Wednesday, April 26, 2017

आखिर अंबेडकर को पीएम के तौर पर देखने की बात कभी किसी ने क्यों नहीं की ? -साभार :- श्री मान पुण्य प्रसुन्न वाजपेयी जी !

नेहरु की जगह सरदार पटेल पीएम होते तो देश के हालात कुछ और होते । ये सवाल नेहरु या कांग्रेस से नाराज हर नेता या राजनीतिक दल हमेशा उठाते रहे हैं। लेकिन इस सवाल को किसी ने कभी नहीं उठाया कि अगर नेहरु की जगह अंबेडकर पीएम होते तो हालात कुछ और होते । दरअसल अंबेडकर को राजनीतिक तौर पर किसीने कभी मान्यता दी ही नहीं। या तो संविधान निर्माता या फिर दलितों के मसीहा के तौर पर बाबा साहेब अंबेडकर को कमोवेश हर राजनीतिक सत्ता ने देश के सामने पेश किया । लेकिन इतिहास के पन्नों को अगर पलटे और आजादी से पहले या तुरंत बाद में या फिर देश के हालातों को लेकर अंबेडकर तब क्या सोच रहे थे और क्यों अंबेडकर को राजनीतिक तौर पर उभारने की कोई कोशिश हुई नहीं । और मौजूदा वक्त में भी बाबा साहेब अंबेडकर का नाम लेकर राजनीतिक सत्ता जिस तरह भावुक हो जाती है लेकिन ये कहने से बचती है कि अंबेडकर पीएम होते तो क्या होता । 

तो आईये जरा आंबेडकर के लेखन, अंबेडकर के कथन और अंबेडकर के अध्ययन को ही परख लें कि वह उस वक्त देश को लेकर वह क्या सोच रहे थे, जिस दौर देश गढ़ा जा रहा था । तो संविधान निर्माता की पहचान लिये बाबा साहेब अंबेडकर ने संविधान की स्वीकृति के बाद 25 नवंबर 1949 को कहा, " 26 जनवरी 1950 को हम अंतर्विरोधों के जीवन में प्रवेश करने जा रहे हैं । राजनीति में हम समानता प्राप्त कर लेंगे । परंतु सामाजिक-आर्थिक जीवन में असमानता बनी रहेगी। राजनीति में हम यह सिद्दांत स्वीकार करेंगे कि एक आदमी एक वोट होता है और एक वोट का एक ही मूल्य होता है । अपने सामाजिक और आर्थिक जीवन में अपनी सामाजिक और आर्थिक संरचना के कारण हम यह सिद्दांत नकारते रहेंगे कि एक आदमी का एक ही मूल्य होता है। कब तक हम अंतर्विरोधों का ये जीवन बिताते रहेंगे। कह तक हम अपने सामाजिक और आर्थिक जीवन में समानता को नकारते रहेंगे ? बहुत दिनो तक हम उसे नकारते रहे तो हम ऐसा राजनीतिक लोकतंत्र खतरे में डाल कर ही रहेंगे । जिसनी जल्दी हो सके हमें इस अंतर्विरोध को दूर करना चाहिये ।वरना जो लोग इस असमानता से उत्पीडि़त है वे इस सभा द्वारा इतने परिश्रम से बनाये हुये राजनीतिक लोकतंत्र के भवन को ध्वस्त कर देंगे। "   यानी संविधान के आसरे देश को छोड़ा नहीं जा सकता है बल्कि अंबेडकर असमानता के उस सच को उस दौर में ही समझ रहे थे जिस सच से अभी भी राजनीतिक सत्ता आंखे मूंदे रहती है या फिर सत्ता पाने के लिये असमानता का जिक्र करती है । 

यानी जो व्यवस्था समानता की होनी चाहिये, वह नहीं है तो इस बात की कुलबुलाहट अंबेडकर में उस दौर में इतनी ज्यादा थी कि 13 दिसंबर 1949 को जब नेहरु ने संविधान सभा में संविधान के उद्देश्यों पर प्रस्ताव पेश किया तो बिना देर किये अंबेडकर ने नेहरु के प्रस्ताव का भी विरोध किया । अंबेडकर की राइटिंग और स्पीचीज की पुस्तक माला के खंड 13 के पेज 8 में लिखा है कि आंबेडकर ने कितना तीखा प्रहार नेहरु पर भी किया। उन्होने कहा, " समाजवादी के रुप में इनकी जो ख्याती है उसे देखते हुये यह प्रसताव निराशाजनक है । मैं आशा करता था, कोई ऐसा प्रावधान होगा जिससे राज्यसत्ता आर्थिक, सामाजिक और राजनीतिक न्याय को यथार्थ रुप दे सके । उस नजरिए से मै आशा करता था कि ये प्रस्ताव बहुत ही स्पष्ट शब्दों में घोषित करे कि देश में सामाजिक आर्थिक न्याय हो । इसके लिये उघोग-धंधों और भूमि का राष्ट्रीयकरण होगा । जबतक समाजवादी अर्थतंत्र न हो तबतक मै नहीं समझता , कोई भावी सरकार जो सामाजिक, आर्थिक और राजनीतिक न्याय करना चाहती है वह ऐसा कर सकेगी । " तो अंबेडकर उन हालातों को उसी दौर में बता रहे थे जिस दौर में नेहरु सत्ता के लिये बेचैन थे और उसके बाद से बीते 70 बरस में यही सवाल हर नई राजनीतिक सत्ता पूर्व की सरकारों को लेकर यही सवाल खड़ा करते करते सत्ता पाती रही है फिर आर्थिक असमानता तले उन्हीं हालातों में को जाती है । यूं याद तो ठीक दो बरस संसद में संविधान दिवस मनाये जाने के दौर को भी याद किया किया सकता है, जब 26 नवंबर 2015 को संविदान दिवस मनाते मनाते कांग्रेस हो या बीजेपी यानी विपक्ष हो या सत्तादारी सभी ने एक सुर में माना कि अंबेडकर जिन सवालों को संविधान लागू होने से पहले उठा रहे थे , वही सवाल संविधान लागू होने के बाद देश के सामने मुंह बाये खड़े हैं। 

ये अलग बात है कि कांग्रेस हो या बीजेपी दोनों ने खुद को आंबेडकर के सबसे नजदीक खड़े होने की कोशिश संसद में बहस के दौरान की । लेकिन दोनो राजनीतिक दलों में से किसी नेता ने यह कहने की हिम्मत नहीं की कि आजादी के बाद अगर अंबेडकर देश के पीएम होते तो देश के हालात कुछ और होते । क्योंकि अंबेडकर एक तरफ भारत की जातीय व्यवस्था में सबसे नीचे पायदान पर खडे होकर देश की व्यवस्था को ठीक करने की सोच रहे थे । और दूसरा उस दौर में अंबेडकर किसी भी राजनेता से सबसे ज्यादा सुपठित व्यक्तियो में से थे । जो अमेरिकी विश्वविघालय में राजनीति और सामाजिक अध्ययन करने के साथ साथ भारत की अर्थ नीति कैसे हो इसपर भी लिख रहे थे। यानी अंबेडकर का अध्ययन और भारत को लेकर उनकी स च कैसे दलित नेता के तौर पर स्थापना और संविधान निर्माता के तौर पर मान्यता तहत दब कर रह गई ये किसी ने सोचा ही नहीं । क्योंकि जिस दौर में महात्मा गांधी हिन्द स्वराज लिख रहे थे और हिन्द स्वराज के जरीये संसदीय प्रणली या आर्थिक हालातों का जिक्र भारत के संदर्भ में कर रहे थे । उस दौर में अंबेडकर भारत की पराधीन अर्थव्यवस्था को मुक्त कराने के लिये स्वाधीन इक्नामिक ढांचे पर भी कोलंबिया यूनिवर्सिटी में कह-बोल रहे थे । और भारत के सामाजिक जीवन में झांकने के लिये संस्कृत का धार्मिक पौराणिक और वेद संबंधी समूचा वाड्मंय अनुवाद में पढ़ रहे थे । और भोतिक स्थापनायें लोगों के सामने रख रहे थे । इसलिये जो दलित नेता आज सत्ता की गोद में बैठकर अंबेडकर को दलित नेता के तौर पर याद कर नतमस्तक होते है , वह इस सच से आंखे चुराते हैं कि आंबेडकर ब्रहमण व्यवस्था को सामाजिक व्यवस्था से आगे अक सिस्टम मानते थे । और 1930 में उनका बहुत साफ मानना था कि ब्राह्मण सिस्टम में अगर जाटव भी किसी ब्राह्मण की जगह ले लेगा तो वह भी उसी अनुरुप काम करने लगेगा, जिस अनुरुप कोई ब्राह्मण करता । अपनी किताब मार्क्स और बुद्द में आंबेडकर ने बारत की सामाजिक व्यवस्था की उन कुरितियों को उभारा भी और समाधान की उस लकीर को खींचने की कोशिश भी की जिस लकीर को गाहे बगाने नेहरु से लेकर मोदी तक कभी सोशल इंजिनियरिंग तो कभी अमीर-गरीब के खांचे में उठाते हैं। 1942 में आल इंडिया रेडियो पर एक कार्यक्रम में अंबेडकर कहते है , भारत में इस समय केवल मजदूर वर्ग की सही नेतृत्व दे सकता है । मजदूर वर्ग में अनेक जातियों के लोग है जो छूत-अछूत का भेद मिटाती है । संगठन के लिये जाति प्रथा को आधार नहीं बनाते । उसी दौर में अंबेडकर अपनी किताब , ' स्टेट्स एंड माइनरटिज " में राज्यो के विकास का खाक भी खिचते नजर आते है । जिस यूपी को लेकर ाज बहस हो रही है कि इतने बडे सूबे को चार राज्यों में बांटा जाना चाहिये । वही यूपी को स्पेटाइल स्टेट कहते हुये अंबेडकर यूपी को तीन हिस्से में करने की वकालत आजादी से पहले ही करते है । 

फिर अपनी किताब ' स्माल होल्डिग्स इन इंडिया " में किसानो के उन सवालों को 75 बरस पहले उठाते हैं, जिन सवालों का जबाब आज भी कोई सत्ता दे पाने में सक्षम हो नहीं पा रही है । अंबेडकर किसानों की कर्ज माफी से आगे किसानो की क्षमता बढाने के तरीके उस वक्त बताते है । जबकि आज जब यूपी में किसानो के कर्ज माफी के बाद भी किसान परेशान है । और कर्ज की वजह से सबसे ज्यादा किसानों की खुदकुशी वाले राज्य महाराष्ट्र में सत्ता किसानों की कर्ज माफी से इतर क्षमता बढाने का जिक्र तो करती है लेकिन ये होगा कैसे इसका रास्ता बता नहीं पाती । जबकि अंबेडकर 'स्माल होल्डिग्स " में तभी उपाय बताते हैं। और माना भी जाता है कि आंबेडकर ने नेहरु के मंत्रिमंडल में शामिल होने के िबदले योजना आयोग देने को कहा था। क्योंकि आंबेडकर लगातार भारत के सामाजिक - आर्थिक हालातों पर जिस तरह अध्ययन कर रहे थे , वैसे में उन्हें लगता रहा कि आजादी के बाद जिस इक्नामी को या जिस सिस्टम की जरुरत देश को है, वह उसे बाखूबी जानते समझते हैं। और नेहरु ने उन्हीं सामाजिक हालातों की वजह से ही नेहरु मंत्रिमंडल से त्यागपत्र भी दिया, जिन परिस्थितियों को वह तब ठीक करना चाहते थे। हिन्दू कोड बिल को लेकर जब संघ परिवार से लेकर , हिन्दुमहासभा और कई दूसरे संगठनों ने सड़क पर विरोध प्रदर्शन शुरु किया । तो संसद में लंबी चर्चा के बाद भी देश की पहली राष्ट्रीय सरकार को भी जब आंबेडकर हिन्दू कोड बिल पर सहमत नहीं कर पाये तो 27 सितंबर 1951 को अंबेडकर ने नेहरु को इस्तीफा देते हुये लिखा , " बहुत दिनों से इस्तीफा देने की सोच रहा था। एक चीज मुझे रोके हुये था, वह ये कि इस संसद के जीवनकाल में हिन्दूकोड बिल पास हो जाये । मैं बिल को तोड़कर विवाह और तलाक तक उसे सीमित करने पर सीमित हो गया थ। इस आशा से कि कम से कम इन्हीं को लेकर हमारा श्रम सार्थक हो जाये । पर बिल के इस भाग को भी मार दिया गया है । आपके मंत्रिमंडल में बने रहने का कोई कारण नहीं दिखता है । " दरअसल इतिहास के पन्नों को पलटिये तो गांधी, अंबेडकर और लोहिया कभी राजनीति करते हुये नजर नहीं आयेंगे बल्कि तीनों ही अपने अपने तरह से देश को गढना चाहते थे । और आजादी के बाद संसदीय राजनीति के दायरे में तीनों को अपना बनाने की होड़ तो शुरु हुई लेकिन उनके विचार को ही खारिज उनके जीवित रहते हुये उन्हीं लोगों ने किया जो उन्हे अपना बनाते या मानते नजर आये । इसलिये नेहरु या सरदार पटेल का जिक्र प्रशासनिक काबिलियत के तौर पर तो हो सकता है , लेकिन आजादी के ठीक बाद के हालात को अगर परखे तो उस वक्त देश को कैसे गढना हा यही सवाल सबसे बडा था । लेकिन पहले दिन से ही जो सवाल सांप्रदायिकता के दायरे से होते हुये कश्मीर और रोजगार से होते हुये जाति-व्यवस्था और उससे आगे समाज के हर तबके की भागेदारी को लेकर सत्ता ने उठाये या उनसे दो चार होते वक्त जिन रास्तो को चुना। ध्यान दें तो बीते 70 बरस में देश उन्ही मुद्दो में आज भी उलझा हुआ है । और राजनीतिक सत्ता ही कैसे जाति-व्यवस्था के दायरे से इतर सोच पाने में सक्षम नहीं है । 

तो इस सवाल को तो अंबेडकर ने नेहरु के पहले मंत्रिमडल की बैठक में ही उठा दिया था । इसलिये आंबेडकर पंचायत स्तर के चुनाव का भी विरोध कर रहे थे । क्योकि उनका साफ मानना था कि चुनाव जाति में सिमटेंगे । जाति राजनीति को चलायेगी । और असमानता भी एक वक्त देश की पहचान बना दी जायेगी । जिसके आधार पर बजट से लेकर योजना आयोग की नीतियां बनेंगी . और ध्यान दें तो हुआ यही । अंतर सिर्फ यही आया है कि आंबेडकर आजादी के वक्त जब देश को गढने के लिये तमाम सवालो को मथ रहे थे तब देश की आबादी 31 करोड थी । और आज दलितो की तादा ही करीब 21 करोड हो चली है । और शिक्षित चाहे 66 फिसदी हो लेकिन ग्रेजुएट महज 4 फिसदी है । इतना ही नहीं 70 फिसदी दलित के पास अपनी कोई जमीन नहीं है । और 85 फिसदी दलित की आय 5 हजार रुपये महीने से भी कम है । आबादी 16 फिसदी है लेकिन सरकारी नौकरियों में दलितों की तादाद महज 3.96 फिसदी है । और दलितो के सरकार के तमाम मंत्रालयों का कुल बजट यानी उनकी आबादी की तुलना में आधे से भी कम है । 2016-17 में शिड्यूल कास्ट सब-प्लान आफ आल मिनिस्ट्रिज का मजह 38,833 करोड दिया गया . जबकि आजादी के लिहाज से उन्हे मिलना चाहिये 77,236 करोड रुपये । पिछले बरस यानी 2015-16 में तो ये रकम और भी कम 30,850 करोड थी । यानी जिस नजरिये का सवाल आंबेडकर आजादी से पहले और आजादी के ठीक बाद उटाते रहे । उन सवालो के आईने में अगर बाबा साहेब आंबेडकर को देश सिर्फ संविधान निर्माता मानता है या दलितों की मसीहा के तौर पर देखता है तो समझना जरुरी है कि आखिर आजतक किसी भी राजनीतिक दल या किसी भी पीएम ने ये क्यों नहीं कहा कि अंबेडकर को तो प्रधानमंत्री होना चाहिये था। क्योंकि ये बेहद महीन लकीर है कि महात्मा गांधी जन सरोकार को संघर्ष के लिये तैयार करते रहे और अंबेडकर नीतियों के आसरे जनसरोकार के संघर्ष को पैदा करना चाहते रहे । यानी देश की पॉलिसी ही अगर नीचे से उपर देखना शुरु कर देती तो अंग्रेजों का बना ब या सिस्टम बहुत जल्द खत्म होता । यानी जिस नेहरु मॉडल को कांग्रेस ने महात्मा गांधी से जोडने की कोशिश की । और जिस नेहरु मॉडल को लोहिया ने खारिज कर समाजवाद के बीज बोने चाहे। इन दोनों को आत्मसात करने वाली राजनीतिक सत्ताओं ने आंबेडकर मॉडल पर चर्चा करना तो दूर आंबेडकर को दलितों की रहनुमाई तले संविधान निर्माता का तमगा देकर ही खत्म करने की कोशिश की । जो अब भी जारी है ।


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                                                   पीताम्बर दत्त शर्मा,
                                                     सूरतगढ़ !

"5th पिल्लर करप्शन किल्लर", "लेखक-विश्लेषक एवं स्वतंत्र टिप्प्न्नीकार", पीताम्बर दत्त शर्मा ! 
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Friday, April 21, 2017

"कुछ नहीं ,है भाता ,जब रोग ये लग जाता".....!!! - पीताम्बर दत्त शर्मा (स्वतंत्र टिप्पणीकार) मो.न.+ 9414657511

वैसे तो मित्रो,! सभी रोग बुरे होते हैं !लेकिन कुछ रोग तो हमारा पीछा छोड़ देते हैं और कुछ आदमी की मौत तलक साथ देते हैं !पुराने जमाने में ऐसे बुरे चंद ही रोग हुआ करते थे जो आदमी को "मौत"तलक पंहुचा कर ही दम लेते थे !जिनमे एक प्रेम रोग भी हुआ करता था ,जो बड़ा ही घातक होता था !इस रोग के बारे में बड़े ग्रन्थ,नाटक और चलचित्र वर्णन करते आपको मिल जाएंगे ! जैसे जैसे विज्ञानं ने तरक्की करके हमें आलसी,निट्ठल्ला और ना जाने क्या क्या बनाया ,वैसे वैसे हमारे मन-मस्तिष्क और शरीर को कई नए रोगों से ग्रस्त करके दिखाया !हर रोज़ बड़े मुल्कों के वैज्ञानिक किसी ना किसी नए रोग के बारे में हमें बताते हैं ,ये भी बताते हैं कि ये रोग उनकी फलानि गलतियों के कारण से हुआ !जैसे कार बनाई तो धुंए का प्रदूषण हुआ श्वास की बीमारी आम हो गयी !वगैरह वगैरह !
                   आज मैं कई दिनों बाद आपसे रूबरू हो रहा हूँ इस ब्लॉग के माध्यम से ,उसका भी कारण मेरी बीमारियां और देश में फ़ैल चुकीं कई घातक बीमारियां ही हैं ! मुझे पिछले कई महीनो से ,बीपी,शुगर,तेज धड़कन और जोड़ों में दर्द की शिकायतें हैं ! चिकित्सिक लोग चीनी,घी और तेल छोड़ने की हिदायतें दे रहे हैं !देश में इंटरनेट प्रयोग के साथ साथ भ्रष्टाचार आदि की सारी बीमारियां चल ही रही हैं !जो बड़ी घातक हैं !अब तो जो आदमी टीवी ज्यादा देख लेता है वो भी घातक बीमारी का शिकार हो जाता है !
                            2011 से मैं इंटरनेट चला रहा हूँ !मुझे ये बीमारी होना भी जरूरी है !देश में फ़ैल चुकी साड़ी बुराइयों और बिमारियों पर मैं अपने विचार लगभग लिख चूका हूँ ,और आप सभी पाठकों ने उसे सराहा भी है एवं अपने कॉमेंट्स भी दिए हैं ! देश के कई नामचीन अखबारों और पत्रिकाओं ने उसे प्रकाशित भी किया है !लेकिन मैं भी एक इंसान हूँ जी ! बुराइयों के बारे में लिखते लिखते रोग ग्रस्त सा हो गया तो मैंने निर्णय लिया कि कुछ दिन रेस्ट करता हूँ !या किसी और विषय पर लिखूंगा !तो आज आपके सामने ये विषय लेकर आया हूँ ! आप सब अपने स्वास्थ्य का ध्यान रख्खें !उसी से सारे सुख आते हैं ! वो कहते हैं ना कि "पहला सुख ,निरोगी काया "!दूसरा सुख ,बहुत सारी माया !"लाल बत्ती"लगानी छोड़ दी मैंने ,शराफत...!!
                जय हिन्द ,जय भारत !





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Friday, April 14, 2017

"काश्मीर की कली और काँटे"!! - पीताम्बर दत्त शर्मा - (स्वतंत्र टिप्पणीकार) मो.न.+ 9414657511

काश्मीर की कलियाँ तो स्वर्ग का आभास तभी से करवाती आ रही हैं जबसे प्रकृति ने उसकी रचना की है ! इंसान ने उसका भरपूर "उपभोग"किया है !चाहे वो कश्मीरी हो,पाकिस्तानी हो या फिर किसी अन्य देश का निवासी हो ! भारतीय मैंने इसलिए नहीं लिखा क्योंकि "कइयों"का मानना है कि "काश्मीर भारत का नहीं है"! जो मानते आ रहे हैं कि सिर्फ ये काश्मीर ही नहीं ,बल्कि वो काश्मीर भी हमारा है ,जिस पर पाकिस्तान और चीन काबिज़ है ! वो इतने कमज़ोर हैं कि 68 सालों से भारत का धन भी लुटाये रहे हैं ,हमारे सैनिक भी मरवाये जा रहे हैं और स्वयं हमारे नेता वहाँ के बदमाशों से गठबंधन करके उन्हें "सत्ता का आनन्द "भी  रहे हैं !सिर्फ इसी चाह में कि शायद ये "हमारा समर्थक"बन जाए !और विश्व के दुसरे देश हमारी बातों का यकीन कर उनसे हमें हमारा काश्मीर वापिस दिलवा देंगे !
                             लेकिन ना तो हम दुश्मनों से एक मुश्त लड़ पा रहे हैं और  ना ही दुसरे देश कोई न्याय करते दिखाई पड़ते हैं !उलटे "मज़े"लेते रहते हैं !हमारे वो नेता जिन्होंने 65 साल तक देश का शासन चलाया ,नीतियां  बनायीं ,वो गलतियों पर गलतियां करते चले गए !कुछ समय हेतु जो दूसरी सरकारें में सत्ता में आयीं ,वो तो उसी रास्ते पर चलने को मजबूर रहीं ! क्योंकि वो इतनी मजबूत नहीं थीं ! अब जब मोदी जी की सरकार बनी तो वही लोग राह में रोड़े बिछा रहे हैं !
                          आज नेशनल कॉन्फ्रेंस के प्रवक्ता तो टेलीविज़न पर ही साफ़ साफ़ बोल गए ,जो उनकी सच्चाई थी !जिस पर दुसरे दल पर्दा डालते  थे ! उस प्रवक्ता "मट्टू"ने तो कांग्रेस को भी नहीं बख्शा !बोला !! "भाड़ में जाओ तू सब दिल्ली वालो "!!हम हैं पाकिस्तानी ,आतंकवादी !!बेचारा कांग्रेस का प्रवक्ता "सुन्न"सा हो गया ये सब सुनकर !आखिर उसे बहस से बाहर ही निकलना पड़ा !
                           अमेरिका किसी भी देश में जाकर "महा बम्ब"तक गिरा सकता है !तो हम क्यों हैं ऐसी विश्व की नक़ली संस्थाओं या ताक़तों से जो हमें सालों से न्याय ही नहीं दिला पाए ?हम  सिर्फ इसलिए निर्भर रहें क्योंकि हमें "वीटो पावर"चाहिए !हमसे अच्छा  उत्तरी कोरिया है जो खुला चैलेंज तो देता है !समय आ गया है जब देश के अंदर छिपे गद्दारों के मुख से परदे हटाए जाएँ !और दुश्मन चाहे कोई भी हो उससे अपनी ज़मीं वापिस लेकर ही मिशन समाप्त किया जाये !
                          मोदी जी भारत  आपको तन-मन-और धन से समर्थन देगी !आप निडर मनसे आगे बढिये ! नहीं चाहिए जनता को अब डरपोक दलाल टाइप के "केजरीवाल,शारद पवार,मुलायम,माया ,ममता,और लालू जैसे नेता !लगाओ एमरजेंसी और करो इनको एक बार अंदर !लिखो एक और इतिहास भारत का !छोडो राम मंदिर वगैरह जैसे मसले ये तो कभी भी हल कर लेंगे आप !जय हिन्द जय भारत ! 





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                                                   पीताम्बर दत्त शर्मा,
                                                     सूरतगढ़ !

"5th पिल्लर करप्शन किल्लर", "लेखक-विश्लेषक एवं स्वतंत्र टिप्प्न्नीकार", पीताम्बर दत्त शर्मा ! 
वो ब्लॉग जिसे आप रोजाना पढना,शेयर करना और कोमेंट करना चाहेंगे !
 link -www.pitamberduttsharma.blogspot.com मोबाईल न. + 9414657511.
 इंटरनेट कोड में ये है लिंक :- https://t.co/iCtIR8iZMX.
 "5th pillar corruption killer" नामक ब्लॉग अगर आप रोज़ पढ़ेंगे,उसपर कॉमेंट करेंगे और अपने मित्रों को शेयर करेंगे !तो आनंद आएगा !मेरा इ मेल ये है -: "pitamberdutt.sharma@gmail.com.

Tuesday, April 11, 2017

"चर्चा मेरे प्यारे पाठक मित्रों से "!- पीताम्बर दत्त शर्मा मो.न.+9414657511

प्रिय "5TH पिल्लर करप्शन किल्लर"नामक ब्लॉग के पाठक मित्रो !सादर प्यारभरा नमस्कार !आप मेरा साथ पिछले 7 वर्षों से दे रहे हैं !मैं आपका हृदय से आभारी हूँ !आपने ना केवल मेरे और मेरे मित्रों के लेखों को पढ़ा,बल्कि उसे अपने मित्रों संग शेयर भी किया ,पसंद किया और उस पर जाकर कॉमेंट भी लिखे ! जो मेरे लिए ना केवल अनमोल थे , साथ ही साथ मेरे लिए वो प्रेरणादायी भी थे !कई मित्रों ने तो मेरा ब्लॉग ज्वाइन भी किया है !कई समाचार पत्रों-पत्रिकाओं ने मेरे लेख प्रकाशित भी किये ! उनका भी मैं आभारी हूँ !आप सबकी इस अनुकम्पा से ही आज मेरे पाठकों की संख्या अगर मैं सभी माध्यमों की जोड़ दूँ तो तक़रीबन दस लाख(१०,०००००. )बनती है !क्योंकि ब्लॉग पर लिखी सामग्री गूगल+,ट्वीटर,फेसबुक और उसके कई ग्रुपों के साथ साथ मेरे पेज पर भी डाली जाती है !
                         मैं बड़े ही गर्व के साथ कह सकता हूँ की मेरे ब्लॉग को माननीय प्रधानमंत्री श्री मान नरेंद्र मोदी जी और माननीय राष्ट्रीय अध्यक्ष भाजपा श्री मान अमित शाह जी भी पढ़ते हैं !उन्होंने मुझे ट्वीट भी किये हैं ! कई बड़े लेखक और लेखिकाएं,कवी-कवित्रियाँ और स्वतंत्र टिप्पणीकार आदि भी जुड़े हैं जिससे मैं अपने आपको गौरवान्वित समझता हूँ !आशा करता हूँ की आप सबका मुझे और ज्यादा साथ मिलेगा ! फिर मैं बारी बारी से आप सबके शहरों में आकर मिलूंगा !आपसे और ज्यादा सीखूंगा !
                           आप सबसे अनुरोध है कि आप मुझे अपने अनमोल सुझाव देते रहा करें !
                               सधन्यवाद !
                                                  आपका अपना ,
                                                   पीताम्बर दत्त शर्मा,
                                                     सूरतगढ़ !

"5th पिल्लर करप्शन किल्लर", "लेखक-विश्लेषक एवं स्वतंत्र टिप्प्न्नीकार", पीताम्बर दत्त शर्मा ! 
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Saturday, April 8, 2017

"हम"जो बड़े ख़ास हैं !लेकिन - देसी ?

हम लोग, देसी !
जो 1950 से 1990
के बीच जन्में है,
हमें विशेष आशीर्वाद प्राप्त हैँ ...
हम ना अत्याधुनिक पीढ़ी है ना अत्यन्त प्राचीन ....

....और ऐसा भी नही कि
आधुनिक संसाधनों से
हमें कोई परहेज है......!!!
लेकिन.....
👍 हमें कभी भी
जानवरों की तरह किताबों को
बोझ की तरह ढो कर स्कूल
नही ले जाना पड़ा ।
👌हमारें माता- पिता को
हमारी पढाई को लेकर
कभी अपने programs
आगे पीछे नही करने पड़ते थे...!
👍 स्कूल के बाद हम
देर सूरज डूबने तक खेलते थे
👍 हम अपने
real दोस्तों के साथ खेलते थे;
net फ्रेंड्स के साथ नही ।
👍 जब भी हम प्यासे होते थे
तो नल से पानी पीना
safe होता था और
हमने कभी mineral water bottle को नही ढूँढा ।
👍 हम कभी भी चार लोग
गन्ने का जूस उसी गिलास से ही
पी करके भी बीमार नही पड़े ।
👍 हम एक प्लेट मिठाई
और चावल रोज़ खाकर भी
मोटे नही हुए ।
👍 नंगे पैर घूमने के बाद भी
हमारे पैरों को कुछ नही होता था ।
👍 हमें healthy रहने
के लिए Supplements नही
लेने पड़ते थे ।
👍 हम कभी कभी अपने खिलोने
खुद बना कर भी खेलते थे ।
👍 हम ज्यादातर अपने parents के साथ या grand- parents के पास ही रहे ।
👌हम अक्सर 4/6 भाई बहन
एक जैसे कपड़े पहनना
शान समझते थे.....
common. वाली नही
एकतावाली feelings ...
enjoy करते थे......!
👍 हम डॉक्टर के पास
नहीं जाते थे,
पर डॉक्टर हमारे पास आते थे
हमारे ज़्यादा बीमार होने पर ।
👍 हमारे पास
न तो Mobile, DVD's,
PlayStation, Xboxes,
PC, Internet, chatting,
क्योंकि
हमारे पास real दोस्त थे ।
👍 हम दोस्तों के घर
बिना बताये जाकर
मजे करते थे और
उनके साथ खाने के
मजे लेते थे।
कभी उन्हें कॉल करके
appointment नही लेना पड़ा ।
👍 हम एक अदभुत और
सबसे समझदार पीढ़ी है क्योंकि
हम अंतिम पीढ़ी हैं जो की
अपने parents की सुनते हैं...
और
साथ ही पहली पीढ़ी
जो की
अपने बच्चों की सुनते हैं ।
We are not special,
but.
We are
LIMITED EDITION
and we are enjoying the
Generation Gap......
💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐
मैं उन भाग्यशालियों में शुमार हूँ,
जिसे ये आशीर्वाद मिला है ।
"5th पिल्लर करप्शन किल्लर", "लेखक-विश्लेषक एवं स्वतंत्र टिप्प्न्नीकार", पीताम्बर दत्त शर्मा ! 
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Thursday, April 6, 2017

"शराब से परेशान महिलाएं ,अपनाएं मेरा फार्मूला"!! - पीताम्बर दत्त शर्मा (स्वतन्त्र टिप्पणीकार) मो.न.+9414657511

'शराब-सोमरस मृत संजीवनी सुरा और दारु ,ना जाने कितने नाम हैं इस "राक्षसी" के?ना जाने कितनी प्रकार की होती है ये ज़हर !कब ये शौंक,शोक से दवा-दारु और फिर ये घातक बीमारी बन जाती है ! देवताओं से लेकर राक्षसों तलक,राजाओं से लेकर लेखकों-कवियों तलक और आम आदमी से लेकर रईसों तलक !सबकी पसंद रही है ये शराब !नेता हों या पत्रकार,जादूगर हों या जादूगरनियाँ,सब इसका स्वाद चखना चाहते हैं ! कहते हैं कि जहां गरीबी होती है ,वहीँ शराब से लड़ाई होती है !धनवानों को तो "पत्नियां"स्वयं परोसती हैं !इस विषय के अंदर "सभ्यता-असभ्यता"भी छिपी हुई है !इतना ही नहीं हमारा संविधान भी इस विषय पर मैं सच लिखूं तो "दोगला" है !अमीरों हेतु बीयरबार,होटल-मोटल और ना जाने क्या क्या खुले हुए हैं ! वहाँ कोई सरकारी अधिकारी जांच हेतु चला भी जाए तो उसे शराब ऑफर की जाती है और कोई गरीब कहीं बैठकर पि रहा हो तो उसे उठाकर जीप में डालकर थाने लेजाया जाता है !दो-चार जापद भी रसीद कर दिए ! इस तरह के सैंकड़ों उदाहरण दिए जा सकते हैं !
                           चलिए विषय पर आते हैं ! आजकल जगह जगह शराब बन्द कहीं सरकारें कर रही हैं या कहीं हमारी महिलाएं "गुंडागर्दी से भरे आंदोलन चलाकर"आगजनी-लूटपाट करके शराब की दुकाने बंद करवा रहीं हैं !और हमेशां की तरह हमारा "सयाना-मीडिया" आग में घी डालने और तारीफें करता नहीं थक रहा !जब भी कांग्रेस की सरकार को भारत की जनता हटाती है ,ना जाने कौन सी ताक़तें सक्रीय हो जातीं हैं कि वो उन्हीं के समर्थकों में से कोई भोले भाले लोग ढूंढकर उनसे ऐसा माहौल बनवा देतीं हैं !ऐसा लगने लगता है ,जैसे भारत में उहा-पोह की ही स्थिति है ,प्रशासन नाम की कोई चीज़ है ही नहीं !उस पर हैरानी वाली बात ये है कि भाजपा से जुड़े लोग और rss के विभिन्न संगठनों से जुड़े लोग "भावावेश"में आकर कुछ जैसे उल्टा-पुल्टा बोल जाते हैं ,वैसे ही कारपोरेट मीडिया घरानों के चेले एंकर-पत्रकार ऐसे नेताओं के बयान लेने निकल पड़ते हैं जिनको भारत से कुछ लेना-देना नहीं होता ,बस अपने वोट बैंक को खुश करना होता है !इस चक्कर में नेता और मीडिया ये भूल जाते हैं कि उनके इस क्रियाकर्म से विश्व के अन्य देश भारत के बारे में कैसी कैसी धारणाएं बना लेते हैं?
                           में मानता हूँ की शराब से घरों में क्लेश,गरीबी और हत्याएं तक हो जाती हैं !हज़ारों का जीवन बर्बाद हो जाता है !लेकिन शराब का ठेकेदार तो देश के संविधान के मुताबिक ही दूकान खोल रहा होता है !उसके नुकसान का कौन जिम्मेदार होता है ऐसी तोड़फोड़ से?अब रही मेरे फार्मूले की बात !जिसको अपनाने से उनका पति ना केवल शराब पिणि छोड़ देगा !बल्कि शराब छोड़ने का प्रचार भी करना शुरू कर देगा !महिलाओं को सिर्फ इतना करना है कि " वो सब महिलाये जो अपने पतियों की शराब छुड़वाना चाहती हैं ,को दिनों तलक ऐसा दर्शाएं की उनको एवम उनके बच्चों को भी शराब पीने की लत लग चुकी है "!ये नाटक तब तलक चलना चाहिए जब तलक उनका पति शराब पीना छोड़ ना दे !अब रही सरकार की बातें ! तो पाठक मित्रो!! हमारी प्रादेशिक एवं राज्यों की सरकारों ने पहले तो "कमाई"के लालच में "लॉटरी,सट्टों,शराब,भांग,पोस्त और चरस आदि की दुकाने खुलवायीं अब वो सम्पूर्ण रूप से नहीं "आंशिक"रूप से मज़बूरी में बंद करवा रहीं हैं !मनसे अभी भी कोई सरकार शरण एवं अन्य नशे बंद नहीं करना चाहतीं! अब मैं दारु नहीं पिता इसलिए मैं कहता हूँ की शराब बन्द होनी चाहिए !अगर पीता होता तो मैं भी यही लिखता कि शराब बिकनी चाहिए !जय हम जैसे !दोगले लोगों की !  





 "5th पिल्लर करप्शन किल्लर", "लेखक-विश्लेषक एवं स्वतंत्र टिप्प्न्नीकार", पीताम्बर दत्त शर्मा ! 
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Monday, April 3, 2017

"मेरे यादगार ट्वीट्स"!! पीताम्बर दत्त शर्मा (5thपिल्लर करप्शन किल्लर)ब्लॉग !

  1. जनरल सैम मानेक शाह जी।एक महान सेनापति।आज उनका जन्मदिन है।हमें उनका आभारी होना चाहिए।उनके परिवार को शुभकामनाएं।
  2. दिल्लीविधानसभा चुनावोंमें73 सीटेंजीतने वाली"आप"mcd चुनावोंमें कितनीसीटें जीतेगी?कमसीटें जीतनेपर क्या केजरीवाल त्यागपत्र देंगे?मांगलेते हैं
  3. Ndtv कलसे मोदीजी के चुनावी वाकय को पकड़ के बैठगया है एक साजिश के तहत।कर्ज़ा माफ़ी को लेकर अगर कुछसमय लग जाये तोक्या हर्ज है।बेईमान पत्रकार।
  4. शरारती पाकितान को"प्रॉक्सी-वार"के लायक भी नहीं छोड़ा जाना चाहिए ।कितनी बार उलंघन करता है।un,कब ध्यान करेगा।उन्हें क्या पड़ी है?हम मारेंगे।
  5. आधुनिकता और अधिकारों के नाम पर बरसों से भारत के लोगों को विकृत मानसिकता वाले लोग "सेक्स"के गड्ढे में धकेलते जा रहे हैं।और हम गिरने को तैयार।
  6. "रेवन"इंडियन आइडल बन गया है । बधाइयाँ संगीत प्रेमियों को।
  7. इंडियन आइडल के विनर अगर सा-रे-गा-मा के बच्चों से अगर मुकाबला करेंगे,तो हार जायेंगे ।आप क्या कहेंगे मित्रो ।संगीत है ही ऐसी चीज़।
  8. वास्तव में,देशमें सभी स्तरके चुनाव एक सेशन में ही हो जाने चाहिए।अन्यथा केजरीवाल जैसे लोगों को लगता है कि mcd चुनावों सेवो pm बन सकते हैं।
  9. आज तलक गलत टीम की तरफ से "खेल"रहे थे।देर आयद दुरुस्त आयद।और भी जो विद्वान् देश के सच्चे भक्त हैं,उचित स्थान पर आ-जा सकते हैं।जय हिंद।
  10. आज देश में ऐसे नेता पावर में नहीं हैं,तंत्र के लोग भी बेईमानी से डरने लगे हैं,अब आप-हम भी सुधर जाएँ तो देश तर जायेगा जी।जिम्मेदारी हमारी है।
  11. देश इस समय "अथाह संकट"से जूझ रहा है,जिम्मेदार पदों पर बैठे महानुभावों से निवेदन,कृपया अपनी जिम्मेदारी देश के प्रति निष्ठा से निभाएं।
  12. देशके सभी"बुद्धिजीवियों"से अनुरोध हैकि जहाँ भीहैं,वहां समस्याओं से देश या देशवासियों को निकालने का प्रयास करें नाकि उलझाने का।बुद्धि हैतो।
  13. बेटियों को आप ही बचा सकते हो बजरंगी जी।
  14. आज फिर जीने की तमन्ना है,आज फिर पेप्सी पीने का इरादा है।केवल आपके साथ । कसम से ।
  15. रोजाना पढ़ें आपका अपना ब्लॉग"5TH पिल्लर करप्शन किल्लर"! लिंक ये है :- . like,share and comment on it daily. thanks !
  16. 5TH Pillar Corruption Killer: "दीवारें,बेड़ियाँ,हथकड़ियाँ,समाज-धर्म के ये ,नियम और...
  17. 1अप्रैल को बहुत से अजीब समाचार देखने,सुनने और पढ़ने को मिल सकते हैं।जिनसे आपको थोड़ी प्रसन्नता मिल सकती है।मेरी छटी इन्द्रि बता रही है ।
  18. बड़े चेनल उत्तराखण्ड की खबरें नहीं दिखारहे तो cm रावतजी ने स्वयंही सोशियल मीडिया का सहारा लेकर समाचार देना शुरूकर दिया।"मनोपली"नहीं चलेगी।
  19. योगी जी के नाजायज़ कत्लखाने बन्द करवाने से और चाहे कोई खुश हुआ हो या नहीं,लेकिन जो कटने से बच गए वो तो कुछ साँसे चैन की ले पाये होंगे।
  20. अलग अलग समाजों,धर्मोंऔर जातियोंको जोड़ने काकाम संविधानानुसार किसकाहै?और वोअपना कामक्यों नहीं कररहा?कौन सज़ादेगा उनको?अबतक सज़ादी क्योंनहीं ?
 "5th पिल्लर करप्शन किल्लर", "लेखक-विश्लेषक एवं स्वतंत्र टिप्प्न्नीकार", पीताम्बर दत्त शर्मा ! 
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आखिर अंबेडकर को पीएम के तौर पर देखने की बात कभी किसी ने क्यों नहीं की ? -साभार :- श्री मान पुण्य प्रसुन्न वाजपेयी जी !

नेहरु की जगह सरदार पटेल पीएम होते तो देश के हालात कुछ और होते । ये सवाल नेहरु या कांग्रेस से नाराज हर नेता या राजनीतिक दल हमेशा उठाते रहे ...