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Showing posts from November, 2015

चले गये राम मंदिर की आस लिए ............!!!

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जो ना तो राजनीति का नायक बना। ना ही हिन्दुत्व का झंडाबरदार। लेकिन जो सपना देखा उसे पूरा करने में जीवन कुछ इस तरह झोक दिया कि संघ परिवार को भी कई मोड़ पर बदलना पड़ा। और देश की सियासत को भी राम मंदिर को धुरी मान कर राजनीति का ककहरा पढ़ना पड़ा। जी अशोक सिंघल ने सदा माना कि धर्म से बडी राजनीति कुछ होती नहीं। इसीलिये चाहे अनचाहे अयोध्या आंदोलन ने समाज से ज्यादा राजनीति को प्रभावित किया और धर्म पर टिकी इस राजनीति ने समाज को कही ज्यादा प्रभावित किया। इसी आंदोलन ने आडवाणी को नायक बना दिया। आंदोलन से निकली राजनीति ने वाजपेयी को प्रधानमंत्री बना दिया। लेकिन निराशा अशोक सिंघल को मिली तो उन्होने गर्जना की। स्वयंसेवकों की सत्ता का विरोध किया। लेकिन आस नहीं तोड़ी। इसीलिये 2014 में जब नरेन्द्र मोदी को लेकर सियासी हलचल शुरु हुई तो चुनाव से पहले ही मोदी की नेहरु से तुलना कर राम मंदिर की नई आस पैदा की। यानी अपने सपने को अपनी मौत की आहट के बीच भी कैसे जिन्दा रखा यह महीने भर पहले दिल्ली में सत्ता और संघ परिवार की मौजूदगी में अपने ही जन्मदिन के समारोह में हर किसी से यह कहला दिया कि सबसे बेहतर तोहफा तो राम…

"5th pillar corruption killer " नामक ब्लॉग का कार्यालय जल कर राख हुआ !

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"5th pillar corruption killer " नामक ब्लॉग का कार्यालय जल कर राख हुआ ! श्री पीताम्बर दत्त शर्मा (लेखक - विश्लेषक) की दूकान भी जली ! सूरतगढ़ के मोज़िज़ लोगों ने अफ़सोस जताया और नगर-पालिका की छोटी फायर-ब्रगेड द्वारा आग बुझाने में ज्यादा समय लेने के कारण नुक्सान ज्यादा हो जाने पर रोष भी प्रकट किया ! भगवान की

माया है जी सब ! 
" आकर्षक - समाचार ,लुभावने समाचार " आप भी पढ़िए और मित्रों को भी पढ़ाइये .....!!!
BY :- " 5TH PILLAR CORRUPTION KILLER " THE BLOG . प्रिय मित्रो , सादर नमस्कार !! आपका इतना प्रेम मुझे मिल रहा है , जिसका मैं शुक्रगुजार हूँ !! आप मेरे ब्लॉग, पेज़ , गूगल+ और फेसबुक पर विजिट करते हो , मेरे द्वारा पोस्ट की गयीं आकर्षक फोटो , मजाकिया लेकिन गंभीर विषयों पर कार्टून , सम-सामायिक विषयों पर लेखों आदि को देखते पढ़ते हो , जो मेरे और मेरे प्रिय मित्रों द्वारा लिखे-भेजे गये होते हैं !! उन पर आप अपने अनमोल कोमेंट्स भी देते हो !! मैं तो गदगद हो जाता हूँ !! आपका बहुत आभारी हूँ की आप मुझे इतना स्नेह प्रदान करते हैं !!नए मित्र सादर आमंत्रित हैं ! the link is - w…

हो गए चुनाव,मना ली दीपावली ,अब तो कर लो इस गरीब देश की रखवाली !! - पीताम्बर दत्त शर्मा (लेखक-विश्लेषक) मो. न. - +919414657511.

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"क्या-क्या सितम नहीं ढाएँ हैं इन कमीनों ने चुनाव की खातिर "इस देश की जनता पर , पोत दी है "कालिख"भारत माता के मुंह पर !अब जांच करवाओ कि "किसके" कहने पर कोन - क्या बोला ? किसने किसके कहने पर हड़ताल की ? जिन्होंने पुरुस्कार लोटाये उन्हें "हौसला" किसने दिया ?"दादरी-हार्दिक पटेल-पंजाब में छाये असंतोष और योगेन्द्र-यादव केजरीवाल एंड पार्टी के पीछे कौन-कौन सी छिपी हुई ताक़तें हैं ??कांग्रेस - कम्युनिस्टों के और कितने छिपे हुए दोस्त हैं ? हमें सब पता लगाना ही होगा ! क्योंकि अगर ये लोग अब फिर "सत्ता"तक पहुँच गए तो फिर इस देश में हिन्दू सभ्यता को मानने वाले हर धर्म के लोग सदा के लिए असरुक्षित हो जाएंगे !
                          मोदी जी  तो देश हित में अपने काम में लग गए हैं ! विदेशों में भारत हित साधने की श्रृंखला में लंदन और फिर तुर्की जायेंगे ! देश की सारी जिम्मेदारी गृहमंत्री राजनाथ सिंह और अपने अन्य मंत्रियों को सौंप गए हैं !अब इन्ही लोगों को चौकस रहकर अपने काम करने हैं !इस देश में आज से पहले भी दंगे फसाद ,प्रदर्शन,धार्मिक भावनाओं को ठेस …

संघ परिवार में जाग रहा है सावरकर का हिन्दुत्व !

सरसंघचालक का काम हिन्दू संगठन को मजबूत करना है लेकिन वह धर्म की लड़ाई में जा फंसे। प्रधानमंत्री मोदी समृद्ध भारत के लिये काम करना है लेकिन वह चुनावी जीत के लिये प्रांत-दर-प्रांत भटक रहे हैं। और अमित शाह को राजनीतिक तौर पर हेडगेवार के हिन्दुत्व को रखना है लेकिन वह सावरकर की लाइन पकड़े हुये हैं। तो बड़ा सवाल है कि इन्हे समझायेगा कौन और गलती कर कौन रहा है यह बतायेगा कौन । यह तीनों सवाल इसलिये क्योंकि सरसंघचालक को ही प्रधानमंत्री मोदी को समझाना था कि उन्हे भारत के लिये जनादेश मिला है। यानी मोदी को तो गोलवरकर की लीक एकचालक अनुवर्तिता की लाइन पर ही चलना है। राज्यों का काम तो संगठन के लोग करेंगे। लेकिन मोदी निकल पड़े इंदिरा गांधी बनने तो रास्ता डगमडाने लगा। और सरसंघचालक दशहरा की हर रैली में ही जब मोदी को देश-दुनिया का नायक ठहराने लगे तो उसके आगे कहे कौन। तो अगला सवाल सरसंघचालक मोहन भागवत का है जिनका काम हिन्दू समाज को संगठित करना ही रहा है लेकिन मौजूदा वक्त में वह खुद जगत गुरु की भूमिका में आ गये और राजनीतिक तौर पर भी त्रिकालवादी सत्य यह कहकर बोलने लगे कि जब आंबेडकर ने भी आरक्षण की उम्र 10 …

राजनीति का ककहरा सिखा दिया बिहार के जनादेश ने !!! - साभार - श्री पुण्य प्रसुन्न वाजपेयी जी

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बीजेपी का यह भ्रम भी टूट गया कि कि बिना उसे नीतीश कुमार जीत नहीं सकते हैं। और नीतिश कुमार की यह विचारधारा भी जीत गई कि नरेन्द्र मोदी के साथ खड़े होने पर उनकी सियासत ही धीरे धीरे खत्म हो जाती। तो क्या बिहार के वोटरों ने पहली बार चुनावी राजनीति में उस मिथ को तोड़ दिया है, जहां विचारधारा पर टिकी राजनीति खत्म हो रही है। यह सवाल इसलिये क्योंकि जो सवाल नीतीश कुमार ने बीजेपी से अलग होते वक्त उठाये और जो सवाल बीजेपी शुरु से उठाती रही कि पहली बार नीतीश को बिहार का सीएम भी बीजेपी ने ही बनाया। तो झटके में जनादेश ने कई सवालो का जबाब भी दिया और इस दिशा में सोचने के लिये मजबूर कर दिया कि देश से बड़ा ना कोई राजनीतिक दल होता है। ना ही कोई राजनेता और ना ही वह मुद्दे जो भावनाओं को छूते हैं लेकिन ना पेट भर पाते है और ना ही समाज में सरोकार पैदा कर पाते हैं। यानी गाय की पूंछ पकड कर चुनावी नैया किनारे लग नहीं सकती। समाज की हकीकत पिछड़ापन और उसपर टिके आरक्षण को संघ के सामाजिक शुद्दिकरण से घोया नहीं जा सकता। जंगल राज को खारिज करने के लिये देश में हिन्दुत्व की बेखौफ सोच को देश पर लादा नहीं जा सकता। यानी पहली …

करियर के पहले संपादक ने सिखाया , “पत्रकारिता जीने का तरीका है”

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मौजूदा दौर में पत्रकारिता करते हुये पच्चीस-छब्बीस बरस पहले की पत्रकारिता में झांकना और अपने ही शुरुआती करियर के दौर को समझना शायद एक बेहद कठिन कार्य से ज्यादा त्रासदियों से गुजरना भी है। क्योंकि 1988-89 के दौर में राजनीति पहली बार सामाजिक-आर्थिक दायरे को अपने अनुकूल करने के उस हालात से गुजर रही थी और पत्रकारिता ठिठक कर उन हालातों को देख-समझ रही थी , जिसे इससे पहले देश ने देखा नहीं था । भ्रष्टाचार के कटघरे में राजीव गांधी खड़े थे । भ्रष्टाचार के मुद्दे के आसरे सत्ता संभालने वाले वीपी सिंह मंडल कमीशन की थ्योरी लेकर निकल पड़े और सियासत में साथ खड़ी बीजेपी ने कमंडल थाम कर अयोध्या कांड की बिसात बिछानी शुरु कर दी । और इसी दौर में नागपुर से हिन्दी अखबार लोकमत समाचार के प्रकाशन लोकमत समूह ने शुरु किया । जिसका वर्चस्व मराठी पाठकों में था । और संयोग से छब्बीस बरस पहले भी मेरे जहन में नागपुर की तस्वीर तीन कारणों से बनी थी । पहली , संघ का हेडक्वार्टर नागपुर में था । दूसरा बाबा साहेब आंबेडकर के सामाजिक-राजनीतिक प्रयोग की जमीन नागपुर थी और तीसरा आंध्रप्रदेश से निकलकर महाराष्ट्र के विदर्भ में नक्सल…

"धर्म-कर्म और ज़राईम " !! इस दीपावली पर सदविचारों की रौशनी करो ! - पीताम्बर दत्त शर्मा (लेखक-विश्लेषक) मो. न. - 09414657511

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भारतीय संस्कृति के अनुसार , जब से ये सृष्टि रची गयी है ,लगभग तभी से धर्म के नाम पर तथाकथित धर्म चलाने वालों द्वारा ही अपराध किये या करवाये जाते रहे हैं !वजह सिर्फ सत्ता और औरत ही रही है !कोई देवताओं में सर्वोच्च स्थान पाना चाहता था तो कोई "मोहिनी"को पाना चाहता था !जायज़ तरीके से जो व्यक्ति कोई भी "वस्तु"या स्वर्गीय आनंद पा लेता था उसे "देवता"और "नाजायज़"तरीके से जो व्यक्ति कोई वस्तु या "स्वर्गीय-आनंद"पा लेता था , तो उसे "राक्षस"कहा जाता था !किस देवता या राक्षस ने क्या पाने के लिए क्या क्या किया या नहीं किया , ये आप सब ने भारत के महान संतों से अवश्य सुन रख्खा होगा !मैं नाजायज़ अपनी बात को लम्बा नहीं खींचना चाहता हूँ जी !
                          कलयुग में ना जाने कितने बड़े-बड़े अपराध हो चुके हैं , फिर भी हम आज तक दशहरे में रावण का पुतला ही जलाते हैं जी !हमारे साथ कोई कितना भी ज़ुल्म ढा दे , लेकिन हमें "कंस,रावण,महिषासुर,दुर्योधन,बाली और हरिण्यकश्यप से बड़ा कोई अपराधी नज़र ही नहीं आता !?ना जाने क्यों ?हम अपने बड़े से बड़े दुःख को अ…