Monday, January 15, 2018


अभिषेक मनु सिंघवी का हाथ जैसे ही उस अर्द्धनग्न महिला के कमर के उपर पहुँचा ,  महिला ने बड़ी अदा व बड़े प्यार से पूछा - "जज कब बना रहे हो ?..... बोलो ना डियर , जज कब बना रहे हो..???"

अब साहब ने जो भी उत्तर(?) दिया था वह सम्पूर्ण प्रसंग उस सेक्स-सीडी में रिकॉर्ड हो गया .....और यही सीडी कांग्रेस के उस बड़े नेता और सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ वकील अभिषेक मनु सिंघवी के राजनीतिक पतन का कारण बनी ! परन्तु बेशर्म सिंघवी आज भी कोर्टों में शान से पेश होता है और कांग्रेस का प्रवक्ता भी है और कहीं फिर कांग्रेस की सरकार बनी तो जज बनाना शुरू कर देगा।

पिछले 70 सालों से जजों की नियुक्ति में सेक्स , पैसा , ब्लैक मेल एवं दलाली के जरिए जजों को चुना जाता रहा है।

अजीब बिडम्बना है कि हर रोज दुसरों को सुधरने की नसीहत देने वाले लोकतंत्र के दोनों स्तम्भ मीडिया और न्यायपालिका खुद सुधरने को तैयार नही हैं।

जब देश आज़ाद हुआ तब जजों की नियुक्ति के लिए ब्रिटिश काल से चली आ रही " कोलेजियम प्रणाली " भारत सरकार ने अपनाई.... यानी सीनियर जज अपने से छोटे अदालतों के जजों की नियुक्ति करते है। इस कोलेजियम में जज और कुछ वरिष्ठ वकील भी शामिल होते है। जैसे सुप्रीमकोर्ट के जज हाईकोर्ट के जज की नियुक्ति करते है और हाईकोर्ट के जज जिला अदालतों के जजों की नियुक्ति करते है ।

इस प्रणाली में कितना भ्रष्टाचार है वो लोगों ने अभिषेक मनु सिंघवी की सेक्स सीडी में देखा था... अभिषेक मनु सिंघवी सुप्रीमकोर्ट की कोलेजियम के सदस्य थे और उन्हें दिल्ली हाईकोर्ट के लिए जजों की नियुक्ति करने का अधिकार था... उस सेक्स सीडी में वो वरिष्ठ वकील अनुसुइया सालवान को जज बनाने का लालच देकर उसके साथ इलू इलू करते पाए गए थे , वो भी कोर्ट परिसर के ही अपने चैम्बर में।

कलेजियम सिस्टम से कैसे लोगो को जज बनाया जाता है और उसके द्वारा राजनीतिक साजिशें कैसे की जाती है उसके दो उदाहरण देखिये .......

पहला उदाहरण --
किसी भी राज्य के हाईकोर्ट में जज बनने की सिर्फ दो योग्यता होती है... वो भारत का नागरिक हो और 10 साल से किसी हाईकोर्ट में वकालत कर रहा हो .....या किसी राज्य का महाधिवक्ता हो ।

वीरभद्र सिंह जब हिमाचल में मुख्यमंत्री थे तब उन्होंने सारे नियम कायदों को ताक पर रखकर अपनी बेटी अभिलाषा कुमारी को हिमाचल का महाधिवक्ता नियुक्त कर दिया फिर कुछ दिनों बाद सुप्रीमकोर्ट के जजों के कोलेजियम ने उन्हें हाईकोर्ट के जज की नियुक्ति दे दी और उन्हें गुजरात हाईकोर्ट में जज बनाकर भेज दिया गया। 

तब कांग्रेस , गुजरात दंगो के बहाने मोदी को फंसाना चाहती थी और अभिलाषा कुमारी ने जज की हैसियत से कई निर्णय मोदी के खिलाफ दिये ...हालाँकि सुप्रीम कोर्ट ने बाद में उसे बदल दिया था।

दूसरा उदाहरण....
1990 में जब लालूप्रसाद बिहार के मुख्यमंत्री थे तब कट्टरपंथी मुस्लिम आफ़ताब आलम को हाईकोर्ट का जज बनाया गया.... बाद में उन्हे प्रोमोशन देकर सुप्रीमकोर्ट का जज बनाया गया.... उनकी नरेंद्र मोदी से इतनी दुश्मनी थी कि तीस्ता शीतलवाड़ और मुकुल सिन्हा गुजरात के हर मामले को इनकी ही बेंच में अपील करते थे... इन्होने नरेद्र मोदी को फँसाने के लिए अपना एक मिशन बना लिया था।

बाद में आठ रिटायर जजों ने जस्टिस एम बी सोनी की अध्यक्षता में सुप्रीमकोर्ट के चीफ जस्टिस से मिलकर आफ़ताब आलम को गुजरात दंगो के किसी भी मामलो की सुनवाई से दूर रखने की अपील की थी.... जस्टिस सोनी ने आफ़ताब आलम के दिए 12 फैसलों का डिटेल में अध्ययन करके उसे सुप्रीमकोर्ट के चीफ जस्टिस को दिया था और साबित किया था कि आफ़ताब आलम चूँकि मुस्लिम है इसलिए उनके हर फैसले में भेदभाव स्पष्ट नजर आ रहा है। 

फिर सुप्रीमकोर्ट ने जस्टिस आफ़ताब आलम को गुजरात दंगो से किसी भी केस की सुनवाई से दूर कर दिया।

जजों के चुनाव के लिए कोलेजियम प्रणाली के स्थान पर एक नई विशेष प्रणाली की जरूरत महसूस की जा रही थी। जब मोदी की सरकार आई तो तीन महीने बाद ही संविधान का संशोधन ( 99 वाँ संशोधन) करके एक कमीशन बनाया गया जिसका नाम दिया गया National Judicial Appointments Commission (NJAC)

इस कमीशन के तहत कुल छः लोग मिलकर जजों की नियुक्ति कर सकते थे। 
A- इसमें एक सुप्रीम कोर्ट का मुख्य न्यायाधीश ,
B- सुप्रीम कोर्ट के दो सीनियर जज जो मुख्य न्यायाधीश से ठीक नीचे हों , 
C- भारत सरकार का कानून एवं न्याय मंत्री , 
D- और दो ऐसे चयनित व्यक्ति जिसे तीन लोग मिलकर चुनेंगे।( प्रधानमंत्री , मुख्य न्यायाधीश एवं लोकसभा में विपक्ष का नेता) ।

परंतु एक बड़ी बात तब हो गई जब सुप्रीम कोर्ट ने इस कमीशन को रद्द कर दिया , वैसे इसकी उम्मीद भी की जा रही थी। 

इस वाकये को #न्यायपालिका एवं #संसद के बीच टकराव के रूप में देखा जाने लगा ....भारतीय लोकतंत्र पर सुप्रीम कोर्ट के कुठाराघात के रूप में इसे लिया गया।

यह कानून संसद के दोनों सदनों में सर्वसम्मति से पारित किया गया था जिसे 20 राज्यों की विधानसभा ने भी अपनी मंजूरी दी थी।

सुप्रीम कोर्ट यह भूल गया थी कि जिस सरकार ने इस कानून को पारित करवाया है उसे देश की जनता ने पूर्ण बहुमत से चुना है।

सिर्फ चार जज बैठकर करोड़ों लोगों की इच्छाओं का दमन कैसे कर सकते हैं ? 

क्या सुप्रीम कोर्ट इतना ताकतवर हो सकता है कि वह लोकतंत्र में #जनमानस की आकांक्षाओं पर पानी फेर सकता है ?

जब संविधान की खामियों को देश की जनता परिमार्जित कर सकती है तो न्यायपालिका की खामियों को क्यों नहीं कर सकती ? 

यदि NJAC को सुप्रीम कोर्ट असंवैधानिक कह सकता है तो इससे ज्यादा असंवैधानिक तो कोलेजियम सिस्टम है जिसमें ना तो पारदर्शिता है और ना ही #ईमानदारी ?

#कांग्रेसी सरकारों को इस कोलेजियम से कोई दिक्कत नहीं रही क्योंकि उन्हें #पारदर्शिता की आवश्यकता थी ही नहीं।

मोदी सरकार ने एक कोशिश की थी परंतु सुप्रीम कोर्ट ने उस कमीशन को रद्दी की टोकरी में डाल दिया।

#शूचिता एवं #पारदर्शिता का दंभ भरने वाले सुप्रीम कोर्ट को तो यह करना चाहिए था कि इस नये कानून (NJAC) को कुछ समय तक चलने देना चाहिए था...ताकि इसके लाभ हानि का पता चलता , खामियाँ यदि होती तो उसे दूर किया जा सकता था ...परंतु ऐसा नहीं हुआ।

जज अपनी नियुक्ति खुद करे ऐसा विश्व में कहीं नहीं होता है सिवाय भारत के।

क्या कुछ सीनियर #IAS आॅफिसर मिलकर नये IAS की नियुक्ति कर सकते हैं? 

क्या कुछ सीनियर प्रोफेसर मिलकर नये #प्रोफेसर की नियुक्ति कर सकते हैं ? 

यदि नहीं तो जजों की नियुक्ति जजों द्वारा क्यों की जानी चाहिए ?

आज सुप्रीम कोर्ट एक धर्म विशेष का हिमायती बना हुआ है ...
सुप्रीम कोर्ट गौरक्षकों को बैन करता है ...सुप्रीम कोर्ट जल्लीकट्टू को बैन करता है ...सुप्रीम कोर्ट #दही_हांडी के खिलाफ निर्णय देता है ....सुप्रीम कोर्ट दस बजे रात के बाद #डांडिया बंद करवाता है .....सुप्रीम कोर्ट #दीपावली में देर रात पटाखे को बैन करता है।

लेकिन ..
सुप्रीम कोर्ट #आतंकियों की सुनवाई के लिए रात दो बजे अदालत खुलवाता है ....सुप्रीम कोर्ट #पत्थरबाजी को बैन नहीं करता है....सुप्रीम कोर्ट गोमांस खाने वालों पर बैन नहीं लगाता है ....ईद - बकरीद पर पर कुर्बानी को बैन नहीं करता है .....मुस्लिम महिलाओं के शोषण के खिलाफ तीन तलाक को बैन नहीं करता है।

और तो और सुप्रीम कोर्ट ने यहाँ तक कह दिया कि तीन #तलाक का मुद्दा यदि #मजहब का है तो वह हस्तक्षेप नहीं करेगा। ये क्या बात हुई ? #आधी_मुस्लिम_आबादी की जिंदगी नर्क बनी हुई है और आपको यह मुद्दा मजहबी दिखता है ? धिक्कार है आपके उपर ....।

अभिषेक मनु सिंघवी के वीडियो को सोशल मीडिया , यू ट्यूब से हटाने का आदेश देते हो कि न्यायपालिका की बदनामी ना हो ? ....पर क्यों ऐसा ? ...क्यों छुपाते हो अपनी कमजोरी ?

जस्टिस कर्णन जैसे पागल और टूच्चे जजों को नियुक्त करके एवं बाद में छः माह के लिए कैद की सजा सुनाने की सुप्रीम कोर्ट को आवश्यकता क्यों पड़नी चाहिए ? 

#अभिषेक मनु सिंघवी जैसे अय्याशों को जजों की नियुक्ति का अधिकार क्यों मिलना चाहिए ? 

क्या #सुप्रीम कोर्ट जवाब देगा ..?????


लोग अब तक सुप्रीम कोर्ट की इज्जत करते आए हैं , कहीं ऐसा ना हो कि जनता न्यायपालिका के विरुद्ध अपना उग्र रूप धारण कर लें उसके पहले उसे अपनी समझ दुरुस्त कर लेनी चाहिए। सत्तर सालों से चल रही दादागीरी अब बंद करनी पड़ेगी .. यह "#लोकतंत्र" है और "#जनता" ही इसकी "#मालिक" है।










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Saturday, December 9, 2017

"अब कि बार कोई कार्यकर्ता ही हमारा जनसेवक (विधायक) होगा"!!

"सूरतगढ़ विधानसभा क्षेत्र की जनता ने ये निर्णय कर लिया है कि उसे अब अपना अगला विधायक कोई नेता,चौधरी,राजा या धनवान नहीं बल्कि किसी एक कार्यकर्ता को चुनना है "!! 









"मेरी राजस्थान के आगामी विधानसभा चुनाव लड़ने हेतु आरम्भ हुई "चुनाव-अभियान यात्रा"सूरतगढ़ विधानसभा क्षेत्र हेतु !! आपका साथ आवश्यक है !


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Thursday, November 23, 2017

"मेरी राजस्थान के आगामी विधानसभा चुनाव लड़ने हेतु आरम्भ हुई "चुनाव-अभियान यात्रा"सूरतगढ़ विधानसभा क्षेत्र हेतु !! आपका साथ आवश्यक है !


मुझे राजस्थान का अगला विधानसभा चुनाव सूरतगढ़ विधानसभा से लड़ना होगा ,क्योंकि जनता भाजपा से रूठकर वापिस कांग्रेस के पास ना जा पाए !मुझे ये आभास हुआ है कि जनता भाजपा विधायकों से नाराज होकर वापिस कांग्रेस को जितवाने का सोच रही है !पार्टी नेतृत्व को घंटी बजाकर जगाना होगा !!  भाजपा का कार्यकर्ता होने के नाते पार्टी की टिकेट मांगूंगा ! अगर नेतृत्व ने मुझे नकार कर अगर किसी नए आदमी को टिकट दिया तो पार्टी का साथ देंगे ,अगर पुराने रह चुके विधायकों को ही फिर से दोहराया तो जन भावना को जानने हेतु एक सभा बुलाई जाएगी ,फिर जो जनता कहेगी वो ही करेंगे !हो सकता है निर्दलीय चुनाव लड़कर जनता की सेवा करनी पड़े !मैं पीछे नहीं हटूंगा !एक बात तो निश्चित है कि सूरतगढ़ विधानसभा की जनता बड़ी परेशान है मौजूदा प्रशासन एवं नेतृत्व से !जिसे अनदेखा नहीं किया जा सकता ! मैंने जनता से मिलना शुरू कर दिया है ! मैंने अपनी "चुनाव-अभियान यात्रा"का शुभारम्भ गुरु-पर्व वाले दिन बाबा रामदेव जी ,गुरुदवारा साहिब और बजरंगबली जी के मंदिर में माथा टेक कर उनकी पवित्र ध्वजा लेकर करी थी !जिनसे भी मिल रहा हूँ ,सब खुश हो रहे हैं और आगे बढ़ने हेतु कह रहे हैं !जनता का प्यार और आशीर्वाद मिल रहा है !30 साल तक पार्टी की सेवा करी है !जिसको भी पार्टी ने अपना प्रत्याशी बनाया उसे जितने हेतु भरपूर काम किया !अब जनता हमें उलाहने दे रही है ! हम किधर जाएँ !राजनीति छोड़कर हम तो अपने घर भी बैठ गए थे ! लेकिन जनता बैठने भी नहीं देती ! पार्टी नेतृत्व से अनुरोध है कि वो वस्तुस्थिति को समझकर उचित निर्णय ले !अन्यथा होने वाले नुकसान का पार्टी नेतृत्व स्वयं जिम्मेदार होगा !हम जीवित भी भाजपा के , बागी भी भाजपा के मरेंगे तो भी भाजपा के जीते तोभी भाजपा के और हारे तो भी भाजपा के !!आपकी जानकारी हेतु प्रस्तुत है पूरी जानकार हमारी गतिविधियों की ! आप सब अगर सहमत हों तो हमारे साथ जुड़ें !इस संदेश को आगे शेयर करें !














"मेरी राजस्थान के आगामी विधानसभा चुनाव लड़ने हेतु आरम्भ हुई "चुनाव-अभियान यात्रा"सूरतगढ़ विधानसभा क्षेत्र हेतु !! आपका साथ आवश्यक है !


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Friday, October 27, 2017


प्रेस की स्वतंत्रता के नाम पर अपराधियों के संरक्षण का अड्डा बनता जा रहा है प्रेस क्लब!

प्रेस क्लब (PCI) की कुछ प्रेसवार्ताओं, बैठकों, गतिविधियों पर नजर डालें तो यह चित्र उभरता है:-

1) PCI को बलात्कार का अधिकार दो- तरुण तेजपाल के लिए प्रेस कांफ्रेंस!

2) PCI को मनी लाऊंड्रिंग का अधिकार दो- प्रणय राय के लिए प्रेस कांफ्रेंस!

3) PCI को ब्लैकमेलिंग का अधिकार दो- विनोद वर्मा के लिए प्रेस कांफ्रेंस!

4) PCI को अपराध आरोपियों को संरक्षण देने का अधिकार दो- कन्हैया कुमार को पुलिस से बचाने के लिए छुपाया! बकैत पांडे के बलात्कार आरोपी भाई को भी यदा-कदा वहां देखा गया!

5) PCI को सरकार गिराने का अधिकार दो- आंदोलन की आड़ में राजनीतिक साजिश रचने वाले अरविंद केजरीवाल और उनके अपराध आरोपी साथियों के लिए कथित पत्रकारों द्वारा बैठकों का आयोजन।

6) PCI को फैसला सुनाने का अधिकार दो- गौरी लंकेश की हत्या में बिना सबूत हिंदू संगठनों को गुनाहगार ठहराने के लिए बैठक!

7) PCI को सामाजिक एडिटर नियुक्ति का अधिकार दो- कन्हैया कुमार, उमर खालिद जैसों के लिए बकैत गिरोह द्वारा प्रेस वार्ता और मार्च का आयोजन।

यह है दिल्ली स्थित प्रेस क्लब ऑफ इंडिया की सच्चाई! इस क्लब में नक्सलियों, आतंकियों, अलगा्वादियों, अपराधियों के लिए खुलेआम बैठकें होती हैं! प्रेस का भय दिखाकर समाज और सरकार को ब्लैकमेल किया जाता है! वामपंथी गिरोह ने इसे क्रियेटिव सेंटर की जगह डिस्ट्रक्टिव सेंटर बना रखा है!

जो लोग वास्तविक पत्रकारिता कर रहे हैं, उन्हें चाहिए कि एकजुट होकर यहां से मिल रहे अपराध के संरक्षण पर रोक लगाएं और समाज को तोड़ने वाले तथाकथित पत्रकारों की सदस्यता खारिज कर उन्हें बाहर निकालें! प्रेस की स्वतंत्रता के नाम पर अपराध आरोपियों के संरक्षण का अड्डा बनता जा रहा है #PCI

 Sandeep Kumar Deo


By-: www.pitamberduttsharma.blogspot.com.


























Sunday, October 22, 2017

अगर कोई मोदी को गालियाँ दे रहे है ...
तो वह महाशय अवश्य इन लिस्ट में से एक है :
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1. नम्बर दो की इनकम से प्रॉपर्टी खरीदने वाले ।
2. राशन डीलर नाराज़ हो गये: राशन कार्ड सब्सिडी आधार कार्ड से जोड़ दिया।
3. प्रॉपर्टी डीलर नाराज हो गये: दो लाख से ज्यादा Cash पेमेंट में रोक लगा दी।
4. दलाल नाराज: ऑनलाइन सिस्टम बनने से दलाल नाराज हो गये।
5. NGO के मालिक नाराज़: 40,000 से अधिक NGO बन्द हो गये।
6. कंपनी के MD: मोदी ने फर्जी 3,00,000 कंपनी बन्द कर दी।
7. E-tender होने से ठेकेदार नाराज हो गये।
8. गैस एजेंसी वाले नाराज : गैस सब्सिडी को बैंक खाते से जोड़ दिया गया।
9. इनकम टैक्स चोर नाराज: 12 करोड लोग इनकम टैक्स के दायरे मै आ चुके।
10. ब्यापारी नाराज: व्यापारी लोग आटोमेटिक GST सिस्टम में आ गये।
11. बेनामी संपत्ति वाले नाराज: बेनामी संपत्ति कानून लागु
12. नम्बर-२ का काम वाले नाराज: ऐसे लोगो का फलना फूलना बन्द हो गया।
13. ब्लैक वाइट करने वाले नाराज: दो लाख से ज्यादा Cash पेमेंट में रोक
14. आलसी अधिकारी नाराज : अब ऑफिस में समय फिंगरप्रिंट अटेंडेंस
15. वो लोग नाराज हो गये जो रिश्वत देकर काम करने मे विश्वास करते है।
16. घोटाले करने वाले पुराने नेता और अधिकारी नाराज हैं ।
17. फर्जी कंपनी खाता धारक वाले नाराज हैं: क्योकि बैंक एकाउंट्स को आधार कार्ड और पैन कार्ड से जोड़ दिया गया।
18. करोड़ो का Cash से कारोबार करने वाले नाराज हैं: क्योकि नोट बंदी से करोड़ो का घर में रखा हुवा Cash बैंक में जमा हो गया।
19. लाखो, करोड़ो की ज्वेलरी Cash में बेचने और खरीदने वाले नाराज हैं: क्योकि पैन कार्ड अनिवार्य कर दिया।
20. जिनको राजनीति विरासत में मिली हैं वो नाराज हैं ।
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देश वदलाव की कहानी लिख रहा है
जिसे समझ है और जो ईमानदार हैं वही सही गलत और मोदी जी को समझ पा रहा हैं.
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चोर, फ्री का माल खाने वाले, टैक्स की चोरी करने वाले ... मोदी को कोस रहे है...।
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Wednesday, October 18, 2017

मुसलमानो का असली दूश्मन कौन है ..????

अगर भारतीय मुसलमानो से पूछो की तुम्हारा सबसे बड़ा दुश्मन कौन है,तो वो बोलेंगे...
आरएसएस वीएचपी बीजेपी

अगर गाजा के मुसलमानो से पूछो की तुम्हारा सबसे बड़ा दुश्मन कौन है तो वो बोलेंगे,
इज़राइली !

अगर अमेरिकन मुस्लिम से पूछो की तुम्हारा सबसे बड़ा दुश्मन कौन है तो वो बोलेंगे,
American Freedom Defense Initiative!

अगर चीन के मुसलमानो से पूछो की तुम्हारा सबसे बड़ा दुश्मन कौन है तो वो बोलेंगे,
चाइना की सरकार!

अगर म्यांमार के मुसलमानो से पूछो की तुम्हारा सबसे बड़ा दुश्मन कौन है तो वो बोलेंगे,
बौद्धिस्ट!

अगर पाकिस्तान के सुन्नियों से पूछो की तुम्हारा सबसे बड़ा दुश्मन कौन है तो वो बोलेंगे,
शिया,बोहरा,अहमदी!

अगर पाकिस्तान के मुसलमानो से पूछो की तुम्हारा सबसे बड़ा दुश्मन कौन है तो वो बोलेंगे,
भारत के बहुसंख्यक हिन्दू!

अगर आसाम के मुसलमानो से पूछो की तुम्हारा सबसे बड़ा दुश्मन कौन है तो वो बोलेंगे,
बोड़ो आदिवासी!

अगर इराक के सुन्नियों से पूछो की तुम्हारा सबसे बड़ा दुश्मन कौन है तो वो बोलेंगे,
शिया मुस्लिम!

अगर ब्रिटेन के मुसलमानो से पूछो की तुम्हारा सबसे बड़ा दुश्मन कौन है तो वो बोलेंगे,
इंग्लिश डिफेंस लीग!

अगर रूस के मुसलमानो से पूछो की तुम्हारा सबसे बड़ा दुश्मन कौन है तो वो बोलेंगे,
रशियन डिफेंस लीग!

अगर श्रीलंका के मुसलमानो से पूछो की तुम्हारा सबसे बड़ा दुश्मन कौन है तो वो बोलेंगे,
Bodu Bala Sena (BBS)!

अगर किसी गैर मुसलमान से पूछो की दुनिया मे किसने अशांति फैला रखी है
तो वो सिर्फ एक ही जवाब देंगे......
इस्लाम ( मुस्लिम) ..????




Friday, October 13, 2017

सचमुच भारत का समाज एक अजीब समाज है।
*********
ज्यादा दिन नहीं हुए, कोई तीन-साढ़े तीन साल पहले जब उस समय के शासक लूट के अनेक नए आयाम गढ़ रहे थे। तब जनता इससे परेशान थी... तब अन्ना के पीछे पागल हुई जनता पूरी तरह से समाज में ईमानदारी लाने के लिए आन्दोलित थी.... फिर नई सरकार बनी.... सब लोग तत्काल हर बेईमान को पकड़ कर अंदर करने और ईमानदार समाज बनाने को तत्काल कदम उठाने को बेचैन हो उठे......
नवंबर 2016 से कदम उठाए जाने लगे... शुरू में सबको अच्छा लगा.... बुरा तो खैर अभी भी किसी को नहीं लग रहा होगा, लेकिन नोटबन्दी, आधार लिंकिंग, GST जैसे कदमों को काफी जनता अब बुरी नज़रों से देख रही है... क्यों देख रही है?... कारण क्या है?... आखिर मामला क्या है? 
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ठीक से देखा जाए तो मामला कुछ नहीं है।
अन्ना की मांग थी कि लोकपाल लाओ, जो हमारे पिछवाड़े लाठी धर-धर के हमे ईमानदार बनाएगा, क्योंकि बिना पिटे हम ईमानदार नहीं बनेगे... अब वही जनता कुछ भी खरीदने पर बिल काटे जाने से परेशान हो गई है.... जो व्यापारी बेईमान अफसरों के द्वारा प्रताड़ित होने पर इनके खिलाफ कदम उठाने की मांग करते थे, वो ही व्यापारी अब ऑनलाइन रिटर्न भर कर सरकारी बाबू के मुंह पर फेंकने को बुरा मान रहे हैं.....
इसका आसान कारण है कि लोग ईमानदार हों,... लेकिन हमको छोड़कर सब हों.... हम माल कमाएं और बाकी ईमानदारी से रहें. अगर लतियाने वाला लोकपाल आ गया होता तो क्या होता? खुद ही सोच लें…. नोटबन्दी से पहले जो काला बाज़ारी थी, जिस इकॉनमी को ब्लैक मनी संभालता था, वो काफी रुक गई है.... जब पूरी इकॉनमी से कालाबाज़ारी की भारी रकम निकल जाएगी तो उसका असर तो पड़ना ही है.... लेकिन जनता चाह रही थी कि सब ईमानदार हो जाएं और इसका कोई असर भी न पड़े.... उदाहरण के लिए जनता चाह रही थी कि कुछ ऐसा हो, कि जब हम प्रॉपर्टी बेचें तो महंगी बिके... लेकिन जब खरीदें तो सस्ती मिले.... ज़ाहिर है कि लोगों को नुकसान दिख ही रहा है....
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आधार लिंक कराने से महाराष्ट्र में 10 लाख गरीब गायब हो गए.... उत्तरखण्ड में भी कई लाख फ़र्ज़ी BPL कार्ड धारी गरीब ख़त्म हो गए.... 3 करोड़ से ज्यादा फ़र्ज़ी LPG कनेक्शन धारक ख़त्म हो गए... मदरसों से वजीफा पाने वाले 1,95,000 फर्ज़ी बच्चे गायब हो गए..... डेढ़ करोड़ से ऊपर फर्जी राशन कार्ड धारी गायब हो गए.... इन सबसे सरकारी ख़ज़ाने को चूना लगा रहे लोगों का टर्नओवर ख़त्म हो गया.... ये लोग बाजार में मंदी का रोना रोने लगे.... आधार लिंकिंग को बुरा बताने लगे, और साथ में जनता भी रोने लगी.....
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खैर मामले तो बहुत हैं… कभी फिर लिखेंगे… तुम चाहो तो सरकार बदल देना… फर्क मोदी को नहीं... फर्क जनता को ही पड़ेगा…

अभिषेक मनु सिंघवी का हाथ जैसे ही उस अर्द्धनग्न महिला के कमर के उपर पहुँचा ,  महिला ने बड़ी अदा व बड़े प्यार से पूछा - "जज कब बना रहे ह...