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Showing posts from November, 2012

" ये भारतीय नारी है - लाने वाली बीमारी है " ??

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आज जिस घटना का ज़िक्र मेरी पोस्ट पर है ., शायद वो आपको झकझोर दे .... एक सच ...... ज़रूर पढ़े ..... 
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दो दिन पहले भिलाई के कुछ पुराने मित्रो से शाम को वही टी-स्टाल पर मिलना हुआ., गप्पो के दौर के बीच में ., उनमे से एक मित्र ., जो की एक " सोनोग्राफी " सेंटर में टेक्नीशियन की पोस्ट पर कार्यरत है ., उसने अपने संस्थान में घटित घटना का वृत्तांत बताया ... उसने बताया 
की उसके संस्थान में दो दिन पहले एक व्यक्ति अपनी सुपुत्री जिसकी उम्र यही कोई सोलह - सत्रह वर्ष की होगी . उसे सोनोग्राफी टेस्ट के लिए लेकर आए .., उस युवती के पिता के अनुसार ., उनकी सुपुत्री को लगभग डेढ़ - दो माह से पेट में दर्द की शिकायत थी .., जिसके चलते डाक्टर की सलाह के अनुसार उन्होंने सोनोग्राफी करवाने का निर्णय लिया था ...


कुछ देर प्रतीक्षा करने के पश्चात उस युवती को सोनोग्राफी टेस्ट रूम में रेडियोलाजिस्ट के पास भेजा गया .., रेडियोलाजिस्ट ने जब युवती का टेस्ट किया तब वो अचंभव में पड़ गयी ... कारण कुछ और नहीं ., युवती ने दो माह के लगभग की अवधि का गर्भ-धारण किया था ., रेडियोलाजिस्ट ने …

" 5th pillar corrouption killer " की आशँका हुई सच साबित ! गुजरात में " श्वेता-भट्ट " बनी कान्ग्रेसी उम्मीदवार !!!??

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     प्रिय पाठक मित्रो , सादर नमस्कार !! " 5th pillar corrouption killer " की आशँका हुई सच साबित ! गुजरात में " श्वेता-भट्ट " बनी कान्ग्रेसी उम्मीदवार !!!?? जिस प्रकार से गुजरात में श्री संजीव भट्ट साहिब मोदी जी के खिलाफ ज़हर उगल रहे थे , और तथाकथित " सेकुलर " लोग उनकी मदद कर रहे थे मुझे तो तभी आभास हो गया था कि हो न हो ये एक     " सुनियोजित षड्यंत्र " का ही एक हिस्सा मात्र है !!
                   लेकिन गुजरात और भारत की जनता बहुत समझ दार है , वो भलीभांति जानती है कि कौन सही है और कौन गलत ???? पेश है आपके समक्ष वो लेख जो हमने उस वक्त लिखा था.....!! कृपया आप इसे ज्यादा से ज्यादा शेयर भी करें !!!!
                      धन्यवाद  !! 


Tuesday, October 4, 2011 "देखना गुजरात में " भट्ट " की पत्नी बनेगी विधानसभा की कांग्रेसी उमीदवार ..!" राजनीती में आने की चाह रखने वाले दोस्तों , मेरा नमस्कार स्वीकार करें !,आज ही  मैंने न्यूज चेनल पर गुजरात के पूर्व पुलिस अधिकारी  श्री संजीव  भट्ट की पत्नी को ये कहते सुना की मोदी जी ने  उस पुलिस  वाले क…

" क्या करेगा .....आम आदमी "( mango-man ) ...? ?

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मेरे प्यारे "मेंगो-मैन" और वुमन मित्रो, मीठा मीठा आफ्सीज़न वाला प्यार भरा नमस्कार !!
 कृपया स्वीकार कीजिये !!!!
    राष्ट्रीय-दामादश्री वाड्रा जी ने एकदम सही फ़रमाया था कि ये देश " बनाना - रिपब्लिक " है और यंहा का निवासी " मैंगो-मैन " !! यानि " अंधेर नगरी - चोपट राजा " !! यंहा के लोगों को मूर्ख बनाना कितना आसान है, इसके उदाहरण नित नए-नए सामने आते रहते हैं !! तभी तो हम सेंकडों सालों तक गुलाम रहे !!आज़ाद होने के बाद सुनने में आता है कि हमारे नेताओं ने " आंबेडकर " जी के नेतृत्व में एक नए " संविधान " का निर्माण किया,जिसका " एहसान " हम कभी नहीं उतार पायेंगे ??? जिस प्रकार हम पिछले 67 सालों से आरक्षण देकर एक भी व्यक्ति को " स्वर्ण " नहीं बना सके !!??
               कुछ विद्वान लोग  तो                                     कहते हैं कि 95% हमारा संविधान अंग्रेजों वाला ही है !!?? जो आज के " अमीरों " की ही रक्षा करता है !!?? मेरे एक मित्र ने एक घटना मेरे साथ सांझी की है, वो मैं आपको भी बता रहा हूँ....
Kumar SauvirP…

आम आदमी को "आम" की तरह ख़ास आदमी चूसता रहा है..!!

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Monday, November 26, 2012
"आम आदमी को "आम" की तरह ख़ास आदमी चूसता रहा है ...मुग़ल कालीन जुमला है "कत्ले आम" यानी यहाँ भी आम आदमी का ही क़त्ल होता था ...अंग्रेजों के समय भी आम आदमी ही गुलाम था ...नेहरू से मनमोहन तक भी आम आदमी की खैर नहीं रही ...रोबर्ट्स बढेरा को भी बनाना रिपब्लिक घोटाले की डकार लेते हुए मेंगो रिपब्लिक लगने लगा कार्टून की दुनिया में आर के लक्ष्मण के "आम आदमी" की हैसियत काक के कार्टूनों में भी नहीं बदली ...आम आदमी पर वामपंथी कविता सुनते ख़ास आदमी ने भी द्वंदात्मक भौतिकवाद दनादन बघारा ...आम आदमी की चिंता में संसद के ख़ास आदमी अक्सर खाँसते हैं ...अब केजरीवाल को भी आम आदमी को आम की तरह चूसना है ...अरे भाई आम आदमी वह है जिसे केरोसीन के तेल का मोल पता हो ...राशन की दूकान की कतार में कातर सा खडा हो ...आलू की कीमत से जो आहात होता हो ...जो बच्चों के साथ खिलोनो की दूकान से कतरा कर निकलता हो ...जो बच्चों को समझाता हो कार बालों को डाईबिटीज़ हो जाती है क्योंकि वह पैदल नहीं चलते ...आम आदमी अंगरेजी नहीं बोलता ...आम आदमी के बच्चे मुनिस्पिल स्कूल में पढ़ते है…

कौन बनेगा कांग्रेस का " तारनहार " ? ?

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कांग्रेस की नैया कांग्रेस डगमगा रही है। उम्मीदें राहुल गांधी पर टिकी हैं। 'युवराज' की ताजपोशी का उपक्रम चल रहा है, लेकिन जनमानस में यक्ष प्रश्न तैर रहा है कि क्या राहुल गांधी कांग्रेस की नैया पार लगा पाएंगे? उनके अतीत के कुहासे में इसका उत्तर खो सा जाता है। कांग्रेस भय ग्रस्त है, बेचैन भी कि कौन करेगा कांग्रेस की नैया पार? पार्टी के खिलाफ पूरे देश में लोकलहर है। पार
्टी के रूप में उसकी पहचान खो चुकी है। सोनिया गांधी का प्रबंधन नेतृत्व असफल हो चुका है। कांग्रेस उन्हीं पर निर्भर थी, और है। सोनिया गांधी अध्यक्ष बनी थीं 1998 में। वे भारत का मन नहीं जानतीं। भारतीय संस्कृति से उनका जुड़ाव नहीं। 14 बरस हो गये उनकी अध्यक्षी के, लेकिन कांग्रेस उनकी जगह लेने वाला कायदे का राष्ट्रीय अध्यक्ष भी नहीं खोज पायी। अब कांग्रेस में राष्ट्रीय अध्यक्ष बदलने की परम्परा भी नहीं है। कांग्रेस ने सत्ता के लिए संप्रग बनाया। स्वाभाविक ही इसका 'रिमोट कंट्रोल' सोनिया के पास रहा। संप्रग-1 की सरकार में वे 'सुपर पी.एम.' कही जाती थीं। वे पर्दे के पीछे थीं। दूसरी दफा इसकी जरूरत नहीं रही। प्रधान…

स्वराज की अवधारणा: शंका एवं समाधान ( 'स्वराज टोपी ' वालो के लिये विशेष पठनीय )..!!

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गाँधीजी ने स्वराज के वर्षो पूर्व 1909 में ही हिन्द स्वराज जैसी छोटी-सी किताब लिखकर अपनी कल्पना के स्वराज का चित्र खींचा था। स्वराज प्राप्ति के लिए उन्होंने नैतिक साध्नों का इस्तेमाल का व्यापक आंदोलन किया। लेकिन गाँधीजी के हत्या से यह संभव नहीं हो पाया।

पाश्चात्य लोकतांत्रिक देशों में चुनाव के साथ-साथ प्रबल लोकमत-ध्र्मसंस्था, विद्यापीठ, श्रमिक संगठन, प्रेस इत्य
ादि शक्तियों द्वारा शासन की मनमानी पर चतुर्विध् अंकुश लगाने का काम होता है। भारत की लोकशाही में इसका अपेक्षाकृत अभाव है। चुनाव के लिए राजनीतिक दलों द्वारा लगने वाला खर्च सरकार द्वारा किया जाना, सानुपातित प्रतिनिधित्व (प्रपोर्शनल रिप्रेजेंटेशन), प्रतिनिधि का वापस बुलाने का अधिकार, मतदाता को अभिक्रम का अधिकार, आममत आदि अनेक माध्यमों से कुछ देशों में लोकशाही की मनमानी पर अंकुश रहता है।

लोकतंत्र के दो प्रकार हैं। पहला केन्द्रित प्रतिनिधिक लोकतंत्र। यहां चुनाव में जीते हुए लोक प्रतिनिधि शासन की सारी सत्ता निहित होती है। उसे वापस नहीं बुलाया जा सकता। दूसरा, विकेन्द्रित सहभागी लोकतंत्र इसमें ज्यादा से ज्यादा सत्ता नीचे की ईकाई के पास होत…

" स्वच्छ नेता चुनने हेतु जागरूक नागरिकों की एक कमेटी का गठन raviwar ko " !!

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 प्रिय सूरतगढ़ के नागरिक मित्रो, नमस्कार !!

  अपने शहर सूरतगढ़ में भी पूरे भारत की तरह  एक                       स्वच्छ नेता चुनने हेतु जागरूक नागरिकों की एक कमेटी का गठन  करने के लिए, रविवार दिनांक 2 नवम्बर2012 को प्रातः 11-00 बजे, हेल्प- लाईन-बिग-बाज़ार,आर.सी.पी. रोड, पंचायत समिति भवन के सामने, सूरतगढ़ . पर एक मीटिंग रक्खी गयी है ! जो भी सज्जन इस पुण्य कार्य को करने में  रूचि रखते हो, उनका स्वागत है, सादर - निमंत्रण है   ! !
          इस कमेटी के गठन के पश्चात,पूरे विधानसभा क्षेत्र में एक व्यापक सर्वे करवाया जाएगा, जनता, बुद्धिजीवियों,समाजसेवियोंऔर स्वच्छ व्यवहार वाले नेताओं से पूछा जाएगा की वो सब कैसे                          और कौन से व्यक्ति को अपना सांसद या विधायक चुनना चाहते हैं !! उनसे ये भी पूछा जायेगा कि क्या उन्हें कोई नया व्यक्ति चाहिए या जो इस समय हमारे सामने हैं उन्हीं में से कोई पसंद है !! इस सर्वे और पूछताछ से जिस भी लोकप्रिय व्यक्ति का नाम हमारे सांसद-विधायक हेतु सामने आएगा , वो फिर चाहे किसी भी दल का होगा, या चाहे वो निर्दलीय भी होगा हम जनता को जागरूक करके उसे ही आगामी चुन…

आखिर ये राम-नाम है क्या ?..........!! ( DR. PUNIT AGRWAL )

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जिस नाम का भेद परमात्मा-स्वरुप सतगुरु से प्राप्त होता है, उस नाम से तुलसीदास जी का क्या तात्पर्य है, यह बहुत ही अहम् विषय है । आखिर ये राम-नाम है क्या ? यह नाम न तो किसी भी धर्म में आये अवतार विशेष का वर्णात्मक नाम नहीं हो सकता, क्योंकि तुलसीदास जी इस राम-नाम को सर्वोच्च सत्ता मानते हैं जिसने पूरी कायनात, सूर्य, चन्द्र आदि नक्षत्रों और अग्नि आदि तत्वों सहित समूची सृष्टि की उत्पत्ति की है । देवताओं में शिरोमणि माने जाने वाले ब्रह्मा, विष्णु और शिव भी इसे सिर झुकाते हैं । तुलसीदास जी इस राम-नाम को परमात्मा का स्वरुप मान कर इसकी वन्दना करते हुए कहते हैं:

बंदऊँ नाम रघुबर को । हेतु कृसानु भानु हिमकर को ।। (भानु - सूर्य; हिमकर - चन्द्रमा )

भानु कृशानु मयंक को कारन रघुबर नाम ।
बिधि हरि शिरोमणि प्रणत सकल सुखधाम ।।

हिन्दू लोग क्यों आदमी के अंतिम सफ़र में जाते हुए क्यों बोलते हैं - "राम-नाम सत है, सत बोलो गत है" ? इसका अर्थ है सिर्फ राम-नाम ही इस कायनात में सत्य है, बाकी सब असत्य है, छलावा है, माया है जो नाशवान है । अगर हम इस सत्य के साथ जुड़ेंगे तो सतगति होगी अन्यथा मनुष्य जन्म व्यर्थ गय…