Friday, August 31, 2012

" उल्लू के पठ्ठों की पंचायत "


एक बार एक हंस और एक हंसिनी जंगल
में घूम रहे थे बातों बातों में समय
का पता नहीं चला शाम हो गयी,
वो अपने घर का रास्ता भूल गए और
चलते-चलते एक सुनसान जगह पर एक पेड़
के नीचे जाकर रुक गए .
हंसिनी बोली मैं बहुत थक गयी हूँ
चलो रात यहीं बिताते हैं सुबह होते
ही चलपड़ेंगे. हंस बोला ये बहुत
सुनसान और वीरान जगह लगती है
(----''यहाँ कोई उल्लू
भी नहीं रहता है''-----) चलो कोई
और जगह देखते हैं. उसी पेड़ पर बैठा एक
उल्लू हंस और हंसिनी बातें सुन
रहा थावो बोला आप लोग घबराएँ
नहीं मैं
भी यहीं रहता हूँ ,डरने की कोई बात
नहीं है आप सुबह होते ही चले
जाईयेगा. हंस और हंसिनी उल्लू
की बात मानकर वहीँ ठहर गए .
सुबह हुई हंस और हंसिनी चलने लगे
तो उल्लू ने उन्हें रोक लिया और हंस
से बोला तू हंसिनी को लेकर
नहीं जा सकता ये मेरी पत्नीहै. हंस
बोला भाई ये क्या बात कर रहे
हो तुम जानते
हो कि हंसिनी मेरी पत्नी है. उल्लू
बोला नहीं हंसिनी मेरी पत्नी है तू
इसे लेकर नहीं जा सकता . धीरे-
धीरे झगड़ा बढ गयाऔर तू-तू में-में
होने लगी . उल्लू हंस की बात मानने
को तैयार ही नहीं था .
तभी चतुराई से उल्लू बोला
कि हम पंचों से इस बात
का फैसला करवाएंगे
कि हंसिनी किसकी पत्नी है . हंस के
पास कोई चारा नहीं था . उल्लू
उनको लेकर पास के गाँव में गया और
हंस ने पंचों को अपनी व्यथा सुनाई.
फिर फैसले के लिए पंचायत बुलाई
गयी सभी पंचों ने विचार विमर्श
किया और सोचा कि हंस
तो कहीं बाहर से यहाँ आया है और
उल्लू तो हमारे गाँव में ही रहता है
इसलिए हंसिनी उल्लू को ही दे देते हैं
जिससे हंसिनी हमारे गाँव में
ही रहेगी. पंचों ने
फैसला सुनाया हंस को बोले
कि हंसिनी उल्लू की ही पत्नी है
और उसे तुम उसे लेकर नहीं जा सकते
हो. हंस दुखी होकर रोने लगा.
फिर तीनों लोग वापस गाँव सेबाहर
निकल कर उसी पेड़ के पास जाकर
रुके. हंस बहुतदुखी था तभी उल्लू
बोला हंस दुखी मत
हो हंसिनी तेरी ही पत्नी है और तू
ही इसे लेकर यहाँ से जायेगा. लेकिन
मेरी एक नसीहत सुन ----> ''ये जगह
इसलिए इतनी सुनसान और
वीरान नहीं है कि यहाँ उल्लू रहताहै
बल्कि इसलिए सुनसान और वीरान
कि यहाँ ऐसे पंच रहते हैं जो उल्लू
की बात मान कर फैसले लेते हैं''.

दोस्तों आने वाले समय में हमें ऐसे
पंचों को हटाना है
और ऐसे पंच ढूढने हैं जो उल्लुओं
की बात न मानें तभी हमारा देश
खुशहाल हो सकेगा....
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" मेरा - भारत - महान " ?????

समाज का जो तबका मकान नहीं बनाता पर बड़े मकान में रहता है ! जो लोग अनाज नहीं उगाते पर जिनके अन्न भण्डार भरे हुए ही रहते हैं ! जो गाय नहीं चराते पर दूध मक्खन से तर रहते हैं ! जो ताल में जाल नहीं फेंकते लेकिन सबसे बढ़िया मछली खाते हैं ! जो कारखाने में मशीन नहीं चलाते लेकिन सारा उत्पादन जिनके उपभोग के लिये होता है !
यही तबका राजनीति की दिशा तय करता है ! वही तय करता है कृषी नीति क्या होनी चाहिये ! वही बताते हैं कि मजदूरों को कितने अधिकार दिये जा सकते हैं ! यही लोग तय करते हैं कि गरीब की अधिकारों की लड़ाई कितनी नैतिक और कब अनैतिक है ! यही तबका तय करने की कोशिश कर रहा है कि गरीब कैसे और किन हथियारों से लड़े !
यही तबका कांग्रेस का नेता है यही भाजपा के शीर्ष पर है , यही वामपंथी पार्टियों के नेता हैं , यही नक्सली दलों में चोटी पर बैठे हैं ! यही तबका गांधीवादी हैं ! यही धार्मिक और सांस्कृतिक तबका है ! यही कवि है ! संसद के मालिक यही , अदालत में जज इसी तबके के , सेना में अफसर भी यही हैं , बुद्धिजीवी भी इसी तबके के हैं , सारे एनजीओ इसी तबके के लोगों के हैं !
सरकार
 इनकी , मोदी इनका , मोदी के विरोधी भी यही !
राष्ट्र इनका , देशभक्त भी यही !
इनके चंगुल से मुक्ति ही असली मुक्ति है ! वही क्रान्ति का अंतिम पड़ाव भी होगा ! जहां मेहनत का फल मेहनती को ही मिलेगा ! जहां एक की मेहनत से दूसरा मज़े नहीं उड़ा पायेगा ! जहां बुद्धी झूठ को सच नहीं कहेगी !                                                               (हिमांशु कुमार ) साभार !! रोजाना पढ़ें, शेयर करें और अपने अनमोल विचारों से हमें अवगत अवश्य  करवाएं !! " 5TH PILLAR CORRPUPTION KILLER " LINK IS :- www.pitamberduttsharma.blogspot.com. 

Thursday, August 30, 2012

भगवान के कल्कि अवतार से होगा कलयुग का अंत !!! ????




भगवान विष्णु सृष्टि के पालनहार हैं| भगवान विष्णु ईश्वर के तीन मुख्य रुपों में से एक रूप हैं इन्हें त्रिमूर्ति भी कहा जाता है ब्रह्मा विष्णु, महेश के मिलन से ही इस त्रिमूर्ति का निर्माण होता है| सर्वव्यापक भगवान श्री विष्णु समस्त संसार में व्याप्त हैं कण-कण में उन्हीं का वास है उन्हीं से जीवन का संचार संभव हो पाता है संपूर्ण विश्व श्री विष्णु की शक्ति से ह
ी संचालित है वे निर्गुण, निराकार तथा सगुण साकार सभी रूपों में व्याप्त हैं|

पुराणों में भगवान विष्णु के दशावतारों का वर्णन है। इनमें से नौ अवतार हो चुके हैं, दसवें अवतार का आना अभी शेष है। धर्म ग्रंथों के अनुसार भगवान विष्णु का यह अवतार कल्कि अवतार कहलाएगा। पुराणों के अनुसार श्रावण मास के शुक्ल पक्ष की षष्ठी तिथि को यह अवतार होगा, इसलिए इस दिन कल्कि जयंती का पर्व मनाया जाता है।

भगवान विष्णु के प्रमुख अवतार-

जब-जब पृथ्वीलोक पर धर्म की हानि हुई तब- तब भगवान विष्णु ने अपने भक्तों को बचाने व धर्म की रक्षा के लिए अवतार लिए| भगवान विष्णु के कुछ अवतार इस प्रकार हैं-

मत्स्य अवतार- इस अवतार में भगवान विष्णु ने मछली का रूप धरा और पृथ्वी के जल मग्न होने पर ऋषि- मुनियों समेत कई जीवों की रक्षा की| भगवान ने ऋषि की नाव की रक्षा की थी तथा ब्रह्मा जी ने पुनः जीवन का निर्माण किया| एक अन्य कथा अनुसार शंखासुर राक्षस जब वेदों को चुरा कर सागर में छुपा गया तब विष्णु ने मत्स्य रूप धारण करके वेदों को मुक्त करके उन्हें पुनः स्थापित किया|

कूर्म अवतार- इस अवतार में भगवान विष्णु ने क्षीरसागर समुद्रमंथन के समय मंदर पर्वत को अपने कवच पर संभाला था उनकी सहायता से देवों एंव असुरों ने समुद्र मंथन करके चौदह रत्नों की प्राप्ति की|

वराहावतार अवतार- इस अवतार में भगवान विष्णु ने पृथ्वी कि रक्षा की थी, एक पौराणिक कथा अनुसार भगवान ने हिरण्याक्ष नामक राक्षस का वध किया था| हिरण्याक्ष हिरण्यकश्यप का भाई था|

नरसिंहावतार- इस अवतार में भगवान श्रीहरि ने हिरण्यकश्यप का वध करके भक्त प्रहलाद की रक्षा की थी| इसके अलावा वामन अवतार में विष्णु जी बौने के रूप में प्रकट हुए तथा राजा बलि से देवतओं की रक्षा की, त्रेता युग में 'राम' अवतार लेकर लंकापति रावण का वध किया| द्वापर में 'कृष्णावतार' हुआ| इस अवतार में कंस का किया, 'परशुराम अवतार' में विष्णु जी ने असुरों का संहार किया|

माना जाता है कि भविष्य में कलयुग का अंत करने के लिए भगवान विष्णु कल्कि अवतार लेंगे|

कल्कि अवतार की कथा-

धर्म ग्रंथों में भगवान विष्णु के कल्कि अवतार के बारे में विस्तृत वर्णन है। उसके अनुसार कल्कि अवतार कलियुग व सतयुग के संधिकाल में होगा। यह अवतार 64 कलाओं से युक्त होगा। पुराणों के अनुसार उत्तरप्रदेश के मुरादाबाद जिले के शंभल नामक स्थान पर विष्णुयशा नामक तपस्वी ब्राह्मण के घर भगवान कल्कि पुत्र रूप में जन्म लेंगे। कल्कि देवदत्त नामक घोड़े पर सवार होकर संसार से पापियों का विनाश करेंगे और धर्म की पुन:स्थापना करेंगे।

भारत में कल्कि अवतार के कई मंदिर भी हैं, जहां भगवान कल्कि की पूजा होती है। यह भगवान विष्णु का पहला अवतार है जो अपनी लीला से पूर्व ही पूजे जाने लगे हैं। जयपुर में हवा महल के सामने भगवान कल्कि का प्रसिद्ध मंदिर है। इसका निर्माण सवाई जयसिंह द्वितीय ने करवाया था। इस मंदिर में भगवान कल्कि के साथ ही उनके घोड़े की प्रतिमा भी स्थापित है।
 

Tuesday, August 28, 2012

" हमलावर " बनाती सांसदों को " हमारी सोनिया जी" ....????

      " हमला " सहने वाले सभी मित्रों को मेरा शान्ति भरा नमस्कार !! कृपया सभी मित्र स्वीकार करें !!!!
                              "माता,                                                  पिता,चाचा,चाची,मामा, मामी,भाई,बहन,और दादा दादीआदि रिश्तेदार एवं हमारे गुरुजन जब हम पर कोई गुस्सा या हमारे शरीर पर कोई चोट     ( हमला ) करते हैं तो वो हमारे भले के लिए होता है !! लेकिन अगर हमारा नेता " हमलावर " हो जाये जैसा की u.p.a.की अध्यक्षा जी कह रही हैं अपने सांसदों को तो क्या वो हमारे भले के लिए होगा ??? हमारे नेता तो पहले से ही " हिंसक " हुए पड़े हैं !!ऊपर से उनका नेत्रित्व करने वाले ही जब ऐसा निर्देश देंगे तो वो क्या- क्या " गुल " खिलाएंगे, ये सब राजनीति के जानकार लोग भली भाँती समझ सकते हैं !!
                                  अभी,ही ये हालात हैं कि हमारे नेता लोग " कार्यपालिका,न्यायपालिका और लोकतंत्र के चौथे स्तम्भ यानी मिडिया को भी कुछ नहीं समझते    , उनका वे जब भी जैसा जी में आता है, वैसा इनका इस्तेमाल करते हैं !! आजकल तो " डांटने- डपटने " भी लगे हैं हमारे नेता !!! टीवी चेनल्ज़ पर ये नज़ारा आम देखा जा सकता हैं !!! 
                           अगर  नेत्रित्व करने वाला नेता ही अपने कार्यकर्ताओं को " हमलावर " बनने  को       कहेगा तो...... हो गया...काम तमाम !!!! इस देश और देशवासियों का कल्याण !!!" गुंडे, बदमाश और कातिल तो पहले से भरे पड़ें हैं हमारी संसद से लेकर नगर - पालिका तक में !!!!!
                       श्री   मति सोनिया गाँधी जी के इस बयान की सबको निंदा करनी चाहिए और भरपूर विरोध करना  चाहिए !! " 5TH PILLAR CORROUPTION KILLER " का आप सबसे बस इतना ही निवेदन है !! कृपया इस ब्लॉग को रोजाना पढ़ें , शेयर करें और इस पर अपने अनमोल विचार भी लिखें !! लिंक :- www.pitamberduttsharma.blogspot.com. ...... जय- हिंद !!

Saturday, August 25, 2012

" कृषि प्रधान " देश नहीं ये " बलात्कार प्रधान " देश है !!??


   आखिर ये मुँह ही तो थक चुका था यह कहते कहते कि भारत एक कृषि प्रधान देश है ,भारत एक कृषि प्रधान देश है। इस वाक्य को मंत्र की तरह बार बार, बार बार दुहराना होता था। लेखों में तो, भाषणों में तो, सभी जगह कृषि प्रधान देश था भारत। किसान सूखे से तबाह हो जाता था, बाढ में चौपट हो जाता था, फसल पर पाला पड़ जाता था, खलिहान में आग लग जाती थी, बेमौसम की बरसात किये कराये पर पानी फेर देती थी, पर देश कृषि प्रधान ही बना रहता। हम इसे अपनी मौलिक सोच की तरह कहते थे तो पता चलता था कि ये तो नकल है और जब दूसरे भी यही दुहराते तो ऐसा लगता था जैसे कि मेरी नकल कर रहे हों । झल्लाहट होती थी यह सुन सुन कर कि कौन किसकी नकल कर रहा है- मातृवत परदारेषु जैसा मामला था कि हमारी बीबी तुम्हारी माता, तुम्हारी बीबी हमारी माता पता नहीं कि हम तुम्हारे बाप या तुम हमारे।      
       आजादी आने के बाद भी लम्बे समय तक देश कृषि प्रधान ही बना रहा, यहाँ तक कि शर्म आने लगी कि यह  अभी तक कृषि प्रधान ही बना हुआ है। दूसरे देश कहाँ से कहाँ तक की प्रधानी पर पहुँच गये और एक हम हैं कि अभी तक वहीं के वहीं डले हुए हैं। बगल वाला पाकिस्तान तक आतंक प्रधान देश बन गया पर हम कुछ नहीं कर सके।
हम से क्या हो सका मुहब्बत में,                                                                 तुमने तो खैर बेबफाई की
       अब लगता है कि माहौल कुछ कुछ बदल रहा है, देश कई दिशाओं में प्रधानता की ओर बढ रहा है। भ्रष्टाचार में शायद ही किसी एकाध देश से पीछे होगा पर यह तो कह ही सकते हैं कि भारत एक बलात्कार प्रधान देश है। हालात यह हो गये हैं कि अगर देश में बलात्कार बन्द हो जायें तो बेचारे अखबारों का क्या होगा वे कब तक और कहाँ तक लौकी के पकौड़े और बरसात में स्वस्थ कैसे रहें छापते रहेंगे। पूरे अखबार में कम से कम एकाध दो बलात्कार तो चाहिए ही चाहिए। इस कमी को पूरा करने के लिए हमने एक पूरी कौम पैदा कर ली है। हमारे देश में तीसरे खंभे के नाम से जाने जाने वाले लम्पट दलों के छुटभैए नेताओं और नवधनाड्यों के नौजवानों की कृपा से देश का चौथा खम्भा बचा हुआ है और समाचार पत्र पत्रिकाओं से लेकर सत्य कथाएं तक दूधों नहा कर पूतों फल रही हैं।
       बलात्कारों ने पूरे देश को राष्ट्रीय एकता के सूत्र में बाँधने में अपूर्व योगदान दिया है। आदमी चाहे असमी बोलता हो या तामिल, गुजराती बोलने वाला हो या पंजाबी बोलने वाला कोलकते का हो या काझीकोड का अपनी भाषा के अपने अखबार के लोकल पेज पर बलात्कार की खबर जरूर पढता है। हिमालय से कन्या कुमारी तक और अटक से कटक तक पूरा भारत एक है। हमारे द्वारा प्यार से ‘सुरक्षित’ रखे गये कश्मीर से लेकर पीओके अर्थात पाकिस्तान ओक्यूपाइड कश्मीर तक इन खबरों में समानता बनी हुयी है। न जाति का भेद है न धर्म का, सवर्णों से लेकर दलित तक, और शैव, शाक्त, वैष्णव, मुस्लिम, सिख, ईसाई, जैन, बौद्ध, पारसी, बिना किसी भेद भाव के समाज में धर्मनिरपेक्षता का वातावरण बनाने के लिए बलात्कार कर रहे हैं।
       इस देश और समाज की एकता के लिए चिंतित लोगों ने देश के चप्पे चप्पे को बलात्कारमयी बनाने की कोशिश की है और वे इसमें असफल भी नहीं कहे जा सकते हैं। कृषि प्रधान देश के खेत और घर तो इसके लिए परम्परा से ही सबसे प्रिय जगह रही है पर अब तो स्कूलों में, कालेजों में, पार्कों में, आश्रमों में, पूजा स्थलों में, प्रार्थना स्थलों में, अस्पतालों में, कार्यालयों में, गलियारों में, यहाँ तक कि शौचालयों तक में इन खबरों के कार्यक्रम स्थल बन रहे हैं। गतिमान दशा में पहले यह काम यदा कदा ट्रेनों के कूपों में हुआ सुना जाता था पर वाहनों के विकास ने इसे गति के साथ जोड़ दिया जाता है। एकाध सप्ताह ही बीतता है कि राम भरोसे कहने लगता है कि बहुत दिन हो गये चलती कार में बलात्कार के समाचार नहीं आ रहे हैं कहीं पैट्रोल की मँहगाई का असर तो नहीं है। दो दिन बाद ही पैट्रोल के दाम एक रुपया सत्तर पैसे सस्ते होने और चलती सफारी में मंत्रीजी के भतीजे और गैंग द्वारा रास्ते से उठायी गयी लड़की से बलात्कार की खबर एक साथ आ जाती है, भले ही पैट्रोल के एक रुपए सत्तर पैसे सस्ता होने से उसका कोई सम्बन्ध नहीं हो। सहकारी आन्दोलन अगर कहीं सफल होता नजर आ रहा है तो वह यही क्षेत्र है। ‘गैंग रेप’ शब्द को हिन्दी के शब्दकोष में सम्मलित किये जाने पर विचार चल रहा है। लगता है कि ट्रैनों, बसों, कारों, जीपों, के निरंतर आरामदायक बनाये जाने के विज्ञापन इस को प्रोत्साहित करने के लिए ही दिये जाते हैं। हमारे मध्य प्रदेश में [मेरा मतलब राज्य से ही है] तो गत दिनों एक सरकारी एम्बुलेंस वाले ने एक महिला मरीज की रास्ते में ही प्राकृतिक चिकित्सा कर देने के समाचार प्राप्त हुए हैं।
       अस्पतालों में डाक्टर इसी ओवरटाइम में लगे सुने जाते हैं, तो थानों में पुलिस अधिकारी, कालेजों में प्रोफेसर, या जहाँ जो काम करता है वहाँ ओवर टाइम कर रहा है। व्यापारिक कार्यालयों और गैर सरकारी कार्यालय के अधिकारी इस मामले में कोई भेद नहीं मानते। साहब के देर होते ही उनकी पत्नियों के दिमागों में एक ब्लू फिल्म के साथ हथकड़ी लगे जेल ले जाये जाते हुए दृष्य कौंधने लगते है और वेतन के साथ उससे चौगुनी ऊपरी कमाई पर संकट आने के दौरे पड़ने लगते हैं। सेना के कई अधिकारी तक यह मानने लगे हैं कि उनका काम विदेशी हमलावरों से रक्षा करना है और देश तो अपने परिवार की तरह है।
        हमारे पुराणों में तो यदा कदा कोई इन्द्र किसी गौतम ऋषि के घर में कूदता होगा पर आज के इस पवित्र पावन विश्वगुरु देश में सभी इन्द्र होते जा रहे हैं। मन्दिर मस्ज़िद के नाम पर धर्म की रक्षा करने वाले तक अपने धर्म का झंडा उठाये हुए दूसरे धर्मों की महिलाओं से बलात्कार करने को पुण्य का काम मानते हैं और ज़न्नत में अपनी जगह पक्की करवाने में लगे हैं। अगर इतने और ऐसे लोग स्वर्गवासी हो जायेंगे तो या खुदा, स्वर्ग के अपने चरित्र का क्या होगा? " साभार "
वीरेन्द्र जैन
2/1 शालीमार स्टर्लिंग रायसेन रोड
अप्सरा सिनेमा के पास भोपाल [म.प्र.] 462023
मोबाइल 9425674629
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Thursday, August 23, 2012

लौह अयस्क में भी दो हजार करोड़ का घोटाला !! ???



ठ्ठ नीलू रंजन, नई दिल्ली केंद्र सरकार के हजारों करोड़ रुपये के घोटालों का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा है। 2जी स्पेक्ट्रम आवंटन, कोयला ब्लाक आवंटन व दिल्ली अंतरराष्ट्रीय हवाईअड्डे के निजीकरण में घोटाले के बाद अब नेशनल मिनरल डेवलपमेंट कारपोरेशन (एनएमडीसी) द्वारा लौह अयस्कों की बिक्री में घोटाले का पर्दाफाश कैग ने किया है। खास बात यह है कि खुद स्टील मंत्रालय इस घोटाले पर मुहर लगा रहा है। एनएमडीसी के ऑडिट के दौरान नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (कैग) को लौह अयस्कों को बेहद कम कीमत पर बेचे जाने के सुबूत मिले हैं। कैग की ड्राफ्ट रिपोर्ट के अनुसार इससे सरकारी खजाने को 2000 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ। कैग के इस आकलन से स्टील मंत्रालय भी सहमत है। पिछले एक महीने में कार्मिक मंत्रालय को भेजे गए दो पत्रों में स्टील मंत्रालय ने एनएमडीसी में लौह अयस्क की बिक्री में 2000 करोड़ रुपये के घोटाले का जिक्र किया है। कार्मिक मंत्रालय के उच्च पदस्थ सूत्रों के अनुसार घोटाले की स्वीकारोक्ति के पीछे स्टील मंत्री बेनी प्रसाद वर्मा 
की मंशा कई महीने से खाली चल रहे एनएमडीसी के सीएमडी के पद पर मनपसंद अधिकारी को बैठाना है। हालांकि सार्वजनिक उपक्रम चयन समिति (पीईएसबी) पिछले साल इस पद के लिए स्टेट प्रिंटिंग एंड मिंटिंग कारपोरेशन ऑफ इंडिया लिमिटेड के सीएमडी एमएस राणा का चयन कर चुकी है, लेकिन केंद्रीय सतर्कता आयोग से राणा की विजिलेंस क्लियरेंस मिलने में एक साल से अधिक समय खप गया। जब उन्हें विजलेंस क्लियरेंस मिला तो वर्मा ने नया अड़ंगा उनकी अनुभवहीनता का लगा दिया है। स्टील मंत्रालय ने 19 जुलाई को कार्मिक मंत्रालय को एमएस राणा को विजिलेंस क्लियरेंस नहीं मिलने और एनएमडीसी में घोटाले का हवाला देते हुए नए सिरे से सीएमडी की खोज प्रक्रिया शुरू करने को कहा था। इसके 10 दिन बाद ही सीवीसी से राणा का विजिलेंस क्लियरेंस आ गया। जब कार्मिक मंत्रालय ने स्टील मंत्रालय को राणा की नियुक्ति के लिए जरूरी कदम उठाने का निर्देश दिया तो स्टील मंत्रालय ने राणा को रोकने के लिए अपने जवाबी पत्र में कहा कि उनके पास माइनिंग का अनुभव नहीं है, जबकि इसी महीने खुद स्टील मंत्रालय माइनिंग का अनुभव नहीं रखने वाले मलय चटर्जी को कुद्रेमुख आयरन ओर कारपोरेशन का सीएमडी बना चुका है।

Wednesday, August 22, 2012

" क्यों चुप हैं तथाकथित सेकुलर और मिडिया " डर गए क्या ????



इस 11 अगस्त (शनिवार) को मुम्बई के आजाद मैदान पर मुस्लिमों द्वारा हिंसा का जो दृश्य खड़ा किया गया वह सोचने पर मजबूर करता है कि राजनीतिक सत्ता पाने के लिए देश विभाजन के रूप में जो महंगा मूल्य चुकाया गया, अब 65 वर्ष बाद क्या खंडित भारत पुन:विभाजन के कगार पर पहुंच गया है? 13 अगस्त के अंग्रेजी दैनिक 'हिन्दू' में प्रकाशित मुम्बई पुलिस की आंतरिक जांच रपट के अनुसार असम के बोडो क्षेत्र और म्यांमार में अराकान प्रांत के रोहिंगिया या मुसलमानों के प्रति सहानुभूति और समर्थन के लिए शांतिपूर्ण प्रदर्शन करने के नाम पर आयोजित सभा में पुलिस और टेलीविजन चैनलों पर हमले की पूरी तैयारी पहले से की गयी थी। पुलिस रपट में बताया गया है कि मंच पर 17 वक्ता थे। उनमें से केवल पांच के भाषण पूरे हो पाये थे। पांचवें वक्ता मौलाना गुलाम अब्दुल कादरी का भड़काऊ भाषण चल ही रहा था कि झंडे, बैनर ही लेकर 1000 मुस्लिम युवकों की भीड़ छत्रपति शिवाजी टर्मिनल रेलवे स्टेशन से बाहर निकली और शांति व्यवस्था के लिए तैनात पुलिस दल व सभा को 'कवर' करने के लिए टीवी चैनलों की 'ओबी बैन' पर टूट पड़ी। वाहनों में आग लगा दी गयी। पुलिस वालों को गाड़ियों में बंद करके जिंदा जलाने की कोशिश की गयी। महिला पुलिसकर्मियों का उत्पीड़न किया गया। उनके हाथों से रायफलें, रिवाल्वर व कई राउंड जिंदा कारतूस छीन लिये गये। 15 से 25 वर्ष आयु वर्ग की यह हिंसक भीड़ पेट्रोल के टिन, ज्वलनशील पदार्थों से भरी प्लास्टिक बोतलों, हाकी, लोहे की छड़ों और डंडों से लैस होकर सभा स्थल पर आयी थी। भद्दी-भद्दी गालियां और उत्तेजक नारे लगाते हुए वह पुलिस और मीडियाकर्मियों पर टूट पड़ी। आधे घंटे तक यह हिंसक नृत्य चलता रहा। इस दौरान 2 निरपराध लोग घटनास्थल पर मारे गये। 54 घायल हुए, जिनमें से 45 पुलिसकर्मी हैं। उनमें से आठ की हालत गंभीर बतायी गयी है।

खतरनाक अनदेखी

इस एकतरफा हमले की दहशत से भयभीत मीडिया इस घटना के संदेश की बेबाक समीक्षा करने से घबरा रहा है, और मुस्लिम वोट बैंक के भूखे पाखण्डी सेकुलरवादी राजनेता चुप्पी साध गये हैं। आज, (16 अगस्त) के मेल टुडे में प्रकाशित चित्रों के अनुसार मुम्बई के पुलिस आयुक्त अरूप पटनायक अपराधियों को पकड़वाने में मुस्तैदी दिखाने की बजाय अपने मातहतों को फटकार रहे हैं कि उन्होंने अमुक दंगाई को क्यों पकड़ा, किसके कहने पर पकड़ा? यहां तक कि उन्होंने बिना जांच- पड़ताल किये उस गिरफ्तार आरोपी को छुड़वा भी दिया। पता नहीं क्यों महाराष्ट्र की गठबंधन सरकार में शरद पवार की राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी आर.आर.पाटिल को ही गृहमंत्री बनाये रखना चाही है? पाटिल का रिकार्ड 26/11 के आतंकी हमले के समय भी बहुत खराब था, उनके कई गैर जिम्मेदाराना बयानों की कटु आलोचना हुई थी। तब सब आशा कर रहे थे कि पाटिल में अगर थोड़ी-सी भी शर्म बाकी होगी तो वे स्वयं ही गृहमंत्री के पद से त्यागपत्र दे देंगे। कम से कम (स्व.) विलास राव देशमुख के नैतिक जिम्मेदारी के आधार पर मुख्यमंत्री पद से त्यागपत्र देने के पश्चात तो पाटिल को अपने पद पर बने रहने का कोई अधिकार नहीं रह गया था। पर वे बने रहे, बहुत दबाव और आलोचना के बाद ही मजबूरन पद छोड़ा। इस बार फिर गृहमंत्री बनाये गये और अपने त्यागपत्र की सब ओर से उठ रही मांग पर कान बहरे करके मीडिया की आंखों से ओझल हो गये हैं। यह भी कम महत्व की बात नहीं है कि उस सभा के आयोजकों में रजा अकादमी और 25 साल के युवक मौलाना अहमद रजा की कुछ ही दिनों पहले बनी 'मदीनातुल इल्म फाउंडेशन', जिसका अभी पंजीकरण भी नहीं हुआ है, जैसी अज्ञात संस्थाएं थीं। मौलाना रजा कुछ ही समय पहले इंग्लैण्ड से मजहबी प्रचार का एक साल का प्रशिक्षण लेकर वापस भारत लौटा है। उसका कहना है कि रिजवान खान नामक एक कबाड़ी ने उसे इस सभा की अनुमति लेने को कहा और वह अनुमति लेने को तैयार हो गया। आश्चर्य यह है कि उसे फटाफट अनुमति मिल भी गयी। किन्तु इससे भी अधिक महत्व की बात यह है कि उस सभा में मंच पर शमशेर खान पठान नामक महाराष्ट्र के एक पूर्व पुलिस अधिकारी भी मौजूद था और कुछ समय पूर्व ही गठित उसकी 'अवाम विकास पार्टी' भी सभा के आयोजकों में से एक थी। इन आयोजकों के साथ-साथ 'नरेन्द्र मोदी विरोध' के एक सूत्री कार्यक्रम के लिए कुख्यात तीस्ता सीतलवाड़ की भूमिका भी कम दिलचस्प नहीं है। उसने पुलिस आयुक्त अरूप पटनायक को ऐसी 'डिजिटल फोटो' पेश की है, जिसके आधार पर वे सिद्ध करना चाहती है कि तिब्बत और थाईलैण्ड जैसे देशों के लोगों के उत्पीड़न के जाली फोटुओं को असम और म्यांमार के मुसलमानों पर उत्पीड़न के चित्र बताकर मुस्लिम युवकों को भड़काया और गुमराह किया गया। यानी वे उनकी सुनियोजित हिंसा पर पर्दा डालने की कोशिश कर रही हैं और यह सत्य छिपा रही हैं कि म्यांमार के रोहिंगिया मुसलमानों के प्रश्न को ओ.आई.जी., मुस्लिम काउंसिल आफ बर्मा, भारतीय मुसलमानों के उत्तरी अमरीका मंच जैसे अनेक अन्तरराष्ट्रीय मुस्लिम संगठनों ने एक वैश्विक अभियान के तौर पर उठाया है। जमाते-ए-इस्लामी ए हिंद के अंग्रेजी साप्ताहिक मुखपत्र 'रेडियांस' के दो अंक (15 और 12 अगस्त, 2012) म्यांमार के रोहिंगिया मुसलमानों का वहां के बौद्ध समाज और सरकार के द्वारा उत्पीड़न के इतिहास से भरे हुए हैं। इन्हीं अंतरराष्ट्रीय मुस्लिम संस्थाओं के आह्वान पर दिल्ली में म्यांमार दूतावास के सामने एक प्रदर्शन आयोजित किया गया था, जिसमें जमात-ए-इस्लामी और उसके 'वेलफेयर पार्टी' नामक राजनीतिक दल के बैनर तले तथाकथित सेकुलर पार्टियों, यथा-मुलायम सिंह यादव की समाजवादी पार्टी, रामविलास पासवान की लोक जनशक्ति पार्टी, भाकपा और जद(यू) भी सम्मिलित हुए थे। मुस्लिम वोट बैंक को रिझाने के लालच में ही भारत सरकार ने म्यांमार सरकार के पास अपना दूत भेजने का निर्णय किया है। क्या सरकार और तथाकथित सेकुलर पार्टियों के ऐसे आचरण से मुस्लिम आक्रामकता को प्रोत्साहन नहीं मिलता है?

बढ़ती मुस्लिम आक्रामकता

यह मुस्लिम आक्रामकता बढ़ ही नहीं रही है बल्कि हिंसक रूप धारण कर रही है। उ.प्र. के बरेली और आंवला जैसे शहरों में प्रत्येक हिन्दू पर्व के अवसर पर मुस्लिम हिंसा का भड़कना इसका उदाहरण है। बरेली तो पिछले एक महीने से कर्फ्यू झेल रहा है। पिछले वर्ष जब मायावती मुख्यमंत्री थीं तब यहां होली के पर्व पर खून की होली खेली गयी थी। इस वर्ष समाजवादी पार्टी के सत्ता में आने के बाद पहले कांवड़ियों को लेकर फिर जन्माष्टमी के जुलूस को लेकर बरेली में हिंसा भड़कायी गयी है। यह आक्रामकता कितना आगे बढ़ गयी है इसका उदाहरण दिल्ली में जामा मस्जिद मेट्रो स्टेशन के लिए खुदाई के दौरान किसी पुराने भवन के अवशेषों के प्रगट होने पर उसे अकबराबादी मस्जिद घोषित किए जाने के रूप में सामने आया। पता नहीं यह कैसे जाना गया कि वे अवशेष सत्रहवीं शताब्दी की किसी अकबराबादी मस्जिद के ही हैं? यह खबर फैलते ही एक मुस्लिम राजनेता मैदान में कूद पड़ा। स्थानीय मुस्लिम विधायक शोएब इकबाल ने नेतृत्व की कमान संभाल ली। उसने दिल्ली और आसपास के हजारों मुसलमानों की भीड़ उस मस्जिद में नमाज पढ़ने के लिए जुटा ली। कुछ मौलवियों ने भीड़ को मस्जिद का पुनर्निर्माण करने के लिए जुटा दिया और रातों-रात उस जगह मस्जिद का एक ढांचा खड़ा कर दिया गया। एक ओर मजहबी उन्माद, दूसरी ओर असहाय प्रशासन व न्यायपालिका। दिल्ली उच्च न्यायालय ने उस ढांचे को अवैध घोषित किया, उसे गिराने का आदेश दिया, पर उसे गिराये कौन? दिल्ली सरकार ने कहा कि यह जिम्मेदारी नगर निगम की है। नगर निगम ने कहा कि यह जिम्मेदारी पुरातत्व सर्वेक्षण विभाग की है। पुरातत्व सर्वेक्षण विभाग ने कहा कि यह कार्य दिल्ली पुलिस को करना चाहिए। दिल्ली पुलिस ने कहा कि स्थानीय विधायक शोएब इकबाल को इसमें सहयोग करना चाहिए, पर मुस्लिम उन्माद की लहर पर सवार शोएब इकबाल ने कहा कि यह ढांचा गिराया ही नहीं जाना चाहिए। इसी उधेड़बुन में एक महीना निकल गया, अवैध ढांचा ज्यों का त्यों पड़ा है। मेट्रो कंपनी का निर्माण कार्य रुका पड़ा है, जिसके कारण लालकिला, जामा मस्जिद, सुनहरी मस्जिद, दिल्ली गेट, कश्मीरी गेट, गुरुद्वारा रकाब गंज और जंतर मंतर जैसे महत्वपूर्ण ऐतिहासिक स्थलों को जोड़ने वाली भूमिगत मेट्रो लाइन को बिछाने का काम अधर में लटका हुआ है। यदि पुराने खंडहरों के पुनर्निर्माण की नीति को अपनाया जाता है तो पूरी दिल्ली में ही ऐसे खंडहर बिखरे हुए हैं, तो फिर दिल्ली में कोई भी नया निर्माण संभव नहीं होगा और यदि बारहवीं से अठारहवीं शताब्दी तक की मध्ययुगीन विध्वंस लीला के इन खंडहरों के पहले के इन्द्रप्रस्थ के इतिहास को खोजने की कोशिश की गयी तो शायद हमें पाताल तक खंडहर ही मिलते जाएंगे। क्या पांडवों से चौहानों और तोमरों तक के इतिहास को प्रगट होने का अधिकार नहीं है?

इतिहास से सबक सीखें

पर इस समय भारत में इतिहास के तथ्यों और तकर्ों से अधिक महत्व मजहबी जुनून और उसके पीछे खड़ी डंडे की ताकत का हो गया है। यह मजहबी जुनून वोट बैंक राजनीति का मुख्य हथियार बन गया है। वास्तव में असम की घटनाओं से पूरे देश का ध्यान बंगलादेशी घुसपैठ पर केन्द्रित होना चाहिए था। म्यांमार की रोहिंगिया मुस्लिम समस्या और असम की घुसपैठ समस्या एक ही प्रक्रिया के दो चेहरे हैं। म्यांमार अपनी अस्मिता को बचाने के लिए जूझ रहा है तो पूर्वोत्तर भारत अपनी। भारत के मुस्लिम समाज से अपेक्षा है कि वह भारत की राष्ट्रीय अस्मिता की रक्षा के लिए बंगलादेशी घुसपैठ को रोकने के राष्ट्रीय प्रयत्नों में सहयोग दे। पर हो रहा है उलटा। मुस्लिम कट्टरवादियों ने महाराष्ट्र और कर्नाटक में पूर्वोत्तर भारत के छात्रों के विरुद्ध हिंसा का वातावरण पैदा कर दिया है, एक ओर भारत में बंगलादेशी घुसपैठ बड़े पैमाने पर जारी है तो दूसरी ओर पाकिस्तान से बचे-खुचे हिन्दू भी भागकर भारत में शरण लेने को मजबूर किये जा रहे हैं। उनकी दर्द भरी कहानी सुनकर भी भारत सरकार और वोट बैंक के भूखे राजनेताओं की अन्तरात्मा उन्हें नहीं कचोटती, यह कैसी दुर्भाग्यपूर्ण स्थिति है? क्या विभाजन को जन्म देने वाले घटनाचक्र को हम पूरी तरह भूल गये हैं? इस घटनाचक्र से हमने कोई सबक नहीं सीखा है? जो राष्ट्र अपने इतिहास को याद नहीं रखता, उससे कोई सीख नहीं लेता, वह धरती पर अपने अस्तित्व को खोकर स्वयं इतिहास बन जाता है। क्या भारत की यही नियति है?

   भारत के मुस्लिम समाज से अपेक्षा है कि वह भारत की राष्ट्रीय अस्मिता की रक्षा के लिए बंगलादेशी घुसपैठ को रोकने के राष्ट्रीय प्रयत्नों में सहयोग दे। पर हो रहा है उलटा। मुस्लिम कट्टरवादियों ने महाराष्ट्र और कर्नाटक में पूर्वोत्तर भारत के छात्रों के विरुद्ध हिंसा का वातावरण पैदा कर दिया है, एक ओर भारत में बंगलादेशी घुसपैठ बड़े पैमाने पर जारी है तो दूसरी ओर पाकिस्तान से बचे-खुचे हिन्दू भी भागकर भारत में शरण लेने को मजबूर किये जा रहे हैं। — साभार मित्र से !!" 5th pillar corrouption killer " the link is :- www.pitamberduttsharma.blogspot.com. 

Monday, August 20, 2012

" हर दर्द की दवा है ...ये समय " !!

  समय की कद्र करने वाले सभी मित्रों को मेरा "सामयिक"नमस्कार !! कृपया स्वीकारें !
        इंसान की फितरत है की वो हर दर्द को कुछ समय के पश्चात् भूल जाता है, चाहे वो कितनी भी बड़ी " चोट " क्यों ना हो !! घरेलू चोट चंद दिनों में, समाज की चोट चन्द हफ़्तों में, दोस्तों,रिश्तेदारों की चोट चंद महीनों या सालों में और नेताओं की चोट 5-10 सालों में भूल जाता है !! लेकिन कई चोटें ऐसी होतीं हैं ,जो भुलाये नहीं भूलतीं, जैसे इस निक्कम्मी सरकार का एक मंत्री श्री बेनीप्रसाद वर्मा जी दे रहे हैं!
          वो फरमाते हैं कि " मुझे ख़ुशी होती है जब मंहगाई बढती है " !!!??उनकी अपनी अजीब दलील है की इससे किसानों को फायदा होता है !!?? अब मैं इनको पागल कंहूँ या उनको जिन्होंने इन्हें मंत्री बनाया है ??? ये सरकार लगातार जनता को ऐसी - ऐसी चोटें पंहुचा रही है कि पूछो मत !! जनता इन चोटों को भूला पायेगी ऐसा मुझे नहीं लगता !! आपको ऐसा लगता है क्या ?? क्या जनता अगले चुनावों में इन चोटों का बदला इन ढीठ नेताओं को चुनावों में हराकर लेगी ?????
            आप अपने विचारों को हमारे ब्लॉग " 5TH PILLAR CORROUPTION KILLER " पर जाकर टाईप करें !! जिसका लिंक है :- www.pitamberduttsharma.blogspot.com. क्यों चाहिए इन्ही लोगों को हर बार " सत्ता "??????क्या सभी पार्टियाँ और उनके संगठन जनता को हिसाब देंगे कि कब कितना पैसा आया और कब कंहा गया ????विपक्ष अपना धर्म क्यों नहीं निभा पा रहा है ????
     हर दर्द की दवाये समय है, वो ही इनका  " इलाज  " करेगा  !!!! अवश्य  करेगा !!     

Friday, August 17, 2012

" फांसी पर चढाओ उनको, जिन्होंने कलमाड़ी जी को चोर कहा था " ???????

 " झूठे इल्जामों से बदनाम " हो चुके मेरे इमानदार मित्रो !! चमकदार सफाई वाला नमस्कार स्वीकारिये जी !                                                                                     आज कलथोडा सा आदमी कुछ बन जाये सही, बस पूछो मत जी, दोस्त कम - दुश्मन ज्यादा बन जाते हैं आदमी के !! ऐसा ही अपने कलमाड़ी जी के साथ हुआ

  है ! अगले  की सारी इज्ज़त मिटटी में मिलादी इन   इलेक्ट्रोनिक  मिडिया  ,प्रिंट मिडिया और सोशल  मिडिया  वालों   ने  !!!!?????        
                           c.b.i. वाले   अब कह  रहे   हैं   की   उनका कंही  नाम ही नहीं था !! वो तो बस ऐसे ही शोकिया जेलयात्रा कर आये थे !! ???
           आप भी अपने विचार लिखिए हमारे ब्लॉग पर जिसका नाम है " 5th pillar corrouption killer " और जिसका लिंक है  :- www.pitamberduttsharma.blogspot.com. हमारी बातें अच्छीं लगें तो शेयर भी अवश्य करें !!

आजादी के 65 साल बीत जाने के बाद देश के सामने किस तरह की चुनौतियां हैं और इसके क्या कारण हैं ?


वास्तव में प्रजातंत्र हिन्दू का स्वभाव है। यह अंग्रेजों की देन है, ऐसा मैं नहीं मानता। प्रजा क्या चाहती है, उसका हमारे यहां पंचायतों के माध्यम से गांव-गांव में निराकरण किया जाता था और न्याय भी उस आधार पर होता था। पंचायतों के माध्यम से कानून का पालन भी होता था। यानी प्रजातंत्र हमारे स्वभाव में है। मगर अंग्रेजों ने जिस प्रकार का प्रजातंत्र हमें दिया है वह पूरे देश के लिए सोचने और विचारने का विषय है। प्रजातंत्र आज बड़े-बड़े हिंसक समाजों और जातिवादी घृणा पैदा करने वालों के हाथों में जा रहा है। वे धीरे-धीरे समाज का नेतृत्व कर रहे हैं। यह प्रजातंत्र हमारे देश को विनाश की ओर ले जा रहा है। पूरे देश को सोचना पड़ेगा कि क्या ऐसे तत्वों के हाथों में देश का भविष्य-भवितव्य देना चाहिए?
ऐसा नेतृत्व जब हमारे सामने खड़ा हो गया है तो उसके दुष्परिणाम भी दिखाई देने लगे हैं। भ्रष्टाचार के ऐसे मामले उजागर होने लगे हैं, जिनकी हम कल्पना भी नहीं कर सकते हैं। कालेधन की चर्चा चारों ओर होने लगी है। यह सब भारतीय स्वभाव के बिल्कुल प्रतिकूल हो रहा है। इस प्रकार का प्रजातंत्र हमारे यहां कभी रहा ही नहीं। इसे अंग्रेजों ने हम पर थोप दिया है। इस प्रजातंत्र से समाज बड़ा त्रस्त हो गया है। समाज बड़े संकट और कष्ट में है। इसलिए हमें विचार करना ही होगा कि आखिर भारत में किस प्रकार का प्रजातंत्र चाहिए।
हमारा समाज बड़ा सत्यवादी रहा है। पूरे समाज में सच्चाई का एक वातावरण था। अंग्रेजों ने जब से यहां शिक्षा व्यवस्था में परिवर्तन किया और हमारी शिक्षा में से धर्म को हटा लिया तब से भारत में शिक्षा के दुष्परिणाम भी दिखने लगे हैं। यही कारण है कि आज समाज में कानून-व्यवस्था चरमरा गई है। हमें प्रजातंत्र चाहिए मगर भारतीय परम्पराओं की रक्षा, धर्म की अनिवार्य शिक्षा के साथ चाहिए। वह पंथनिरपेक्ष भारत से संभव नहीं, आध्यात्मिक भारत के स्वरूप को चरितार्थ करके चाहिए।
आज चारों ओर आतंकवादियों का साम्राज्य हो गया है। एक तरफ पाकिस्तान है, दूसरी ओर बंगलादेश है, उनके द्वारा प्रेरित जिहादी आतंकवादी भारतीय जीवन को रात-दिन अशान्त बनाए हुए हैं, हिन्दुओं में अलगाव पैदा कर रहे हैं। आज सर्वाधिक अशान्ति जिहादी इस्लाम से है जो उनके लाखों मदरसों के कारण है। एक उदाहरण देना पर्याप्त रहेगा - पीलीभीत में चुनाव लड़ रहे वरुण गांधी को गांव-गांव में हिन्दू महिलाओं ने कहा कि हमारी कन्याओं का आज कट्टरवादी शील हरण कर रहे हैं, तुम्हारी मां यहां से सांसद थी, रक्षा नहीं कर सकी। तुम भी वैसा ही करोगे तो हमारी रक्षा कौन करेगा ? वरुण ने कहा हमारी बहनों के साथ कोई बलात्कार करेगा तो उसके हाथ तोड़ देंगे, पैर तोड़ देंगे। वहां की माताओं को समाधान हुआ। देश में इसका प्रचार हुआ और वरुण की भर्त्सना की गई। भाजपा भी पीछे नहीं रही। उसे जेल भेजा गया। उसे लगा मैं अकेला रह गया। यह पीलीभीत के गांवों की बात नहीं है, पूरे असम, बंगाल, बिहार, उत्तर प्रदेश के हजारों-हजारों गांव की कहानी है। केवल वरुण ही नहीं, राजनीति में कार्य करने वाले हर व्यक्ति के लिए हिन्दू समाज, उसकी संस्कृति और धर्म की रक्षा प्रधान कार्य होना चाहिए। विकास के कार्य उसके बाद आते हैं। गोरक्षा, मन्दिरों की रक्षा, सन्तों की रक्षा, पर्वों में विघ्न पैदा करने वालों से रक्षा, अपने पवित्र तीर्थों की रक्षा, मतान्तरण से रक्षा, कट्टरवादियों द्वारा छोटी जातियों पर अन्याय से रक्षा, जो भी करेगा हिन्दू समाज एक वोट बैंक के नाते उसके पीछे खड़ा होगा। योगी आदित्यनाथ जी इसके उदाहरण हैं।
ब्रिटिश राज्य के समय से ही हिंसक चर्च भारत के उत्तर पूर्व में ʅलिबरेशन मूवमेन्टʆ के संगठन बनाकर हिन्दू समाज को आक्रान्त किए हुए है तथा सम्पूर्ण भारत में मतान्तरण की आंधी चलाए हुए है। चीन से प्रेरित माओवादी विचारधारा कम्युनिस्ट नाम से भारत के 400 से अधिक जिलों में हिंसा के सहारे जीवन दूभर किए हुए है। ये हिंसक अशान्ति पैदा करने वाले तत्व 100 करोड़ हिन्दुओं पर हावी हो रहे हैं। आज आवश्यकता है कि जो भी बन्धु हिन्दू समाज की रक्षा के लिए राजनीतिक, धार्मिक व सामाजिक क्षेत्र में कार्य कर रहे हैं, वे समवेत कार्य करें, एक-दूसरे के पूरक बनकर कार्य करें।
सरकारों की सेकुलरवादी नीतियों से देश में किस तरह की समस्याएं खड़ी हो रही हैं ?
इस देश का शत्रु है सेकुलरवाद। हिन्दू समाज को मिटाने का एक षड्यंत्र है सेकुलरवाद। मैं तो इतना ही जानता हूँ कि यदि इस देश में सेकुलरवाद चलता रहा तो हिन्दू समाज समाप्त हो जाएगा। इसलिए इस देश में हमेशा के लिए सेकुलरवाद समाप्त हो, इसका प्रबन्ध होना चाहिए। धर्म की रक्षा होनी चाहिए। हमारे देश में किसी पंथ का राज्य नहीं रहा है, मगर धर्म का राज्य रहा है। विदेशों में पंथ के राज्य रहे हैं, पर अपने यहां धर्म का राज्य चाहिए। सेकुलरवाद एक पंथ है और हमें किसी पंथ का राज्य मंजूर नहीं है। पिछले दिनों दिल्ली के सुभाष पार्क में रातों-रात एक मस्जिद का ढांचा खड़ा हो गया और उसमें दिल्ली की मुख्यमंत्री शीला दीक्षित की बड़ी भूमिका मानी जाती है। प्रश्न है कि क्या शीला जी सिर्फ मुसलमानों की मुख्यमंत्री हैं या दिल्ली के सभी नागरिकों की मुख्यमंत्री हैं? वह सेकुलर मुख्यमंत्री हैं। यदि राष्ट्रीय मुख्यमंत्री होतीं तो वहां मस्जिद का ढांचा खड़ा नहीं होता। उसी समय वह ढांचा गिरा दिया जाता। अब भी वह ढांचा नहीं गिराया जा रहा है। इस देश के भीतर जो हिन्दुओं के शत्रु हैं, सेकुलरवादी उनके लिए ही काम कर रहे हैं। यदि ये लोग इसी तरह काम करते रहेंगे तो देश की कानून-व्यवस्था ही ध्वस्त हो जाएगी। जब ये आतंकवाद के खिलाफ कुछ कर ही नहीं रहे हैं तो आतंकवाद सेकुलरवादियों की छत्रछाया में बढ़ता ही जाएगा।
क्या अपनी राजनीतिक उपेक्षा के लिए हिन्दू समाज स्वयं दोषी नहीं है?
हिन्दू समाज दोषी नहीं है, राजनीतिक दल दोषी हैं। सेकुलरों ने हिन्दू समाज को जाति, पंथ, सम्प्रदाय के नाम पर बांट रखा है। इसलिए सेकुलरों के दोष को हिन्दू समाज का दोष न कहें। हिन्दू समाज तो आज बड़े-बड़े साधु-सन्तों की गिरफ्त में है और वह अपनी रक्षा कर रहा है। बड़े-बड़े काम कर रहा है।
वर्तमान केन्द्र सरकार की नीतियों से हिन्दू समाज को किस प्रकार का नुकसान हो रहा है?
जब तक सेकुलरवादी राज्यसत्ता पर बने रहेंगे तब तक हिन्दू समाज को क्षति पहुंचती रहेगी। हिन्दू समाज के पांच शत्रु हैं, उनमें सबसे मुख्य सेकुलरवाद है। इस देश के भीतर जितनी भी विदेशी शक्तियां हैं, वे सभी हमारी शत्रु बनकर खड़ी हैं। इसमें कोई आश्चर्य की बात नहीं है। चर्च हमारा विरोध करता है और हिंसक तरीकों को अपनाकर अपना प्रचार करता है, तो यह उसकी रीति-नीति है, जो वर्षों से चली आ रही है। इस्लाम अपनी आक्रामकता के बल पर अपनी सत्ता का प्रभाव बढ़ा रहा है। यानी चर्च और हिंसक इस्लाम तो हमारे शत्रु हैं ही, चौथा शत्रु है चीन। उसका माओवाद हमारे यहां क्या कर रहा है, उसको सब जानते हैं। पांचवां शत्रु है वह सेकुलर मीडिया, जो इन सबका समर्थन करता है। सेकुलर मीडिया इन्हीं सबके पैसे पर पल रहा है। इन पांच शत्रुओं से घिरा है हिन्दू समाज। देखिए इन सबसे कौन पार पाता है।
पिछले दिनों असम में बोडो और बंगलादेशी मुस्लिम घुसपैठियों के बीच दंगे हुए। इस पर आपकी क्या राय है ?
आज असम के कोकराझार क्षेत्र में बोडो समाज के लोगों को, जो वहां के मूल निवासी हैं, बंगलादेशी घुसपैठिए सुनियोजित ढंग से उन्हें अपने ही गांव से भगाने के प्रयत्न में लगे हैं जिससे वे गांव छोड़कर चले जाएं और बंगलादेशी मुसलमान वहां अपनी पैठ बना लें। बंगलादेशी आज शिविरों में, जहां मुस्लिम शरणार्थी हैं, बाहर से आकर भारी संख्या में अपने नाम लिखा रहे हैं और उन्हें बोडो क्षेत्र में बसाया जाए, यह षड्यंत्र चल रहा है। असम सरकार उन्हें सहायता प्रदान कर रही है। इसे देश के राजनीतिज्ञों को रोकना चाहिए
 

Thursday, August 16, 2012

" डरो-मत , मुकाबला करो,इन दंगाइयों का " !!

 मुकाबला करने वाले सभी मित्रों को मेरा झुक कर सलाम !!                                                                                                                                   गुंडे - बदमाश चाहे वो कंही के हों, उनका डट कर मुकाबला करना ही चाहिए !! सरकार चाहे उनसे डर कर उनकी हिंसा की जांच ना कराये , उन पर कंट्रोल ना कर सके, मीडिया चाहे अपना मुंह बंद करले , तो भी आप सब मिलकर अपनी सुरक्षा करें !! मिडिया  की तो हमेशां से  यही चाल रही है की जब हम अपनी रक्षा  करने लगते  हैं तभी वो चीखता है की देखो हिंदुस्तान में " सेकुलर " मारे जा रहे हैं !! 
                   हमें अपनी जान बचाने का पूर्ण अधिकार इस देश संविधान ने दे रख्खा है !!
 सब " साम्प्रदायिक शक्तियों " एक हो जाओ !!
  चुप मत बैठो,उठो !! लड़ो !! भाजपा, चाहे चुप रहे !!....... भागो मत !!!

Wednesday, August 15, 2012

" आओ देश को साफ़ करें " ! ! !

 सफाई पसंद सभी मित्रों को मेरा नमस्कार !! 
  आज सब जान गए हैं की हमारा वतन पूरी तरह से गन्दा हो चुका है ! जिसमे हमारा भरपूर हाथ है ! एक पुरानी कहावत है कि " चोर को मारने से पहले, उसकी माँ को मारो" ! इसलिए क्योंकि हम सब ही चोर की "माँ " हैं !! सबसे पहले हमें,अपने-आप को ही मारना पड़ेगा !!?? यानीकि अपनी " इच्छाओं" को मारना पड़ेगा !! इच्छाएं सीमित हो जाएँगी तो भ्रष्टाचार अपने आप कम हो जायेंगी !! क्योंकि धन के पीछे भागना हमारा बंद हो जाएगा !!
               फिर हमें " झाड़ू " उठाना पड़ेगा और जंहाँ भ्रष्टाचार हो रहा हो वंहा सफाई करदो !! आप पूछोगे कि वो कैसे ??? तो मित्रो,वो ऐसे कि " सब अपने मोबाईल                                       से हो रहे भ्रष्टाचार की मूवी बनाओ और यू-ट्यूब में लोड करदो " फिर देखना सब भ्रष्टाचारी जैसे-जैसे नंगे होते जायेंगे वैसे वैसे ये कम होते जायेंगे !! अगर फिर भी अगर ऐसा काम हो तो सब मिलकर एक" छित्तर-पार्टी " बनाओ !! जूतों की माला पहनाओ, गधे पर बिठा कर " शोभायात्रा " निकालो !! शर्तिया इलाज है ये !! 
              जब से हमने ऐसे काम करने बंद कर दिये हैं और चोरों-भ्रष्टाचारियों                                          की हाँ में हाँ मिलानी शुरू कर दी है, तभी से ये बीमारी शुरू हुई है !! अब तो " नेता+व्यपारी+कर्मचारी " का एक " त्रिफला-चूरण " बन गया है !! अब तो कर्मचारी नेताओं और व्यपारी की पसंद की ही योजनायें बनाते हैं और ये तीनों बराबर-बराबर अपना हिस्सा बाँट लेते हैं ! ऐसा हर स्तर पर हो रहा है !!
             आपका क्या कहना है ????
 अपने विचार आप हमारे ब्लॉग पर जाकर टाईप करें, जिसका नाम है " 5th pillar corrouption killer " जिसका लिंक ये है :- www.pitamberduttsharma.blogspot.com. .....जय- हिंद !!!!!

Monday, August 13, 2012

" मन्नू " बाबा बोलेंगे लाल किले की प्राचीर से क्या ..???

 कभी कभी बोलने वाले मित्रों को मेरा नमस्कार !!
  हमारे माननीय प्रधानमंत्री सरदार मनमोहन सिंह जी , 15 अगस्त को लाल किले की प्राचीर से क्या बोलेंगे यही भारत और विश्व रहा सोच है । अन्ना टीम रो - रो कर थक गयी और शायद बिखरने के कगार  पर पंहुच गयी है और बाबा रामदेव जी भी संसद को चल पड़े हैं रामलीला मैदान को त्यागकर !!
  सरकार ससुरी सो रही है !!
                              मिडिया भी अपनी भूमिका बखूबी निभा रहा है यानी " पैसा फेंको तमाशा देखो " ?? 10-10 दिनों के आन्दोलनों पर भी सरकार के कानों पर " जूँ " तक नहीं रेंगती , तो जनता बेचारी इस भारी मंहगाई में रोटी का इंतजाम करे या लम्बे आन्दोलन करे ??? ये बात सरकार भी जानती है !!
      अब तो किसी को जबरदस्ती सत्ता परिवर्तन करना पड़ेगा या जनता को " समझदार " बनना पड़ेगा ......!!! क्योंकि इस लोकतंत्र के सारे रास्ते " नेताओं के चरणों " के नीचे से होकर गुज़रते हैं !!! और नेता तो नेता होता है जी ??????
                              आपका क्या विचार है जी ??? 
     " 5th pillar corrouption killer " पर जाकर टाईप करें लिंक  है :- www.pitamberduttsharma.blogspot.com. 
    

Thursday, August 9, 2012

क्या आप जानते है की कोई मीडिया समूह हिन्दू या हिन्दू संघठनो के प्रति इतना बैरभाव क्यों रखती है.

 -भारत में चलने वाले न्यूज़ चैनल, अखबार वास्तव में भारत के है ही नहीं…
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सन २००५ में एक फ़्रांसिसी पत्रकार भारत दौरे पर आया उसका नाम फ़्रैन्कोईस था उसने भारतमें हिंदुत्व के ऊपर हो रहे अत्याचारों के बारे में अध्ययन किया और उसने फिर बहुत हद तक इस कार्
य के लिए मीडिया को जिम्मेवार ठहराया.
फिर उसने पता करना शुरू किया तो वह आश्चर्य चकित रह गया की भारत में चलने वाले न्यूज़ चैनल, अखबार वास्तव में भारत के है ही नहीं… फीर मैंने एक लम्बाअध्ययन किया उसमे निम्नलिखित जानकारी निकल कर आई जो मै आज सार्वजानिककर रहा हु ..
विभिन्न मीडिया समूह और उनका आर्थिक श्रोत……
१-दि हिन्दू … जोशुआ सोसाईटी , बर्न, स्विट्जरलैंड , इसके संपादक एन राम , इनकी पत्नी ईसाई में बदल चुकी है.
२-एन डी टी वी … गोस्पेल ऑफ़ चैरिटी, स्पेन , यूरोप
३-सी एन एन , आई बी एन ७,सी एन बी सी …१००% आर्थिक सहयोग द्वारा साउदर्न बैपिटिस्ट चर्च
४-दि टाइम्स ऑफ़ इंडिया, नवभारत , टाइम्स नाउ… बेनेट एंड कोल्मान द्वारासंचालित ,८०% फंड वर्ल्ड क्रिस्चियन काउंसिल द्वारा , बचा हुआ २०% एक अँगरेज़ और इटैलियन द्वारा दिया जाता है. इटैलियन व्यक्ति का नाम रोबेर्ट माइन्दो है जो यु पी ए अध्यक्चा सोनिया गाँधी का निकट सम्बन्धी है.
५-स्टार टीवी ग्रुप…सेन्ट पीटर पोंतिफिसिअलचर्च , मेलबर्न,ऑस्ट्रेलिया
५-हिन्दुस्तान टाइम्स,दैनिक हिन्दुस्तान…माल िक बिरला ग्रुप लेकिन टाइम्सग्रुप के साथ जोड़ दिया गया है..
६-इंडियन एक्सप्रेस…इसे दो भागो में बाट दिया गया है , दि इंडियन एक्सप्रेस और न्यू इंडियन एक्सप्रेस(साउदर्न एडिसन) -Acts Ministries has major stake in the Indian express and later is still with the Indian कौन्तेर्पर्त
७-दैनिक जागरण ग्रुप… इसके एक प्रबंधक समाजवादीपार्टी से राज्य सभा में सांसद है… यह एक मुस्लिम्वादी पार्टी है.
८-दैनिक सहारा .. इसके प्रबंधन सहारा समूह देखतीहै इसके निदेशक सुब्रोतो राय भी समाजवादी पार्टी के बहुत मुरीद है
९-आंध्र ज्योति..हैदराबा द की एक मुस्लिम पार्टी एम् आई एम् (MIM ) ने इसे कांग्रेस के एक मंत्री के साथ कुछ साल पहले खरीद लिया
१०- दि स्टेट्स मैन… कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ़ इंडिया द्वारा संचालित
इस तरह से एक लम्बा लिस्ट हमारे सामने है जिससे ये पता चलता है की भारत की मीडिया भारतीय बिलकुल भी नहीं है.. और जब इनकी फंडिंग विदेश से होती है है तो भला भारत के बारे में कैसे सोच सकते है..
अपने को पाक साफ़ बताने वाली मीडिया के भ्रस्ताचार की चर्चा करनायहाँ पर पूर्णतया उचित ही होगा
बरखा दत्त जैसे लोग जो की भ्रस्ताचार का रिकार्ड कायम किया है उनके भ्रस्ताचरणकी चर्चा दूर दूर तक है , इसके अलावा आप लोगो को सायद न मालूम हो पर आपको बता दू की लगभग ये १००% सही बात है की NDTV की एंकर बरखादत्त ने ईसाई धर्म स्वीकार कर लिया है..
प्रभु चावला जो की खुद रिलायंस के मामले में सुप्रीम कोर्ट में फैसला फिक्स कराते हुए पकडे गए उनके सुपुत्र आलोक चावला, अमर उजाला के बरेली संस्करण में घोटाला करते हुए पकडे गए.
दैनिक जागरण ग्रुप ने अवैध तरीके से एक ही रजिस्ट्रेसन नो. पर बिहार में कई जगह पर गलत ढंग से स्थानीय संस्करण प्रकाशितकिया जो की कई साल बाद में पकड़ में आया और इन अवैध संस्करणों से सरकार को २०० करोड़ का घटा हुआ.
दैनिक हिन्दुस्तान ने भी जागरण के नक्शेकदम पर चलते हुए यही काम किया उसने भी २०० करोड़ रुपये का नुकशान सरकार को पहुचाया इसके लिए हिन्दुस्तान के मुख्य संपादक सशी शेखर के ऊपर मुक़दमा भी दर्ज हुआ है.. शायद यही कारण है की भारत की मीडिया भी काले धन , लोकपाल जैसे मुद्दों पर सरकार के साथ ही भाग लेती है.....

सभी लोगो से अनुरोध है की इस जानकारी को अधिक से अधिक लोगो के पास पहुचाये ताकि दूसरो को नंगा करने वाले मीडिया की भी सच्चाई का पता लग सके.....   । रोजाना पढ़िए " 5th pillar corrouption killer " . link :- www.pitamberduttsharma.blogspot.com.

* पूरे विश्व को सभ्यता हमने सिखाई और आज हम उनसे सभ्यता सिख रहे हैं ==========================================



ध्यान-साधना, योग, आयुर्वेद, ये सारी अनमोल चीजें हमारी विरासत थी लेकिन अंग्रेजों ने हम लोगों के मन में बैठा दिया कि ये सब फालतू कि चीज़े हैं और हम लोगों ने मान भी लिया पर आज जब उनको जरुरत पड़ रही हैं इन सब चीजों कि तो फिर से हम लोगों कि शरण में दौड़े-भागे आ रहे हैं और अब हमारा योग 'योगा' बनकर हमारे पास आया तब जाकर हमें एहसास हो रहा हैं कि जिसे हम कंचे समझकर खेल रहे थे, वो हीरा था। उस आयुर्वेद के ज्ञान को विदेशी वाले अपने नाम से पेटेंट करा रहे हैं जिसके बाद उसका व्यापारिक उपयोग हम नहीं कर पायेंगे। इस आयुर्वेद का ज्ञान इस तरह रच बस गया हैं हम लोगों के खून में कि चाहकर भी हम इसे भुला नहीं सकते ...आज भले ही बहुत कम ज्ञान हैं हमें आयुर्वेद का पर पहले घर कि हरेक औरतों को इसका पर्याप्त ज्ञान था तभी तो आज दादी माँ के नुस्खे या नानी माँ के नुख्से पुस्तक बनकर छप रहे हैं। उस आयुर्वेद की छाया प्रति तैयार करके अरबी वाले 'यूनानी चिकित्सा' का नाम देकर प्रचलित कर रहे हैं।

जिस समय पश्चिम में आदिमानवों ने कपडे पहनना सीखा था...उस समय हमारे यहाँ लोग पुष्पक विमान में उड़ा करते थे। आज अगर विदेशी वाले हमारे ज्ञान को अपने नाम से पेटेंट करा रहे हैं तो हमारी नपुंसकता के कारण ही ना ??
वो तो योग के ज्ञाता नहीं रहे होंगे विदेश में और जब तक होते तब तक स्वामी रामदेव जी आते नहीं तो ये किसी विदेशी के नाम से पेटेंट हो चुका होता....हमारी एक और महान विरासत हैं संगीत की जो माँ सरस्वती की देन हैं किसी साधारण मानवों की नहीं। फिर इसे हम तुच्छ समझकर इसका अपमान कर रहे हैं। याद हैं आज से साल भर पहले हमारे संगीत-निर्देशक ए.आर. रहमान (पहले नाम दिलीप कुमार) को संगीत के लिए आस्कर पुरूस्कार दिया गया था.....और गर्व से सीना चौड़ा हम भारतियों का जबकि मुझे ऐसा लग रहा था कि मेरे अपनों ने मुझे जख्म दिया और अंग्रेज उसमे नमक छिड़क रहे हैं और मेरे अपने उसे देखकर खुश हो रहे हैं।
किस तरह भीगा कर जूता मारा था अंग्रेजों ने हम भारतियों के सर पर और हम गुलाम भारतीय उसमे भी खुश हो रहे थे कि मालिक ने हमें पुरस्कार तो दिया..... भले ही वो जूतों का हार ही क्यों ना हों ?? अरे शर्म से डूब जाना चाहिए हम भारतियों को अगर रत्ती भर भी शर्म बची है तो ??
बेशक रहमान की जगह कोई सच्चा देशभक्त होता तो ऐसे आस्कर को लात मार कर चला आता ........क्योंकि वो पुरस्कार अच्छे संगीत के लिए नहीं दिए गए थे बल्कि उसने पश्चिमी संगीत को मिलाया था भारतीय संगीत में इसलिए मिला वो पुरस्कार....यानी कि भारतीय संगीत कितना भी मधुर क्यों न हों आस्कर लेना हैं तो पश्चिमी संगीत को अपनाना होगा........सीधा सा मतलब यह हैं कि हमें कौन सा संगीत पसंद करना हैं और कौन सा नहीं ये हमें अब वो बताएँगे .........इससे बड़ा और गुलामी का सबूत और क्या हो सकता हैं कि हम अपनी इच्छा से कुछ पसंद भी नहीं कर सकते......कुछ पसंद करने के लिए भी विदेशियों कि मुहर लगवानी पड़ेगी उस पर हमें.... जिसे क,ख,ग भी नहीं पता अब वो हमें संगीत सिखायेंगे जहाँ संगीत का मतलब सिर्फ गला फाड़कर चिल्ला देना भर होता हैं वो सिखायेंगे ??

ज्यादा पुरानी बात भी नहीं हैं ये ......हरिदास जी और उसके शिष्य तानसेन (जो अकबर के दरबारी संगीतज्ञ थे) के समय कि बात हैं जब राज्य के किसी भाग में सुखा और आकाल कि स्थिति पैदा हो जाती थी तो तानसेन को वहां भेजा जाता था वर्षा करने के लिए......तानसेन में इतनी क्षमता थी कि मल्हार गाके वर्षा करा दे, दीपक राग गाके दीपक जला दे और शीतराग से शीतलता पैदा कर दे तो प्राचीन काल में अगर संगीत से पत्थर मोम बन जाता था, जंगल के जानवर खींचे चले आते थे कोई आश्चर्य की बात नहीं होनी चाहिए क्योंकि ये बात कोई भी अनुभव कर सकता हैं की किस तरह दिनों-दिन संगीत-कला विलुप्त होती जा रही हैं .....और संगीत कला का गुण तो हम भारतियों के खून में हैं .......किशोर कुमार, उषा मंगेशकर, कुमार सानू जैसे अनगिनत उदाहरण हैं जो बिना किसी से संगीत की शिक्षा लिए बॉलीवुड में आये थे।
एक और उदहारण हैं जब तानसेन की बेटी ने रात भर में ही "शीत राग" सीख लिया था.......चूँकि दीपक राग गाते समय शरीर में इतनी ऊष्मा पैदा हो जाती हैं कि अगर अन्य कोई “शीत राग” ना गाये तो दीपक राग गाने वाले व्यक्ति की मृत्यु हो जायेगी और तानसेन के प्राण लेने के उद्द्येश्य से ही एक चाल चलकर उसे दीपक राग गाने के लिए बाध्य किया था उससे इर्ष्या करने वाले दरबारियों ने ..........और तानसेन भी अपनी मृत्यु निश्चित मान बैठे थे क्योंकि उनके अलावा कोई और इसका ज्ञाता (जानकार) भी नहीं था और रातभर में सीखना संभव भी ना था किसी के लिए पर वो भूल गए थे कि उनकी बेटी में भी उन्ही का खून था और जब पिता के प्राण पर बन आये तो बेटी असंभव को भी संभव करने कि क्षमता रखती हैं ...... तानसेन के ऐसे सैकड़ों कहानियां हैं पर ये छोटी सी कहानी मैंने आप लोगों को अपने भारत के महान संगीत विरासत कि झलक दिखने के लिए लिखी.......अब सोचिये कि ऐसे में अगर विदेशी हमें संगीत कि समझ कराये तो ऐसा ही हैं जैसे पोता, दादा जी को धोती पहनना सिखाये, राक्षस साधू-महात्माओं को धर्म का मर्म समझाए और शेर किसी हिरन को अपने पंजे में दबाये अहिंसा कि शिक्षा दे ......नहीं..??
हम लोगों के यहाँ सात सुर से संगीत बनता हैं इसलिए 'सात तारों से बना सितार' बजाते हैं हमलोग, लेकिन अंग्रेजों को क्या समझ में आ गया जो छह तार वाला वाध्य-यंत्र बना लिया और सितार कि तर्ज पर उन्सका नामकरण गिटार कर दिया ??

इतना कहने के बाद भी हमारे भारतीय नहीं मानेगे मेरी बात पर जब कोई अंग्रेज कहेगा कि उसने गायों को भारतीय संगीत सुनाया तो ज्यादा दूध लिया या जब शोध सामने आएगा कि भारतीय संगीत का असर फसलों पर पड़ता हैं और वे जल्दी-जल्दी बढ़ने लगते हैं तब हम विश्वास करेंगे.... क्यों ?? ये सब शोध अंग्रेज को भले आश्चर्यचकित कर दे पर अगर ये शोध किसी भारतीय को आश्चर्यचकित करते हैं तो ये दुःख: कि बात हैं।

हमारे देश वासियों को लगता हैं हम लोग पिछड़े हुए हैं जो हमारे यहाँ छोटे-छोटे घर हैं और दूसरी और अंग्रेज तकनीकी विद्या के कितने ज्ञानी हैं, वो खुशनसीब हैं जो उनके यहाँ इतनी ऊँची-ऊँची अट्टालिकाए (Buildings) हैं और इतने बड़े-बड़े पुल हैं........ इस पर मैं अपने देशवासियों से यहीं कहूँगा कि ऊँचे घर बनाना मज़बूरी और जरुरत हैं उनकी, विशेषता नहीं..... हमलोग बहुत भाग्यशाली हैं जो अपनी धरती माँ कि गोद में रहते हैं विदेशियों कि तरह माँ के सर पर चढ़ कर नहीं बैठते।
हम लोगों को घर के छत, आँगन और द्वार का सुख प्राप्त होता हैं .....जिसमें गर्मी में सुबह-शाम ठंडी-ठंडी हवा जो हमें प्रकृति ने उपहार-स्वरूप प्रदान किये हैं उसका आनंद लेते हैं और ठण्ड में तो दिन-दिन भर छत या आँगन में बैठकर सूर्य देव कि आशीर्वाद रूपी किरणों को अपने शारीर में समाते हैं, विदेशियों कि तरह धुप सेंकने के लिए नंगे होकर समुन्द्र के किनारे रेत पर लेटते नहीं हैं.............रही बात क्षमता कि तो जरुरत पड़ने पर हमने समुन्द्र पर भी पत्थरों का पुल बनाया था और रावण तो पृथ्वी से लेकर स्वर्ग तक सीढ़ी बनाने कि तैयारी कर रहा था तो अगर वो चाहता तो गगनचुम्बी इमारते भी बना सकता था लेकिन अगर नहीं बनाया तो इसलिए कि वो विद्वान था।
तथ्यपूर्ण बात तो ये हैं कि हम अपनी धरती माँ के जितने ही करीब रहेंगे रोगों से उतना ही दूर रहंगे और जितना दूर रहेंगे रोगों के उतना करीब जायेंगे। हमारे मित्रों को इस बात कि भी शर्म महसूस होती हैं कि हम लोग कितने स्वार्थी, बेईमान, झूठे, मक्कार, भ्रष्टाचारी और चोर होते हैं जबकि अंग्रेज लोग कितने ईमानदार होते हैं ....हम लोगों के यहाँ कितनी धुल और गंदगी हैं जबकि उनके यहाँ तो लोग महीने में एक-दो बार ही झाड़ू मारा करते हैं.......तो जान लीजिये कि वैज्ञानिक शोध ये कहती हैं कि साफ़ सुथरे पर्यावरण में पलकर बड़े होने वाले शिशु कमजोर होते हैं, उनके अन्दर रोगों से लड़ने कि शक्ति नहीं होती दूसरी तरफ दूषित वातावरण में पलकर बढ़ने वाले शिशु रोगों से लड़ने के लिए शक्ति संपन्न होते हैं। इसका अर्थ ये मत लगा लीजियेगा कि मैं गंदगी पसंद आदमी हूँ, मैं भारत में गंदगी को बढ़ावा दे रहा हूँ ........मेरा अर्थ ये हैं कि सीमा से बाहर शुद्धता भी अच्छी नहीं होती और जहाँ तक भारत कि बात हैं तो यहाँ हद से ज्यादा गंदगी हैं जिसे साफ़ करने कि अत्यंत आवश्यकता हैं.......रही बात झाड़ू मारने कि तो घर गन्दा हो या ना हों झाड़ू तो रोज मारना ही चाहिए क्योंकि झाड़ू मारकर हम सिर्फ धुल-गंदगी को ही बाहर नहीं करते बल्कि अपशकुन को भी झाड -फुहाड़ कर बाहर कर देते हैं तभी तो हम गरीब होते हुए भी खुश रहते हैं।
भारतीय को समृद्धि कि सूची में पांचवे स्थान पर रखा गया था क्योंकि ये पैसे के मामले में भले कम हैं लेकिन और लोगो से ज्यादा सुखी हैं और जहाँ तक हमारे ऐसे बनने की बात है तो वो सब अंग्रेजों ने ही सिखाया है हमें, नहीं तो उसके आने के पहले हम छल-कपट जानते तक नहीं थे........उन्होंने हमें धर्म-विहीन और चरित्र-विहीन शिक्षा देना शुरू किया ताकि हम हिन्दू धर्म से घृणा करने लगे और ईसाई बन जाए।
उन्होंने नौकरी आधारित शिक्षा व्यवस्था लागू की ताकि बच्चे नौकरी करने कि पढाई के अलावा और कुछ सोच ही न पाए. इसका परिणाम तो देख ही रहे हैं कि अभी के बच्चे को अगर चरित्र, धर्म या देशहित के बारे में कुछ कहेंगे तो वो सुनना ही नहीं चाहता..........वो कहता है उसे अभी सिर्फ अपने कोर्स कि किताबों से मतलब रखना हैं और किसी चीज़ से कोई मतलब नहीं उसे......अभी कि शिक्षा का एकमात्र उद्द्येश्य नौकरी पाना रह गया हैं ....लोगो को किताबी ज्ञान तो बहुत मिल जाता हैं कि वो ……
डॉक्टर, इंजिनियर, वकील, आई.ए.एस. या नेता बन जाता हैं पर उसकी नैतिक शिक्षा न्यूनतम स्तर कि भी नहीं होती जिसका कारण रोज एक-से-बढ़कर एक अपराध और घोटाले करते रहते हैं ये लोग। अभी कि शिक्षा पाकर बच्चे नौकरी पा लेते हैं लेकिन उनका मानसिक और बौद्धिक विकास नहीं हो पाता हैं, इस मामले में वो पिछड़े ही रह जाते हैं जबकि हमारी सभ्यता में ऐसी शिक्षा दी जाती थी जिससे उस व्यक्ति के पूर्ण व्यक्तिगत का विकास होता था.....उसकी बुद्धि का विकास होता था, उसकी सोचने-समझने कि शक्ति बढती थी।
आज ये अंग्रेज जो पूरी दुनिया में ढोल पिट रहे हैं कि ईसाईयत के कारण ही वो सभ्य और विकसित हुए और उनके यहाँ इतनी वैज्ञानिक प्रगति हुई तो क्या इस बात का उत्तर हैं उनके पास कि कट्टर और रुढ़िवादी ईसाई धर्म जो तलवार के बल पर 25-50 कि संख्या से शुरू होकर पूरा विश्व में फैलाया गया, जो ये कहता हो कि सिर्फ बाईबल पर आँख बंदकर भरोसा करने वाले लोग ही स्वर्ग जायेंगे बाकी सब नर्क जाएंगे,,,जिस धर्म में बाईबल के विरुद्ध बोलने कि हिम्मत बड़ा से बड़ा व्यक्ति भी नहीं कर सकता वो इतना विकासशील कैसे बन गया ???
400 साल पहले जब गैलीलियों ने यूरोप की जनता को इस सच्चाई से अवगत कराना चाहा कि पृथ्वी सूर्य कि परिक्रमा करती हैं तो ईसाई धर्म-गुरुओं ने उसे खम्बे से बांधकर जीवित जलाये जाने का दंड दे दिया वो तो बेचारा क्षमा मांगकर बाल-बाल बचा। एक और प्रसिद्ध पोप, उनका नाम मुझे अभी याद नहीं, वे भी मानते थे कि पृथ्वी सूर्य के चारो और घुमती हैं लेकिन जीवन भर बेचारे कभी कहने की हिम्मत नहीं जुटा पाए...उनके मरने के बाद उनकी डायरी से ये बात पता चली। क्या ऐसा धर्म वैज्ञानिक उन्नति में कभी सहायक हो सकता हैं ??? ये तो सहायक की बजाय बाधक ही बन सकता हैं।

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हिन्दू जैसे खुले धर्म को जिसे गरियाने की पूरी स्वतंत्रता मिली हुई हैं सबको, जिसमें कोई मूर्ति-पूजा करता हैं, कोई ध्यान-साधना, कोई तन्त्र-साधना, कोई मन्त्र-साधना ....... ऐसे अनगिनत तरीके हैं इस धर्म में, जिस धर्म में कोई बंधन नहीं ..जिसमें नित नए खोज शामिल किये जा सकते हैं और समय तथा परिस्थिति के अनुसार बदलाव करने की पूरी स्वतंत्रता हैं, जिसने सिर्फ पूजा-पाठ ही नहीं बल्कि जीवन जीने की कला सिखाई, 'वसुधैव कुटुम्बकम' का नारा दिया, पूरे विश्व को अपना भाई माना, जिसने अंक शास्त्र, ज्योतिष-शास्त्र, आयुर्वेद-शास्त्र, संगीत-कला, भवन निर्माण कला, काम-कला आदि जैसे अनगिनत कलाएं तुम लोगों (ईसाईयों) को दी और तुम लोग कृतघ्न, जो नित्यकर्म के बाद अपने गुदा को पानी से धोना भी नहीं जानते, हमें ही गरियाकर चले गए।
अगर ईसाई धर्म के कारण ही तुमने तरक्की की तो वो तो 1800 साल पहले कर लेनी चाहिए थी, पर तुमने तो 200-300 साल पहले जब सबको लूटना शुरू किया और यहाँ (भारत) के ज्ञान को सीख-सीखकर यहाँ के धन-दौलत को हड़पना शुरू किया तबसे तुमने तरक्की की ऐसा क्यों ???
ये दुनिया करोडों वर्ष पुरानी हैं लेकिन तुम लोगों को 'ईसा और मुहम्मद' के पहले का इतिहास पता ही नहीं ......कहते हो बड़े-बड़े विशाल भवन बना दिए तुमने.....अरे जाओ, जब आज तक पिछवाडा धोना सीख ही नहीं पाए, खाना बनाना सीख ही नहीं पाए, जो की अभी तक उबालकर नमक डालकर खाते तो बड़े-बड़े भवन बनाओगे तुम। एक भी ग्रन्थ तुम्हारे पास-भवन निर्माण के ?? जो भी छोटे-मोटे होंगे वो हमारे ही नक़ल किये हुए होंगे।

प्रोफ़ेसर ओक ने तो सिद्ध कर दिया की भारत में जितने प्राचीन भवन हैं वो हिन्दू भवन या मंदिर हैं जिसे मुस्लिम शासकों ने हड़प कर अपना नाम दे दिया और विश्व में भी जो बड़े-बड़े भवन हैं उसमें हिन्दू शैली की ही प्रधानता हैं। ये भी हंसी की ही बात हैं की मुग़ल शासक महल नहीं सिर्फ मकबरे और मस्जिद ही बनवाया करते थे भारत में। जो हमेशा गद्दी के लिए अपने बाप-भाईयों से लड़ता-झगड़ता रहता था, अपना जीवन युद्ध लड़ने में बिता दिया करते थे उसके मन में अपने बाप या पत्नी के लिए विशाल भवन बनाने का विचार आ जाया करता था !! इतना प्यार करता था अपनी पत्नी से जिसको बच्चा पैदा करवाते करवाते मार डाला उसने !! मुमताज़ की मौत बच्चा पैदा करने के दौरान ही हुई थी और उसके पहले वो 14 बच्चे को जन्म दे चुकी थी ......जो भारत को बर्बाद करने के लिए आया था, यहाँ के नागरिकों को लूटकर, लाखों-लाख हिन्दुओं को काटकर और यहाँ के मंदिर और संस्कृतिक विरासत को तहस-नहस करके अपार खुशी का अनुभव करता था वो यहाँ कोई सृजनात्मक विरासत कार्य करे ये तो मेरे गले से नहीं उतर सकता। जिसके पास अपना कोई स्थापत्य कला का ग्रन्थ नहीं हैं वो भारत की स्थापत्य कला को देखकर ये कहने को मजबूर हो गया था की भारत इस दुनिया का आश्चर्य हैं इसके जैसा दूसरा देश पूरी दुनिया में कहीं नहीं हो सकता हैं, वो लोग अगर ताजमहल बनाने का दावा करते हैं तो ये ऐसा ही हैं जैसा 3 साल के बच्चे द्वारा दसवीं का प्रश्न हल करना।

दुःख तो ये हैं की आज़ाद देश आज़ाद होने के बाद भी मुसलमानों को खुश रखने के लिए इतिहास में कोई सुधर नहीं किये, हमारे मुसलमान और ईसाई भाइयों के मूत्र-पान करने वाले हमारे राजनितिक नेताओं ने। आज जब ये सिद्ध हो चूका हैं की ताजमहल शाहजहाँ ने नहीं बनवाया बल्कि उससे सौ-दो-सौ साल पहले का बना हुआ हैं तो ऐसे में अगर सरकार सच्चाई लाने की हिम्मत करती तो क्या हम भारतीय गर्व का अनुभव नहीं करते ? क्या हमारी हीन भावना दूर होने में मदद नहीं मिलती? ताजमहल साथ आश्चर्यों में से एक हैं ये सब जानते हैं पर सात आश्चर्यों में ये क्यों शामिल हैं ये कितने लोग जानते हैं ? इसके शामिल होने का कारण इसकी उत्कृष्ट स्थापत्य कला, इसकी अदभुत कारीगरी को अब तक आधुनिक इंजीनियर समझने की कोशिश कर रहे हैं। जिस प्रकार कुतुबमीनार के लौह-स्तम्भ की तकनीक को समझने की कोशिश कर रहे हैं......जो की अब तक समझ नहीं पाए हैं। (इस भुलावे में मत रहिएगा की कुतुबमीनार को कुतुबद्दीन एबक ने बनवाया था)...... मोटी-मोटी तो मैं इतना ही जानता हूँ की यमुना नहीं के किनारे के गीली मुलायम मिटटी को इतने विशाल भवन के भार को सेहन करने लायक बनाना, पूरे में सिर्फ पत्थरों का काम करना समान्य सी बात नहीं हैं .........इसको बनाने वाले इंजिनियर के इंजीनियरिंग प्रतिभा को देखकर अभी के इंजीनियर दांतों तले ऊँगली दबा रहे हैं। अगर ये सब बातें जनता के सामने आएगी तभी तो हम अपना खोया आत्मविश्वास प्राप्त कर पायेंगे ........1200 सालों तक हमें लूटते रहे, लूटते रहे, लूटते रहे और जब लुट-खसौट कर कंगाल कर दिया तब अब हमें एहसास करा रहे हों की हम कितने दीन-हीन हैं और ऊपर से हमें इतिहास भी गलत पढ़ा रहे हैं इस डर से की कहीं फिर से अपने पूर्वजों का गौरव इतिहास पढ़कर हम अपना आत्मविश्वास ना पा लें। अरे, अगर हिम्मत हैं तो एक बार सही इतिहास पढ़कर देखों हमें.....हम स्वाभिमानी भारतीय जो सिर्फ अपने वचन को टूटने से बचाने के लिए जान तक गवां देते थे इतने दिनों तक दुश्मनों के अत्याचार सहते रहे तो ऐसे में हमारा आत्म-विश्वास टूटना स्वभाविक ही हैं .....हम भारतीय जो एक-एक पैसे के लिए, अन्न के एक-एक दाने के लिए इतने दिनों तक तरसते रहे तो आज हीन भावना में डूब गए, लालची बन गए, स्वार्थी बन गए तो ये कोई शर्म की बात नहीं........ऐसी परिस्थिति में तो धर्मराज युधिष्ठिर के भी पग डगमगा जाएँ....आखिर युधिष्ठिर जी भी तो बुरे समय में धर्म से विचलित हो गए थे जो अपनी पत्नी तक को जुए में दावं पर लगा दिए थे।

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* चलिए इतिहास तो बहुत हो गया अब वर्तमान पर आते हैं *
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वर्तमान में आप लोग देख ही रहे हैं कि विदेशी हमारे यहाँ से डाक्टर-इंजिनियर और मैनेजर को ले जा रहे हैं इसलिए कि उनके पास हम भारतियों कि तुलना में दिमाग बहुत ही कम हैं। आप लोग भी पेपरों में पढ़ते रहते होंगे कि अमेरिका में गणित पढ़ाने वाले शिक्षकों की कमी हो जाती हैं जिसके लिए वो भारत में शिक्षक की मांग करते हैं तो कभी ओबामा भारतीय बच्चो की प्रतिभा से डर कर अमेरिकी बच्चो को सावधान होने की नसीहत देते हैं । पूर्वजों द्वारा लुटा हुआ माल हैं तो अपनी कंपनी खड़ी कर लेते हैं लेकिन दिमाग कहाँ से लायेंगे....उसके लिए उन्हें यहीं आना पड़ता हैं ....हम बेचारे भारतीय गरीब पैसे के लालच में बड़े गर्व से उनकी मजदूरी करने चले जाते थे, पर अब परिस्थिति बदलनी शुरू हो गयी हैं। अब हमारे युवा भी विदेश जाने की बजाय अपने देश की सेवा करना शुरू कर दिए हैं ....वो दिन दूर नहीं जब हमारे युवाओं पर टिके विदेशी फिर से हमारे गुलाम बनेंगे। फिर से इसलिए कह रहा हूँ क्योंकि पूरे विश्व पर पहले हमारा शासन चलता था जिसका इतिहास मिटा दिया गया हैं ........लेकिन जिस तरह सालों पहले हुई हत्या जिसकी खूनी ने अपनी तरफ से सारे सबूत मिटा देने की भरसक कोशिश की हो, उसकी जांच अगर की जाती हैं तो कई सुराग मिल जाते हैं जिससे गुत्थी सुलझ ही जाती हैं, बिलकुल यहीं कहानी हमारे इतिहास के साथ भी हैं जिस तरह अब हमारे युवा विदेशों के करोड़ों रुपये की नौकरी को ठुकराकर अपने देश में ही इडली, बड़ा पाव सब्जी बेचकर या चालित शौचालय, रिक्शा आदि का कारोबार कर करोड़ों रुपये सालाना कम रहे हैं, ये संकेत हैं की अब हमारे युवा अपना खोया आत्म-विशवास प्राप्त कर रहे हैं और उनमे नेतृत्व क्षमता भी लौट चुकी हैं तो वो दीन भी दूर नहीं जब पूरे विश्व का नेतृत्व फिर से हम भारतियों के हाथों में होगा और हम पुन: विश्वगुरु के सिंहासन पर आसीन होंगे। जिस तरह हरेक के लिए दिन के बाद रात और रात के बाद दिन आता है वैसे हम लोगों के 1200 सालों से ज्यादा रात का समय कट चुका हैं अब दिन निकल आया हैं ...इसका उदाहरण देख लो भारत का झारखंड राज्य जहां जनसँख्या 3 करोड़ की नहीं हैं और यहाँ 14,000 करोड़ का घोटाला हो जाता हैं फिर भी ये राज्य प्रगति कर रहा है।

इसलिए अपने पराधीन मानसिकता से बाहर आओ, डर को निकालों अपने अन्दर से हमें किसी दूसरे का सहारा लेकर नहीं चलना हैं। खुद हमारे पैर ही इतने मजबूत हैं की पूरी दुनिया को अपने पैरों तले रौंद सकते हैं हम ...हम वही हैं जिसने विश्वविजेता का सपना देखने वाले सिकन्दर का दंभ चूर-चूर कर दिया था। गौरी को 13 बार अपने पैरों पर गिराकर गिडगिडाने को मजबूर किया और जीवनदान दिया। जिस प्रकार बिल्ली चूहे के साथ खेलती रहती हैं वैसे ही ये दुर्भाग्य था हमारा जो शत्रू के चंगुल में फंस गए क्योंकि उस चूहे ने अपनों की ही सहायता ले ली पर हमने उसे छोड़ा नहीं, अँधा हो जाने के बावजूद भी उसे मारकर मरे........जिस प्रकार जलवाष्प की नन्ही-नन्ही पानी की बूंदें भी एकत्रित हो जाने पर घनघोर वर्षा कर प्रलय ला देती है, अदृश्य हवा भी गति पाकर भयंकर तबाही मचा देती है, नदी-नाले की छोटी लहरें नदी में मिलकर एक होती है तो गर्जना करती हुई अपने आगे आने वाली हरेक अवरोधों को हटाती हुई आगे बढती रहती है वैसे ही मैं अभी भले ही जलवाष्प की एक छोटी सी बूंद हूँ, पर अगर आप लोग मेरा साथ दो तो इसमें कोई शक नहीं की हम भारतीय फिर से इस दुनिया को अपने चरणों में झुका देंगे....... और मुझे पता हैं दोस्त.........मेरे जैसी करोड़ों बूंदें एकृत होकर बरसने को बेकरार हैं इसलिए अब और ज्यादा विलंब ना करो और मेरे हाँथ में अपना हाँथ दो मित्र और अगर किसी को इस लेख से किसी भी प्रकार की चोट पहुंचाई तो उसके लिए भी क्षमा मांगता हूँ।

Wednesday, August 8, 2012

क्या गलत कहा आडवाणी जी ने ? यूपीए 2 को अवैध और करोड़ो रुपये देकर बनाई सरकार कहा तो क्या गलत है ?





आईबीएन समूह के सर्वेसर्वा राजदीप सरदेसाई अगर ब्रिटेन या अन्य यूरोपीय देशों में होते तो निश्चित मानिए कि उनकी जगह जेल होती और उनके न्यूज चैनल आईबीएन पर ताला जड़ गया होता। सामाजिक जलालत अलग से झेंलनी पड़ती। कानूनों की घेरेबंदी में इनकी ईमानदारी के पचखडे उड़ गये होते। इनकी पेज थ्री संस्कृति जमींदोज हो जाती। सड़कों पर चलने के दौरान इनके उपर अंडे-टमाटरों की बरसात होती। इनकी ज्ञात और अज्ञात संपति भी अपराध की श्रेणी में खड़ी होती। लेकिन ऐसा अभी तक नहीं हुआ है जिसका मतलब है कि अनैतिक, पतनशील और भ्रष्ट सत्ता वाली व्यवस्था के अंतर्गत ही राजदीप सरदेसाई जैसी संस्कृति जन्म ले सकती है और फल-फूल सकती है।

कैश फॉर वोट कांड में राजदीप सरदेसाई एक अपराधी के तौर पर खड़े हैं।

एक साथ इन्होंने कई अपराधिक षडयंत्रों को रचा और संबंधित कानूनों के पचखड़े उड़ाये। प्रसारण नियमावली का उल्लंधन किया। दर्शकों और पाठको के कानूनी/नैतिक और परम्परागत अधिकार से वंचित किया। राजदीप सरदेसाई को न्यूज दबाने के षडयंत्र के लिए प्रसारण लाइसेंस दिये गये थे क्या? पत्रकारिता के मूल्यों और जिम्मेदारियों की ऐसी हताश प्रक्रिया के उदाहरण रचकर पत्रकारिता की विश्वसनीयता और लोकतांत्रिक ढाचे पर कलंक का बीज बोया गया है। मीडिया की थोड़ी सी भी समझ रखने वाली देश की आबादी स्पष्ट तौर पर राजदीप सरदेशाई के उस कुकृत्य को अपराध की श्रेणी में ही नहीं मानता है बल्कि चैनल चलाने के निहित जरूरी अहर्ताओं का उल्लंघन भी मानता है। मीडिया स्टडी ग्रुप के शोध में दिल्ली और छोटे-छोटे शहरों के पत्रकारों की राय एकमत रूप से आईबीएन और इनके कर्ताधर्ता राजदीप सरदेसाई को अप्रत्यक्ष नहीं बल्कि प्रत्यक्षतौर पर दोषी माना है और प्रसारण लाइसेंस का उल्लंधन भी।

अगर आईबीएन ने समाचार दबाने का षडयंत्र नहीं किया होता और ईमानदारी दिखायी होती तो निश्चित तौर पर मनमोहन सिंह, उनके मैनजरों तथा अमर सिंह एंड पार्टी का काला चेहरा उसी समय उजागर हो गया होता जिस समय परमाणु मुद्दे पर सरकार बचाने के लिए सांसदों के जमीर को खरीदा गया था और लोकतंत्र को पैसों की शक्ति से कुचला गया था। किस उ्देश्य से समाचार प्रसारण रोकने का षडयंत्र हुआ था। कही कांग्रेस/ मनमोहन सत्ता और आईबीएन के बीच पैसे की शक्ति तो काम नहीं कर रही थी। कही सांसदों को पैसे के बल पर खरीदने जैसी प्रक्रिया कांग्रेस और उसके मैनजरों ने आईबीएन के साथ तो नहीं चलायी थी? यही खोज का विषय है। पुलिस इस पर निष्कर्ष स्थापित कर सकती है। पत्रकारिता में चोर-चोर मसौरे भाई की संस्कृति हावी हो गयी है। इसीलिए जब टू जी स्पेक्टरम में बरखा दत्त पत्रकारिता को बेचती है तब राजदीप सरदेसाई जैसे पत्रकार समर्थन में खड़ा होकर बरखा दत्त को जलालत झेलने और कानून का ग्राह बनने से बचाने के लिए कलम-आवाज उठाते हैं। जब राजदीप सरदेसाई केश फॉर वोट कांड को दबाता है तब पत्रकारिता के अन्य मठाधीश अपनी आवाज बक्से में बंद कर देते हैं। यह चोर-चोर मसौरे भाई की ही लूट,चोरी और भ्रष्टाचार की कहानी है।

रूपर्ट मर्डोक का उदाहरण

जो लोग आईबीएन और राजदीप सरदेसाई एंड कंपनी को सत्यवादी हरिश्चंद्र से भी बड़ा सत्यवादी मानते हैं और इनके कुकत्यों को पत्राकारिता के ज्ञात और परम्परागत यथार्थों के विपरीत नहीं मानते उन्हें मीडिया सुलतान रूपर्ट मर्डोंक के प्रकरण को आत्मसात करना चाहिए। ब्रिटेन ही नहीं बल्कि दुनिया का मशहूर अखबार ‘न्यूज ऑफ द वर्ल्ड ‘ और मीडिया सुलतान रूपर्ट मर्डोक के हश्र का उदाहरण हमारे सामने है। न्यूज ऑफ द वर्ल्ड का प्रकाशन सदा के लिए बंद कर दिया गया। न्यूज ऑफ द वर्ल्ड ने समाचार की खोज में निजी तौर पर टेलीफोन टेप का अपराध किया था। यह अपराध उसने न्यूज को दबाने या फिर ब्लैकमैलिंग के उद्देश्य से नहीं किये गये थे। खोजी पत्रकारिता और पाठकों के बीच विशेष समाचार सामग्री देने की होड़ में न्यूज आफ द वर्ल्ड ने ब्रिटेन की राजशाही सहित अन्य प्रमुख हस्तियों के टेलीफोन टेप कर सनसनी समाचार पाठकों के बीच परोसे थे। जैसे ही यह प्रकरण सामने आया वैसे ही ब्रिटेन की कैमरून सरकार सकते में आ गयी और कैमरून के मीडिया सलाहकार सहित न्यूज ऑफ द वर्ल्ड के टॉप अधिकारी जेल के अंदर पहुंच गये। मर्डोक के खिलाफ संज्ञान लिया गया और उन्हें ब्रिटेन की संसदीय समिति के सामने कई दिनों तक हाजिरी लगानी पड़ी। इस दौरान मर्डोक पर हमले भी हुए। न्यूज आफ द वर्ल्ड से जुड़े टॉप मीडियाकर्मियों को जनाक्रोश की जलालत झेलनी पड़ रही है और वे सड़कों पर बाधा रहित घूम भी नहीं सकते। उन्हें अंडो और टमाटरों की अपने उपर बरसात होने का डर है। जबकि न्यूज आफ द वर्ल्ड का अपराध आईबीएन की तुलना में कहीं भी नहीं ठहरता है। न्यूज आफ द वर्ल्ड का हश्र इसलिए हुआ कि ब्रिटेन की सामाजिक और सत्ता व्यवस्था में अभी भी नैतिकता है।

आईबीएन का स्टिंग आपरेशन
अमेरिका के साथ परमाणु 123 करार पर वामपंथी जमात के समर्थन खींच लेने के कारण मनमोहन सिंह सरकार अल्पमत आ गयी थी। सांसदों की खरीद के बिना मनमोहन सिंह की सत्ता बचती और न ही अमेरिका के साथ 123 परमाणु करार संसद में पास होता। सांसदों की खरीद के लिए कांग्रेस के मैनेजर तो थैली खोलकर बैठे ही थे, इसके अलावा अमर सिंह और मुलायम सिंह एंड पार्टी भी सांसदों के खरीद में लगे हुए थे। अमेरिका की परमाणु कंपनियां और देश के कांग्रेसी सत्ता समर्थक उद्योगपति धन की वर्षा कर रहे थे। भाजपा सहित अन्य अन्य विपक्षी दलों के सांसदो पर पैसे की शक्ति का लालच दिया गया था। भाजपा के सांसदों ने इसकी शिकायत आलाकमान से की थी। भाजपा आलाकमान ने आईबीएन और राजदीप सरदेसाई से सांसदों की खरीदने की कांग्रेसी और अमर-मुलायम एंड पार्टी की करतूत का स्टिंग आपरेशन करने के लिए संपर्क्र किया था। भाजपा से आईबीएन और राजदीप सरदेसाई ने वायदा किया था कि आपरेशन चाकचौंबद होगा और कांग्रेस की पैसे की शक्ति से उनकी ईमानदारी नहीं डिगेगी। सच को उजागर कर मनमोहन सत्ता का खेल बेपर्दा होगा।

नोट लहराने की बेबसी
आईबीएन ने ईमानदारी नहीं दिखायी। स्टिंग आपरेशन तो किया पर उसने स्टिंग आपरेशन को दिखाने से साफ इनकार कर दिया। अमान्य और प्रत्यारोपित तर्क प्रस्तुत किये गये। भाजपा राजदीप सरदेसाई एंड कंपनी विश्वास कर ठगी गयी। सांसदों को खरीदने की कांग्रेसी/अमर-मुलायम एंड पार्टी की करतूत पर पर्दा उठने की उम्मीद बेकार साबित हो गयी थी। हारकर भाजपा सांसदों ने अमर सिंह-मुलायम सिंह एंड पार्टी द्वारा दिये गये एक करोड़ रूपये को संसद में लहराना पड़ा। संसद में रिश्वत के रूप में दिये गये एक करोड़ रूपये लहराने की यह पहली घटना थी। कायदे से इस करतूत का पर्दाफाश आईबीएन को करना चाहिए था। अगर आईबीएन नोट की शक्ति से सांसदों की जमीर खरीदने का खेल प्रसारित कर दिया होता तो संसद में मनमोहन सरकार बेपर्दा हो जाती।

22 जुलाई से 11 अगस्त के बीच कौन सा खेल हुआ
22 अगस्त 2008 को कैश फॉर वोट कांड की करतूत सामने आयी थी। लोकतंत्र की इस हत्या पर लोकतांत्रिक समाज-व्यवस्था हतप्रथ थी। देश का लोकतांत्रिक संवर्ग और आम आबादी इस कंाड की असली सच्चाई जानने की उम्मीद आईबीएन से कर रहा था। आईबीएन कभी स्टिंग आपरेशन को अधूरा होने तो कभी तस्वीर साफ नहीं होने और कैश फॉर वोट कांड में संलग्न लोगों की शख्सियत अज्ञात होने जैसे रक्षा कवज बनाता रहा। इस दौरान उसकी कांग्रेस-मनमोहन सिंह सत्ता या फिर अमर सिंह-मुलायम सिंह एंड पार्टी से आईबीएन व राजदीप सरदेसाई एंड पार्टी के बीच कौन सा खेल हुआ। कही पैसे की शक्ति से आईबीएन भी तो प्रभावित नहीं हुआ? इस तथ्य से इंकार नहीं किया जा सकता है। सच तो यह है आईबीएन और कांग्रेस मनमोहन सिंह सरकार के बीच सैकड़ो करोड़ की डील हो सकती है। ऐसे ही कोई नामी-गिरामी न्यूज चैनल अपनी विश्वसनीयता नहीं खो सकता है। ऐसे समय में जब कांग्रेस-मनमोहन सरकार और अमर-मुलायम अपनी साख बचाने और कैश फॉर वोट कांड पर पर्दा डालने के लिए कोई/कैसी भी हदें पार कर सकतंे थे। पत्रकारिता संवर्ग की इस आशंका को झुठलाया नहीं जा सकता है कि राजदीप सरदेसाई स्टिंग आपरेशन को दबाने और सत्यता छुपाने की कीमत भी करोड़ों में वसूली होगी। मीडिया स्टटी ग्रुप के सर्वेक्षण में पत्रकारिता संवर्ग ने ऐसी ही राय प्रकट की थी।

चोरी-चोरी दिखाया क्यो?
इलेक्टानिक्स मीडिया का इतिहास खंगाल लीजिये और राजदीप सरदेसाई की चोरी और पत्रकारिता बेचने की कहानी की नीयत भी पकड़ लीजिये। जब कोई सनसनी या विशेष समाचार का खुलासा होता तो चैनल कई दिनों से इसकी सूचना बार-बार देते हैं और सनसनी खेज समाचारों की फूटेज भी दिखाते हैं। विज्ञापन बटोरने का खेल भी खेलते हैं इसकी मिसाल शायद आपको याद हो जब लालू प्रसाद यादव रेलमंत्री थे तब लालू यादव के क्षेत्र से एक खबर इसी चैनल पर फ्लैश की जा रही थी कि लालू ने कितने ही लोगों की जमीन हथिया ली है लेकिन उस जमीन के बारे में कोई खुलासा नहीं हुआ, दो दिन तक लालू द्वारा जमीन हथियाने की पट्टी समाचार चलाने के बाद उस खबर की सच्चाई सदा के लिए जमींदोज कर दिया गया था। उसी तरह कैश फॉर नोट कांड का प्रसारण राजदीप एंड कंपनी ने बेहद गोपनीय ढंग से और बिना पूर्व सूचना के 11 अगस्त 2008 को कर दिया। सनसनी खेज और विशेष समाचारों के प्रसारण बार-बार दिखाये जाते हैं। दर्शकों की प्रतिक्रिया लेने के लिए चैनलों के रिर्पोटर खाक छानते हैं। 19 दिनों तक इस स्टिंग आपरेशन को दबा कर रखा जाता है क्यों? अगर देश भर में मीडिया कर्मियों और बुद्धिजीवियों में हो हल्ला नहीं मचता तो 19 दिन बाद भी कैश फॉर वोट कांड को नहीं दिखाता। चर्चा में कई सवाल है। इन सवालों में अमर सिंह और अहमद पटेल के घर में किये गये स्टिंग आपरेशन को गोलमाल करना भी है।

बेशर्मी की हद भी देखिये
विकीलीक्स ने खुलासा किया था कि कैश फॉर वोट कांड में मनमोहन सिंह और कांग्रेस ने सांसदों की जनमत खरीदा था। विकीलीक्स के खुलासे में ऐसी कोई नयी बात नही थी जो राजनीतिक-पत्रकारिता संवर्ग से ओझल थी। जैसे ही विकीलीक्स का खुलासा सामने आया वैसे ही आईबीएन की सनसनी शुरू हो गयी। आईबीएन पर विकीलीक्स के खुलासे का जिक्र तो हुआ पर गर्व के साथ समाचार दिखाया गया कि सबसे पहले आईबीएन ही इस कांड को दिखाया था और इसकी पोल खोली थी। गर्व और वीरता का ऐसा भाव दिखाया गया जैसा कि सही में आईबीएन कैश फॉर वोट कांड में सत्यता सामने लाया है। 19 दिनों तक क्यो छुपा कर रखा स्टिंग आपरेशन को। अमर सिंह और अहमद पटेल के घरों में किये गये स्टिंग आपरेशन का गोलमाल क्यों हुआ? यह सब कौन बतायेगा?

न्याय प्रक्रिया की जिम्मेदारी
मनमोहन सरकार प्रारंभ से ही इस कांड को दफन करने में लगी है। इसलिए पुलिस अमर सिंह एंड कंपनी और अहमद पटेल सहित राजदीप सरदेसाई एंड कंपनी को बचा रही है। पुलिस के माध्यम से सच का सामने आना मुश्किल है। इसलिए पुलिस जांच की निगरानी ही सर्वश्रेष्ठ प्रक्रिया होगी। अगर न्यायालय अपनी निगरानी में पुलिस को चाकचौबंद/दबाव रहित और निष्पक्ष जांच करने के लिए बाध्य करेगा तभी सभी सच्चाई की हम उम्मीद कर सकते हैं। पुलिस-न्यायालय द्वारा आईबीएन/राजदीप सरदेसाई की गर्दन क्यों नही नापी जानी चाहिए? ब्रिटेन के मशहूर अखबार ‘न्यूज ऑफ वर्ल्ड‘ के ह्रास और मीडिया सुलतान रूपर्ट मर्डोंक की कानूनी घेरेबंद व उनके खिलाफ ब्रितानी समाज में उपजे जनाक्रोश की कसौटी जैसा ही व्यवहार और कानूनी कार्रवाई आईबीएन समूह और राजदीप सरदेसाई एंड कंपनी के खिलाफ होना जरूरी है। आज राजीव सरदेसाई जैसा पत्रकार रातो रात चैनल मालिक कैसे हो जाता है। चैनल चलाने के लिए आया धन कही आईएसआई एजेंड गुलाम नवी फई जैसा तो नहीं है? इसकी जांच कौन करेगा? मीडिया जगत को भी अपनी छवि बचाने के लिए राजदीप सरदेसाई जैसे पत्रकारों पर गहणता के साथ विचार करना होगा। अगर नहीं तो फिर पत्रकारिता जगत अपने आप को लोकतंत्र का चौथा स्तंभ होने का दावा कैसे कर सकता है   link is  www.pitamberduttsharma.blogspot.com. " 5th pillar corrouption killer " 

Tuesday, August 7, 2012

"अडवानी जी अब - संभावित राष्ट्रपति हो सकते हैं " ???

 " सम्भावना" तलाशते रहने वाले मित्रों को,मेरा सादर नमस्कार !!
                       अगर जीवन से आशा और सम्भावना समाप्त हो जाए तो जीने का आनंद ही ख़त्म हो जाता है !! राजनीति में तो विशेष रूप से ये आवश्यक हो जाता है अन्यथा आप " लाइन " में नहीं रह पाते !! सन 2009 के चुनावों में भाजपा ने उनको संभावित प्रधानमंत्री मान लिया था लेकिन कोई क्या करता , संसद में उतनी सीटें ही नहीं मिल पायीं !!N.D.A. के घटक दल भीं  बेचारे क्या कर सकते थे ???
                        अब जनता के दिल में नरेंदर मोदी जी विराजमान हो चुके हैं !भाजपा उन्हें चाहे चुनावों से पहले अपना संभावित प्रधानमंत्री घोषित करे या बाद में ,ये उसके नेत्रित्व को सोचना है ! केंद्रीय भाजपा नेता सब अब सिर्फ केंद्र में मंत्री बन्ने के काबिल ही रह गए हैं !! या फिर राज्यपाल,चाहे वो सुषमा जी हों या जेटली जी,ये सबको समझना होगा !! और अगर भाजपा ऐसा नहीं करती तो अडवानी जी का कथन सत्य साबित हो जाएगा !!! भाजपा को घटक दलों से ये स्पष्ट कह देना चाहिए की चुनावों के बाद चर्चा करेंगे !!
                         अगर ऐसा नहीं होता , तो अन्ना टीम और बाबा रामदेव जी को मोदी जी के साथ खुलकर आ जाना चाहिए !! क्योंकि आज के समय में मनमोहन सिंह व राहुल के सामने " मोदी " से बढ़िया कोई " विकल्प " नहीं है !!!??? आज के समय की मांग है की हिंदुस्तान में कोई तो हिन्दुओं के पक्ष में खुल कर आये......!!! सभी मुसलमानों को 65 सालों से अपना घर जलाकर खुश करने में लगे हैं !! मगर वो आज तक " खुश " नहीं हुए !!!
                    इलज़ाम तो भाजपा पर हिन्दू -समर्थक होने का लगता ही है ,तो बन जाओ अबकी बार " हिन्दू पार्टी " देख लेंगे सबको बाद में ...!!
                      आप भी अपने विचार हमें लिख भेजिए हमारे ब्लॉग और ग्रुप में, जिसका नाम है "5TH PILLAR CORROUPTION KILLER " और इसका लिंक है :- www.pitamberduttsharma.blogspot.com. 
                  कर   दो " कल्याण " !!!!

2014 की कॉरपोरेट फंडिग ने बदल दी है देश की सियासत !!

चुनाव की चकाचौंध भरी रंगत 2014 के लोकसभा चुनाव की है। और क्या चुनाव के इस हंगामे के पीछे कारपोरेट का ही पैसा रहा। क्योंकि पहली बार एडीआर न...