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Showing posts from January, 2015

"भारत के हर दुश्मन को कोंग्रेसी, सेकुलर और कॉमरेड ही क्यों पसन्द आते हैं "??- पीताम्बर दत्त शर्मा

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इस्लामिस्टों को कम्युनिस्ट क्यों अच्छे लगते हैं?
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लड़ाई से पहले कई गतिविधियाँ होती है. उसमें एक है शत्रु भूमि पर अपने लिए कुछ अनुकूल मानसिकता तैयार करना. ताकि जब युद्ध की घोषणा हो तो सैनिकों को शत्रुभूमि में प्रतिकार कम हो. इस के लिए कुछ अग्रिम दस्ते भेजे जाते हैं जो शत्रु के लोगों में घुल मिल जाते हैं. या फिर स्थानिक हैं जिनको अपनी तरफ मोड़ा जाता है. ये लोग प्रस्थापित सत्ता के प्रति असंतोष पैदा कर देते हैं ताकि जब युद्ध शुरू हो तब स्थानिक प्रजा -कम से कम- प्रस्थापित सत्तासे सहकार्य तो न करें. इस से भी अधिक अपेक्षाएं होती हैं लेकिन यह तो कम से कम.
.सत्ता की नींव कुरेद कुरेद कर खोखली करने में कम्युनिस्टों को महारत हासिल होती है. उनका एक ही नारा होता है – गरीबों का धन अमीरों की तिजोरियों में बंद है, आओ उन्हें तोड़ो, गरीबों में बांटो. बांटने के बाद नया कहाँ से लाये उसका उत्तर वे देते नहीं. रशिया और चाइना में कम्युनिज्म क्यों फेल हुआ उसका भी उत्तर उनके पास नहीं. खैर, मूल विषय से भटके नहीं, देखते हैं कि इस्लामिस्टों को कम्युनिस्ट क्यों अच्छे लगते हैं.
.सामाजिक विषमता को टार्गेट कर के कम्युनिस्ट …

" पी के " !! अपने धर्म के लोगों की विश्व में बिगड़ती छवि को सुधारने की एक असफल कोशिश मात्र भर है !!-पीताम्बर दत्त शर्मा ( लेखक-विश्लेषक-टिप्पणीकार )

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मित्रो ! कल मैंने आमिर खान अभिनीत पीके देखी ! जो बड़ी विवादित हुई थी ! सारी फिल्म देखने के बाद मुझे महसूस हुआ कि विश्व में उर्दू और मुस्लिम धर्म के हालात बहुत ही बुरे हैं ! हालाँकि जितनी मिठास उर्दू भाषा में है , उतनी किसी भाषा के बोलने में नहीं है ! लिखने में बड़ी मुश्किल भी ये भाषा है ! इसी लिए कई पाकिस्तानी और हिंदुस्तानी कवि, फिल्मकार और टीवी चैनेल वाले लोग इस भाषा को बढ़ावा हेतु प्रयास करते रहते हैं ,जो  उचित भी है !
          लेकिन आजकल मुस्लिम धर्म को अपनाने वाले लोगों को चरित्रवान और अन्य धर्मों के अनुयायियों को पाखंडी व धूर्त , दिखाया -बताया जा रहा है ! जिसके पीछे एक अंतर्राष्ट्रीय साज़िश दिखाई दे रही है ! हालांकि पीके फिल्म में नाम मात्र मुस्लिम धर्म की बुराइयां भी बतायीं गयीं हैं , जो पर्याप्त नहीं है ! हर धर्म को अपना प्रचार-प्रसार करने का पूरा-पूरा हक़ है , लेकिन इसके लिए दुसरे धर्म को बुरा कहना जरूरी क्यों है!?
             ऐसे चालाक लोगों के शिकार बड़ी आसानी से वो लोग भी हो जाते हैं जो मुस्लिम धर्म के अनुयायी नहीं होते लेकिन जो न्याय-प्रिय होते हैं !!हो सकता है उनके इस तरह के फ…

" ओबामा गए - आप और राहुल जी आएं या जाएँ क्या फर्क पड़ता है "??-पीताम्बर दत्त शर्मा

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  भारत के "विद्वान"टीवी उद्घोषकों में से एक रवीश कुमार आगे पता नहीं क्या , जी के अनुसार , ओबामा जी के दौरे से ऐसा कुछ भी नहीं विशेष घटा है कि जिसके ऊपर देश वासी नाचें-गायें ! उन्हें इस बात पर भी ऐतराज़ था कि देश में इतना उत्साह क्यों है ? मेरे भाई क्या सब कुछ आपको तुरन्त इसलिए बता दिया जाये क्योंकि आपको प्राइम-टाईम दिखाना है ?? कोइन भेद भी रख्खा जाये या नहीं ?? संविधान में शपथ दिलाने का काम राष्ट्रपति जी भला क्यों करते हैं ?? जनता को बताने और जनता पूछ रही है या जानना चाहती है के नाम पर आप जैसे कई लोग अपनी दुकाने भी चमकाते रहते हैं , साथ ही साथ विपक्षियों को भी खुश करते रहते हैं ताकि बाद में मीडिया - सलाहकार बन सकें " पचौरी " जी की तरह ?? 
                    अपने देश के महान नेता बने फिरते घूम रहे श्रीमान राहुल गांधी जी फरमाते हैं कि " इतनी देर हो गयी मोदी जी की सरकार बने को , अभी तक प्रचार ही कर रहे हैं , काम नहीं कर रहे "! इनसे कोई पूछे अभी तुम्हारा हिसाब तो करलें ?? देश को कांग्रेस मुक्त करके , फिर मोदी जी की सरकार का भी नतीजा निकाल लेंगे ! तुम ने साठ सा…