" राजनीति " " कला - या - साइंस ".....???

सभी कलाकार राजनीतिज्ञ मित्रो , झुक कर सलाम करता हूँ , कबूल कीजिये !! देश के ५ राज्यों में चुनाव होने जा रहे हैं , सभी राजनितिक दलों के नेताओं की " कलाकारी "आम - जनता को विभिन्न माध्यमो से नज़र भी आ रही है और समझ भी आ रही है !! जब मैंने b.a. में राजनीती शास्त्र पढ़ा तो पहला पाठ यही था की ये ससुरी राजनीती साइंस है या आर्ट ?? तब प्रोफेसर साहिब के लाख समझाने पर भी हम समझ ही नहीं सके थे की ये " राजनीती " साइंस और कला दोनों कैसे हो सकतीं हैं ????? लेकिन अब समझ में आ रहा है की वो पाठ सही था और गुरु जी भी सही थे !!पंजाब में बदल जी और कप्तान साहिब , u.p. में " मोसेरे भाई बहन " और b.j.p. वाले ऐसे ऐसे नाटक दिखा रहे हैं की नाटक करने में जो माहिर हैं , वो भी " दांतों तले उंगलियाँ " दबाने को मजबूर हो रहे हैं ????/ परम आदरणीय मुलायम जी और सुश्री माया बहन जी ने 4.साल 6. महीनो तलक तो कोंग्रेस पार्टी के साथ कदम से कदम मिला कर " सत्ता " का परम सुख भोगा केंद्र में , कहा तो ये गया की ये साथ साम्प्रदायिक शक्तियों को सत्ता से दूर रखने हेतु था ??? लेकिन जनता ने देखा की इनका स्वयं का स्वार्थ ज्यादा था ??? सब मस्त हाथी की तरह राज करने में मस्त थे ?? अब जब चुनाव घोषित हुए तो सब एक दुसरे से नकली लड़ाई लड़ रहे हैं ?? बहन जी की सरकार के ऊपर भ्रष्टाचार के आरोप लगने लगे तो , प्रखर राजनीतिज्ञ का परिचय देते हुए , बिना कोई देर किये , अपने ऊपर कोई आंच न आने पाए , इस लिए अपने 20. मंत्रियों को बर्खास्त करके पार्टी से बाहर कर दिया || ताकि कोई बहन जी को " काला " न कह सके ??? जनता को भी अब कुछ सच्चाई सहने लायक हो जाना चाहिए , जैसे किसी प्रिय की मृत्यु हो जाने पर हम सब्र के इलावा कुछ नहीं कर पाते , उसी तरह , राजनीति में " सत्य " की मृत्यु को भी हमें कबूलना होगा !! इसके साथ - साथ सदाचार , निष्ठा और जनता की सेवा की भावना भी मृतु शैया पर पड़ी " भीष्म पितामह की तरह अपनी मृत्यु  की प्रतीक्षा कर रही है !! आज मूल्यों की अपेक्षा करने वाला " मूरख " साबित कर दिया जाता है !! चाहे वो अकेला हो या उसके पीछे लाखों की गिनती में इस देश की जनता ही क्यों न हो ??? जिस तरह से भारत के नेताओं ने " अन्ना " जैसे सच्चे व्यक्ति के जायज़ विषय पर चलाये गए आन्दोलन को न केवल लटका दिया है ,बल्कि उसकी धार को भोथरा भी कर दिया है .....?? उस से तो यही साबित होता है की हमारे नेता भी उच्च क्वालिटी के कलाकार हैं .... इन्हें तो " आस्कर " मिलना चाहिए ???? एक दल से निकले गए " चोरों " को दुसरे राजनितिक दल वाले अपने में शामिल करने के कार्य को कैसे उचित ठहराते हैं ??? ये कला भी भारत की जनता को देखने हेतु उपलब्ध हो रही है ????? मुझे तो इस अवसर पर मुकेश जी का एक गीत याद आ रहा है की ...." जय बोलो बे - ईमान की जय बोलो .........!!!!! बोलो जय श्री .....राम ....!!!

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