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Showing posts from August, 2013

" इन्डियन - मिडियुद्दीन "," अटकल - भटकल " !!

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समाचार - माध्यमों से किसी भी प्रकार से जुड़े सभी मित्रों , आपको सादर नमन !!
                    समाचार को बनाने वाले, उसकी स्क्रिप्ट लिखने, उसको छापने या दिखाने वाले और उस " तैयार " किये गए " स्पाईसी - न्यूज़ " को पढने-देखने और झेलने वाले दीन-हीन भारतीयो !! जैसे जैसे कलयुग के बादल गहरा रहे हैं वैसे-वैसे भ्रष्टाचार का स्वरूप भी बड़ा होता जा रहा है !! कोई ज्यादा पुराणी बात नहीं है जब लोग कहा करते थे कि ये चंद काम हम नहीं करेंगे इनको करने से हमें श्रम आएगी या हमारे परिवार की शान चली जायेगी !! लेकिन आज देखिये ऐसा कोई काम नहीं बचा है जिसमे भ्रष्टाचार करने की गुन्जायिश ना हो !!
                   शिक्षा , चिकित्सा,पत्रकारिता और धार्मिक ज्ञान देने वाले जैसे चाँद कार्य ऐसे हैं जिनमे अगर भ्रष्टाचार करने का कोई समाचार पढने-देखने को मिलता है तो आज भी हैरानी होती है !! आज हम केवल पत्रकारिता के भ्रष्टाचार की ही बात करेंगे !!
                     जब से ये इलेक्ट्रोनिक - मिडिया आया है तबसे ख़बरों को " बनाने " का काम ज्यादा चल-निकला है !! मुझे याद हैं वो दिन जब किसी छोटे से…

" संत जी कमरे में , विधायक जी गोआ में , " रास - लीला " चालू आहे ! ! ? ? ?

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सभी  सखियों और सखाओं को मेरा " रस " भरा नमस्कार !! जय श्री राधे-कृष्णा !!
                        कई वाहनों पर अक्सर ये लिखा दिखाई पड़ ही जाता है कि " हम करें तो अपराध और वो ( श्री कृष्ण जी ) करें तो रास - लीला " !! इस विषय को लेकर श्री कृष्ण जी के चरित्र पर मेरे जैसे मूर्खों और तथाकथित " विद्वानों " द्वारा कई प्रकार के प्रश्न उठाये गये हैं कालान्तर में , उनकी तीन सौ शादियों के बारे में भी कई शक पैदा किये गए " आडम्बर से दूर सेकुलरों " प्राणियों द्वारा !! अपने अथक प्रयासों के बावजूद , अपने प्राणों की बलि दे देने के बावजूद और विदेशों से भरपूर धन के सहयोग मिलने के बावजूद वे सारे समाजसेवी ना तो सनातन धर्म का ही कुछ बिगड़ सके और श्री राधा-कृष्ण जी का तो बिगड़ना ही क्या था ????
                      जन्माष्टमी के पावन पर्व पर दो-तीन समाचार प्रमुखता लिए हुए हमारे " परम-पवित्र मिडिया "की पसंद लगातार बने हुए हैं !! पहले तो आप्ची मुम्बई के पास एक महिला पत्रकार के साथ पाँच " सेकुलर धर्म के शिष्यों ने उसकी मर्ज़ी के बिना " सांस्कृतिक कार्य…

" चदरिया झीनी रे झीनी, राम - श्याम नाम रस भीनी " !!!!

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" झीनी चादर " अपने जीवन में ओढने वाले सभी मित्रों को मेरा सादर नमस्कार !!
                     कबीर जी कहते हैं ,जब हम पैदा हुए , जग हँसे हम रोये ! ऐसी करनी कर चलो , हम हँसे जग रोये !! शारीर को एक चादर के सामान मानते हुए कबीर जी ने मानव शारीर की बहुत ही सुन्दर तुलना की है ! हमारी ये चादर , राम और श्याम नामक रस में भीगी हुई है !! अष्ट कमल का एक " चरखा " बना , और पांच तत्व की " पूनी " बनी ,"नो-दस मास" बुनने में लगे और हम मूर्खों ने इसे कितना मैला कर दिया ??
                 जब हमारी चादर बन के घर आ गयी तो रंगरेज़ को दीन्ही , यानी " शिक्षक "यानी गुरु  के पास भेजा  गया , उसने उत्तम शिक्षा देकर इसे लाल रंग दे दिया !! आगे कबीर जी हमें शिक्षा भी दे रहे हैं की ये स्पेशल चादर ओढ़कर कोई शंका मत करना , मुरख लोग भेद नहीं जानते इसीलिए हर दिन हम इसे मैली करते रहे !
                  आगे कबीर जी बताते है हम लोगों को समझाते हुए कि ये चादर " ध्रुव - प्रहलाद और सुदामा जैसे भक्तों ने ओढ़ी थी , जिन्होंने जैसी चादर पायी थी बिलकुल वैसी ही वापिस कर दी थी !…

" गैंग " के बिना ससुरा " मज़ा " भी तो नहीं आता !!

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किसी न किसी गैंग के सदस्य रह चुके मेरे सभी आदरनीय मित्रों को मेरा सादर " गंगाष्टक " प्रणाम !!
               जब हम पैदा हुए तो हमें उस गैंग ने घेर रख्खा था जिन्हें लोग परिवार कहते हैं !!थोडा बड़े हुए तो गली के गैंग ने मुझे अपना सदस्य बना लिया , जिन्हें कई लोग " बाल - टोली कहते थे !! जब हम      " टीन " एज में पंहुचे तो हम उस गैंग के सदस्य बने जिन्हें हम " मस्तों का टोला " कहकर बुलाते थे !! इस गैंग  में कभी " भगत सिंह - राजगुरु और सहदेव " जैसे देश भक्त सदस्य हुआ करते थे !! फिर हमारे माता -पिता  ने सभी गैंग की सदस्यता रद्द करवादी और हमें शादीशुदा नामक गैंग में शामिल कर दिया !! इस गंग में शामिल होने के बाद थोड़े समय तलक तो हमें गहरे आनंद की अनुभूति हुई जी , लेकिन बाद में " आटे  - दाल के भाव " का पता चलने लगा !!
                              लेकिन हमने सभी गैंग के अन्दर रहकर भरपूर आनंद उठाया !! तभी मोबाईल और इटरनेट का जमाना आया , हम अधेड़ों ने इसमें भी जवानों को पीछे छोड़ दिया है !! मेरी इतनी महिला मित्र हैं जितनी किसी हैण्ड-सम युवाओं की…

" पत्रकारिता का क - ख - ग " भी नहीं जानते , ये " डिग्री " धारक टीवी एंकर !!!

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" विद्या " का ' आशीर्वाद " पाए हुए प्यारे मित्रो , आप सबको सादर नमन !! स्वीकार हो !!
                           पिछले कई वर्षों से टेलिविज़न की दुनिया के चमत्कार देख रहा हूँ !! जब से ये सेट - लाईट  चेनेल चले हैं तब से इन्सान कई बिमारियों ,दुराचारों और कुविचारों से ग्रसित हो चूका है !! क्या बूढ़े , क्या जवान क्या महिलाएं और क्या पुरुष , यंहा तलक की छोटे - छोटे बच्चे भी इसका शिकार हो चुके हैं !! हालांकि सेहत को तंदरुस्त रखने वाले , धार्मिक प्रवचन और सब तरह के सामाजिक और राजनीती को नयी दिशा देने वाले कार्यक्रम भी बनते हैं और दिखाए जाते हैं !! लेकिन इस बहुतायत ने " पाखंडियों " को भी एक सुअवसर प्रदान करने का काम भी किया है !! इंटरनेट के आ जाने के बाद तो जैसे बुरे कामों की बाढ़ सी आ गयी है !! और हम हैं कि अभी तलक छोटे स्तर तलक ही दोष ढूंढ रहे हैं !
                         ना जाने कैसे - कैसे संत - विशेषग्य और पत्रकार पैदा हो गए कि पूछो मत !! देश का बंटा - ढार  कर दिया ससुरों ने !! महिलाएं गन्दी सास - ननद - भोजाई - देवरानी और जेठानी के नाटक देख - देख कर " भ्र…

" चोरों ने तो अपना काम कर दिया , करते रहेंगे ", देश - भक्त अगर जीवित हैं , तो उनका काम क्यों नज़र नहीं आता ???????

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 प्रिय मित्रो , नमस्कार , जयहिंद और स्लामालेकुम !!
             उत्तर भारत के कुछ भागों में " काले - कच्छे " वाले गिरोह की बहुत अफवाहें फ़ैल रही हैं ! इसमें कितनी सच्चाई है ये तो प्रशासन ही जानता है मैं नहीं ! लेकिन गाँवों के निवासी " ठीकरी पहरा " देकर अपनी हिफाज़त करने का प्रयास कर रहे हैं !! गिरोह के लोग धन तो लूटते ही हैं , साथ में शरीर  के अंग भी निकाल लेते हैं !! मेरे पास जब ये खबर पंहुची तो मेरे मन से अनायास ही निकला कि " थोड़े दिन और ठहर जाओ , फिर " सफ़ेद चोले - पजामे वाले " भी आ जायेंगे , जो इनसे भी खतरनाक होंगे " !!
                   यारो ये तो हद्द ही हो गयी !! कोई देश में हो रहे घोटालों की गिनती भी नहीं करना और रखना चाहता , जांच और सज़ा मिलना तो बहुत दूर की बात है !! लोक तंत्र के चारों - पाँचों " स्तम्भ " खंडहर से बने नज़र आ रहे हैं !! अब तो ये हाल है कि घोटालों की खबर पढ़-सुन कर " बोर " से हो जाते हैं ऐसे लगता है जैसे किसी ने " ठंडी चाय " पिला दी हो !! किसी बड़े घोटालेबाज को फाँसी चढ़ते किसी ने देखा है???…

यह हिंदुत्व के पुनुरुत्थान का समय है--------!

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 यह भारत वर्ष है यहाँ उतार-चढ़ाव स्वाभाविक है क्योंकि ये सनातन है, न इसका आदि है न अंत यहाँ की संस्कृति आदि काल से है अनादि काल तक रहने वाली है जिसे हम वैदिक धर्म अथवा सनातन धर्म के नाते जानते हैं, दुनिया हमें हिन्दू के नाते जानती है इसके क्षत्रित्व के गुण को हिंदुत्व कहते हैं यहाँ समय- समय पर महापुरुषों का आवागमन होता है वे ईश्वरांश यानी अवतारी महापुरुष होते हैं, भगवान श्रीकृष्ण गीता का उपदेश देते हुए कहते हैं की जब-जब धर्म की हानी होती है मै आता हूँ स्वधर्म की रक्षा करता हूँ और वे आये-----! बिलुप्त होते हिन्दू धर्म को बचाने सुदूर दक्षिण केरल के कालड़ी ग्राम में शंकर के रूप में आये पूरे भारत वर्ष में वैदिक धर्म समाप्त के कगार पर था कुमारिल भट्ट जैसे आचार्य संघर्ष कर ही रहे थे की इन महापुरुष ने २५०० वर्ष पहले अवतरित हुए उन्होंने उत्तर से दक्षिण पूरब से पश्चिम सम्पूर्ण आर्यावर्त में बौद्ध हो चुके राजाओं के आचार्यों से शास्त्रार्थ कर अवैदिक मतों को पराजित कर वैदिक धर्म की श्रेष्ठता सिद्ध की जिस साम्राज्य की स्थापना आचार्य चाणक्य ने चन्द्रगुप्त के नेतृत्व में की थी उसे आचार्य शंकर ने जा…

" अगर हमें देश में परिवर्तन चाहिए, तो संकल्प लेने ही पड़ेंगे " !!!!

" परिवर्तन " की चाह रखने वाले सभी मित्रों को मेरा हार्दिक नमस्कार !! कृपया स्वीकार करें !
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सह सरकार्यवाह दत्तात्रेय होसबले ने कहा कि देश की वर्तमान स्थिति को बदलने का यही सही समय है। यह तब हो सकेगा जब सारा समाज परिवर्तन के लिए संकल्पित होगा।


जो सरकार चीन-पाकिस्तान से डरती हो वह देश व समाज की सुरक्षा कर ही नहीं सकती। देश की विविधता को जातिवाद का नाम देकर राजनीतिक स्वार्थ की रोटियां सेंकने वालों से भी यह काम नहीं हो सकता। इन्हें कमजोर न किया गया तो समाज में व सीमाओं में खतरा बढ़ेगा।

सह सरकार्यवाह ने कहा कि समाज ऐसी स्थितियां पैदा करने वालों को सबक सिखाने के लिए गंभीरता से सोच रहा है। विशेष तौर से युवा बहुत गंभीर है। उसके अंदर बदलाव की छटपटाहट है। इस छटपटाहट को और बढ़ाना होगा। समाज में जन्म ले रही बदलाव की इस चेतना को और जगाना होगा।

गांव-गांव जाकर लोगों को, देश को दांव पर लगाने व समाज को बांटने वालों की असलियत बतानी होगी। दिल्ली में बैठे कमजोर लोगों ने देश को तमाम तरह के खतरे खड़े कर दिए हैं। समाज को यह समझाना होगा।

समाज को भी दिल्ली में बैठे राजनीतिक द…

येन बद्धो बलि राजा दानवेन्द्रो-महाबलः l तेन त्वाम रक्ष-बध्नामि, रक्षे माचल माचल: ll आप सभी मित्रों को रक्षा बंधन पर्व की हार्दिक शुभकामनाए ll

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" रक्षा करने वाले ", देश के नेताओ !!! आप हमारी उसी तरह से रक्षा कीजिये जिस प्रकार राजा बलि ने अपनी प्रजा की करी थी !! बहुत बड़ा दानी भी था !! उसने अपना वचन निभाने हेतु अपना समस्त राज्य ,उसका आकाश और स्वयं का शरीर तक भगवान वामन के सामने अर्पित कर दिया था !! तब भगवान ने प्रसन्न होकर उसे ये आशीर्वाद ( वर )दिया की जब तलक ये सृष्टी रहेगी तब तलक तुम्हारा नाम रहेगा !!

                       लेकिन हमारे नेता हमारी रक्षा करने के बजाये हमारा (बैंड-बजाने ) पर तुले हुए हैं !! ये देश की जनता और देश के खजानों को निचोड़ कर खा-पी गये हैं !! बेशर्मी की हद हो गयी है !! घमंड सर चढ़ कर बोलने लगा है !! आम आदमी भी सोचने लगा है कि काश !!! मेरे हाथ में कोई ऐसी ताकत आ जाए तो मैं इन कमीनों को और इनके समर्थकों को ऐसी सज़ा दूं कि इनकी सात पीढियां तलक याद रख्खें !!!
                        हे भगवान !! कंहा हो तुम ???? जिस प्रकार मगर के मुंह में फंसे गजराज को बचाने हेतु तुरन्त आप गरुड़ पे सवार होकर आगये थे और अपने सुदर्शन का प्रयोग कर उस मगर का संघार कर दिया था !! उस गजराज ने तो केवल एक बार " हरि &quo…

" क्या इस प्रकार मनाये गये स्वाधीनता दिवस पर हम और आप " गर्व " का अनुभव कर सकते हैं ???

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         भारत में आज़ादी का जश्न इस बार कुछ अलग तरीके से मनाया गया ! कोई इसे किसी का आखरी झण्डा - रोहण बता रहा था तो कोई जवाबी भाषण को घटिया और बढ़िया बता रहा था !! कोई अपनी उपलब्धियां गिनाते हुए भी नज़रों को उठा नहीं पा रहा था तो कोई प्रादेशिक उपलब्धियों को इस तरीके से बता रहा था , जैसे देश का भला सिर्फ वो ही कर सकता है ? उसे किसी मंत्री - संतरी की आवश्यकता ही नहीं पड़ेगी ?????
                        प्रिय प्रधान-मंत्री जी और लोकप्रिय मोदी जी के भाषण देने के पश्चात जो अलोक-प्रिय " कटाक्ष " किये गये विभिन्न सेनापतियों द्वारा उन्होंने तो ज़हरीले तीरों जैसा काम किया !! बुद्धिजीवी सोचने पर मजबूर हैं कि कोई करे भी तो क्या करे ??????
                   सरदार मनमोहन सिंह जी के लाल किले से दिए गये तथाकथित " अन्तिम " भाषण से केवल यही अन्देशा देश को हुआ की वह स्वयं गैर- राजनितिक  रूप से भाषण दे रहे हैं !! केवल एक " क्लर्क " की रिपोर्ट पढ़ते हुए नज़र आ रहे थे !! देश किसी प्रधान मंत्री के चलाने  से नहीं बल्कि अपनी गति से ही चल रहा था !! देशवासी किसी नए " सूर्य &…

" जन - गण " आइये " मन " से देश - हित के फैसले करें.......!!!! अब वक्त आ गया है ????

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                 आज लालकिले से हमारे प्रधानमंत्री जी ने राष्ट्र को दसवीं बार संबोधित किया ! आज से पहले जिन लोक प्रिय नेताओं ने दस बार लाल किले से राष्ट्र को संबोधित किया था उन्होंने देश को कुछ सफलताएँ भी दीं थीं लेकिन हमारे सरदार जी जिस काम में माहिर थे यानी " अर्थ - शास्त्र " उसको भी अनर्थ-शास्त्र बनाकर रख दिया है ! गुजरात के मुख्यमंत्री पहले भी अपने भाषण में जो कुछ बोलते थे उसकी तुलना देश के समीक्षक लोग किया करते थे लेकिन जब कल मोदी जी ने कह दिया की कल तुलना कर लेना .....तो कईयों के पेट में दर्द हो गया की ये सपने देखने लगे हैं प्रधानमंत्री बन्ने के !! राजनितिक समीक्षक मित्रो मोदी जी को भारत का अगला प्रधान-मंत्री बनाने का सपना तो अब देश की जनता देखने लगी है , कईयों ने निर्णय कर लिया है और कई उनके आज के भाषण सुनने के बाद कर लेंगे !! आज के भाषण में उन्होंने ये मुद्दे उठाये जिनको उठाने में हमारे सरदार जी चूक गए !!
नरेंद्र मोदी ने भुज के लालन कॉलेज से देश को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह को खुली चुनौती दे डाली। मोदी ने मनमोहन सिंह से कहा कि हम छोटे राज्य हैं, आप …

" विश्वास के देवता " ये हमारे राजनितिक दल , हाय मैं मर जावाँ। ......! ! !

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 आज के समय में , विश्वास करने वाले , भोले मित्रों  को मेरा सादर चरण-स्पर्श !!!
                   R.T.I.क़ानून के तहत आने से डरने वाले सभी राजनितिक दलों के प्रवक्ता का T.V. चेनलों पर बहस करते हुए डर भी रहे थे , धमका भी रहे थे और अपने आपको एवं अपनी पार्टी को ऐसी संस्था बता रहे थे ,जिन पर कार्यकर्ता ,व्यापारी और देश की जनता इतना विश्वास करते हैं कि वो जब भी रूपये मांगते हैं , सब उन्हें इस विश्वास के तहत रूपये दे देते हैं की ये पैसा उस पार्टी की " पवित्र-विचारधारा " को बढ़ाने हेतु काम आएगा !! या उसी कार्य हेतु खर्च होगा जिस कार्य हेतु माँगा गया है !! लेकिन वो दानदाता हमसे पूछे ना की वो पैसा कंहा खर्च हुआ !! इसी लिए कल देश की सभी राजनितिक पार्टियों के नेता फेविकोल से जुड़े

दिखे जब इस से संबंधित विधेयक सदन में पेश हुआ !!
                  न्यायालय ने दूसरा विषय भी उठाया , वो ये कि जो " सज्जन " दो वर्ष की सज़ा भुगत चुका  हो या जेल में हो वो चुनाव नहीं लड़ सकता !! इस बात पर भी सभी पार्टियों के नेता एक जुट हैं !! कह रहे हैं इतना बड़ा अत्याचार कोई हम जैसे " सीधे-साधे &qu…

राजस्थान में बदलाव के बयार की आहट...........!!!!!???

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अशोक गहलोत व वसुंधरा राजे के लिए प्रतिष्ठा का सवाल बनी सत्ता की जंग-संगीता शर्मा|| राजस्थान में कांग्रेस के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत तीसरी बार सत्ता पर काबिज होने की जुगत बिठाने में ताकत लगाए है जबकि वसुंधरा राजे उनके हाथ से सत्ता छीन दुबारा मुख्यमंत्री का ताज पहनने के लिए बेताब है. लोकसभा चुनाव के लिए किए गए इलेक्षन टेकर सर्वे की माने तो राजस्थान में भाजपा का वोट बैंक बढ़ने की उम्मीद से कांग्रेस के लिए अब सत्ता में दोबारा लौटना इतना आसान नहीं होगा. इन चुनावों में कड़ी टक्कर के चलते भाजपा कांग्रेस के समीकरण बदल सकती है. चुनावी मानसून आने से पूर्व ही राजस्थान में अब बदलाव के बयार की आहट महसूस होने लगी है. यह अलग बात है कि चुनाव आने तक मुख्यमंत्री गहलोत अपनी रणनीति में तब्दीली कर बयार का रूख ही बदल दे. हालांकि अभी जमीनी हकीकत को खंगाले तो कांग्रेस के लिए हालात सुखद नहीं है. कांग्रेस के लिए सत्ता पर दुबारा काबिज होने के लिए बागी और बसपा के विधायकों को मंत्री बनाना अब गले की फांस साबित होने वाला है. इधर गहलोत सरकार के मंत्रियों के कार्यकलाप और सांसदों से लेकर कार्यकर्ताओं तक में आपसी खींचता…