Thursday, December 25, 2014

" हम किसी के प्रिय नहीं , तो क्या , इसलिए हम सबके विरोधी हैं "??-पीताम्बर दत्त शर्मा (लेखक-विश्लेषक)

आज क्रिसमिस की छुट्टी थी,सर्दी भी अपने चरम स्तर पर थी,तो रजाई से उठने का मन ही नहीं कर रहा था ! सुबह से दो बार चाय पी चुके थे ! एक बार फिर चाय पीकर नहाने-धोने की सोचकर श्रीमती जी को अधिकार भरे लहजे में हम बोले , हे भागवान !! ज़रा एक कप चाय तो और देदो , कड़क सी ! रसोई से " कड़कती " हुई आवाज़ आई सारा दिन चाय ही पीते रहोगे क्या ?, या फिर कोई काम-धाम भी करोगे ?ये ठीक कराना है , उसे साफ़ करना है ,आता पिसवाने भी जाना है ?10 बजने को हैं !
           मैं बोला बस एक कप चाय मांग ली तो इतनी शिकायतें हमसे हो गयीं आपको ?? पडोसी को देखो !! वो कितना सुख भोग रहा है ! हमारे भाग्य में पत्नी- प्यार नहीं बल्कि झिड़कियां ही लिखीं हैं क्या ?पत्नी  बोलीं लाती हूँ ज्यादा डायलॉग मत मारो लेखक जी ! पत्नी द्वारा दी गयी मीठी-कड़क चाय का एक घूँट भरा ही था कि साहेबज़ादे आ गए बोले पापा जी 500 रूपये दीजिये आज पार्टी देनी है दोस्तों को ! मैं बोला , बेटा !! हम क्रिश्चियन तो नहीं बने हैं आज तक , तो फिर पार्टी किस बात की ? तुम्हारा जनम दिन भी नहीं है आज और शादी के लायक तुम अभी हुए नहीं ! अंदर से पत्नी जी फिर बोलीं , तुम कौन से शादी के लायक थे जब तुम्हारी शादी कर दी गयी थी ?बेटा बोला - पापा आप भी ना प्रश्न बहुत पूछते हो? मेरे दोस्तों के पापा तो अपने बेटे को हर महीने 1000 रूपये ख़ुशी-ख़ुशी दे देते हैं ! पाठक मित्रो !!पैसे भी देने पड़े और दूसरों की तारीफ़ भी सुननी पड़ी जो बहुत ही पीड़ा दायक थी !
        मौका बढ़िया देख कर बेटी कहाँ पीछे रहने वाली थी ? प्यार से बोली , पापा आप तो अन्याय करोगे नहीं , अगर भैया को 500 दिए हैं तो मुझे भी मिलेंगे ही ये मैं जानती हूँ ! सोचा की चलो बेटी से तारीफ मिलेगी सुनने को , उसे भी 500 रूपये दे दिए ! रूपये हाथ से झटकते हुए और जाते हुए बेटी बोली - बिना मांगे पैसे देते तो अच्छे पापा मानती आपको !!इस तरह से 1000 रूपये की चोट खाकर , तीसरा कप चाय पीकर और पत्नी-प्रसाद लेकर नहाया-धोया और घर के आवश्यक काम निपटाता हुआ अपने आफिस पंहुचा तो असिस्टेंट बोला सर आप तो बहुत लेट आते हो !
           जैसे ही अपनी कुर्सी पर बैठा तो असिस्टेंट बोला सर वो मंत्री जी का फोन आया था , कह रहे थे कि आज के लेख में कुछ तारीफ़ में लिखें हमेशां विरोध ही करते  आप अपने विश्लेषण में ! मैं बोला अब मैं क्या उनको " भारत - रत्न " दिलवा दूँ ?? करम अच्छे करेंगे तो ही तारीफ कर पाउँगा ना !! जी सर !! मंत्री जी ने फैक्स करके करवाये गए कार्यों की लिस्ट भी भेजी है ! मैं बोला यार एक कप कोफ़ी मंगवाओ !! फिर काम शुरू करते हैं ! असिस्टेंट जाते-जाते बोलता हुआ गया की कैसे-कैसे लोग दफ्तर में अफसर बन जाते हैं आते ही खर्चा करने लगते हैं !! साहिब ठीक ही कहते हैं कि "लेखक" लिखते कम हैं,काफी ज्यादा पीते हैं !
          मैंने अपनी आँखें बंद कर लीं और सोचने लगा कि कहीं यही वजह तो नहीं जो "बुद्धिजीवियों" को कुछ पसन्द नहीं आता आजकल ?? हमारे घर-समाज-शहर-देश और विश्व का वातावरण तनाव पूर्ण होता जा रहा है !! आर्थिक युग की देन है ये शायद ! आप क्या सोचते हैं ?? क्या आपके साथ भी यही हो रहा है ???
      
             आपसे मित्रता करके मुझे अत्यंत प्रसन्नता हो रही है ! आपके जनम दिन की आपको हार्दिक बधाई और शुभ कामनाएं !! कृपया स्वीकार करें ! आपका जीवन सदा खुशियों से भरा रहे !! मेरा फेसबुक,गूगल+,ब्लॉग,पेज और विभिन्न ग्रुपों की सदस्य्ता ग्रहण करने का एक ख़ास उद्देश्य है ! मैं एक लेखक-विश्लेषक और एक समीक्षक हूँ ! राष्ट्रीय-अंतराष्ट्रीय ज्वलंत विषयों पर लिखना -पढ़ना मेरा शौक है ! मैं एक साधारण पढ़ालिखा और साफ़ स्वभाव का आदमी हूँ ! भारतीय संस्कृति और सनातन धर्म से प्यार करता हूँ ! भारत देश के लिए अगर मेरे प्राण काम आ सकें तो मैं इसे अपना सौभाग्य मानूंगा !परन्तु किसी संत-राजनितिक दल और नेता हेतु नहीं !मैं एक बिन्दास स्वभाव का आदमी हूँ ! मेरी मित्र मण्डली में मेरे बच्चे और रिश्तेदार भी शामिल हैं ! तो भी मैं सभी विषयों पर अपने खुले विचार रखता हूँ !! आप सब का हार्दिक स्वागत है मेरे जीवन में !! मैं आपकी यादों - बातों को संभल कर रखूँगा !!
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आशा है आपका प्यार मुझे इसी तरह से मिलता रहेगा !!आपका क्या कहना है मित्रो ??अपने विचार अवश्य हमारे ब्लॉग पर लिखियेगा !!
सधन्यवाद !!
आपका प्रिय मित्र,
पीताम्बर दत्त शर्मा,
हेल्प-लाईन-बिग-बाज़ार,
R.C.P. रोड, सूरतगढ़ !
जिला-श्री गंगानगर।
मोबाईल नंबर-09414657511
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BY :- " 5TH PILLAR CORRUPTION KILLER " THE BLOG . READ,SHARE AND GIVE YOUR VELUABEL COMMENTS DAILY . !!
Posted by PD SHARMA, 09414657511 (EX. . VICE PRESIDENT OF B. J. P. CHUNAV VISHLESHAN and SANKHYKI PRKOSHTH (RAJASTHAN )SOCIAL WORKER,Distt. Organiser of PUNJABI WELFARE SOCIETY,Suratgarh. (raj)INDIA.  

3 comments:

  1. सार्थक प्रस्तुति।
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    आपकी इस प्रविष्टि् की चर्चा कल शनिवार (27-12-2014) को "वास्तविक भारत 'रत्नों' की पहचान जरुरी" (चर्चा अंक-1840) पर भी होगी।
    --
    सूचना देने का उद्देश्य है कि यदि किसी रचनाकार की प्रविष्टि का लिंक किसी स्थान पर लगाया जाये तो उसकी सूचना देना व्यवस्थापक का नैतिक कर्तव्य होता है।
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    सादर...!
    डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक'

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  2. बहुत रोचक प्रस्तुति ..
    ठण्ड में चाय और कॉफी खूब चलती हैं ..मेरे हिसाब से कभी-कभी श्रीमती को चाय और कॉफी बनाकर पिला दिया करें तो फिर देखो प्यार ही प्यार .....आजकल के बच्चे की मत पूछो वे कब क्या कह ले कुछ भी कहा नहीं जा सकता ..अपना जमाना गया ....

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  3. सही लिखा आपने .............आज कल इस तरह का तनाव भरा वातावरण बहुत कुछ सोचने पर मजबूर कर देता है...

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"कुछ नहीं ,है भाता ,जब रोग ये लग जाता".....!!! - पीताम्बर दत्त शर्मा (स्वतंत्र टिप्पणीकार) मो.न.+ 9414657511

वैसे तो मित्रो,! सभी रोग बुरे होते हैं !लेकिन कुछ रोग तो हमारा पीछा छोड़ देते हैं और कुछ आदमी की मौत तलक साथ देते हैं !पुराने जमाने में ऐसे ...