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Showing posts from July, 2017

"लोकतंत्र के चारों खम्बे ज़र्ज़र हो चुके,पांचवां खम्बा सोशल मीडिया ही बचाएगा शान हमारी"!! - पीताम्बर दत्त शर्मा (स्वतंत्र टिप्पणीकार)

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मैं बुरा या आप बुरे ?की लड़ाई से बाहर निकलते हुए ,कुछ आज ऐसी सकरात्मक चर्चा की जाए ,जिससे हमारे भारत का कुछ भला हो सके !ऐसी ही मुश्किलों का हल ढूंढने हेतु हम संसद में चर्चा करते हैं ! टीवी चैनलों पर बहस देखते-करते हैं !समाचार पत्रों के सम्पादकीय पढ़ते हैं ! इंटरनेट के साधनों का दोहन करते हैं !लेकिन कोई भी रास्ता नहीं निकलता ! क्योंकि हम रास्ता तो निकलना ही नहीं चाहते ,बल्कि हम तो किसी ना किसी तरह अपनी "रोटियां सेंकना" चाहते हैं ! रोटियां सेक सेक कर हम तो मोटे-ताज़े और बलवान हो गए लेकिन हमारा देश अपनी आभा खो चुका है !अपनी ताकत गवाँ चुका है !
                          हमने अपने ऊपर ना जाने कैसे-कैसे मोटे-मोटे लबादे ओढ़ लिए हैं !कोई सेकुलर बन गया तो कोई समाजवादी बन गया !कोई राष्ट्रवादी बन गया तो कोई दलितों का मसीहा बन गया !कोई हिन्दुओं का तो कोई मुसलमानो,ईसाईयों,सिख्खों,जैनियों और बौद्धों का खैरख्वाह बना बैठा है !लेकिन सच्चाई तो ये है की हम ना तो अपने बच्चों के हितेषी हैं ,ना अपने बुज़ुर्गों और समाज के तो देश दुनिया धर्म के तो हो ही नहीं सकते हम !हम इतने बड़े झूठे और मक्कार हैं कि हम …

"माया - मायावती की ", !!! - पीताम्बर दत्त शर्मा ( टिप्पणीकार)

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"फरेब और षड्यंत्र "रचने में माहिर आज का विपक्ष नित नए "ड्रामे"करता है ! सोचता है कि ऐसा करने से उनकी पार्टियों को जनता वोट दे देगी ! जनता एक दो बार तो इनके झांसे में आ सकती है ,लेकिन हमेशां जनता को बेवकूफ बनाया  नहीं जा सकता ! चाहे कांग्रेस हो या कॉमरेड,ममता हो या बहन मायावती , सब अपनी अदाओं से जनता को बरगलाने की कोशिश करते रहते हैं ! काम भाजपा भी नहीं है , लेकिन वो कभी अपने राष्ट्र-हित को दांव पर नहीं लगाती !कभी ये लोग तीसरा मोर्चा बनाते हैं तो कभी महागठबंधन !संसद को ना चलने देना ,दुश्मन देशों के मन को बहाने वाले कुकृत्य करना ,दुश्मन के पक्ष को मजबूत करने वाले बयान देना इनका काम हो गया है आजकल !सोशल मीडिया की सक्रियता ने इन्हें नंगा करके रख दिया है !
                         आज संसद में जिस बेशर्मी से राजयसभा के उप-सभापति जी को धमकाया गया है ,खुला चेलेंज दिया गया है ,ऐसा पहले कभी नहीं हुआ है ! पिछले कई सेशनों में ये देखा गया है कि "मिडिया-हाईप "हेतु पहले एक पार्टी का नेता जबरदस्ती बिना कोई नोटिस दिए नियमों को तोड़ते हुए ,अपना कोई मुद्दा रखता है ,फिर बड़ी चा…

"जो करना चाहिए ,वो करते नहीं,षड्यंत्र-फरेब अच्छा लगता है"! - पीताम्बर दत्त शर्मा (स्वतंत्र टिप्पणीकार)

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   जबसे ये इलेक्ट्रॉनिक मीडिया आया है ,तभी से भारत में जहाँ देखो उधर फरेब-षड्यंत्र ही नज़र आता है ! सोशल मीडिया ने इनके भेद खोले तो सही ,लेकिन अपने भेद बताये नहीं !शायद यही दुकानदारी है !जब किसी सार्वजनिक कार्य में दुकानदारी जुड़ जाती है तो वहाँ फिर फरेब और षड्यंत्र अपनी जगह अपनेआप बना लेते हैं !मज़े की बात ये है कि तब सच्चाई की बात भीफरेब और षड्यंत्र के साथ होती है !
                          अभी कल परसों दो दिन देश के "भरोसेमंद चैनल के विद्वान एंकर श्रीमान रविश कमर ने "फेक-न्यूज़"पर प्राइम-टाइम किया !मैंने सोचा अच्छा विषय है ,देखते हैं !लेकिन जैसे जैसे कार्यक्रम देखा ,तो ये विश्वास हो गया कि अब बिना फरेब के कोई कार्यक्रम देखने की आशा करना भी एक फरेब होता जा रहा है !उस कार्यक्रम में भाई लोग बातें अमेरिका की बता रहे थे और उदाहरण हिंदुस्तान के दे रहे थे !हद्द हो गयी ये तो !क्या ndtv वाले दर्शकों को बेवकूफ समझते हैं ?क्या बातें घूमना केवल यही लोग जानते हैं जो एंकर और रिपोर्टर होते हैं ?अजीब ज्ञान होता है इनके कार्यक्रमों में आनेवाले प्रव्क्ताओं,विशेषज्ञों और नेताओं का ?शर्म आन…

"जनता हराती है,लेकिन वो हार नहीं मानते",क्या करें ? - पीताम्बर दत्त शर्मा (लेखक-विश्लेषक)

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सृष्टि की रचना के समय से ही सत्ता प्राप्ति हेतु संघर्ष होते आये हैं !लेकिन लोग न्याय और सत्यता का लिहाज़ करते थे ! नैतिकता का ध्यान भी रख्खा जाता था !हमारे भारत के राजा महाराजा ,इतने संवेदनशील,कि राजा राम चंद्र बनवास चले गए ,राजपाट छोड़ कर ,पिता का वचन रखने हेतु!आदि,आदि,आदि सैंकड़ों उदाहरण मिल जायेंगे त्याग के हमारे गौरवपूर्ण इतिहास में ,मैं अपना लेख लम्बा नहीं करना चाहता यहां सबका ज़िक्र करके !लेकिन सन 1857 तक तो सभी शासकों ने त्याग करके देश की आजादी हेतु अपना सर्वस्व त्याग दिया ,अपने प्राणों की भी परवाह नहीं करी !लेकिन मुगलों और अंग्रेज़ों के शासन की समाप्ति तक ऐसे भी उदाहरण सामने आने लगे जिनमे सत्ता के लिए कत्ल और भ्रष्टाचार बढ़ते चले गए !
                       सन 1947 में सत्ता प्राप्ति हेतु ही बंटवारा हुआ इस देश का !लेकिन राजाओं ने उस समय भी त्याग करके देश को एक माला में पिरोने का काम भी किया !हमारा नया संविधान बना !मापदंड तय किये गए !लोकतान्त्रिक व्यवस्था तैयार की गयी !राष्ट्र की सेवा करने हेतु "जन-सेवक"चुने जाने की व्यवस्था बनाई गयी !जो जनहित के काम करेगा उसे जनता जिताएगी,औ…

"जिसका कोई नहीं , वो हिन्दु है"! - पीताम्बर दत्त शर्मा (स्वतंत्र-टिप्पणीकार)

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एक फिल्म का गीत था कि "जिसका कोई नहीं,उसका तो खुदा है यारो !मैं नहीं कहता किताबों में लिखा है यारो ! बहुत ही अच्छा लगता था जब ये गीत फिल्म में अमिताभ बच्चन जी ने और असल में किशोर जी ने गया था ,या जब भी बजता था तो मन को एक शांति सी मिलती थी !क्यों? सवाल ये पैदा होता है कि क्यों हमें हिन्दू होते हुए भी शान्ति मिलती थी ,जब खुदा की तारीफ़ होती थी?क्योंकि हमें हमारे धर्म ने ये सिखाया कि अपने घर आये मेहमान का स्वागत करो!उसकी बात सुनो!उसे खाने-पहनने और सोने की जगह दो ! जितने दिन आपके पास रहना चाहे उसे रहने दो !आदि आदि !हमें ये भी बताया गया कि सत्य की हमेशां जीत होती है वोकभी मरता नहीं !शायद इसी विश्वास के चलते हमारे पुरखों ने अनेक छोटे मोटे धर्मों-पंथों को भारत में आने दिया ,बसने दिया और पनपने दिया !उस समय ये भी नहीं पता था किसी को कि ये देश केवल और केवल वोटों की गिनती पर चलेगा !राजनितिक दल और उनके नेता सभी राक्षसों का रिकार्ड तोड़ देंगे !सिर्फ ये देखेंगे कि वोट कैसे मिलते हैं और सत्ता कैसे हाथ में आती है !                       येन - केन -प्रकरेण सत्ता चाहिए !अन्यथा हम दंगे करवाएंगे,बलात्…

"हमउं प्रवक्ता रहन अपनी पार्टीन का "!का समझे ?- पीताम्बर दत्त शर्मा ( लेखक-समीक्षक)

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मित्रो ! एक लाईन बड़ी मशहूर हुई है कि "अगले जन्म मुझे बिटिया ही कीजो"! इसी तरह हमारे एक परम मित्र जो एक राजनीतिक पार्टी के प्रदेश पदाधिकारी हैं ,लेकिन फिर भी उदास -उदास से रहते हैं !कल मुझसे टकरा गए ! उनका कहना है कि हमारे राष्ट्रीय उपाध्यक्ष इतने मशहूर नहीं और समझदार नहीं हैं जितने हमारी पार्टी के प्रवक्ता लोग !क्योंकि इतने न्यूज़ चेनेल हैं उनमें इतने राजनीतिक बहस के कार्यक्रम आते हैं कि पूछिए मत !हर कोई उनके दिए गए वक़्तव्यों को सुनता समझता है और फिर प्रतिक्रिया देता है ! बड़े-बड़े नेता ज्यादा समझदार होते हुए भी पीछे बैठे रह जाते हैं ! इसलिए वो भगवन से यही मान करते नज़र आते हैं कि  हे भगवान् !!"अगले जन्म मुझे प्रवक्ता ही कीजो "!!अन्यथा इस गंदी राजनीति से हमें दूर ही रखियो !
                         मैंने कहा हे मित्र !ज्यादा लालच मत दिखाओ,प्रदेश पदाधिकारी हो ,ये कोई छोटी बात है ?वो बोले नहीं यार ! तुम नहीं समझोगे मेरे इस मर्म को !जब कोई टीवी चैनल  पर मुस्कुराता हुआ पार्टी की तरफ से किसी बात का जवाब देता है तो वो "मालिक"सा नज़र आता है !मैंने कहा कभी कभी वो गलत ब…