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Showing posts from April, 2014

" लीजिये देखिये आज हम आपको दिखाते हैं - बोलती तस्वीरें " ! !

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इन्हें देखकर आपके मन मे क्या विचार आ रहे हैं ??


मित्रो !! मैं अपने ब्लॉग , फेसबुक , पेज़,ग्रुप और गुगल+ को एक समाचार की तरह से देखता हूँ !! आप भी मेरे ओर मेरे मित्रों की सभी पोस्टों को एक समाचार क़ी तरह से ही पढ़ा ओर देखा कीजिये !!
" 5TH PILLAR CORRUPTION KILLER " नामक ब्लॉग ( समाचार-पत्र ) के पाठक मित्रों से एक विनम्र निवेदन - - - !!
प्रिय मित्रो ,
सादर नमस्कार !!
आपका हार्दिक स्वागत है हमारे ब्लॉग ( समाचार-पत्र ) पर, जिसका नाम है - " 5TH PILLAR CORRUPTION KILLER " कृपया इसे एक समाचार-पत्र की तरह ही पढ़ें - देखें और अपने सभी मित्रों को भी शेयर करें ! इसमें मेरे लेखों के इलावा मेरे प्रिय लेखक मित्रों के लेख भी प्रकाशित किये जाते हैं ! जो बड़े ही ज्ञान वर्धक और ज्वलंत - विषयों पर आधारित होते हैं ! इसमें चित्र भी ऐसे होते हैं जो आपको बेहद पसंद आएंगे ! इसमें सभी प्रकार के विषयों को शामिल किया जाता है जैसे - शेयरों-शायरी , मनोरंहक घटनाएँ आदि-आदि !! इसका लिंक ये है -www.pitamberduttsharma.blogspot.com.,ये समाचार पत्र आपको टविटर , गूगल+,पेज़ और ग्रुप पर भी मिल जाएगा ! ! अतः ज…

बनारस में मोदी के लिये संघ परिवार उतरा मैदान में ! ! मोदी के लिये विहिप के 30 हजार कार्यकर्ता बनारस की खांक छान रहे हैं...!!

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"नरेन्द्र मोदी के लिये विश्व हिन्दू परिषद के प्रवीण तोगडिया को चाहे आरएसएस ने खामोश कर दिया हो लेकिन बनारस का सच यही है कि नरेन्द्र मोदी के लिये बनारस शहर ही नहीं बल्कि जिले की हर गली में विश्व हिन्दू परिषद के कार्यकर्ता ही घूम रहे हैं। और खास बात यह है कि अय़ोध्या आंदोलन के दौर में विहिप के जिस नेता ने 6 दिसंबर 1992 को लेकर समूची रणनीति बनायी थी, विहिप के वही नेता बनारस में मोदी के जीत का मंत्र भी फूंक रहे हैं। मोदी की जीत के लिये व्यूह रचना बनाते विहिप के अंतराष्ट्रीय महामंत्री चंपत राय लगातार विहिप के सैकड़ों कार्यकर्ताओं को अयोध्या आंदोलन के दौर से इतर जाति और मजहब से इतर कैसे चुनावी जीत साधी जा सकती है, इसकी बिसात बिछा रहे है । जिस तरह की बिसात विहिप बनारस में बना रहा है, उसने पहली बार इसके संकेत दे दिये हैं कि किसी भी राजनीतिक दल से कई कदम आगे चलते हुये किसी भी सामाजिक संगठन का राजनीतिक प्रयोग कैसे किया जा सकता है। दिलचस्प बात यह है कि विहिप के लिये 2014 गोल्डन जुबली का साल है और जन्माष्टमी के दिन अपनी स्वर्णजंयती मनाने से पहले विहिप ने राजनीतिक तौर पर जिस तरह की व्यूह रचना …

" मेरा जीवन , कोरा - कागज़ , पता ही नहीं चला आधा कब ओर कैसे भर ग़या "???- पीताम्बर दत्त शर्मा

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सभी परिचितों - अपरिचितों मित्रों को मेरा प्यार भरा  नमस्कार !! कृपया स्वीकार कर मुझे कृतार्थ करें !
                     आज मैंने सोचा कि हम सब विचारक बन्धु दूसरों के विषय पर तो रोज़ लिखते हैं , क्यों ना आज अपने जीवन के बारे मे लिखकर अपने मित्रों को बताया जाये !! कुछ खट्टे - मीठे अनुभव , कुछ प्यारी-प्यारी यादें , कुछ जीवन की गहराइयाँ , अच्छाइयाँ और बुराइयां आपके साथ साँझी की जायेँ !!
                मित्रो !! मेरा जन्म पंजाब के अबोहर शहर में दिनाँक 4 जुलाई 1961 को वंहा के राजकीय अस्पताल मे हुआ ! मेरी माता श्री का नाम श्रीमती वीणा पाणी " रामायणी " और पिता श्री का नाम श्री मान वेद प्रकाश " दिग्गज " है ! वो आज भी अबोहर में ही रह रहे हैं लेकिन मुझे हालातों ओर भाग्य के चलते राजस्थान के सूरतगढ़ शहर में रहना पड़ रहा है !! मेरे पितृ-पक्ष के बाकी रिश्तेदार एक मेरे चाचा श्री मान ओम प्रकाश जी शर्मा , वो भी अबोहर मे ही रहते हैं और एक हमारी बुआ श्रीमती सुमित्रा देवी मोगा शहर मे रह्ती हैँ !! हमारे दादाश्री मान पँडित ध्यान चन्द ज़ी पाकिस्तान के कुम्हारीवाला गाँव मे मुस्लिम आतताइयों…

" तो अच्छे दिन ऐसे आयेंगे... सोने का पिंजरा बनाने के विकास मॉडल को सलाम "....! !

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एक ने देश को लूटा, दूसरा देश को लूटने नहीं देगा। एक ने विकास को जमीन पर पहुंचाया। दूसरा सिर्फ विकास की मार्केटिंग कर रहा है। एक ने भ्रष्टाचार की गंगोत्री बहायी। दूसरा रोक देगा। कुछ ऐसे ही दावों-प्रतिदावों या आरोप प्रत्यारोप के साथ राहुल गांधी और नरेन्द्र मोदी के भाषण लगातार सुने जा सकते हैं। लेकिन नेताओं की तमाम चिल्ल-पों में क्या देश की जरुरत की बात कहीं भी हो रही है। क्या किसी भी राजनीतिक दल या राजनेता के पास कोई ऐसा मॉडल है, जिसके आसरे देश अपने पैरों पर खड़ा हो सके। ध्यान दें तो आर्थिक सुधार की जो लकीर मनमोहन सिंह ने बतौर वित्त मंत्री 1991 में खींची, उसके बाद सबसे प्रभावी तबका पैसे वाला समाज बनता चला गया। मिडिल क्लास का विस्तार भी इसी दौर में हुआ और वाजपेयी सरकर ने भी आर्थिक सुधार का ट्रैक टू ही अपनाया। बीते दस बरस मनमोहन सिंह ने बतौर पीएम देश को विकास का वही माडल दिया, जिसमें खनिज संसाधनों की लूट, खादानों के जरीये विकास का खाका, पावर प्लाट से लेकर इन्फ्रास्ट्रक्चर निर्माण की बात थी। यानी विकास के इस मॉडल ने भ्रष्टाचार को इस अबाध रुप से फैलाया, जिसके दायरे में मंत्री से लेकर नौकरशा…

" अब हमें केवल " रोटी-कपड़ा-और मकान " ही नहीं, बल्कि " सुखी जीवन बिताने के लिए भरपूर अवसर भी चाहियें "!! भारत के कर्णधारो !!

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           सन 1947 में  भारत विभाजित हुआ , हुआ तो उस से पहले भी था और अब भी कई शक्तियां प्रयास में हैं ,लेकिन उस वक्त तलक पैसे का इतना महत्त्व नहीं था जितना सुखमय रहने और दूसरों को रहने देने का था !
                    " पण्डित "  लोग तो ये मंत्र भी पढ़ा करते थे कि " सर्वे भवन्तु सुखिना , सर्वे सन्तु निरामयाः ! सर्वे भद्राणि पश्यन्तु , माँ कश्चिद् दुःख भाग्भवेत !! संत पुरुष भी जब कभी गांव कसबे में आते थे तो यही प्रवचन दिया करते थे कि " अपने मन को इतना कोमल बना लो की आपको अपने दुःख के आभास से पहले दुसरे का दुःख महसूस हो जाए !!
                      केवल महसूस ही ना हो बल्कि दुसरे का दुःख दूर करके जो आपको शान्ति मिले , उस से आपका दुःख दूर हो जाए !! ऐसा बनने को कहा जाता था !! हमारे बुज़ुर्गों,संतों, पंडितों और हमारे पवित्र सभी धर्मों के ग्रंथों द्वारा भी !! इसीलिए सब मिलजुल कर रहा करते थे !! लेकिन जैसे जैसे समय बदला कलयुग और घोर होने लगा तो हमारे जीवन में पैसे ने इतना अपना महत्त्व बढ़ा लिया कि पूछिये मत !! देवता जैसा इंसान पहले स्वार्थी बना फिर पशु और आज राक्षस बन चुका …

आजादी के बाद मुसलमानों की अग्नि-परीक्षा !! " साभार - श्री पुण्य प्रसुन वाजपेयी "

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1952 में मौलाना अब्दुल कलाम आजाद को जब नेहरु ने रामपुर से चुनाव लड़ने को कहा तो अब्दुल कलाम ने नेहरु से यही सवाल किया था कि उन्हें मुस्लिम बहुल रामपुर से चुनाव नहीं लड़ना चाहिये। क्योंकि वह हिन्दुस्तान के पक्ष में हैं और रामपुर से चुनाव लड़ने पर लोग यही समझेंगे कि वह हिन्दुस्तान में पाकिस्तान नहीं जाने वाले मुसलमानों के नुमाइन्दे भर हैं। लेकिन नेहरु माने नहीं। वह आजादी के बाद पहला चुनाव था और उस वक्त कुल 17 करोड़ वोटर देश में थे। संयोग देखिये 2014 के चुनाव के वक्त देश में 17 करोड़ मुसलमान वोटर हो चुके हैं। लेकिन 1952 में देश के मुसलमानों को साबित करना था कि वह नेहरु के साथ हैं। और 2014 में जो हालात बन रहे हैं, उसमें पहली बार खुले तौर पर मुस्लिम धर्म गुरु से लेकर शाही इमाम और देवबंद से जुड़े मौलाना भी यह कहने में हिचक नहीं रहे कि पीएम पद के लिये दौड़ रहे नरेन्द्र मोदी से उन्हें डर लगता है या फिर मोदी पीएम बने तो फिरकापरस्त ताकतें हावी हो जायेंगी।

तो क्या आजादी के बाद पहली बार देश का मुस्लिम समाज खौफजदा है। या फिर पहली बार भारतीय समाज में इतनी मोटी लकीर नरेन्द्र मोदी के नाम पर खींची जा …

" आशाओं के सागर में - उमंगों की बहार में , आओ नयी सरकार बनायें " !! " अच्छे दिन आने वाले हैं "!! - पीताम्बर दत्त शर्मा ( राजनितिक-समीक्षक )

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लोग कहा करते हैं कि " समय का पहिया " घूमता रहता है !! अगर आज दुःख है तो कल अवश्य सुख आएगा ! लेकिन अगर आज हम सुख भोग रहे हैं तो समय तो क्या हमें भगवान भी याद नहीं आएगा !! फिर तो जो कुछ भी हो रहा है वो सब हमारे कारण या परमात्मा के कारण से नहीं सिर्फ और सिर्फ " मेरे " कारण से ही अच्छा हो रहा है !! ऐसी लगभग सभी की मानसिकता रहती है !!
                 सनातन धर्म में इस को भी एक सामान्य बात माना गया है क्योंकि ये सब हमारे स्वभाव में व्याप्त है ! कितना भी दुःख हमें क्यों ना सताने लगे लेकिन एक छोटी सी आशा की किरण हमारे अंदर उमंग जगा जाती है और हम सब दुःख भूलकर भविष्य के सुन्दर सपनो में विचरण करने लगते हैं !!
               आज विश्व घोर कलयुग से गुज़र रहा है और सबसे ज्यादा सन्ताप अपने भारत में व्याप्त है क्योंकि यंहा लोग एक विशेष प्रकार के " सपनों " में विचरण करते रहते हैं ! चाहे वो अनपढ़ हो या पढ़ा-लिखा , अमीर हो या कोई गरीब सब स्वप्न में मगन रहते हैं !!
              आज हम अपने ऊपर नज़र डालें तो हम देखेंगे कि हम अपने " धर्म " को भूल कर दुसरे के धर्म को ब…

" अपने " कमल फूलों " " धोकर " लेजाना संसद में मोदी जी !! और संसद को भी गंगाजल के छींटे देकर ज़रा पवित्र कर लेना !! बड़ी " पापात्मायें " तड़प रही हैं वहाँ " !! - पीताम्बर दत्त शर्मा ( राजनितिक - समीक्षक )

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मेरी प्यारी पवित्र आत्माओ !!
                प्यार भरा नमस्कार कृपया स्वीकार करें !! वर्ष 2014 का चुनाव लगभग सम्पूर्ण होने को है ! 6 चरण मतदान हो चुका है और बाकी काम चुनाव-आयोग के " त्रिदेव " बखूबी से पूर्ण करवा लेंगे ,इसकी भरपूर संभावना है !!
                  मित्रो !! देश आज़ाद होने के बाद जो सांसद लोक-सभा और राज्य-सभा में चुन कर आये वो आजादी के आंदोलन की प्रेरणा मन में लिए हुए थे ! उसके बाद जो अगले 10 वर्षों में सांसद चुने गए वो समाजसेवियों की श्रेणी थी ! उसके बाद देखा देखि कई व्यपारी नेता  बन गए ! यंहा तलक तो कोई गलत बात नहीं थी ! लेकिन इसके बाद जिन व्यपारियों को असली नेताओं ने दोबारा चुन कर नहीं आने देने का प्रयास किया , तो वे व्यपारी गुंडों,नशेड़ियों और वैश्याओं की मदद से राजनितिक दलों की टिकटें भी लेने में कामयाब होने लगे तथा जीतने भी लगे !!
                    फिर कई अफसर, वकील , पत्रकार , गुण्डे , नशेड़ी और वैश्याएँ भी संसद में पंहुचनी शुरू हो गयीं बाकायदा चुन कर !! ये सब पहले नेताओं का सहयोग करते थे और बाद में ये स्वयं नेता बन गए !! क्योंकि हमारा संविधान ये बोलने में…

मोदी का मिशन बनाम संघ का टारगेट ! ! -( साभार - श्री पुण्य प्रसुन वाजपेयी )

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मोदी को पीएम की कुर्सी चाहे 272 में मिलती हो लेकिन संघ का टारगेट 395 सीटों का है। संघ के इस टारगेट का ही असर है कि अगले एक महीने में मोदी के पांव जमीन पर तभी पडेंगे, जब उन्हें रैली को संबोधित करना होगा। यानी हर दिन औसतन चार से पांच रैली। और यह तेजी मोदी के रैली में इसलिये लायी जा रही है क्योंकि मोदी के पांव जिस भी लोकसभा सीट पर पड़ते हैं, उस क्षेत्र में संघ के स्वयंसेवकों में उत्साह भी आ जाता है और क्षेत्र में लोग संघ परिवार के साथ संबंध बनाने से भी नहीं चूक रहे। स्वयंसेवकों के लिये टारगेट का नाम बूथ जीतो रखा गया है। इसके तहत कम से कम 395 सीटों पर बीजेपी पूरा जोर लगाएगी। 100 से ज्यादा सीटें ऐसी, जिस पर जीत पक्की। 120-130 सीटें ऐसी, जिन पर थोड़ी मेहनत से ही जीत तो पक्की। यूपी, बिहार, झारखंड, उत्तराखंड से कम से कम 90 सीटें जीतने का टारगेट। लेकिन पहली बार सवाल सिर्फ पीएम की कुर्सी को लेकर टारगेट का नहीं है बल्कि देशभर में आरएसएस अपने स्वयंसेवकों की संख्या कैसे दुगुनी कर सकती है, नजरें इस पर भी हैं और इसीलिये समूचे संघ परिवार के लिये 2014 का चुनाव उसके अपने विस्तार के लिये इतना महत्वपूर्ण…

" राम तेरी गंगा-जमुना-सरस्वती मैली हो गयी....,चरित्र पर जम चुकी मैल धोते धोते "....!! - पीताम्बर दत्त शर्मा ( राजनितिक - समीक्षक )

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मित्रो !! इन्सान की प्रथम गुरु उसकी माँ होती है ! वो अगर अपने बच्चे को सही ज्ञान दे पाती है तो उसका बच्चा एक बढ़िया इंसान बन जाता है ! और अगर वो माता अपने बच्चे को अच्छा ज्ञान नहीं दे पाती तो वो बच्चा बिगड़ जाता है आगे चलकर वो एक बुरा आदमी बन जाता है !!
               उसका पिता माता के ज्ञान को पक्का करता है , उसके बाद के सारे गुरु उस ज्ञान को मजबूत ही बनाते हैं ! लेकिन इंसान के जीवन में असर केवल माता का ज्ञान ही करता है !!
                 इसी लिए शास्त्रों में माँ को व्यक्ति का प्रथम गुरु माना गया है !! मित्रो !! हमारी माँ कहा करती हैं कि चरित्र पर कभी आंच मत आने दो बेटा ! इसको बनाने में बहुत समय लगता है , कई बार तो कई जीवन लग जाते हैं ! हम बड़े अचरज से पूछा करते थे कि माँ कई जीवन कैसे लग सकते हैं ??

                    आदमी को तो अगले पिछले जनम के बारे में कुछ याद ही नहीं रहता , तो हमारी माँ प्यार से दुलारती हुई बताया करती थी कि सुनो बेटा ....कोई आदमी जब चोरी-ठगी करनी शुरू कर देता है तो उसकी अगली तीन पीढ़ियां लोगों के शक़ के दायरे में रहती हैं और इसी तरह से अगर कोई स्त्री चरित्र-हीन…