"सकरात्मक सोच वाला बनना चाहता हूँ लेकिन "...... ???

रिश्तेदार,दोस्त,पडोसी,अफसर,पोलिस,न्याय-व्यवस्था वाले,शिक्षक,सन्त,महिलाएं,पुरुष और  नेता गन इतने "तेज़"हो गए हैं कि मैं चाहते हुए भी सकरात्मक सोच वाला बन नहीं पा रहा हूँ ! सच मानिये मित्रो ! मैं हर सुबह को सूर्य भगवान से हाथ जोड़ कर प्रार्थना करता हूँ कि हे साक्षात देवता ! सत्य के प्रतीक दिनकर जी ! कृपा करके आज से मुझे उन व्यक्तियों से ही मिलवाइए जो विश्वास पात्र हों !ताकि मैं "सकरात्मक"सोच के साथ अपना जीवन व्यतीत कर सकूं !
                                लेकिन कुछ ना कुछ ऐसा घट ही जाता है जिसके कारण से मैं नाकारात्मक सोच वाला फिर से हो जाता हूँ !शायद मेरे मन-मस्तिष्क में ही कुछ कमी होगी ऐसा सोच कर मैं हर रात्रि को सो जाता हूँ !लेकिन जैसे ही मैं प्रातः समाचार पत्र पढ़ना शुरू करता हूँ , वैसे ही आभास होने लगता है कि "ये दुनिया,ये महफ़िल मेरे काम की नहीं ....मेरे काम की नहीं !!!अब मनुष्य एक सामाजिक प्राणी है मित्रो ! अकेला तो जीवन व्यतीत कर नहीं सकता ना !इसलिए चाहे कोई जैसा भी है उसे रहना तो इसी व्यवस्था में है ना !ना जाने कितने आधुनिक सोच वाले  पढ़े-लिखे विशेषज्ञ आदि आये और चले गए , लेकिन हम इतने बदलावों के बाद भी नहीं बदले !!शोले वाले असरानी जेलर साहिब की तरह !
                       आजकल क्या लेखक क्या कवि , क्या अध्यापक क्या इतिहासकार क्या शिक्षक क्या सन्त और पत्रकार , जिनपर समाज को सुधरने की एक जिम्मेदारी होती है , जिन्होंने गलत और सही बताना होता है !वो ही सभी के सभी किसी ना किसी राजनितिक दल से जुड़ कर ग़ुड गोबर किये जा रहे हैं !! कोई करे भी तो क्या ??आप ही बताइये मित्रो कि मैं किधर जाऊं ?????
                 जय - हिन्द !! जय भारत ! वन्दे मातरम !
प्रिय मित्रो !सादर नमस्कार !कुशलता के आदान-प्रदान पश्चात जिन भी मित्रों का आज जन्म-दिन या विवाह दिवस है , उनको मेरी तरफ से हार्दिक बधाई और शुभ कामनाएं !आप अपने ब्लॉग "फिफ्थ पिल्लर करप्शन किल्लर"को बहुत पसंद कर रहे हैं,रोज़ाना इसमें प्रकाशित लेखों को पढ़ कर शेयर करते हैं ,उन पर अपने अनमोल कॉमेंट्स भी देते हैं !उस सब के लिए भी आपका हार्दिक आभार प्रस्तुत करता हूँ !इस ब्लॉग का लिंक ये है - www.pitamberduttsharma.blogspot.com 
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