Posts

Showing posts from August, 2015

"काट खाये सैयाँ हमारो, चोरों सी सूरतिया पकड़ो नहीं जात "! - पीताम्बर दत्त शर्मा (लेखक-विश्लेषक) - मो. न. 9414657511

Image
"सैयाँ"मतलब हमेशां साथ देने वाला , चाहे फिर वो जीवन साथी हो,कोई दोस्त हो या कोई नेता ! सभी ये वादा करते हैं कि हम साथ निभाएंगे लेकिन नित नए "धोखे"जनता के सामने आ रहे हैं !जीवन का हर मोड़ खतरों से भरा पड़ा है !इतने "स्टाईल" से लोग अपना काम कर जाते हैं कि बेचारे धोखा खाने वाले को ये पता ही नहीं चलता,कब उसकी पीठ में छुरा घोंपा जा चुका है !सभी रिश्ते अपनी मर्यादा खोते जा रहे हैं ! इसीलिए आज मैंने ये शीर्षक बनाया है कि - "काट खाये सैयाँ हमारो, चोरों सी सूरतिया  पकड़ो नहीं जात "!
                        सभी राजनितिक दलों में सैंकड़ों की संख्या में ऐसे विधायक, साँसद एवं पदाधिकारी हैं जिन पर भारतीय क़ानून के मुताबिक अपराधिक मामले चल रहे हैं ! उनके सक्रिय कार्यकर्त्ता कितनी संख्या में अपराधी प्रकृति के हैं अगर कोई ये जांचने को निकल पड़े तो 60 %से भी ज्यादा ऐसे "कारीगर"लोग मिल जाएँगे , जो महत्वपूर्ण पदों पर बैठे हुए हैं !अचरज तो इस बात पर है कि कोई उन्हें हटाना भी नहीं चाहता !क्योंकि हाई-कमाण्ड जानता है कि जैसे ही ऐसे कार्यकर्ताओं को उनके पद…

पुरुषोत्तम अग्रवाल जेएनयू से रिटायर हुए तो उस समय उनके विदाई समारोह में भी नामवरजी शामिल नहीं हुए !! साभार - श्रीमान जगदीश्वर चतुर्वेदी जी !

Image
नामवरजी का पुरुषोत्तम अग्रवाल की षष्ठिपूर्ति के कार्यक्रम में न जाना !नामवर सिंह के स्वभाव को जो लोग जानते हैं उनको पता है कि वे बात के पक्के हैं, यदि किसी कार्यक्रम के लिए हाँ कर दी है तो जरूर जाते हैं, लेकिन इस बार पुरुषोत्तम अग्रवाल की षष्ठिपूर्ति के कार्यक्रम में वे नहीं गए। असल कारण तो नामवरजी जानें, हम इतना जानते हैं कि जिस समय पुरुषोत्तम अग्रवाल जेएनयू से रिटायर हुए तो उस समय उनके विदाई समारोह में भी नामवरजी शामिल नहीं हुए वे उस समय शिलांग में थे। उनका सचेत फ़ैसला था कि वे पुरुषोत्तम के विदाई समारोह शामिल नहीं होंगे। संयोग की बात थी उस समय मैं उनके पास था और उन्होंने अपने मन की अनेक कड़वी मीठी यादें बतायीं। उस समय उनका जो रूप मैंने देखा वह काबिलेतारीफ था। नामवरजी का पुरुषोत्तम की षष्ठिपूर्ति में न जाना उनके शिलांग में व्यक्त किए गए नीतिगत रुख़ की संगति में उठाया गया क़दम है। उनके फ़ैसले से उनके आलोचनात्मक रुख़ के प्रति विश्वास और पुख़्ता हुआ है। पुरुषोत्तम अग्रवाल साठ के हुए,  हम चाहेंगे वे सौ साल जिएँ,  उनको हम सामाजिक जीवन में हमेशा सक्रिय देखकर ख़ुश होते हैं। लेकिन सामाजिक भूम…

"हम तो पूछेंगे कि…सूरतगढ़ की सड़कें इतनी जर्ज़र हालात में क्यों हैं जी "??? - पीताम्बर दत्त शर्मा (लेखक-विश्लेषक) मो. न. - 9414657511

Image
राजस्थान का एक सुन्दर और प्यारा  सा  नगर सूरतगढ़ , जिसे हम सोढल नगर से भी जानते हैं ! यहाँ एक सुन्दर सा किला,जिसके पास ही घाटों से सुसज्जित एक तालाब , जिसे हम आज "ढाब"के नाम से जानते हैं ! इस तालाब के पास भगवान भोले-शंकर, गणेश,हनुमान,शनि देव और माता जी के भव्य मन्दिर बने हुए थे ! किले से एक चौड़ी कच्ची सड़क आदर्श कालोनी की तरफ जाती थी,एक चौड़ी सड़क स्टेशन से सीधे हाईवे तक,  चौड़ी सड़क गोशाला रामनाथ जी की कुटिया और बिश्नोई मंदिर के चारों और घूमती हुई कोहेनूर सिनेमा की तरफ जाती थी !श्रीगंगानगर,हनुमानगढ़ बड़ोपल , बीकानेर और अनूपगढ़ जाने वाली सड़कें इसको बाहर से खूबसूरत बनाती थीं ! हमारा ये शहर कच्ची सड़कें होने के बावजूद सुन्दर और खुला-खुला नज़र आता था !
                                             जैसे जैसे समय बदलता गया ,वैसे वैसे इस शहर की शक्ल भी बदलती गयी ! खुली कच्ची सड़कें पक्की लेकिन संकरी गलियों में तब्दील होती चली गयीं !जब श्रीमती आरती शर्मा सूरतगढ़ नगरपालिका की चेयरमैन बनीं, तो उन्होंने स्टेशन रोड और शहर की अन्य सड़कें भी बनवायीं ! शहर के लोग आज भी उनके कार्यकाल को याद करत…

साप्ताहिक कालम :- " हम तो पूछेंगे कि ....सूरतगढ़ में सड़कों की हालत इतनी जर्ज़र क्यों ." ???? पीताम्बर दत्त शर्मा - (लेखक-विश्लेषक) मो.न. - 9414657511.

Image
पाठक मित्रो !श्री पीताम्बर दत्त शर्मा (लेखक-विश्लेषक) के लेख को पाठकों ने खूब सराहा है !आप लोगों की "रूचि" ने ही हमारा हौसला बढ़ाया है और हमें आपके लिए नित नए प्रयास करके रोचक,सारगर्भित और सच्चे समाचार लेख एवं परिशिष्ट आप तक पंहुचाने हेतु प्रेरित किया है ! आपकी संतुष्टि ही हमारी सफलता है ! इसीलिए हम आपके लिए एक साप्ताहिक कालम ले कर आये थे , जिसमे हर सप्ताह के शुक्रवार को विशेष जानकारी के साथ आपको प्रशासन, नेताओं,राजनितिक दलों और समाजसेवी संस्थाओं द्वारा किये गए जनहित के कार्यों में आ रही गड़बड़ी के बारे में विस्तार से तथ्यों सहित बताया जाता रहेगा ! पिछले सप्ताह की तरह इस बार  हम जनता की एक और विशेष समस्या को इस कालम में उठाएंगे ! और उस समस्या से सम्बंधित व्यक्तियों से सवाल पूछे जाएंगे ! इसी लिए हमने इस कालम का नाम ही रख दिया था कि "हम तो पूछेंगे .............."??? हम यानिकि जनता !
                    ये कालम दैनिक सीमान्त-रक्षक के हर शुक्रवार को प्रकाशित किया जाता है ! इस कड़ी के दुसरे पादान में आपको सूरतगढ़ में सड़कों की  जर्ज़र हालात के बारे में विस्तार से बताय…

साप्ताहिक कालम :- "हम तो पूछेंगे कि "जनता को राशन कार्ड से सुविधा की जगह असुविधा क्यों मिल रही हैं "?सरकार जी !! - पीताम्बर दत्त शर्मा - (लेखक-विश्लेषक) मो. न. - 9414657511

Image
"भारतीय लोकतंत्र" में प्रत्येक व्यक्ति के जीवन में "कार्ड"अपना एक विशेष महत्त्व रखते हैं !ये कई प्रकार के होते हैं !जैसे राशन-कार्ड,ग्रीन-कार्ड,विज़टिंग-कार्ड,इन्विटेशन-कार्ड,एंट्री-कार्ड,ए.टी.एम.-कार्ड और भामाशाह व आधार-कार्ड आदि-आदि ! व्यक्ति के जीवन की शुरुआत से ही उसका पाला इन कार्डों से पड़ना शुरू हो जाता है ! अगर किसी का कोई प्रकार का कार्ड नहीं बन पाया हो, या उसे किसी प्रकार का कोई कार्ड नहीं मिला हो तो,  उसके जीवन में एक प्रकार का अधूरापन छा जाता है ! 
                                         हमारा सबसे पहला कार्ड एक "कुंडली"के रूप में "पंडित" जी बनाते हैं ! फिर नगरपालिका या ग्राम पंचायत हम सबका नाम परिवार-कार्ड में जोड़ती है ! जैसे-जैसे इन्सान बड़ा होता जाता है , वैसे-वैसे उसका वास्ता इन तरह-तरह के कार्डों से पड़ता जाता है !   हर कार्ड को बनाने से पहले उस कार्ड से मिलने वाली सुविधाओं के बारे में विस्तार से और बढ़ा -चढ़ा कर बताया जाता है !हर व्यक्ति को लगता है जैसे ये कार्ड बना लेने से उसका जीवन बड़े आराम से बीतेगा ! लेकिन जब वास्तविकता से मनुष्य…

"अब निचले स्तरों पर फैले अस्मंजसों को मिटाना और हर पद के कार्य को स्पष्ट करना होगा माननीय मोदी जी " !!

Image
माननीय प्रधानमंत्री श्रीमान नरेंद्र मोदी जी ने आखिर अपना लालकिले से दूसरा भाषण दे ही दिया ! बहुत से लोग आशावादी सोच के साथ प्रतीक्षा कर रहे थे उनके इस भाषण की , उन्हें पूर्ण संतुष्टि भी मिली उनका भाषण सुन कर ! ऐसे लोगों को ये निम्न बातें बहुत पसंद आयीं :- 
1. "टीम इण्डिया" में प्रधानमंत्री जी ने देश के हर नागरिक को ना केवल शामिल किया बल्कि देश की तरक्की में भी सबका योगदान बताया जो सराहनीय बात है !
2. अपने एक वर्ष पहले किये वादे उनको स्पष्ट ना केवल याद थे, बल्कि उन वादों को वो कितना पूरा कर पाये , ये भी बताया ! जो की एक नयी परंपरा है !
3. उच्च स्तर पर भ्रष्टाचार दूर करने हेतु प्रयास और नए स्त्रोतों से देश की आय बढ़ाना भी उनकी सरकार का एक बड़ा काम है !
4. काले धन , निचले स्तर के लोगों की चिंता ,पूर्वोत्तर राज्यों का विकास ,युवाओं की व्यर्थ इन्टरव्यू बंद करने,सैनिकों को "वन रैंक वन पेंशन"लागू करने का आश्वासन देना , युवाओं को "स्टार्ट-अप" कार्यक्रम के तहत काम करने हेतु लोन देना और किसानों के हित हेतु मंत्रालय  बदलकर ज्यादा कारगर बनाना , ये दर्शाता है कि उनकी नज़र बड़…

नेहरू खानदान के 3 "चिरागों"को सत्ता सौंपने और जापान के हितों हेतु हुआ था भारत का बंटवारा एवं मिली थी "आजादी"!!- पीताम्बर दत्त शर्मा (लेखक-विश्लेषक)

Image
अपुष्ट सूचनाएं बताती हैं कि राहुल गांन्धी की दादी माँ श्रीमती इंदिरा गांधी जी के पिता श्री जवाहर लाल नेहरू , उम्र उब्दुल्लाह के दादा जनाब शेख अब्दुल्लाह और पाकिस्तान के कायदेआज़म मुहम्मद अली जिन्नाह साहेब तीन भाई थे ! ये सब अंग्रेज़ों के बहुत ज़्यादा "करीब" थे ! वो इनकी "कहा" मानते थे और ये उनका ! यही नहीं साहेब ये उनके घर "आते-जाते" थे और वो सब इनके घर "आते-जाते" थे !बताया तो ये भी जाता है कि जवाहर लाल जी के परदादा एक मुसलमान थे और उन्होंने ही श्री गुरु गोबिन्द सिंह जी की आखरी जासूसी की थी जिसकी वजह से उनका कत्ल हुआ था ! जिसके बाद इन्हें इलाहाबाद वाला घर तथा ढेर सारा धन देकर और कश्मीरी ब्राह्मण बनाकर बसाया गया !
                                उधर जापान अपने व्यापार को बढ़ाने हेतु भारत व अफगानिस्तान के अंदर से रास्ता बनाना चाहता था !जिसके लिए उसने नेता जी सुभाष चन्द्र बॉस की आजाद हिन्द फौज को सहारा दिया !उन्होंने भी अंग्रेजों को ये देश छोड़ने पर मजबूर किया ! लाला लजपत राय , भगत सिंह,सरोजनी नायडू और ऊधम सिंह जैसे वीरों ने भी उनकी नाक में दम करके रख दि…

"परायी शिक्षा-पद्धिति,क़ानून,लोक-तंत्र-व्यवस्था,और वैज्ञानिक-खोजों के सहारे आगे बढ़ता ,हमारा ये देश- प्यारा-भारत"!! - पीताम्बर दत्त शर्मा (लेखक-विश्लेषक) मो. न. - 9414657511

Image
प्यारे देश वासियो ! क्या था हमारा भारत देश , और आज क्या हो गया है ? इसे इस स्थिति तक लाने में हम सब का कुछ न कुछ सहयोग अवश्य रहा है !इसे बर्बाद करने में हमारी "कम" भूमिका इस लिए नहीं है कि हम इसे ज्यादा बर्बाद करना नहीं चाहते थे ! बल्कि हम इसे कम बर्बाद इसलिए कर पाये , क्योंकि "ज्यादा हुनरमन्द"लोगों ने हमें ये पवित्र काम करने का मौका ही नहीं दिया ! अगर हमें ये "सुअवसर" मिल जाता , तो आज हमारा भी नाम किसी सड़क,स्टेडियम,योजना और संसद की कार्यवाही में लिखा हुआ होता !
                               पहले अगर कोई बुरा काम करता था तो पता नहीं चलता था !क्योंकि उस समय बुराईयाँ और सम्पर्क साधन बहुत कम उपलब्ध थे !लेकिन आज कल तो कोई कितना भी छिपाकर कर कैसा भी घोटाला करे , वो तुरंत बाहर आ जाता है !आज के लोकतंत्र का पाँचवाँ खम्भा यानी "सोशियल-मीडिया" एक ऐसा माध्यम है जिसने देश के चौथे खम्भे की भी नींद हराम कर रख्खी है ! उनका धंधा तो दो ही बातों पर चलता था ! पहली तो ये कि इतने पैसे दे दे नहीं तो, देखले !! तेरी फलानी खबर छाप दूंगा या टीवी पर चला दूंगा !और दूसरी ये…

"इस घोर-कलयुग की माया का मज़ा लीजिये " हज़ूर !! - पीताम्बर दत्त शर्मा (लेखक-विश्लेषक) मो. न. - 9414657511.

Image
सेक्स,धोखा,छलावा,भ्रष्टाचार,और ड्रामेबाज़ी आज हमें क्यों परेशान कर रही है ?? नेताओं के ड्रामे आप से देखे नहीं जा रहे ??आप सोच-सोच के परेशान हुए जा रहे हैं कि ये क्यों हो रहा है ?? क्योंकि ये तो होना ही था !! जी क्या कहा  ?? आपको विश्वास नहीं हो रहा ! आइये मैं आपको बताता हूँ हमारे सनातन धर्म के ग्रंथों में ये पहले से ही लिखा हुआ है ! यहां तक कि गोपी फिल्म में दलीप कुमार साहिब पर एक गाना भी फिल्माया जा चुका है कि राम चन्द्र कह गए सिया से ऐसा कलयुग आएगा , हंस चुगेगा दाना - तिनका, कौआ मोती खायेगा !! सच पढ़िए ! कलियुग पारम्परिक भारत का चौथा युग है। आर्यभट के अनुसार महाभारत युद्ध ३१३७ ईपू में हुआ। कलियुग का आरम्भ कृष्ण के इस युद्ध के ३५ वर्ष पश्चात निधन पर हुआ।भागवत पुराण  के अनुसार भगवान श्री कृष्ण के इस पृथ्वी से प्रस्थान के तुंरत बाद 3102 ईसा पूर्व से कलि युग आरम्भ हो गया | कलियुग का आगमन धर्मराज युधिष्ठिरभीमसेनअर्जुननकुल और सहदेव पाँचों पाण्डव महापराक्रमी परीक्षित को राज्य देकर महाप्रयाण हेतु उत्तराखंड की ओर चले गये और वहाँ जाकर पुण्यलोक को प्राप्त हुये। राजा परीक्षित धर्म के अनुसार तथ…

हम अपने "गुरु"जी को कितना जानते-पहचानते हैं और क्या हम उनका "कहा"मानते भी हैं ?? - पीताम्बर दत्त शर्मा (लेखक-विश्लेषक) मो. न. - 9414657511 .

Image
मित्रो !! आजकल टीवी चैनलों में तथाकथित "गुरुओं" के बारे में बहुत कुछ दिखाया, समझाया और बताया जा रहा है ! उनके गवाह भी पता नहीं कहाँ -कहाँ से आकर , अपना "ज्ञान" दिखा,सुना और बोलकर बता जाते हैं ?? वैसे तो सनातन धर्म "गुरुओं,देवताओं,देवियों और राक्षसों" से भरा पड़ा है ! जितने चाहो -जैसे चाहो वैसे ही गुरु और भगवान आपको और हमको मिल जाएंगे ! लेकिन फिर भी पता नहीं क्यों हमें "वर्तमान"में जन्मे गुरु की "सेवा" करने की बड़ी ही इच्छा रहती है !??
                     मैं बदनाम हुए या जेल में पंहुच चुके "गुरुओं"की महिमा का बखान या कोई बुराई , अपने इस लेख में करके अपनी "T.R.P."नहीं बढ़ाना चाहता हूँ ! मैं तो सिर्फ ये कहना चाहता हूँ कि इन जैसों की आवश्यकता ही क्यों महसूस होती है ! आप सब अपने अंतर्मन में झाँक कर स्वयं ही इसका उत्तर मुझे और अपने आप को बताएं जी ! मैं तो अपने अंतर्मन की बात आपसे साँझा कर सकता हूँ !जो ये है -:
                         मैं एक ब्राह्मण परिवार में जन्मा व्यक्ति हूँ !मेरे माता-पिता ने सनातन धर्म का प्रचार करने क…