Thursday, December 30, 2010

nav warsh mangalmya ho ! ! ! !

प्रिय पाठक मित्रो ,प्यार भरा नमस्कार  ! आप सब को नया साल मुबारक हो  ! कष्ट अगर नहीं हो तो खुशियों का आनंद नहीं आता ! इसलिए मेरी परमात्मा से विनती है कि कष्ट हमें उतने ही देना जितना हम सह सकें खुशियाँ हमें इतनी देना जितनी हम सब में बाँट सके  !! हम सब आशावादी बने ,यही मेरी कामना है !कोई भूखा पेट नहीं सोये !                                 फिर मिलेंगे                                                                                 धन्यवाद् !  पीताम्बर दत्त शर्मा                                                                                                                            

happy new year !!!! ! ! ! aasha par sansaar tika hai ------------! ! !!!

                                                                                                                                                  

Monday, December 27, 2010

wah ! ! ! uma ji wah ----------------------

एक कहावत है कि ईमानदारी पर धरती टिकी है ! इस कहावत को उमा भारती जी ने सही साबित कर दिया है !आज वे मान गई कि बी .जे .पी .में भी भ्रष्टाचार है !या यूँ कहें कि कहा आज है जानती तो पहले से थी ! फिर भी कहना होगा वाह उमा जी वाह ! ! ! शरीफ आदमी जाए तो जाए कहाँ ? ? ? मंदिर से लेकर राजनीती तक पापी ही पापी भरे पड़े हैं ! गुरु गोबिंद सिंह जी ने कहा था कि सवा लाख से एक लडाऊं तभी गोबिंद सिंह नाम कहाऊं ! लेकिन आज सिंह यानी शेर हैं कहाँ ? ? ?  आदमी तो दोगला और थाली का बैंगन हो गया है !कोई लाखों में एक शेर और शरीफ होता भी है तो नक्कार खाने में तूती की आवाज साबित होता है परमात्मा ने जब से इन्सान नामक जीव बनाया है तब से स्वयं भगवान को कितने ही अवतार लेने पड़े हैं और नजाने कितनी बार महापुरश बन कर प्रवचन दिए हैं परन्तु आदमी है की सुधरता ही नहीं ! ! ! !  बाबा राम देव जी भी सत्य की अलख जगाये बेठे हैं लेकिन पतानहीं जनता उनको कितना समर्थन देती है और कितने शरीफ लोग उनके साथ जुड़ पाते हैं ! आगे आगे देखिये होता है क्या ? ? ?  हे रा ---------------------------म  -------------नमस्ते ! ! ! जी

Friday, December 24, 2010

IS KALYUG MAIN FANSI SE BARHI SAJA KYAA??????????????????????

पाठक मित्रो ,कलयुग में विश्व के जयादातर देशों में फांसी को ही सबसे सख्त सजा समझा जाता है ! वंही कई देश इसे अमानवीय कदम बताते हैं !उनका मानना है कि हम अगर इन्सान को जिन्दा नहीं कर सकते तो मारने का भी हक़ हमें नहीं है ! भारत कि मौजूदा सरकार ने तो पद से त्यागपत्र देने को ही सबसे सख्त सजा मान लिया है !तभी तो जितने भी कांग्रेस पार्टी के लोगों ने घपले किये उनको त्यागपत्र दिला दिया ! सी .बी .आई . से छापे डलवा दिए , एक दो महीने अन्दर कर दिया ! ज्यादा हुआ तो दस पंद्रह साल केस चला दिया ------ लेकिन सजा किसी को नहीं हुई ! है न मानवीय अधिकारों कि रक्षक मनमोहन सरकार ??????????   मिडिया भी सुखराम ,कप्तान सतीश शर्मा ,आदि आदि को भूल जाता है , जनता तो है ही भूलने के लिए ,और करे भी क्या ? न्यूज चेनल वाले इतने ऊटपटांग प्रोग्राम दिखाते रहते हैं एक स्केंडल अप टू डेट कार्यक्रम बनाकर नहीं दिखा सकते  ??? चाइना में एक भ्रष्टाचारी की ही नहीं उसके सारे रिश्तेदारों की     संपत्ति जब्त करली और उसे सारी उम्र की कैद दे दी !---फ़ौरन निर्णय !!!!!   -------------------             बी .जे .पी.के राष्ट्रीय अध्यक्ष कहते हैं कि येदियोरापा का अपनों को जमीन सस्ती कीमत पर देना अनेतिक तो है पर गैर क़ानूनी नहीं ---------!!!!!!   वाह  भाई वाह शराफत हो तो ऐसी हो वरना न हो ! हे राम !!!!!!!!!!----     मोटा बेशरम ---------- मोटा नेता !!!!!!!

Thursday, December 23, 2010

Monday, December 13, 2010

sonia ji aakhir bol parrin------------------manmohan mast--------!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!! ?????????????????

                             लो जी सोनिया जी बोल पढ़ीं --जे.पी.सी .मंजूर नहीं .पहले ही बी .जे .पी .वाले घोटाले करने के सारे गुण सीख गए हैं ! भ्रष्ट मुख्यमंत्रियों को कैसे बचाया जाता है यह भी जान गए !चंदा कैसे लिया जाता है यह भी सीख लिया !!!!!!! अब अगर सब कुछ सीख गए तो आप कि पार्टी विद डिफरेंस वाली नहीं रह जाएगी ! अटल जी के  स्टाइल में --- यह अछी बात नहीं है !                                     मनमोहन जी को क्या संसद नहीं चली तो ? विपक्ष ढीठ है !उसे देश कि चिंता नहीं है !धन देश का ख़राब हुआ मुझे क्या ? सोनिया जी हैं ना !!! अपुन तो भार मुक्त हैं ! बुद्धिजीवी ,अखबार वाले ,ओउर टीवी वाले शोर मचाते थक जायेंगे !------बोलो जय श्री राम !!!!!!!!!  नमस्ते !!!!!!!!!!!

Saturday, December 4, 2010

itani shakti mujhe dena data................!

अभिनन्दन के पश्चात् परमात्मा से वरदान मांगना चाहता हूँ कि मुझे इतनी शक्ति देदो कि जब भी मैं कहूं एक भ्रष्टाचारी मर जाए तो सच हो जाए ! इस देश के संविधान से तो कोई भ्रष्टाचारी सजा प् नहीं सका है !कभी तो इस देश में प्याज के दाम पर सरकार चली जाती है आज सब चीजों के दाम बढ़ गए कुछ भी नहीं हो रहा !इतने घोटाले सामने आ रहे है मंत्रिओं को पद चला गया है !प्रधानमंत्री व सोनिया जी मस्त हैं जनता कई समस्याओं से ग्रस्त है !मन में आता है कि सभी दोषिओं को एक मिनट में दंड सुनादू  किसी फ़िल्मी हीरो की तरह !परन्तु मैं संविधान तोढ़ नहीं सकता ! प्रधान मंत्री ,राष्ट्रपति बन नहीं सकता ! न्यायाधीश भी बेबस    हैं !                                                                          लोकतंत्र में जनता ही सबकुछ है वही क्रांति ला सकती है !जागो जनता जागो ............................................. नहीं जाग रही अब क्या करूँ ! आप ही बतायिए !

Monday, November 22, 2010

MERI AAWAZ SUNO

आप का स्वागत है . मेरा अभिवादन स्वीकार करें . भारत में यदि लोकतंत्र का पांचवां खम्बा यानि पत्रकारिता नहीं होती तो इस देश का भगवान ही मालिक होता कलयुग में शराफत की बात करना प्रकिरती का विरोध करना ही होगा .शास्त्रों में लिखा हे की परमात्मा की आगया के बिना पत्ता भी नहीं हिलता .तो गोर करने वाली बात यह है की हम क्यों शोर मचा रहे हैं .क्या सचमुच हम जनता के हितों की खातिर लिख बोल रहें हैं ऐसा लिखबोल कर हम अपनी दुकान तो नहीं चला रहे .गीता में लिखा है की जब अत्याचार बढ़ता है तो भगवान अवतार लेते हैं और दुष्टोंका संघार करते हैं .तो फिर सवाल उठता है की हम कौन होते हैं शोर मचाने वाले .                                            हिन्दू ग्रन्थों के अनुसार इन्सान के अन्दर एक और इन्सान होता है जिसे आत्मा कहते हैं ,उस आत्मा में परमात्मा रहते हैं .जिन्दगी के इस नाटक में जिस वकत जिसने जो रोल निभाना है उस वकत परमात्मा उस मनुष्य की आत्मा में वेसे ही विचार भर देते हैं चुम्बकीय शक्ति द्वारा क्योंकि चुम्किया शक्ति से ही सारी सृष्टि चलती है . यही साइंस कहती है .कुछ लोग अपनी बुधिका प्रयोग कर के अपना फायदा भी निकाल लेते हैं .उस में कोई बुराई नहीं है .क्योंकि बुधि भी तो भगवान ने ही दी है                                                                    मेरा भी मन कई वर्षों से भ्रष्टाचार मिटाने को कर रहा है लेकिन ब्लॉग बनाने के एक माह बाद भी ये नहीं सोच पाया की इसमें से अपना फायदा कैसे करूँ .अतः अपने फायदे बिना आज से ब्लॉग में लिखकर रोज किसी न किसी भ्रष्टाचार की घटना का न केवल जिक्र किया करूँगा !बल्कि आपके विचारों को भी जानना चाहूँगा        

BHAGWAN BHROSE HINDUSTAN

सभी पाठकों को मेरा सादर नमस्कार ! स्वागत 1 विष्वके सबसे विशाल लोकतंत्र में पांचवें स्तम्भ का विशेष स्थान हे ! जब भी इस देश में भ्रष्टाचार उजागर होता हे तो उसमे पत्रकारिता से सम्बंधित लोगों का सहयोग अवश्य होता हे !ये लोग न्याय पालिका ,जनता एवं कार्यपालिका को सक्रिय करने में सहयोग करते हे ! राजा महाराजाओं के समय में यह कार्य धर्मगुरु किया करते थे !आज का मीडिया इन कार्यों को करते हुए अपना फायदा भी कर लेते हैं                  इसी लिए मेने बिना किसी स्वार्थ के यह ब्लॉग शुरू किया है !हर सप्ताह रविवार को मै किसी न किसी भ्रष्टाचार के विषय पर अपने विचार लिखा करूँगा !आज कर्नाटका के मुख्यमंत्री श्री येद्दियोरप्पा जी के सम्बन्ध में मेरी सोच यही हे की जाँच होने तक उन्हें पद पर नहीं रहना चाहिए !आज हर व्यक्ति दुसरे की तरफ उंगली करके दोषारोपण करता हे !परन्तु हम सब कहीं न कहीं दोषी हे !सारी व्यवस्था बदलनी होगी !या सारे दोषियों को फांसी देनी होगी !सब को फांसी कोई दे नहीं सकता !लेकिन संविधान बदल सकते हे ,प्रकिर्यायें बदल सकते हे !उस के लिए फिर नेताओं के पास जाना होगा !ऐसा नेता कहाँ से लायें जादू तो किसी के पास हे नहीं !तो क्या फिर इस देश को किसी तानाशाह की जरुरत है !मै कहूँगा हाँ !!! इस देश को सही तानाशाह की जरुरत है चाहे कम समय के लिए ही सही , तभी इस देश मै सुधार हो सकता है                                                                                           
              मेरे इन विचारों को आप से पहले भगवान जान  गए ! वे बोले वत्स ! मैंने जो कलयुग बनाया उसका क्या ? मै बोला आप क्यों चिंतित हो रहे हो ऐसा मुमकिन ही नहीं हे ! मै तो भोली भाली जनता को राजी कर रहा था !वो तो इतने मै ही वाह वाह करने लग जाती !अगर श्री राहुल गाँधी के किसी गरीब के घर जाने रोटी खाने से जनता बगोबाग हो सकती हे तो मेरी बातों से क्यों नहीं !तो रिजल्ट यह निकला की ये असम्भव है !

सचमुच भारत का समाज एक अजीब समाज है। ********* ज्यादा दिन नहीं हुए, कोई तीन-साढ़े तीन साल पहले जब उस समय के शासक लूट के अनेक नए आयाम गढ़ ...