Posts

Showing posts from April, 2013

" बलात्कार " पर सच्ची बात क्यों, कहना और सुनना नहीं चाहते- " हम-लोग " ??????

Image
" सभी समझदार "मित्रों को मेरा सादर प्रणाम  !!
          टी.वी. प्रवक्ताओं को स्पेशल नमस्कार !!
              चेनलों के वफादार एंकरों को - राम-राम !!
 सभी  घ्रणित कार्यो की दोषियों को सज़ा दिए जाने की प्रार्थना और पीड़ितों के इलाज और समाज में पुनर्स्थापना की याचना " ठेकेदारों " को करने के बाद अपनी बात कहना चाह रहा हूँ महिला आयोग से माफ़ी मांगते हुए………कृपया आज्ञा प्रदान करें !!
             " भगवान श्री रजनीश " जी की एक पुस्तक में मैंने पढ़ा था कि , नवजात बच्चे के अन्दर भी सेक्स की इच्छा जागती है जिसकी पूर्ती वो " स्तन-पान " और अंगूठा चूस कर करता है !!
                  कलयुग चल रहा है , तो समय की भी यही चाल है कि धरती पर " पाप " बढ़ें !!
                  केंद्र की सरकार भी चाहती थी कि " आपसी सहमती " से सेक्स करने की उम्र घटे !!
                    खाप पंचायत के पदाधिकारी भी शादी की उम्र घटाने के पक्ष में हैं !!
                     " सरप्राइज़ - सेक्स " का आनंद लेने वाले और " गे " समर्थक भी हिंदुस्तान में बहुत पाए जाते …

" साभार " एक बढ़िया कविता " दर्द " भरी "

Image
"दीमकों से चमन को कैसे बचायें?" (डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री ‘मयंक’)

दीमकों से चमन को कैसे बचायें? मोतियों की फसल को कैसे उगायें?
अन्न को घुन मुक्त होकर चर रहे हैं, माल को परदेश में वो भर रहे हैं, दरिन्दे बेखौफ हरकत कर रहे हैं, बालिकाएँ और बालक डर रहे हैं, हम बदन के कोढ़ को कैसे मिटायें? मोतियों की फसल को कैसे उगायें?
कोयला-लक्कड़ व पत्थर खा रहे हैं, मुल्क में गद्दार बढ़ते जा रहे हैं, कुर्सियों पर बोझ बनकर छा रहे हैं, सुख यहाँ काले फिरंगी पा रहे हैं, अब सरोवर को विमल कैसे बनायें? मोतियों की फसल को कैसे उगायें?
शाख अपनी धूल में हमने मिला दी, खो चुकी है आज अपनी शान खादी, कह रही हिन्दोस्ताँ की आज दादी,  अब लुटेरों की बनी पहचान खादी, चैन की वंशी यहाँ कैसे बजायें?

" ये अन्धा - क़ानून है " , इसे जल्द बदलना है....!!??

Image
             " बदलने की क्षमता और विश्वास रखने वाले सभी मित्रों को मेरा हार्दिक नमस्कार !!
                                 बहुत अरसा पहले अमित जी की एक फिल्म रिलीज़ हुई थी , जिसका नाम " अंधा-कानून "  था !! उसमे   कई ऐसे घटनाक्रम दिखाए गए थे !! जो आज सचमुच होने व घटने लगे हैं !! 
                  भारत के विद्वानों द्वारा रचित इस संविधान को कोई बढ़िया बताता है तो कोई अंग्रेजों के संविधान की नक़ल मात्र बताता है !! हमारी सरकारें भी समय-समय पर इसमें संशोधन करती रहीं हैं और आगे भी संशोधन करतीं रहेंगी !!
                   लेकिन क्या हम सन्तुष्ट हैं ????? क्यों नहीं हमारी सरकार एक नयी " संविधान-कमेटी " का गठन कर देती !! ताकि देश की प्रगति में कोई रुकावट ना पैदा सके !!!!

                      अभी तो यही महसूस हो रहा है कि ये केवल अँधा ही नहीं , दोगला भी क़ानून है !! अमीर के लिए अलग तरह की जांच और फैसले होते नज़र आते हैं और गरीब के लिए कुछ और क्यों ???
                       आजकल तो हमारे नेता अपनी नेतागिरी की " नाक " न्यायालय के फैसलों में घुसाने लगे हैं…………अल्लाह ब…

" हम भूल गए अपने - सोलह संस्कार ".....!!

Image
      " याद हैं उल-जलूल बातें ……. क्यों ? ?
सनातन परम्परा के १६ संस्कार ...

सनातन अथवा हिन्दू धर्म की संस्कृति संस्कारों पर ही आधारित है। हमारे ऋषि-मुनियों ने मानव जीवन को पवित्र एवं मर्यादित बनाने के लिये संस्कारों का अविष्कार किया। धार्मिक ही नहीं वैज्ञानिक दृष्टि से भी इन संस्कारों का हमारे जीवन में विशेष महत्व है। भारतीय संस्कृति की महानता में इन संस्कारों का महती योगदान है।

प्राचीन काल में हमारा प्रत्येक कार्य संस्कार से आरम्भ होता था। उस समय संस्कारों की संख्या भी लगभग चालीस थी। जैसे-जैसे समय बदलता गया तथा व्यस्तता बढती गई तो कुछ संस्कार स्वत: विलुप्त हो गये। इस प्रकार समयानुसार संशोधित होकर संस्कारों की संख्या निर्धारित होती गई। गौतम स्मृति में चालीस प्रकार के संस्कारों का उल्लेख है। महर्षि अंगिरा ने इनका अंतर्भाव पच्चीस संस्कारों में किया। व्यास स्मृति में सोलह संस्कारों का वर्णन हुआ है। हमारे धर्मशास्त्रों में भी मुख्य रूप से सोलह संस्कारों की व्याख्या की गई है।ये निम्नानुसार हैं...

1.गर्भाधान संस्कार
2. पुंसवन संस्कार
3.सीमन्तोन्नयन संस्कार
4.जातकर्म संस्कार
5.नामकरण संस्कार
6.न…
Image
   " महामहिम जी के आकर्षक निर्णय " !!!!
अनिवार्य सैन्य प्रशिक्षण को मंजूरी30 min ago
नई दिल्ली [ एजेंसी ] राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी ने अनिवार्य सैन्य प्रशिक्षण गैर सरकारी विधेयक 2013 पर लोकसभा द्वारा विचार किए जाने की मंजूरी प्रदान कर दी है। देश में बढ़ती आतंकवादी गतिविधियों की पृष्ठभूमि में आत्मरक्षा के लिहाज से भी महत्वपूर्ण बताए गए इस विधेयक को पेश करने के लिए राष्ट्रपति की मंजूरी मिलने संबंधी जानकारी रक्षा मंत्री एके एंटनी ने दस अप्रैल को लोकसभा महासचिव को भेजी थी।

लोकसभा सचिवालय सूत्रों ने बताया कि भाजपा के वरिष्ठ सदस्य डॉ. भोला सिंह द्वारा संसद के 22 फरवरी से शुरू हुए बजट सत्र के दौरान आठ मार्च को पेश किए गए इस विधेयक की सूचना राष्ट्रपति को भेजी गयी थी जिन्होंने संविधान के अनुच्छेद 117 (3) के तहत अब इस पर सदन में विचार किए जाने की अनुशंसा कर दी है।

इस गैर सरकारी विधेयक के कारणों और उद्देश्यों में कहा गया है कि आकार, संसाधन और जनसंख्या की दृष्टि से सभी विकासशील देशों, यहां तक कि भारत से कहीं छोटे देशों में भी अनिवार्य सैन्य प्रशिक्षण का प्रावधान किया जा रहा है।

इसमें कहा गया …

" बीबी नवजोत कौर ने मार दिया-" छक्का"…!!

Image
            सरदार नवजोत सिंह सिद्धू जी को प्यार करने वाले सभी मित्रों को मेरा हार्दिक नमस्कार !! जो बात पिछले कई दिनों से सिद्धू साहिब , मर्द होने के बावजूद अपनी पार्टी के नेताओं से कह नहीं पा रहे थे , वो बात उनकी पत्नी ने इतने जोरदार ढंग से कह दी कि भाजपा के वरिष्ठ नेताओं को " नानी याद आ गयी " और  देश के जागरूक लोग एक साथ बोल पड़े कि " सिंघणी ने मारता छक्का " !!!!
           हमने भी सोचा कि इससे पहले कि सिद्धू साहिब कोई सफाई दें,उससे पहले हम भी चटखारे ले-ले कर आपके लिए एक लेख ही लिख दें !!

           भैणजी ने कहा है कि सिद्धु साहिब बेईमानी हेतु तैयार नहीं हुए तो धीरे धीरे उन्हें केन्द्रीय राजनीती से दर किनार कर दिया गया है !! हो सकता है कि वो अगला संसदीय चुनाव ना लड़ें !!  उन्होंने कई टीवी शो साईन कर लिए हैं !!
            मेरे मन में तो दोनों तरह के विचार से आ रहे हैं !! पहला तो ये कि जो मैडम जी बोल रहीं हैं वो और दूसरा ये कि कंही ये टिकट मांगने का कोई नया तरीका तो नहीं जो आक्रामक और सुरक्षित है ????
CURRENT- AFFAIRES WRITER , " 5TH PILLAR CORROUPTION .KILLER"…

" हर दंगों में, निर्दोषों की मृत्यु, का फैसला अदालतों को जल्द करना चाहिए " !!!

         हर दंगों में मरते निर्दोष ही हैं , लेकिन कारण भी   पहचाना जाना अति- आवश्यक है,न्यायालय और सरकारों को ,अन्यथा सच्चा न्याय नहीं हो पायेगा !!                                                               ढाई दशक से ज्यादा वक्त हो चुका है, जब 31 अक्टूबर 1984 को भारत की तत्कालीन प्रधानमंत्री श्रीमती इंदिरा गांधी की उनके अंगरक्षकों द्वारा हत्या किए जाने के बाद देशभर में भड़के सिख विरोधी दंगों में हजारों निर्दोष सिखों को मौत के घाट उतार दिया गया था। जख्म एक बार फिर हरे (हालांकि भरे ही कहां हैं?) हो गए हैं। इस मामले में कांग्रेस के एक और वरिष्ठ नेता सज्जन कुमार भी आरोपी हैं।


एक अनुमान के मुताबिक पूरे देश में करीब 10 हजार सिखों को बेरहमी से कत्ल कर दिया गया था, जिनमें 2500 से ज्यादा सिख तो देश की राजधानी दिल्ली में मारे गए थे। एक आंकड़े के मुताबिक अकेले दिल्ली में करीब 3000 सिख बच्चों, महिलाओं और बड़ों को मौत के घाट उतार दिया गया था।

दिल्ली में खासकर मध्यम और उच्च मध्यमवर्गीय सिख इलाकों को योजनाबद्ध तरीके से निशाना बनाया गया। राजधानी के लाजपत नगर, जंगपुरा, डिफेंस कॉलोनी, फ्रेंड्‍स कॉलोन…

" मेरी अम्मा-तेरी अम्मा और सबकी अम्मा "…!!

Image
लेती नहीं दवाई अम्मा,
जोड़े पाई-पाई अम्मा ।
दुःख थे पर्वत, राई अम्मा
हारी नहीं लड़ाई अम्मा ।
इस दुनियां में सब मैले हैं
किस दुनियां से आई अम्मा ।
दुनिया के सब रिश्ते ठंडे
गरमागर्म रजाई अम्मा ।
जब भी कोई रिश्ता उधड़े
करती है तुरपाई अम्मा ।
बाबू जी तनख़ा लाये बस
लेकिन बरक़त लाई अम्मा।
बाबूजी थे छड़ी बेंत की
माखन और मलाई अम्मा।
बाबूजी के पाँव दबा कर
सब तीरथ हो आई अम्मा।
नाम सभी हैं गुड़ से मीठे
मां जी, मैया, माई, अम्मा।
सभी साड़ियाँ छीज गई थीं
मगर नहीं कह पाई अम्मा।
अम्मा में से थोड़ी - थोड़ी
सबने रोज़ चुराई अम्मा ।
घर में चूल्हे मत बाँटो रे
देती रही दुहाई अम्मा ।
बाबूजी बीमार पड़े जब
साथ-साथ मुरझाई अम्मा ।
रोती है लेकिन छुप-छुप कर
बड़े सब्र की जाई अम्मा ।
लड़ते-लड़ते, सहते-सहते,
रह गई एक तिहाई अम्मा।
बेटी की ससुराल रहे खुश
सब ज़ेवर दे आई अम्मा।
अम्मा से घर, घर लगता है
घर में घुली, समाई अम्मा ।
बेटे की कुर्सी है ऊँची,
पर उसकी ऊँचाई अम्मा ।

दर्द बड़ा हो या छोटा हो
याद हमेशा आई अम्मा।
घर के शगुन सभी अम्मा से,
है घर की शहनाई अम्मा ।
सभी पराये हो जाते हैं,
होती नहीं पराई अम्मा ।

-----(प्रो. योगेश छिब्बर)
आइये हम सब मिलकर हिन्दू नववर्…
Image
सविंधान के महाझूठ :-
1. जो सविंधान अंग्रेजो ने ( governemnt of indian act 1935) हमें लूटने के लिए बनाया लिया था उसी को संविधान बनाने वालो ने इधर उधर फेरबदल करके पूरी तरह से अपना लिया
2.. कहा जाता है की इसको बनाने में 2 साल 11 महीने 18 दिन लगे. लेकिन हकीकत है की सभा ने सिर्फ 166 घंटे ही सविंधान बनाने के लिए काम किया था. इस हिसाब अगर 8 घंटे /दिन काम हो तो सिर्फ 20 दिन में ही सविंधान बन गया था, दुनिया का सबसे बड़ा सविंधान सिर्फ 20 दिन में बन गया है ना आश्चर्य की बात ??
3.. संविधान के अनुसार भारत धर्मनिरपेक्ष है, लेकिन भारत की परम्परा के अनुसार कोई भी देश धर्म निरपेक्ष नहीं हो सकता है बल्कि पंथ और सम्प्रदाय निरपेक्ष हो सकता है. मनु समृति में धर्म के 10 लक्षण दिए गए हैं. जो उनको अपनाये धार्मिक है भले ही वो किसी भी धर्म या जाती का हो. क्या संविधान निर्माताओ के पास इंतना भी धर्म का ज्ञान नहीं था जितना हमारे जैसे छोटे मोटे लोगों पर है ??
4.. कहा जाता है की संविधान बड़े ही दूरदर्शी और देशभक्त लोगो ने बनाया था. लेकिन अगर बनाने वाले इतने ही दूरदर्शी थे क्यों इसमें महज 62 सालो में 97 संसोधन करने प…

" भाजपा में बढ़ता व्यक्तिवाद क्या गुल खिलायेगा " ????

Image
" कोंग्रेस की बहन बनती जा रही है-हमारी भाजपा" !
संघ,निष्ठावान- कार्यकर्त्ता और संगठन मंत्री परेशान !
" रीतियाँ - नीतियाँ सब भूले भाजपा के बड़े नेता " !!
 कोई किसी की नहीं सुनता सब अपनी हाँक रहे हैं !!!
 ज़मीन से जुड्ने की बजाये नेता बड़े नेताओं की चाटुकारिता करने में लगे हैं !!!!
 कार्यकर्ताओं को तो ये अपना बंधुआ-मजदूर समझते हैं !!
 संघ से आये कार्यकर्ताओं को , बड़े नेता ओपचारिक रूप से ही अपने पास बिठाते हैं !!
 क्योंकि संघ से जुड़े कार्यकर्त्ता उन्हें कहते हैं कि हम तो उसकी सपोर्ट करेंगे जिसे पार्टी टिकेट देगी !!!!
                  इतना सुनते ही वो नेता " बिगड़ " जाता है !! क्योंकि उसे संगठन और पार्टी का निष्ठावान कार्यकर्त्ता नहीं,अपितु स्वयम का " भक्त " चाहिए होता है !! वो अगर दिन को रात कहे , तो कार्यकर्त्ता भी रात ही कहे !! ऐसे कार्यकर्ताओं को ही वो पार्टी में पदाधिकारी मनोनीत करवाता है !! यही क्रम मंडल से राष्ट्रीय स्तर तक पिछले 15 वर्षों से चल रहा है !!
              निकट भविष्य में कोई सुधार होता नज़र नहीं आता ! बड़े नेता स्वयं की तो मनमुताबिक " से…

समाजवाद और कांग्रेस के बीच झूलता हमारा जनतंत्र... ब्लॉग बुलेटिन !!!

Image
                " हमारे प्रिय मित्र और प्रसिद्ध लेखक श्री देव झा जी की रचना आपके लिए प्रस्तुत है " !! 


समाजवाद और कांग्रेस के बीच झूलता हमारा जनतंत्र... ब्लॉग बुलेटिन

सभी मित्रों को देव बाबा की राम राम। कल भारतीय जनता पार्टी तैतीस वर्ष की हो गयी और अहमदाबाद में खूब गरजी। मोदी बोले, राजनाथ बोले और सभी खुल कर सरकार विरोधी स्वर से गरजते हुए गुजरात के मॉडल को देश के विकास के लिए प्रमाणिक मॉडल बनाने की वकालत भी करने लगे। एक दिन पहले राहुल गाँधी सी-आई-आई में अपनी बात कह चुके थे, उनकी स्वयं की योग्यता कितनी है यह सम्पूर्ण देश को पता है लेकिन मीडिया और जनता में कितना भ्रम है की उनकी भी प्रधानमंत्री पद के लिए दावेदारी की बात लोग करते हैं आखिर ऐसा क्यों होता है की हमारा देश हर बार कांग्रेस में ही अपना नेतृत्व खोजता है। क्या हम एक अपरिपक्व लोक तंत्र हैं या फिर हम केवल एक भीड़ हैं। आखिर ऐसा क्या है जो हर बार कांग्रेस देश को लूट लेती है और फिर भी सत्ता में आ जाती है। आइये एक विश्लेषण और आंकड़ो के आधार पर यह समझने की कोशिश करते हैं की हमारे यहाँ कांग्रेसी राज समाप्त क्यों नहीं होता। बिखरे…