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Showing posts from April, 2016

क्या अब हमे नए मंदिर बनाने की जरूरत है ?

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उत्तराखंड के ये 'चीफ जस्टिस के. एम. जोसफ' ने कल उत्तराखंड में राष्ट्रपति शासन को लेकर जो निर्णय दिया है उस पर मुझे कुछ नहीं कहना है | पिछले कई दशकों से न्यायलय और वहां कुर्सी में बैठे न्यायाधीशों ने ऐसे ऐसे निर्णय दिए है की संविधान के दरवाजे में दीमक लगी दिखने लगी है |

मुझे कहना सिर्फ इस निर्णय को देते समय लेचीफ जस्टिस के.एम. जोसफ की राष्ट्रपति पर की गयी टिपण्णी पर है, जहाँ उन्होंने लोकतंत्रीय व्यवस्था के राष्ट्रपति को छिड़कते हुए, उन पर सामंतशाही व्यवस्था के 'राजा' का शब्द टांका है | वैसे यह न्यायधीश महोदय अपने केरला कार्यकाल में काफी नाम कमा चुके है और भ्रष्टाचार के मसलों में काफी उदारवादी रहे हैकिन यहाँ उनकी शब्दों के साथ उदारवादिता बिलकुल भी स्वागत योग्य नही है | खैर उनके निर्णय की समीक्षा तो सर्वोच्च न्यायलय में होगी लेकिन उनकी टिप्पणी यही दर्शाती है की न्यायाधीश जोसफ साहब गुस्सा में है |
दरअसल न्यायमूर्ति जी, सोनिया गाँधी के प्रभाव के पच्छम में चले जाने से आहात है | उनको अच्छी तरह पता है की भारत की सत्ता में में जो क्रिश्चियनिटी का असंवैधानिक कब्ज़ा था वह वेटिकन औ…

उत्तराखंड H.C.का "आँख मारकर "दिया गया फैसला !! - पीतांबर दत्त शर्मा (लेखक-विश्लेषक) मो.न. - +919414657511.

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कंही भी अगर कोई बात-विवाद का फैसला  "आँख मारकर "कहा या किया जाए तो उसके पीछे छिपा सत्य ये होता है कि बात कहने वाला या तो मज़ाक कर रहा है,या फिर वो जिसकी तरफ देखकर आँख मार रहा है , उससे वो मिला हुआ है !उस जज के ऐसा करने के कई कारण हो सकते हैं , जैसे एहसान तले दबे होना,मित्रता होना या फिर जज का उस जैसी प्रकृति का ही होना हो सकता है जिसके पक्ष में "आँख मारकर" फैसला सुनाया गया हो ! आजकल तो H.C.-S.C.का जज बनने हेतु किसी राजनितिक दल से जुड़ा होना आवश्य्क माना जाता है !और नेता लोग तो कई बार कह भी चुके हैं कि हम "राजनीतिज्ञ"हैं कोई "संत"के व्यवहार की हमसे अपेक्षा ना करे ! ऐसा हर नेता ने साबित भी कर दिया है अपने राजनितिक "कर्मों"से !
                तो क्या उत्तराखंड के ये जज साहिब जिन्होंने राष्ट्रपति शासन को हटाने का निर्णय आज सुनाया है , उनकी भी जांच नहीं होनी चाहिए ? क्या ये नहीं देखा जाना चाहिए की उन्होंने पिछले चुनावों में किस पार्टी को अपना मतदान किया ?क्या वो किसी आरक्षित श्रेणी से आते हैं ?जिस प्रकार से माननीय हरीश रावत जी ने अपनी प्रेस क…

"जिहाद" की सफलताएं नज़र आने लगी हैं !! -पीतांबर दत्त शर्मा मो. न. - +919414657511

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लाहोर में आज सिख नहीं बचे हैं,काश्मीर में हिन्दू नहीं बचा है,मुल्तान और अफगानिस्तान में हिन्दू नहीं बचा है , ईरान में पारसी नहीं बचे हैं और सऊदी अरब में यहूदी नहीं बचे हैं !ये उस जिहाद की बड़ी सफलताएं हैं जिस पर पूरी दुनिया को तो सोचना ही चाहिए , लेकिन हिंदुस्तान को अपना अस्तित्व अगर बचाना है तो 'कमरकस कर "जिहाद के खिलाफ युद्ध छेड़ देना चाहिए अन्यथा परिणाम भुगतने हेतु हमें और हमारी आनेवाली पीढ़ियों को तैयार रहना चाहिए !
भारत ने अपने टुकड़े केवल इसीलिए होने दिए ताकि वो शान्ति से रह सके ! लेकिन आज हम देख रहे हैं कि केवल 10 - 15 आतंकवादी आकर हमारे सारे सिस्टम को फ़ैल कर जाते हैं हमें आतंक वादियों की संख्या से नहीं बल्कि हमें इसके मूल भाव से सीखना होगा !हम ये भी जानते हैं की वो हमारी गलियों,शहरों और हमारी सरकारों पर कब्ज़ा नहीं कर सकते !जिहादी आतंक हमारे गणतंत्र,व्यक्ति की जड़ों,उसके स्वतंत्र विचारों, बोलने की आज़ादी और महिलाओं के अधिकारों पर चोट करता है !
          इन दिनों मोलवियों द्वारा आतंकवाद के खिलाफ फतवे भी ज़ारी किये जा रहे हैं !जिसके खिलाफ isis ने भी कह दिया है कि खबरदार मोलवियों …
पानी के संकट को नहीं इसके धंधे को समझे तो पानी का संकट भारत के लिये खतरे की घंटी है। क्योंकि दुनिया में जिस तेजी से जनसंख्या बढी और जिस तेजी से पानी कमा उसमें दुनिया के उन पहले देशों में भारत शुमार होता है, जहां सबसे ज्यादा तेजी से हर नागरिक के हिस्से में पानी कम होता चला जा रहा है। आलम यह है कि आजादी के वक्त यानी 1947 में 6042 क्यूबिक मीटर पानी हर व्यक्ति के कोटे में आता था। जो कम होते होते 2001 में 1816 क्यूबिक मीटर हो गया। तो 2011 में 1545 क्यूबिक मीटर पानी ही हर हिस्से में बचा । और आज की तारीख में यानी 2016 में 1495 क्यूबिक मीटर पानी हर व्यक्ति के हिस्सा का है। लेकिन विकसित होते देशों के कतार में भारत ही दुनिया का एक ऐसा देश है जहां पानी का कोई मैनेजमेंट है ही नहीं। यानी उपयोग में लाये जा चुके 90 फीसदी पानी को नदियों में पर्यावरण को और ज्यादा नुकसान करते हुये बहाया जाता है। 65 फीसदी बरसात का पानी समुद्र में चला जाता है। और इसके साथ साथ खेती और बिजली पैदा करने के लिये थर्मल पावर पर भारत की 90 फीसदी जनसंख्या टिकी है। यानी बिजली का उत्पादन बढाने के लिये पानी ही चाहिये । और सिंचाई के …

नक्सलवादियों और वामपंथियों के बारे में इतना कैसे जानते हैं , हमारे पूण्य प्रसुन वाजपेयी जी !!??

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नक्सलबाड़ी से जंगलमहल बंगाल में सत्ता परिवर्तन के लिये "युद्ध क्षेत्र" होना चाहिये


साल की पत्तियों को जमा करते हैं । पांच पत्तियों को जोडकर प्लेट थाली जितना बड़ा बनाते हैं । फिर उसे धूप में सुखाते हैं । और सूखने के बाद सौ सौ के बंडल बनाते हैं । फिर सौ सौ के दस बंडल मिलाकर कर बेचते हैं । और इसकी कीमत मिलती है सौ रुपया । इसे करने में तीन दिन लग जाते है । और कोई काम तो जंगल में है नहीं । चिडिया पकड़ने के लिये इस तरह लकड़ी के छिलके को धागे से बाध कर बनाते हैं । रात में पेड़ पर लटकाते हैं तो सुबह दो चिड़िया तो फंस ही जाती है । जंगल में घूम कर सूखी लकड़िया जमा करते हैं । जिससे खाना बनाने के इंतजाम हो जाये । ममता दीदी ने यह राशन कार्ड बनवा दिया है । जो हमारे जिन्दा होने की निशानी भी है और जिन्दा रहने की जरुरत भी । क्योंकि इसी से दो रुपये किलो चावल मिलता है । हर हफ्ते छह किलों चावल और
आधा लीटर घासलेट । जिन्दगी जीने की यह कहानी उसी जंगलमहल के आडवडिया गांव की है । जिस जंगलमहल के सैकड़ों गांव की आग ने ममता बनर्जी को पांच बरस पहले सत्ता दिला दी । जंगलमहल के तीनों जिलों पश्चिमी मिदनापुर, पु…

"ग़ज़ल"कहीं खो गयी !प्यार कहीं बिक गया !- पीतांबर दत्त शर्मा (लेखक-विश्लेषक) मो. न. + 919414657511.

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कल मैंने टीवी के एक कार्यक्रम में पीनाज़ मसानी जी के साथ-साथ कई ऐसी हस्तियों को देखा , जो आजकल के "बिकाऊ"कार्यक्रमों में नहीं दिखाई जातीं !आजकल ना तो वो पुराना प्यार रहा है ना ही पुराने गीतकार और गायक !या यूं कहें कि आजकल वो गीत-संगीत नहीं गवाया-बजाया जा रहा जिसमे "देवीय-गुन"होते हैं !यानि "शास्त्रीय-संगीत"के अनुसार किसी "राग"पर आधारित गहरे-चोट खाये लेखक द्वारा लिखी गयी रचनाओं का आजकल जैसे कोई अकाल सा पड़ गया हो !
                            पुराने संगीतकारों की रचनाएँ कहीं सुनने को मिल जाती हैं तो ऐसे लगता है जैसे तन-मन में कोई लहर सी दौड़ गयी हो ! "सा-रे-गा-मा पा" नामक कार्यक्रम आजकल जी टीवी पर दिखाया जा रहा है !जहां संगीत से जुडी कई ऐसी हस्तियां नज़र आ जाती हैं जिससे मन को एक शान्ति का सा आभास होता है !इसी तरह कल जी टीवी पर ही "मिर्ची"म्युज़िक-एवार्ड"घोषित किये गए !आदेश श्री वास्तव जी को भी याद किया गया , तो सब की आँखों में आंसू आ गए !हमारे परिवार के सदस्य भी भावुक हो गए !एक अजीब सा जुड़ाव हो जाता है जब भी संगीत का कोई कार्य…

भारत माता की जय और जय-हिन्द बाद में बोलना नेताओ , पहले ज़रा जनता के दुःख हरने का प्रयास करो !- पीतांबर दत्त शर्मा (लेखक-विश्लेषक) मो.न. - +919414657511

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कोई कहता है कि भारत में यदि रहना होगा , "वन्दे-मातरम्"कहना होगा ! कोई कहता है कि भारत देश सिर्फ हिन्दुओं का नहीं , उनका भी है जिन्होंने भारत को लूटा-खसोटा है !और कोई कहता है भारत के सभी पैसे वालों को मारकर भगा दो ! यहां सिर्फ "मजदूर""लाल-सलाम"करेंगे आदि-आदि !लेकिन इस देश की जनता 1952 से सिर्फ यही सोच कर अपनी "बागडोर"कभी किसी को सम्पति है कभी किसी को कि कोई तो उनकी सुरक्षा,रोटी-कपडा और मकान के बारे में सोचेगा या इंतज़ाम करने की कोशिश करेगा !
                           लेकिन अफ़सोस !! होता इसके बिलकुल उल्ट है !सभी "विचारधारा"वाले अपनाकर देख लिए इन 68 वर्षों में भारत की जनता ने ,लेकिन सबने अपनी व्यवस्था अच्छे से करली है लेकिन आम जनता आज भी विभिन्न शंकाओं से जूझ रही है !कुछ लोगों को सरकार और जनता को इतना बेवकूफ बनाना आ गया है कि पूछिए मत !ये "नटवर लाल"  सम्पत्ति का "दोहन" कर लेते हैं !और इनको देश का कोई संविधान और सिस्टम रोक नहीं पाता है !लेकिन इन दोनों की तारीफ़ में तरह-तरह के गीत बहुत गाए जाते हैं इन्हीं लुटेरों द्वारा …

भारतीय सनातन धर्म में नववर्ष का शुभारंभ सोमवार को चैत्र शुक्ल प्रतिपदा (गुड़ी पड़वा) से हो रहा है।

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चैत्र मास की शुक्ल प्रतिपदा को गुड़ी पड़वा या वर्ष प्रतिपदा कहते हैं। यहीं से हिंदू नववर्ष का आरंभ माना जाता है। माना जाता है कि इसी दिन ब्रह्माजी ने सृष्टि का निर्माण किया था। उन्होंने इस प्रतिपदा तिथि को 'प्रवरा' अथवा 'सर्वोत्तम' तिथि कहा था। यही वजह है कि इसे सृष्टि का प्रथम दिन कहा जाता है। इस दिन ब्रह्माजी सहित उनके द्वारा निर्मित सृष्टि के समस्त तत्वों का पूजन भी किया जाता है। चैत्र के महीने में प्रकृति में नवीनता का संचार होता है। नए जीवन के संकेत चारों ओर से मिलते हैं। शुक्ल प्रतिपदा को चंद्रमा की कला का प्रथम दिन माना जाता है और चूंकि वनस्पतियों को सोमरस चंद्रमा ही प्रदान करता है तो इसलिए इस दिन को वर्षारंभ माना जाता है।
इस वर्ष का राजा शुक्र: चूंकि इस वर्ष 8 अप्रैल से नव विक्रम संवत्सर 2073 का प्रारंभ हो रहा है और यह दिन शुक्रवार है तो इस वर्ष का राजा शुक्र ग्रह होगा। ज्योतिषीय गणना में जिस दिन को नव संवत्सर आरंभ होता है उस दिन का स्वामी ग्रह ही वर्ष का राजा होता है। इस संवत्सर का नाम होगा 'सौम्य।
इस वर्ष का मंत्री बुध है। जब वर्ष का राजा शुक्र होता है तो यह…