Tuesday, August 2, 2016

"कैसे कैसे काम करने लग गए हैं हमारे राजनीतिज्ञ "?- पीताम्बर दत्त शर्मा (लेखक-विश्लेषक) मो.न. +9414657511

परिवर्तन इन्सान की ही नहीं बल्कि प्रकृति के भी स्वभाव में है !जो अपने अंदर समय एवं परस्थितियों के अनुसार परिवर्तन नहीं ला पाता वह एक ठहरे हुए बदबूदार तालाब की भाँती है !जिस प्रकार ज़मीन पर पड़ा हुआ पत्थर किसी को ठोकर लगने के काम तो आ सकता है ,लेकिन कोई भला नहीं कर सकता ! उसी  प्रकार मनुष्य को भी गतिमान और परिवर्तन शील होना आवश्यक है !लेकिन अगर यही परिवर्तन गलत दिशा में होने लगे तो परिणाम भयंकर रूप ले सकते हैं !हमारे राजनेता , जिनके आचरण को देख समझ कर देशवासी अपने विचार एवं भावनाएं निर्धारित कर अपने जीवन के लक्ष्य को प्राप्त करते हैं !उनको तो हर कदम सोच समझ कर ही उठाना चाहिए !उनको अपनी वाणी पर भी संयम रखना आवश्यक है !
                           मोदी जी की नयी सरकार बनी तो जनता की अपेक्षाएं भी आसमान छूने लगीं !अब जब दो वर्ष इस सरकार को हो गए हैं तो विपक्षी दल तो मौके की फ़िराक में रहते हैं क्योंकि उनका  काम है , लेकिन भारत की जनता भी अब मन ही मन मोदी सरकार के मंत्रियों,राज्यसरकारों के कामों को तोलने लगी है !भाजपा के  पैतृक संगठन RSS के क्रियाकलापों को भी देखा और समझा जा रहा है !हर भारतवासी अपनी बुद्धि अनुसार अपने नेताओं और दलों को तोल रहा है और आगामी चुनावों हेतु अपना मन बना रहा है !!
                            एक तरफ हमारी विदेश मंत्री सुषमा  स्वराज जी हैं और दूसरी और हमारे खाद्य और कृषि मंत्री हैं !  विदेश  मंत्री श्रीमती सुषमा स्वराज बेहद संवेदनशील राजनेता हैं। पिछले दो वर्ष में उन्होंने विदेशों में संकटग्रस्त स्थितियों में फंसे अनेक भारतीयों की सुरक्षा की है। भारतीय नागरिकों को जिस तत्परता और राजनीतिक समझबूझ से उन्होंने मदद पहुंचाई है, उसकी जितनी सराहना की जाए कम है। सुषमा स्वराज को भविष्य में अपने इन राहत कार्यों के लिए याद किया जाएगा। लेकिन कृषिऔर राज्य 

मंत्री जनता को कम भावों में सब्ज़ियां ,फल और अन्य

 खाद्य पदार्थ उपलब्ध नहीं करवा पा रहे हैं ऊपर से तुर्रा 

ये कि संसद में चर्चा के दौरान हमारे वित् मंत्री भी भाव 

कम करवाने का प्रयास करने का आश्वासन भी नहीं देते 

!धिक्कार है इन पर !!

                                   मोदी जी ने अपने 

मन्त्रिमण्डल में कई बदलाव तो किये हैं लेकिन ये 

पर्याप्त नहीं हैं !विपक्ष के नेता भी अनर्गल ब्यान और  

भरी राजनीतिक फायदे वाली यात्राएं या रोड शो निकाल 

हैं !या फिर गन्दी भाषा का उपयोग करके गलत 

बयानबाज़ी करते फिरते हैं !जनहित में आमरण 

अनशन नहीं बैठते क्यों ??बस अपने अपने चमचों 

से अपनी प्रशंसा सुनकर ही मंत्रमुग्ध हो जाते हैं !जब 

हार 

जाते हैं तो बड़ी ही बेशर्मी से कहते हैं कि हमें जनता का 

फैसला मंज़ूर है , हार-जीत तो लगी रहती है आदि आदि 

! सभी सांसदों,विधायकों और संगठन के लोगों को आम 

जनता और अपने कार्यकर्ताओं की भावनाओं की कद्र 

करनी चाहिए !मौका मिला है तो कुछ ऐसा करके जाएँ 

कि इतिहास में आपका नाम स्वर्ण अक्षरों में लिखा 

जाए , ना की आजमखान और ओवेसी की तरह कि मन 

से बददुआएँ ही निकलें !मेरा तो चेतना काम है बाकि 

आपकी मर्ज़ी !

 जय - हिन्द !! जय भारत ! वन्दे मातरम !
प्रिय मित्रो !सादर नमस्कार !कुशलता के आदान-प्रदान पश्चात जिन भी मित्रों का आज जन्म-दिन या विवाह दिवस है , उनको मेरी तरफ से हार्दिक बधाई और शुभ कामनाएं !आप अपने ब्लॉग "फिफ्थ पिल्लर करप्शन किल्लर"को बहुत पसंद कर रहे हैं,रोज़ाना इसमें प्रकाशित लेखों को पढ़ कर शेयर करते हैं ,उन पर अपने अनमोल कॉमेंट्स भी देते हैं !उस सब के लिए भी आपका हार्दिक आभार प्रस्तुत करता हूँ !इस ब्लॉग का लिंक ये है - www.pitamberduttsharma.blogspot.com 
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कृपया इसी तरह इस ब्लॉग को मेरे गूगल+,पेज,विभिन्न ग्रुप ,ट्वीटर और फेस बुक पर पढ़ते रहें , शेयर और कॉमेंट्स भी करते रहें क्योंकि ये ही मेरे लिए "ऑक्सीजन"का काम करती है ! धन्यवाद !आपका अपना - पीतांबर दत्त शर्मा !




                     
                       

1 comment:

  1. आपकी इस प्रविष्टि् के लिंक की चर्चा कल शुक्रवार (05-08-2016) को "बिखरे मोती" (चर्चा अंक-2425) पर भी होगी।
    --
    हार्दिक शुभकामनाओं के साथ
    सादर...!
    डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक'

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