क्या ऐसी चर्चाओं से कोई समस्या का हल निकल सकता है ?- पीताम्बर दत्त शर्मा (लेखक-विश्लेषक) मो.न. - +9414657511.

  परम विदुषी बहन मृणाल-पांडे जी ने हाल ही एक लेख में वेदों का उदाहरण देते हुए लिखा कि हर समस्या का समाधान चर्चा करने से ही हो सकता है ! मैं भी इस वाक्य से शब्दशः सहमत हूँ , लेकिन चर्चा किस विषय पर कौन करेगा और किन नियमों के तहत तहत होनी चाहिए , ये नियम भी तो वेदों ने बताये हैं ! उनका ज़िक्र करना शायद वो भूल गयीं , या फिर किसी विशेष "विचारधारा"के प्रति अपना पक्ष दिखाने के चक्कर में उन्होंने चर्चा की शर्तों को बताना उचित नहीं समझा ! 
                          प्रश्न ये भी पैदा होता है कि क्या हर समस्या केवल चर्चा कर देने से समाप्त भी हो जाती है क्या ?जैसे J.N.U.में राष्ट्र-द्रोह के मामले में हुआ ! पक्ष-विपक्ष दोनों ने इस मुद्दे को अन्य सहयोगी मुद्दों में ऐसा उलझाया कि असल मुद्दा तो आज कहीं दिखाई नहीं पड रहा है लेकिन दुसरे कई ऐसे मुद्दे और ज्यादा उभर कर सामने आ गए , जिनसे देश और ज्यादा आहत हो गया है !कोई महिषासुर के नाम ले देने से दुखी हो गया तो कोई दुर्गा को "कालगर्ल" कहने से !और तो और तब तो हद्द ही हो गयी जब बहन मायावती ने एक जुमला बोले जाने पर उनका शीश ही मांग लिया !
                               पिछली सरकार के बड़े अफसर और मंत्री ना जाने क्या बयान दे रहे हैं कि विश्वास ही नहीं होता कि ऐसा भी हो सकता है ? क्या कॉंग्रेस इतने बड़े षड्यंत्र भी रच सकती है कि वो 2004 से लेकर आज तक  मोदी जी निशाना बनाने हेतु भारत के हिन्दुओं और देश तक को दांव पर लगा सकती है ?अगर ये सत्य है तो मोदी जी को भारत में आपात-काल लगाकर एक बार पूरे देश को "खंगाल"लेना चाहिए कि जितने भी देश के अंदर दुश्मन किसी भी वेश में रह रहे हैं उनको छान कर बाहर निकला जा सके और उलटे  सके !
                             विपक्षी नेता तो पता नहीं किस लालच में आकर कोंग्रस के साथ गलबहियां डाले हुए है ! शायद इंदिरा जी की मार वो भूल गए हैं !भगवन ही उनको होश में ला सकता है !मेरा तो ये मानना है कि संसद के नियमों को सख्ती से लागू करके हर उस ख़ास विषय का "हल"ढूंढकर ही उसे समापत किया जाए और फिर किसी अन्य मुद्दे पर बात शुरू की जाए ! अन्यथा देश का भला नहीं हो सकता !" 5TH PILLAR CORRUPTION KILLER " THE BLOG .

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पीताम्बर दत्त शर्मा,
हेल्प-लाईन-बिग-बाज़ार,
R.C.P. रोड, सूरतगढ़ !


Comments

  1. आपकी इस प्रविष्टि् की चर्चा कल रविवार (28-02-2016) को "प्रवर बन्धु नमस्ते! बनाओ मन को कोमल" (चर्चा अंक-2266) पर भी होगी।
    --
    सूचना देने का उद्देश्य है कि यदि किसी रचनाकार की प्रविष्टि का लिंक किसी स्थान पर लगाया जाये तो उसकी सूचना देना व्यवस्थापक का नैतिक कर्तव्य होता है।
    --
    हार्दिक शुभकामनाओं के साथ
    सादर...!
    डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक'

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  2. सार्थक व प्रशंसनीय रचना...
    मेरे ब्लॉग की नई पोस्ट पर आपका स्वागत है।

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