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Showing posts from February, 2014

" लालू हो गए लाल , बोले अब होगा लठबन्धन " ये तो होना ही था - पीताम्बर दत्त शर्मा ( विश्लेषक )

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मित्रो होशियारी चालाकी कमीनगी थोड़ी देर ही चलती है जीवन में , धीरे-धीरे सबको पता चल जाता है कि ये आदमी विश्वसनीय नहीं है ! जो लोग कुछ समय तलक उसे बर्दाश्त कर रहे होते हैं दरअसल में वो लोग उसका प्रयोग करके कोई अपना ही हित साध रहे होते हैं !! और फिर  जैसे ही सामने वाले का हित सधता है, वो उस चालाक  कमीने और बेईमान आदमी को अपने घर से लात मार कर बाहर का रास्ता दिखा देता है !!
               " सेकुलर " नाम का झुनझुना कोंग्रेस ने 1975 के बाद बनाया और आज तलाक उसे खूब बजाया , और भरपूर फायदा उठाकर वो सत्ता में रही और मलायी खायी !! इसके लिए उसने कई छुटके नेताओं का प्रयोग किया ,जिनमे कॉमरेड , समाजवादी और अन्य छोटे-मोटे नेता थे ! आज जब उसे लगा कि अब ये नारा और ये छुटके नेता अपना महत्त्व खोते जा रहे हैं तो उसने इन सबको ऐसे निकाल बाहर किया जैसे कोई " दूध में से मख्खी बाहर निकालकर" अपनी अंगुली झटकता है !!
                  अब मायावती , पासवान , ममता , अजित सिंह , मुलायम जयललिता जैसे नेता अंदर से बड़े गुस्से में हैं तभी तो कोई अन्ना जी का विज्ञापन बनवा रहा है  तो कोई तीसरा मोर्चा बना…

" सरकार अगर अकेली भाजपा की बनेगी तो कुछ भला हो सकता है अन्यथा गठबंधन बना तो फिर गुड-गोबर हो जाएगा " !! - पीताम्बर दत्त शर्मा ( विश्लेषक )

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हमारे परम मित्र श्री पुण्य प्रसुन वाजपेयी जी भी यही कह रहे हैं , आप भी पढ़िए उनका ये लेख जो हैम साभार आपके लिए पेश कर रहे हैं !!

मोदी के तीन इक्के हर दाग धो देंगे ! रामविलास पासवान। रामदास आठवले और उदितराज। मोदी के लिये अब यही वह तिकड़ी है जो देश भर में बीजेपी के मंच पर खडे होकर दलित वोट बैंक में सेंध लगायेगी। संघ परिवार के लिये भी अपने राजनीतिक स्वयंसेवक को पीएम पद पर पहुंचाने के लिये यह अपने तरीके की पहली राजनीतिक बिसात होगी जब हिदुत्व की प्रयोगशाला के लिये जाने जाने वाले नरेन्द्र मोदी और आरएसएस की विचारधारा में दलित वोट बैंक साधने की राजनीति बीजेपी के मंच से होगी। दरअसल, बीजेपी को इसकी जरुर क्यों पड़ी या मोदी के पीएम बनने के रास्ते में दलित कार्ड कैसे सीढ़ी का काम कर सकता है। इसके लिये बीजेपी को लेकर देश के मौजूदा हालात और दलित वोट बैंक को लेकर बीजेपी की कुलबुलाहट को को समझना जरुरी है। अभी तक बीजेपी को धर्म के आधार पर वोट बैंक बांटने वाला माना गया। जो यह मिथ इस तिकड़ी के आसरे तोड़ा जा सकता है। बीजेपी को मुस्लिम वोट बैंक के सामानांतर दलित वोट बैंक चाहिये। क्योंकि देश के कुल वोटों का 1…

" थाली के बेंगन " लुढ़कने को तैयार हैं , बस टिकेट और मंत्री की कुर्सी देदो !! - पीताम्बर दत्त शर्मा ( विश्लेषक )

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             मित्रो देश में लोकसभा चुनाव जैसे-जैसे नज़दीक आते जा रहे हैं, वैसे-वैसे वो लोग बेचेनी महसूस कर रहे हैं !अपनी-अपनी पार्टियों में जिनको पिछले पांच वर्षो से उनकी पार्टी ने उन्हें कोई महत्त्व नहीं दिया !! इसलिए वो लोग अपने और अपने       " बच्चों " के उज्जवल भविष्य हेतु किसी ऐसी जगह पर जाना चाहते हैं जहां अच्छे से " गुज़र-बसर " हो सके !!
                      ज्यादातर ये वाले " बैंगन " उधर ही जाते हैं जिधर सत्ता रुपी शहद का पतीला ज्यादा भरता हुआ दिखायी दे रहा हो !! इनकी दृष्टि बड़ी " पारखी " होती है !! कई तो ऐसे भी होते हैं जो अपनी ही नयी दूकान खोल कर बैठ जाते हैं और कई " नंग " मिलकर अपनी " सर्कस " ही बना लेते हैं !! कौन फायदे में रहा कौन घाटे में , ये तो नतीजे आने के बाद ही पता चलता है !!


                     ये लोग जनता को यही कहते हैं कि हमने ये काम ( जो किसी" शहादत " से कम नहीं बताया जाता ) देशहित , समाजहित और जातिहित हेतु किया है ! और फिर शुरू होते हैं पत्रकार भाई , कोई उसे जायज़ ठहरने में लग जाता है तो को…

"अधर्म की बारिश इस कदर है चारों ओर, तुमको गोवर्धन उठाना ही होगा महाभारत युद्ध से भी बदतर हैं हालात, कान्हा तुमको आना ही होगा " -

- पीताम्बर दत्त शर्मा (विश्लेषक )

पांडव भी अब कौरव हो गए भूलकर आपसी द्वेष
सत्य की बातें तुम ही जानो, यहाँ झूठ रह गया शेष
पांडवों को उनका कर्तव्य, दुनिया को सच का महत्त्व समझाना ही होगा
महाभारत युद्ध से भी बदतर हैं हालात, कान्हा तुमको आना ही होगा

गरीबी कालिया नाग की तरह फन फैलाए खड़ी है
भ्रष्टाचारी रुपी कंश की समस्या उससे भी बड़ी है
कंश का वध करके, अन्नपूर्णा का साम्राज्य देश में लाना ही होगा
महाभारत युद्ध से भी बदतर हैं हालात, कान्हा तुमको आना ही होगा

हर तरफ द्रोपदी का चीर खींचा जा रहा है, और
दुशासनो के झूठ और मक्कारी को सींचा जा रहा है
झूठ, मक्कारी को मिटाकर, दुशासनो को जड़ से मिटाना ही होगा
महाभारत युद्ध से भी बदतर हैं हालात, कान्हा तुमको आना ही होगा..

                                                    कश्मीर से लेकर कन्याकुमारी तक देश की हालत एक है ...सभी जगह भ्रष्ट लोग (अफसर और नेता) ...ईमानदार पर हावी है ...
इन भ्रष्ट लोगो की बात चीत और काम करने के तरीके से ...तनिक भी अहसास नहीं होता की ....हमारे देश में लोकतंत्र है ...कानून का राज है ....
हमारे देश में दो तरह के Executive है
एक…

" साभार श्री श्रीश सप्रे " " भविष्य-चिंतक वीर सावरकर के सपनों का भारत "

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हिंदूराष्ट्र के उद्‌गाता वीर सावरकर न केवल एक महान हिंदूसंगठक थे, जिन्होंने अंडमान के कारागार में ही शुद्धि यज्ञ का सूत्रपात किया था अपितु, एक महान साहित्यकार भी थे, जिन्होंने कालकोठरी में ही रहते 'कमला" जैसे महाकाव्य का सृजन किया था, मुंबई मराठी साहित्य सम्मेलन के अध्यक्ष पद से 1938 में 'लेखनियां तोडो और बंदूक हाथ में लो" का क्रांतिकारी वक्तव्य देकर खलबली मचा दी थी। वे क्रांतिमंत्र के उद्‌गाता, जो जीवन के प्रत्येक क्षेत्र में क्रांतिकारी रहे; जिनका कहना था प्रत्येक क्रांति एक प्रयोग होता है, विज्ञाननिष्ठ, तर्कसिद्ध सर्वकालिक हिंदुत्व के प्रवक्ता, द्रष्टा-भविष्यचिंतक भी थे। अंडमान के तट को दूर से देखते ही, जहां उन्हें दो कालापानी का दंड भुगतने के लिए लाया जा रहा था, उनके मन में विचार उठे थे अरे! यह तो हिंदुस्थान के समुद्र का पूर्व की ओर का द्वार ही है, जहां भविष्य में भारतीय नौ-सेना का एक बलिष्ठ सैनिकी अड्डा स्थापित होगा, जो पूर्व की ओर से होनेवाले किसी भी आक्रमण का प्रथम प्रत्याघात कर देश की रक्षा करेगा। उनका यह स्वप्न सुन कारागार के अधीक्षक ने उपहास करने के लिए उनस…

" लालू की लालटेन करने लगी है - जग-बुझ " तेल कंहीं से नहीं मिल पा रहा ! ???? - पीताम्बर दत्त शर्मा ( विश्लेषक )

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              लोकसभा चुनाव से ठीक पहले बिहार में लालू प्रसाद यादव को तगड़ा झटका लगा है. लालू की पार्टी राष्ट्रीय जनता दल के 13 विधायकों ने बगावत कर दी है. आरजेडी के 22 में से 13 विधायकों ने विधानसभा सचिव को पत्र लिखकर सदन में अलग से बैठने की व्यवस्था करने की मांग की है.
इन 13 विधायकों में अब्दुल गफूर, सम्राट चौधरी, राघवेंद्र प्रताप सिंह, ललित यादव, इनाम उल हक, दुर्गा प्रसाद सिंह, चंद्रशेखर के नाम सामने आ रहे हैं. सूत्रों के मुताबिक ये 13 विधायक पार्टी से अलग होना चाहते हैं और इसी को लेकर इन्होंने विधानसभा के अध्यक्ष को अलग बैठने के इंतजाम के लिए पत्र लिखा है.

इस वक्त बिहार विधानसभा में नीतीश कुमार की पार्टी के 116 विधायक हैं. इन बागी विधायकों में से एक सम्राट चौधरी का दावा है कि विधानसभा अध्यक्ष ने सदन में उनके आरजेडी से अलग बैठने की मांग को मान लिया है. सम्राट चौधरी का दावा है कि उनके साथी जेडीयू में शामिल होना चाहते हैं.
आरजेडी के बागी विधायक सम्राट चौधरी ने कहा कि नीतीश को छोड़ बिहार में सेकुलरिज्म का झंडा बुलंद करने वाला अब कोई नहीं है. इसलिए हम जनता दल यूनाइटेड में विलय चाहते हैं. …

" फिर वो ही राजनितिक " गोबर " इकठ्ठा करना क्यों ज़रूरी है भाजपा हेतु " - पीताम्बर दत्त शर्मा

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         देशवासियों और सभी राज नेताओं को ये भलीभांति ज्ञान है कि कुछ नेता " अवसरवादी " हैं , खुराफाती हैं बे-ईमान हैं और विदेशी एजेन्सियों की  कठपुतलियां मात्र हैं, तो क्यों भाजपा का हाई-कमाण्ड  ऐसे नेताओं से या दलों से चर्चा कर रहा है आगामी सरकार में हिस्सेदार बनाने को !! क्या भाजपा वाले अटल जी के साथ हुई " दुर्गति " को भूल गये !! क्या सत्ता पाना ही हमारा उद्देश्य है !! अगर जनता नहीं मौका देती तो हम सबको राजनीति  से ही त्यागपत्र दे देना चाहिए और अपने अपने घरों में बैठ जाना चाहिए संन्यास लेकर !
                    यही नियम बना दिया जाना चाहिए कि  एक बार चुनाव हार गया वो दोबारा चुनाव लड़ ही ना पाये ! अपने आप वंशवाद  समाप्त हो जाएगा !! अगर ऐसा सम्भव नहीं है तो दल व्यवस्था को समाप्त करके हर कोई अलग-अलग चुनाव लड़े और बाद में प्रधानमंत्री या मुख्यमंत्री चुना जाए !! लेकिन इन नेताओं ने सारी  व्यवस्था को ही अपनी सुविधानुसार ढाल दिया है !!
                        इसी का असर ये हो गया है कि चाहे वो मेधा पाटकर हो या केज़रीवाल , अन्ना जी हों या फिर कोई विचारक-पत्रकार सबको इन राज…

" 15 वीं लोक सभा का विदाई समारोह , भावुक हुए नेता , लेकिन सच में " विदा " कितने सांसद होंगे असल में " - पीताम्बर दत्त शर्मा ( विश्लेषक )

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एक हिंदी कॉमेडी फ़िल्म का डायलॉग था कि " बापू पैदा होने में तो 9 महीने लगे और मरने में 90 साल लगाएगा क्या "?? कई बार असल जीवन में भी ऐसा आभास होने लगता है कि ये अब चले ही जाएँ तो सबके हित में हैं !! इसी तरह से जब टीवी एंकर कल समाचारों में ये बता रहे थे कि आज लोक सभा का अंतिम दिन था , 15वीं  लोक सभा में जितने सांसद चुन कर आये थे अब आगे उनमे से कौन कौन नेता 16 वीं लोक सभा में आ सकेंगे , ये कोई नहीं जानता !
                      करमचारी 60 साल की उम्र में रिटायर हो जाता है लेकिन ये नेता मरते दम तक " साथ " नहीं छोड़ते !! काम करते ही रहते हैं , किसके हित हेतु ये पता नहीं चल पाता !! किसीको !!पहले वाले नेता तो राजनीती को देश सेवा मानकर शासन चलाते  थे अब  वाले नेता तो अनाप-शनाप कमाने हेतु " व्यपार " समझ कर राजनीति करते हैं !
                   हमारे अडवाणी जी को तो " फादर आफ हॉउस " की उपाधि भी दे दी गयी !! जिससे वो भावुक हो गए , ये सोचकर कि U.P.A.वाले उन्हें कितना मान दे रहे हैं , लेकिन भोले आडवाणी जी ये नहीं समझ रहे कि केंद्र में सरकार के साथ ज्यादा &quo…

प्रस्तुतकर्ता - सूबेदार जी पटना - " मखतब-मदरसों से भारतीय संस्कृति और राष्ट्रवाद को होता खतरा " -----------!

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               देश आज़ादी के पश्चात् देश में मदरसों की संख्या नगण्य थी १९७७-७८ में यह संख्या बढ़कर ५८ से सौ तक थी यह सरकारी आकड़ा है ९० के दसक में यह संख्या बढ़कर २० हज़ार हो गयी जब हम इसका विश्लेषण करते है कि इन सबका बढ़ाना भारतीय परिवेश में कितना महगा पडेगा --! इसका विचार तो करना चाहिए, क्या भारतीय संस्कृति समाप्त करने पर तुले है ये मदरसे-! फिर राष्ट्रीयता पर इसका क्या प्रभाव पड़ रहा है! भारतीय मीमाशंकों के लिए यह विचारणीय विषय है।
           क्या है भारतीय संस्कृति-? सनातन काल से चली आयी ऋषियों-मुनियों द्वारा हजारों-लाखों वर्षो की तपश्चर्या के पश्चात इस मानवतावादी संस्कृति का निर्माण हुआ जिसे हम हिन्दू संस्कृति, हिन्दू धर्म अथवा सनातन धर्म कहते हैं, हमारी भारतीय संस्कृति का निर्माण नदियों के किनारे जंगलों व हिमालय की कंदरावों मे ऋषियों-मुनियों ने बड़ी योजना पूर्वक किया, एक अरब सत्तानवे करोङ पचासी लाख वर्ष पूर्व हमारे वेदों को भगवान ने हमे दिया जो ऋषि विश्वामित्र, अगस्त, लोमहर्षिनी, लोपमुद्रा, दीर्घतमा, ऐलुष, जमदग्नि, ऋचिक और परसुराम जैसे ऋषियों के कंठो मे आकर इनहोने इसके दर्शन किए य…