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Showing posts from October, 2015

" नेताओं में एक "गुण" भी है , हमें वो ही इनसे सीखना चाहिए जी "!! - पीताम्बर दत्त शर्मा (लेखक-विश्लेषक) मो. न. - 09414657511 .

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   मित्रो ! आज करवाचौथ का व्रत है ! हिन्दू सभ्यता से जुडी हर धर्म की महिलाएं आज अपने उस "दुश्मन" की लम्बी उम्र हेतु करवा-चौथ का व्रत रखती हैं जिनसे वो लगभग रोज़ाना ही "गदर"करतीं हैं ! ये खूबी स्त्रियों के साथ-साथ हमारे नेताओं में भी विशेष रूप से पायी जाती है ! वो भी चुनावों के समय और जनता व पत्रकारों के सामने एक दुसरे को गरियाते रहते हैं लेकिन वो ही नेता शादियों में एक दुसरे की सेवा करते भी नज़र आते हैं !
                     लेकिन हम उन्हें देख कर आपस में लड़ तो लेते हैं लेकिन एक दुसरे के गले मिल नहीं पाते ! यहां तलक कि हम कत्ल करने या देश निकले की भी बात कर देते हैं !क़त्ल करने के भी आजकल अलग-अलग तरीके अपनाये जा रहे हैं जी ! हसीनाएं जहां अपनी अदाओं और नज़रों से कत्ल कर देती हैं , वहीँ ,शायर, लेखक,वैज्ञानिक और इतिहासकार अपने सन्मान लौटाकर देश के प्रधानमंत्री को कत्ल करने की कोशिश करते नज़र आते हैं !"भावुक" कहीं के ना हो तो !!
                        लेकिन जैसे हर बात की कोई ना कोई सीमा होती है , वैसे ही "दुश्मन" के साथ प्यार जताने की भी सीमा होती है जी…

महाजाल पर सुरेश चिपलूनकर (Suresh Chiplunkar): Sanjeev Bhatt and Congress Dirty Tricks (Part 2)

महाजाल पर सुरेश चिपलूनकर (Suresh Chiplunkar): Sanjeev Bhatt and Congress Dirty Tricks (Part 2): पर्दाफ़ाश होते काँग्रेसी षड्यंत्र और झूठ... (भाग..२)   ( पिछले भाग से जारी ... पिछला भाग यहाँ क्लिक करके पढ़ें...)  काँग्रेस के बु...

महाजाल पर सुरेश चिपलूनकर (Suresh Chiplunkar): Congress Dirty Tricks on Coffin and 2G Scam

महाजाल पर सुरेश चिपलूनकर (Suresh Chiplunkar): Congress Dirty Tricks on Coffin and 2G Scam: पर्दाफ़ाश होते काँग्रेसी षड्यंत्र और झूठ...   भारत में ये कहावत अक्सर सुनी जाती हैं, कि “जब मुसीबतें और बुरा वक्त आता है, तो चारों तरफ स...

सत्ता से दो दो हाथ करते करते मीडिया कैसे सत्ता के साथ खडा हो गया ???? - - साभार - श्री पुण्य प्रसुन्न वाजपेयी जी

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अमेरिका में रुपर्ट मर्डोक प्रधानमंत्री मोदी से मिले तो मड्रोक ने मोदी को आजादी के बाद से भारत का सबसे शानदार पीएम करार दे दिया। मड्रोक अब अमेरिकी राजनीति को भी प्रभावित कर रहे है। ओबामा पर अश्वेत प्रेसीडेंट न मानने के मड्रोक के बयान पर बवाल मचा ही हुआ है। अमेरिका में अपने न्यूज़ चैनल को चलाने के लिये मड्रोक आस्ट्रेलियाई नागरिकता छोड़ अमेरिकी नागरिक बन चुके है, तो क्या मीडिया टाइकून इस भूमिका में आ चुके हैं कि वह सीधे सरकार और सियासत को प्रभावित कर सके या कहे राजनीतिक तौर पर सक्रिय ना होते हुये भी राजनीतिक खिलाडियों के लिये काम कर सके। अगर ऐसा हो चला है तो यकीन मानिये अब भारत में भी सत्ता-मीडिया का नैक्सेस पेड न्यूज़ से कही आगे निकल चुका है। जहाँ अब सत्ता के लिये खबरों को नये सिरे से बुनने का है या कहे सत्तानुकुल हालात बने रहे इसके लिये दर्शको के सामने ऐसे हालात बनाने का है जिस देखते वक्त दर्शक महसूस करें कि अगर सत्ता के विरोध की खबर है तो खबर दिखाने वाला देश के साथ गद्दारी कर रहा है। यानी पहली बार मीडिया या पत्रकारिता की इस धारणा को ही मीडिया हाउस जड़-मूल से खत्म करने की राह पर निक…

"अन्तर" !! मन की बात और दिमाग की बात का" तुम क्या जानो ?? - पीताम्बर दत्त शर्मा (लेखक-विश्लेषक) मो. न. - 09414657511

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कई लोग मन और दिल को एक ही मानते हैं , लेकिन मैं और मेरा सनातन धर्म एक नहीं मानते क्योंकि डाक्टर लोग दिल का तो ऑपरेशन कर सकते हैं लेकिन मन का ऑपरेशन नहीं ! दिल की फरमाइशें तो फिर भी जैसे-तैसे पूरी हो सकती हैं लेकिन मन की फरमाइशें अपार होती हैं !!दिल रहता तो हमारे शरीर में ही है , लेकिन हमारा मन कुछ सेकिंडों में ही लंदन-जापान घूम कर आ सकता है जी !! इन दोनों के इलावा एक हमारे शरीर में "दिमाग" नाम का भी पुर्ज़ा होता है जो हमारे शरीर के साथ-साथ हमें भी जीवन भर चलाता है ! कई लोग तो अपने दिल-दिमाग और मन तीनो के गुलाम होते हैं जी !और कुछ लोग सिर्फ दिमाग की बात ही मानते हैं ! ऐसे महापुरुषों को संत पुरुष कहते हैं जी जिन्होंने अपने मन को अपने काबू में कर रख्खा होता है !उनका मन कभी कुछ "अजब-गज़ब"करने को कहता भी है तो "योगी"पुरुष अपने मन को डांटते हैं और कहते हैं कि चल हट रे मन !! मई तेरे कहने पर नहीं चलना ! तो वो ही करना है जो मुझे मेरा दिमाग कहेगा ! समझे !!
                       आज कल हमारे मोदी जी बड़ी मन की बात भारत की जनता को सुना रहे हैं  ! उन्होंने तो अपनी तपस्या …

भारत का "माहोल" क्यों,किसके लिए,कैसे,और कौन बिगाड़ रहा है ? "फायदा" किसको,कितना और कैसा होगा ? - पीताम्बर दत्त शर्मा (लेखक-विश्लेषक) - मो. न. - 9414657511

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अनजाने में गलती एक बार हो सकती है , दो बार हो सकती है , लेकिन हर बार जो हो ,वो गलती नहीं "योजना या षड्यंत्र" हो जाता है जी ! हमारे देश के कुछ पत्रकार,नेता,समाजसेवी,और लेखक ,सिर्फ और सिर्फ मोदी सरकार को हर अन्याय का जिम्मेदार बताने में लगे हुए हैं ! जी हाँ ! हम आज भारत में बिगड़ रहे माहोल की बात कर रहे हैं !जिसकी चिंता , भारत के "पक्षी,विपक्षी,आम जन,लेखक और पत्रकारों के इलावा विदेशी"तलक कर रहे हैं ! कई तो " घड़ियाली आंसू "तक बहा रहे हैं ! ऐसे लग रहा है जैसे उन सबके "अब्बु"अल्लाह को प्यारे हो गए हों ! 
                  हमारे मोदी सरकार के मंत्री तक चुप-चाप बैठे हैं ,जैसे दुबक कर बैठने से वो बच जायेंगे ?लगता है जैसे इनकी कोई "दुखती-रग" कांग्रेस के नेताओं के हाथ में है ?नए बने नेताओं से पहले " घुमा-फिरा "कर प्रश्न पूछना , फिर कोई "प्वॉइंट"ढूँढ कर विरोधी नेतओं से भड़कीले बयान लेना ,फिर उस पर बहस करना और दिनभर रीपीट करना क्या दोष पूर्ण पत्रकारिता नहीं है ?वो ही अगले दिन समाचार-पत्रों की हेड़लाईन बनना, दुश्मन देशों को भी विरोध…

रावण जी की " गैस ट्रबल "!!ऐसे दूर हुई !! आप भी पढ़ें मित्रो !!- पीताम्बर दत्त शर्मा का निवेदन !

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प्रिय ब्लॉगर मित्रों,
प्रणाम |

आज हमारे बड़े भाई श्री नीरज चतुर्वेदी जी ने हमें रामायण से जुड़ा एक 'आधुनिक' प्रसंग सुनाया ... वही आप सब को पढ़वा रहा हूँ |

"रावण का चमत्कार या राम नाम का...पावर...??" ~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~

श्री राम के नाम से पत्थरो के तैरने की 'न्यूज़' जब लंका पहुँची, तब वहाँ की 'पब्लिक' ने सोशल मीडिया मे  काफी 'गौसिप' किया कि भैया जिसके नाम से ही पत्थर तैरने लगें, वो आदमी क्या गज़ब होगा।
इस तरह की बेकार की अफ़वाहों से परेशान रावण ने तैश में आकर घोषणा करवा दी कि कल 'रावण' के नाम लिखे हुए पत्थर भी पानी में तिराये जायेंगे। और अगले दिन लंका में सार्वजनिक अवकाश घोषित कर दिया गया।
निश्चित दिन और समय पर सारी जनता रावण का चमत्कार देखने पहुँच गयी। उचित समय पर रावण भी अपने भाई - बँधुओं , पत्नियों तथा 'स्टाफ' के साथ वहाँ पहुँचे और एक भारी से पत्थर पर उनका नाम लिखा गया।
मजदूर लोगों ने पत्थर उठाया और उसे समुद्र में डाल दिया -- पत्थर सीधा पानी के अंदर ! सारी पब्लिक इस सब को साँस रोके देख रहे थी जबकी रावण लगातार मन ही मन…

"चैन से हमको कभी,तुमने सोने ना दिया नेता जी " !!- पीताम्बर दत्त शर्मा (लेखक-विश्लेषक)मो. न. - 9414657511 .

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फिल्म में इस तरह के एक गीत को एक हीरोइन ने गाया था ! जिसके अंदर उसकी विरह और उसका प्यार झलकता था !वो अभिनय इतना बढ़िया था कि दर्शक को भी यही लगता था कि उसकी ही भावना को प्रकट किया जा रहा है !इसी तरह का एक वक्तव्य हमारी दिल्ली के मुख्यमंत्री केजरीवाल जी ने दिया !उन्होंने ने कहा कि "मैं प्रधानमंत्री मोदी जी को चैन से सोने नहीं दूंगा अगर उन्होंने हमें दिल्ली का पोलिस डिपार्टमेंट नहीं सौपा तो " !उनके इस कथन में भी एक विशेष तरह की दुश्मनी झलक रही थी,जैसे गुड में ज़हर मिला हो !
          आखिर क्यों चाहिए उनको दिल्ली का पोलिस-विभाग ??क्या बाकी सारे विभाग सही चल रहे हैं ??नहीं !!दरअसल में दिल्ली पोलिस के कुछ लोगों से उन्होंने बदला लेना है ! क्योंकि जब वो आंदोलन रत थे तो उन्हें बहुत 'घसीटा"गया था,शायद इसीलिए उन्हें पोलिस विभाग चाहिए ही चाहिए !उन्होंने ये भी कहा कि वो शीला दीक्षित जैसे नहीं हैं !वैसे तो मोदी जी के कार्यकाल शुरू होते वक़्त शीला जी मुख्यमंत्री थीं ही नहीं !तो उनसे तुलना कैसी ?वैसे तो केजरीवाल जी के हर बयान से उदण्डता-शरारत और षड्यंत्र नज़र आता ही है लेकिन इस बार ज़रा…

हिन्दुस्तान में हिन्दुओं के सभी छोटे-बड़े त्योहारों को केंद्र एवं राज्य स्तर पर सरकारी स्थानों में मनाया जाना आवश्यक किया जाए ! - पीताम्बर दत्त शर्मा ( लेखक-विश्लेषक) मो. न. - 9414657511

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   भारत को आजाद हुए ६५ वर्ष हो गए हैं लेकिन आज तक हमें अपने त्यौहार सरकारी स्तर पर मनाने की आजादी नहीं है ! केवल आजादी के दो त्योहारों से ही हम अपनी देश भक्ति तो दिखा पाते हैं लेकिन हमारी संस्कृति क्या है क्यों है और किसके लिए है, ये हमने आज तलक विश्व को आधिकारिक तौर पर नहीं बताया है ! क्यों हम ऐसा नहीं कर पाये ? क्यों ये आवश्यक नहीं समझा गया ? हिन्दुस्तान हिन्दुओं का था , हिन्दुओं का है और हिन्दुओं का रहेगा !! मानवीयता , आत्मीयता और सर्व धर्म समभाव हमें किसी से सिखने जाने की आवश्यकता नहीं बल्कि विश्व को हमने सिखाया है कि "बंदर"से  आदमी कैसे बना जाता है !
                    फिर भी अमेरिका अपने आपको विश्व में "जगत गुरु" सिद्ध करने की असफल कोशिश करता रहता है ! उसकी ये गुंडा गर्दी चलने देने में उसके क़र्ज़ तले दबे चंद यूरोपीय देश और अन्य देशों में विभिन्न रूपों में छिपे बैठे उसके एजेंट मदद करते और करवाते हैं ! ऐसे ही कई एजेंट भारत में भी विराजमान हैं ! जिन्होंने पिछले पंद्रह महीनो से मोदी सरकार और भारत के खिलाफ इतना ज़हर उगला है कि अमेरिका को एक हथियार भारत के खिलाफ मिल …

My thoughts My writings: विरोध का ये कैसा तरीकादादरी कांड और गुलाम अली का क...

My thoughts My writings: विरोध का ये कैसा तरीकादादरी कांड और गुलाम अली का क...: विरोध का ये कैसा तरीका दादरी कांड और गुलाम अली का कंसर्ट रोके जाने और इस जैसी अन्य घटनाओं का एक छत्र विरोध सह रहे प्रधानमंत्री नरेंद्...

देश-प्रेम से जुड़े लेखको-साहित्यकारो !!जोर से जवाब दो इन पुरुस्कार लौटाने वाले वामपंथी फासीवादीयों को !!- पिताम्बर दत्त शर्मा (लेखक-विश्लेषक) मो. न. - 9414657511.

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   कांग्रेस और उसके "माल"पर पलने वाले नेता,लेखक,पत्रकार साहित्यकार,इतिहासविद,अफसर और शिक्षाविद मित्रो ! आप सबको एक निवेदन है कि जनता ने आपको 2014 के लोकसभा चुनावों में नापसन्द घोषित कर दिया है !कृपया अब आप भारत देश पर एक एहसान कीजिये ! ना तो पूर्व की तरह जगह-जगह लड़ाई-झगड़े-फसाद करवाओ और ना ही ये पुरुस्कार लौटाने जैसे नाटक कीजिए ! जनता आपके सारे खेल जान चुकी है ! पिछले 13 वर्षों से आप लोग जितना मोदी जी का विरोध करते हो जनता उनकी पार्टी को उतना ही ज्यादा चुनाव जितवा रही है !लेकिन आप सबको फिर भी समझ नहीं आ रहा है ! मोदी जी के प्रभाव से पूरा विश्व रंग गया है ! तो आप 10 साल शान्ति से बैठकर उचित मुद्दों पर जायज़ विरोध क्यों नहीं करते हो ?? क्यों रोज़ाना कोई नया षड्यंत्र घड़ कर आ जाते हो ?सत्ता पाने की इतनी ललक और हड़बड़ाहट क्यों???
               पहले तो भाजपा के पास सत्ता नहीं थी तो उनके समर्थक लेखक-कर्मचारी-साहित्यकार नहीं थे अब तो उनके समर्थक भी बनने लगे हैं तो पोलपट्टी तो खुलेगी न !इसलिए शांत हो जाओ और उचित समय का इंतज़ार करो !"अच्छे दिन आएंगे " की माला जपते रहो जी आप तो बस …