हर दंगों में मरते निर्दोष ही हैं , लेकिन कारण भी पहचाना जाना अति- आवश्यक है,न्यायालय और सरकारों को ,अन्यथा सच्चा न्याय नहीं हो पायेगा !! ढाई दशक से ज्यादा वक्त हो चुका है, जब 31 अक्टूबर 1984 को भारत की तत्कालीन प्रधानमंत्री श्रीमती इंदिरा गांधी की उनके अंगरक्षकों द्वारा हत्या किए जाने के बाद देशभर में भड़के सिख विरोधी दंगों में हजारों निर्दोष सिखों को मौत के घाट उतार दिया गया था। जख्म एक बार फिर हरे (हालांकि भरे ही कहां हैं?) हो गए हैं। इस मामले में कांग्रेस के एक और वरिष्ठ नेता सज्जन कुमार भी आरोपी हैं।
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राजनैतिक पार्टियां जब दंगो को खुद प्रोत्साहित करने लगे तब न्याय की आशा धूमिल हो जाती है !!
ReplyDeleteनव संवत्सर की हार्दिक बधाई एवं शुभकामनायें !!