"धर्म-कर्म और ज़राईम " !! इस दीपावली पर सदविचारों की रौशनी करो ! - पीताम्बर दत्त शर्मा (लेखक-विश्लेषक) मो. न. - 09414657511

भारतीय संस्कृति के अनुसार , जब से ये सृष्टि रची गयी है ,लगभग तभी से धर्म के नाम पर तथाकथित धर्म चलाने वालों द्वारा ही अपराध किये या करवाये जाते रहे हैं !वजह सिर्फ सत्ता और औरत ही रही है !कोई देवताओं में सर्वोच्च स्थान पाना चाहता था तो कोई "मोहिनी"को पाना चाहता था !जायज़ तरीके से जो व्यक्ति कोई भी "वस्तु"या स्वर्गीय आनंद पा लेता था उसे "देवता"और "नाजायज़"तरीके से जो व्यक्ति कोई वस्तु या "स्वर्गीय-आनंद"पा लेता था , तो उसे "राक्षस"कहा जाता था !किस देवता या राक्षस ने क्या पाने के लिए क्या क्या किया या नहीं किया , ये आप सब ने भारत के महान संतों से अवश्य सुन रख्खा होगा !मैं नाजायज़ अपनी बात को लम्बा नहीं खींचना चाहता हूँ जी !
                          कलयुग में ना जाने कितने बड़े-बड़े अपराध हो चुके हैं , फिर भी हम आज तक दशहरे में रावण का पुतला ही जलाते हैं जी !हमारे साथ कोई कितना भी ज़ुल्म ढा दे , लेकिन हमें "कंस,रावण,महिषासुर,दुर्योधन,बाली और हरिण्यकश्यप से बड़ा कोई अपराधी नज़र ही नहीं आता !?ना जाने क्यों ?हम अपने बड़े से बड़े दुःख को अपना "दुर्भाग्य"मानकर भविष्य में एक नयी "आशा"का संचार होगा ये मान लेते हैं !"सनातन-धर्म"जिसको कोई नहीं चला रहा ,जिसे किसने शुरू किया कोई नहीं जानता , जो किस दिन शुरू हुआ हम नहीं जानते और जिसका कोई प्रचार नहीं होता उस धर्म की सारी दुनिया दुश्मन हुई बैठी है जी !!सनातन धर्म के नाम पर "बाबा,माता,और बालक "रुपी ठेकेदार अपना प्रचार करते हैं और अपने ही आश्रम कम मंदिर बनवाते हैं !अपनी ही शोभा-यात्रायें निकलवाते हैं !इनके भगत अपने -अपने गुरुओं-भगवानों को दुसरे से बड़ा बताते हैं !जो हमारे धर्मों ने हमें करने को कहा है , हम वो तो बिलकुल भी नहीं करते हैं !बल्कि दुसरे अनाप-शनाप काम करते या करवाते रहते हैं धर्मों के नाम पर ! बस इसी चक्र में ,  कोई अपने गुरु को मरवा देता है तो कोई अपने चेले-चेलियों को स्वर्ग पंहुचा देता है !
                       तब स्टोरी में आगमन होता है "महान-विद्वान पत्रकारों" का,जो कहानी में "ट्विस्ट"लाते हैं ! फिर हमारे आज के राक्षस , मेरा मतलब हमारे "नेता"जी अपने विचार कुछ इस तरह से जोड़ते हैं कि वातावरण में अजीब सा "ज़हर"घुल जाता है !ऊपर से हमारे भारत के लोकतंत्र ने सिर्फ कांग्रेस या उसकी सहमति से चलने वाली सरकारों का ही स्वाद चखा हुआ है जी !गलती से जो एक -दो बार जो गैर कोंग्रेसी सरकारें बानी भी हैं तो उसे कोंग्रेसियों ने डराकर ही भगा दिया है !चाहे वो मोरारजी की सरकार हो या फिट अटल जी की , इन सरकारों के कई मंत्री कोंग्रेसियों से पूछकर ही काम किया करते रहे जी ! अफसर लॉबी के तो कहने ही क्या जी ! वो तो आज भी उनकी ही हाज़री भरते हैं ! तभी तो मोदी जी ने आडवाणी,शोरी,जोशी,सिन्हा,जसवंत जी को अपने मंत्रिमंडल में जगह नहीं दी है जी !जबकि इसी मण्डली के जेटली,सुषमा,पासवान और नक़वी जी आदि को मजबूरन अपने मंत्रिमंडल में शामिल ना चाहते हुए भी करना पड़ा है !
                    आप स्वयं देखिये ! देश में फलों,सब्ज़ियों और राशन के दाम आसमान छू रहे हैं लेकिन हमारे कृषि,रसदऔर अन्य मंत्री दो-चार माह बाद कोई कदम उठाते हैं !सभी विपक्षी राजनितिक,वामपंथी -सामाजिक,इतिहासकारों,कवियों,लेखकों द्वारा नाजायज़ ही मोदी जी को निशाना बनाया जा रहा है लेकिन उनके मंत्रिमंडल के अन्य मंत्री चुप बैठे हैं ,क्यों ?? 
                षड्यंत्र बहुत गहरा है ! आज पाकिस्तान के हित की बातें हमारा विपक्ष और आधा फिल्म जगत बोल रहा है क्यों ?125 करोड़ लोगों में से सेंकडों लोगों की चाहत को हमारा "पवित्र-मीडिआ"कैसे और क्यों बनाकर दिखा रहा है ?हर 8 -10 महीनों बाद किसी ना किसी प्रांत में चुनाव क्यों होते हैं ?जबकि जब हमारे पास इतनी पोलिस भी नहीं थी तो हमारा चुनाव आयोग 3 प्रकार के चुनाव एक साथ करवा लिया करता था जी ! क्या इसमें भी कोई षड्यंत्र है ?
               विपक्ष मोदी जी को ,2002 के दंगों हेतु झूठे इलज़ाम लगाकर नहीं रोक पाया , विकास के नाम पर भी मोदी जी ने विपक्ष को पटखनी दे दी ,विश्व में जब मोदी जी ने भारत का झंडा बुलन्द कर दिया , इतना ही नहीं उनकी स्वयं की छवि को भी विश्व नई माना तो कांग्रेस सहित सारा विपक्ष नीचता की हद्द तक उत्तर आया और उसने "सहिष्णुता"और धार्मिक-उन्माद को अपना हथियार बनाया ! विपक्ष की इस चाल में पाकिस्तान ने भी पूरा-पूरा साथ दिया !
                    क्या भारत में केवल कांग्रेस की सरकार ही आपसी भाईचारा बढ़ा सकती है जिसने हज़ारों दंगे इस देश में करवाये !बल्कि भारत का बंटवारा भी कांग्रेस ने ही करवाया था ! इसलिए हमें गहनता से विचार करना होगा कि भारत किसके हाथ में सुरक्षित रहेगा ! ? अब कांग्रेस जनता के निर्णय को ही पलटना चाहती है ! वो मोदी सरकार को पांच वर्ष भी पूरे ही नहीं करने देना चाहती क्यों ?जिसको जनता ने नकारा वो ही आज मापदंड निर्धारित करने चला है क्यों ?हमारा मीडिया "नकारा-नेताओं "के विचार जानने जाता ही क्यों है ?क्या उसे सदविचारों वाले नेता नज़र नहीं आते ? समाज को विकृत करने वाले समाचारों को वो इतनी ज्यादा बार दोहराता ही क्यों है ?क्यों ऐसे विषयों पर स्पेशल प्रोग्राम बनाये जाते हैं ?
            देश के लोकतंत्र के पाँचों स्तम्भो !! पहले सोचो !! फिर समझो ! और फिर कुछ किया करो !! इस दीपावली पर सदविचारों की रौशनी करो ! 
                  " आकर्षक - समाचार ,लुभावने समाचार " आप भी पढ़िए और मित्रों को भी पढ़ाइये .....!!!
BY :- " 5TH PILLAR CORRUPTION KILLER " THE BLOG .  प्रिय मित्रो , सादर नमस्कार !! आपका इतना प्रेम मुझे मिल रहा है , जिसका मैं शुक्रगुजार हूँ !! आप मेरे ब्लॉग, पेज़ , गूगल+ और फेसबुक पर विजिट करते हो , मेरे द्वारा पोस्ट की गयीं आकर्षक फोटो , मजाकिया लेकिन गंभीर विषयों पर कार्टून , सम-सामायिक विषयों पर लेखों आदि को देखते पढ़ते हो , जो मेरे और मेरे प्रिय मित्रों द्वारा लिखे-भेजे गये होते हैं !! उन पर आप अपने अनमोल कोमेंट्स भी देते हो !! मैं तो गदगद हो जाता हूँ !! आपका बहुत आभारी हूँ की आप मुझे इतना स्नेह प्रदान करते हैं !!नए मित्र सादर आमंत्रित हैं ! the link is - www.pitamberduttsharma.blogspot.com. , गूगल+,पेज़ और ग्रुप पर भी !!ज्यादा से ज्यादा संख्या में आप हमारे मित्र बने अपनी फ्रेंड रिक्वेस्ट भेज कर !! आपके जीवन में ढेर सारी खुशियाँ आयें इसी मनोकामना के साथ !! हमेशां जागरूक बने रहें !! बस आपका सहयोग इसी तरह बना रहे !!

मेरा मोबाईल नंबर ये है :- 09414657511. 01509-222768. धन्यवाद !!
आपका प्रिय मित्र ,
पीताम्बर दत्त शर्मा,
हेल्प-लाईन-बिग-बाज़ार,
R.C.P. रोड, सूरतगढ़ !
जिला-श्री गंगानगर।

Posted by PD SHARMA, 09414657511 (EX. . VICE PRESIDENT OF B. J. P. CHUNAV VISHLESHAN and SANKHYKI PRKOSHTH (RAJASTHAN )SOCIAL WORKER,Distt. Organiser of PUNJABI WELFARE





Comments

  1. आपकी इस प्रविष्टि् के लिंक की चर्चा कल शुक्रवार (06-11-2015) को "अब भगवान भी दौरे पर" (चर्चा अंक 2152) पर भी होगी।
    --
    सूचना देने का उद्देश्य है कि यदि किसी रचनाकार की प्रविष्टि का लिंक किसी स्थान पर लगाया जाये तो उसकी सूचना देना व्यवस्थापक का नैतिक कर्तव्य होता है।
    --
    चर्चा मंच पर पूरी पोस्ट नहीं दी जाती है बल्कि आपकी पोस्ट का लिंक या लिंक के साथ पोस्ट का महत्वपूर्ण अंश दिया जाता है।
    जिससे कि पाठक उत्सुकता के साथ आपके ब्लॉग पर आपकी पूरी पोस्ट पढ़ने के लिए जाये।
    हार्दिक शुभकामनाओं के साथ।
    सादर...!
    डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक'

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