सदन में उनको विपक्ष का नेता बनने लायक भी सीटें नहीं मिलीं !विपक्ष धराशायी हो गया !तो मोदी जी भारत के दोबारा प्रधानमंत्री चुने गए !देश को हर दृष्टि से "मजबूत"बनाने हेतु वे और उनके कुछ साथी पूरी ईमानदारी और निष्ठां से लगे हुए हैं !वहीँ एन  डी  ए और भाजपा के लोग उनका साथ नहीं दे रहे !देश की अफसरशाही भी मनमानियां करती रहती है ! जिन्हे देखकर ही भारत की जनता बड़ी व्याकुल है !जनता चाहती है कि संसद में व बाहर विपक्ष समझदारी से काम करे ! जनहित के मुद्दे उठाये ,राष्ट्रहित के विषयों पर विपक्ष सरकार का सहयोग करे और मजबूती दिखाए ताकि दुश्मन देश कोई गलत कदम न उठा सकें !
                       लेकिन बड़े ही दुक्ख के साथ ये कहना पड़ता है कि कांग्रेस राहुल गाँधी और प्रियंका गाँधी को स्थापित नहीं कर पायी है ! अगर भारत का मीडिया इनका दो महीने "सहयोग"न करे तो इनको आज भी भारत का आम आदमी पहचान ही न पाएगा !गाँधी परिवार सहित लगभग सारा विपक्ष आज मनघडंत आरोप लगाकर जनता में भ्रम फैला रहा है और भड़काने का काम कर रहा है !जिसका पूरा फायदा दुश्मन उठा रहा है !दुश्मन देशों ने आज भारत में अपने "पक्के ठिकाने और एजेंट"बना लिया हैं ! जो आज हमें भारत की गलियों में नजर भी आ रहे हैं !भारत के टुकड़े होते दिखाई दे रहे हैं !
                          मेरी सभी निष्ठवान,देशभक्त और निस्वार्थी नए विपक्षी नेताओं से अनुरोध है कि अपनी अपनी पार्टियों में आगे आएं ,नेतृत्व संभालें और भारत को तरक्की के रस्ते पर आगे लेकर जाएँ !ताकि हमारा भारत मोदी जी के शासन में एक बार फिर "विश्व शक्ति" बन सके !भारत की जनता जुआब भी जिस भी स्तर हेतु अपना मतदान करे तो पूरा सोच समझकर ही करे ! किसी लांच में न फंसे ! शुभकामनाओं सहित !


"5th पिल्लर करप्शन किल्लर" "लेखक-विश्लेषक पीताम्बर दत्त शर्मा "
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