Monday, March 11, 2013

" क्या देश की निगह-बान आँखें , मुंद रही हैं " ...???

 प्यारे मित्रो , सादर नमस्कार !!
      " उस मुल्क की सरहद को कोई छू नहीं सकता , जिस मुल्क की सरहद की निगहबान हैं आँखें " !!
                     कितना सही कहा  था किसी शायर ने  !! हमारी सुरक्षा एजेंसियाँ , देश के अन्दर और बाहर नित असफल तो हो ही रहीं थीं !! लेकिन हमारी सरकारें भी फेल हो रहीं हैं !! जिनके कई कारण हैं !! जैसे वोट-बैंक , नेताओं का येन-केन-प्रकरेण सत्ता में बने रहने की कवायद और कार्यपालिका में व्याप्त भ्रष्टाचार होना तथा बाकी लोकतंत्र के स्तंभों का उसमे भागीदार होना देश के लिए घातक सिद्ध हो रहा है !!
                 देश मरणासन पर पंहुच चुका है !! आवश्यकता है निस्वार्थ भाव से काम करनेऔर भ्रष्टाचार से लड़ने वाले बहादुर देशभक्तों की …!!
  कोई  है.........?????
 आओ     ……………… करें नवनिर्माण……. !!
 बनायें  इण्डिया को फिरसे हमारा भारत जो सोने की चिड़िया था ………!!!
                          क्यों मित्रो !! आपका क्या कहना है ,इस विषय पर...??
प्रिय मित्रो, ! कृपया आप मेरा ये ब्लाग " 5th pillar corrouption killer " रोजाना पढ़ें , इसे अपने अपने मित्रों संग बाँटें , इसे ज्वाइन करें तथा इसपर अपने अनमोल कोमेन्ट भी लिख्खें !! ताकि हमें होसला मिलता रहे ! इसका लिंक है ये :-www.pitamberduttsharma.blogspot.com.

आपका अपना.....पीताम्बर दत्त शर्मा, हेल्प-लाईन-बिग-बाज़ार , आर.सी.पी.रोड , सूरतगढ़ । फोन नंबर - 01509-222768,मोबाईल: 9414657511

Friday, March 8, 2013

- क्या ये सच है कि सुग्रीव की राज्य हड़पने की साजिश के मास्टर माइंड आप है? ??????



भगवान राम जब अयोध्या लौट कर आये थे,
यदि उस समय
हमारी मिडिया रही होती तो प्रेस
कांफ्रेंस में कैसे कैसे सवाल करती.....

-आपके टीम के श्री हनुमान को लंका सन्देश
देने भेजा था पर उन्होंने वहाँ आग
लगा दी.... क्या आपकी टीम में अंदरूनी तौर
पर वैचारिक मतभेद है?

- क्या हनुमान के ऊपर अशोक
वाटिका उजाड़ने के आरोप में वन विभाग
द्वारा मुकदमा नहीं चलाया जाना चाहिए?

- आपके सहयोगी श्री सुग्रीव पर अपने भाई
का राज्य हड़पने का आरोप है|....क्या आपने
इसकी जांच करवाई?

- क्या ये सच है कि सुग्रीव की राज्य हड़पने
की साजिश के मास्टर माइंड आप है?

- आप चौदह साल तक वनवास में रहे...
आपको अपने खर्चे चलाने के लिए फंड कहाँ से
मिले?

- क्या आपने उस फंड का ऑडिट करवाया है?

- आपने सिर्फ रावण पर हमला क्यों किया,
जबकि राक्षस और भी थे? क्या ये
लंका की डेमोक्रेसी को अस्थिर करने
की साजिश थी?

- क्या ये सच नहीं है कि रावण को परेशान
करने के मकसद से आपने उनके परिवार के
निर्दोष लोगो जैसे कुम्भकरण पर
हमला किया?

- क्या आपकी टीम के हनुमान
द्वारा संजीवनी बूटी की जगह पूरा पहाड
उखाड़ लेना सरकारी जमीन के साथ छेड़छाड़
नहीं?

- क्या ये सच नहीं कि आपने हमले से पहले
समुद्र पर पुल बनाने का ठेका अपने
करीबी नल और नील को नहीं दिया?

- आपने पुल बनाने के लिए
छोटी छोटी गिलहरियों से काम
करवाया..... क्या इसके लिए आप पर बाल
श्रम कानून के तहत
मुकदमा नहीं चलाया जाना चाहिए?

- आपने बिना किसी पद पर रहते हुए युद्ध के
समय इन्द्र से सहायता प्राप्त की और
उनका रथ लेकर रावण पर हमला किया..
क्या आप इन्द्र की टीम ए है?

- इस सहायता के बदले में क्या आपने इन्द्र
को ये
वादा नहीं किया कि अयोध्या का राजा बनने
के बाद आप उन्हें अयोध्या के आस पास
की जमीन दे देंगे?

- आप युद्ध में अयोध्या से रथ न मंगवा कर
इन्द्र से रथ लिया.... क्या ये इन्द्र
की कंपनी को लाभ पहुंचाने के उद्देश्य से
किया गया?
  क्यों मित्रो !! आपका क्या कहना है ,इस विषय पर...??
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Thursday, March 7, 2013

" काश्मीरी पण्डितों का क्यों आवश्यक है पुनर्वास काश्मीर में " …।????

 " भारत के सभी ब्राह्मणों को मेरा हार्दिक प्रणाम "!! क्या हम  अपने भाइयों को अपने पास नहीं ठहरा सकते भारत वासियों ???
  " काश्मीरी पण्डितों का क्यों आवश्यक है पुनर्वास काश्मीर में " …।????
                                    सरकार ने माना कि कश्मीर में कश्मीरी पंडितों को एक धमकीभरा पत्र मिला है जिसमें उन्हें एक सप्ताह के अंदर घाटी से चले जाने के लिए कहा गया है।

गृह राज्यमंत्री आरपीएन सिंह ने राज्यसभा को एक प्रश्न के लिखित जवाब में यह जानकारी दी। उन्होंने हालांकि कहा कि इस बात के कोई सबूत नहीं हैं कि पत्र उग्रवादी संगठनों की ओर से भेजा गया है।

सिंह ने बताया, जम्मू-कश्मीर सरकार से मिली सूचना के अनुसार, बडगाम के पंडित कॉलोनी शेखपोरा में डाक से धमकीभरा एक पत्र मिला है, जिसमें कश्मीरी पंडितों को एक सप्ताह के अंदर घाटी से चले जाने को कहा गया है। डाक में इस बात का कोई सबूत नहीं है कि यह पत्र उग्रवादी संगठनों की ओर से भेजा गया है। 

उन्होंने बताया कि इस सिलसिले में एक प्राथमिकी दर्ज की गई है। घाटी में और प्रवासियों की कॉलोनियों के आसपास सुरक्षा की पर्याप्त व्यवस्था की गई है, ताकि कश्मीरी पंडितों की सुरक्षा सुनिश्चित हो सके। उन्होंने बताया कि घाटी में करीब 4000 कश्मीरी पंडित हैं।

दो दशक पहले आतंकवाद के चलते घाटी से 350,000 से अधिक कश्मीरी पंडित पलायन कर गए थे। 90 के दशक में कट्टरपंथी गुटों ने उन्हें सुनियोजित योजना के तहत अपने की जमीन से बाहर खदेड़ दिया था। घाटी से पलायन करने वाले कश्मीरी पंडित जम्मू और देश के अन्य इलाकों में विभिन्न शिविरों में रहते हैं।

दुर्भाग्यवश कश्मीरी पंडितों पर जब अत्याचार हो रहे थे तब सारे मानवाधिकार संघटन चुप्पी साधे बैठे रहे। मीडिया ने भी उनके साथ हो रही नाइंसाफ़ी की तरफ़ आंख मूंद ली।

पनून कश्मीर जैसे संगठन कश्मीरी पंडितों के पुनर्वास लिये अलग गृहस्थान (मातृभूमि) की मांग कर रहे है।

                    GOOD LUCK AND GOOD WISHES !! प्रिय मित्रो, ! कृपया आप मेरा ये ब्लाग " 5th pillar corrouption killer " रोजाना पढ़ें , इसे अपने अपने मित्रों संग बाँटें , इसे ज्वाइन करें तथा इसपर अपने अनमोल कोमेन्ट भी लिख्खें !! ताकि हमें होसला मिलता रहे ! इसका लिंक है ये :-www.pitamberduttsharma.blogspot.com.

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Wednesday, March 6, 2013

cut - CUT ........शार्ट कट..............!!



शार्ट कट से भी शार्टकट, प्रारंभ से आदमी तलाश करता रहा है ,चलने में -बोलने में, लिखने में , और जिन खोजा तिन्ह पाइया ,उन्हे रास्ता मिला भी । जब आर से काम चलता है तो ए आर इ क्या मतलब। जब यू से काम चल सकता है तो वाय ओ यू का क्या मतलब । और इसी तरह पिताजी पापा होते हुये डैडी से डैड हो गये । शार्टकट रास्ते में कोई टेडा मेडा रास्ता नहीं देखता और शार्टकट भाषा में कोई शुध्दता अशुध्दता नहीं देखता। और वैसे भी शुध्द अंग्रेजी कोई बोल नहीं सकता और शुध्द हिन्दी कोई समझ नहीं सकता तो रोमन ही सही ।

अभी शासकीय कार्यालयों में शार्टकट का प्रयोग शुरु नहीं हुआ है। इ मेल से भी डाक नहीं भेजी जाती फैक्स से भेज कर फिर कन्फर्मेशन कापी डाक से भेजी जाती है, वाकायदा ड्राफट तैयार होता है वह एप्रूव होता है, उंची कुर्सी वाला नीची कुर्सी वाले का ड्राफट एप्रूव करता है, वैसा का वैसा ही एप्रूव कर दिया तो मतलब ही नहीं, कुछ न कुछ गलती तो निकालना आवश्यक है ही। अच्छा एक मजेदार बात शासकीय शब्द कुल 100-150 है उन्ही से हजारों पत्र, परिपत्र, अर्धशासकीय पत्र, तैयार होते रहते है । एक भी विजातीय शब्द इसमें आजाये तो बात अखरनेवाली हो जाती है। ब्लाग पढता रहता हूं तो कुछ शब्द सामर्थ्य बढ गया है,मैने एक दिन एक शब्द का पर्याय बाची शब्द लिख दिया तो मेरी पेशी हो गई देखिये मिस्टर यह कार्यालय है कोई साहित्यिक संगठन या सभा नहीं है, शब्द वही प्रयोग करो जो शासकीय हो। और पता भी चलना चाहिये कि पत्र सरकारी है। अच्छा देखिये मुझे व् और ब का फर्क आज भी समझ नहीं आता लेकिन हजारों ड्राफ्ट ,एप्रूव किये

भैया हम तो गांव के है वही बोली वही लहजा , यध्यपि बच्चों को पसंद नहीं है । मेरी खडी बोली इन्हें रास नहीं आती । हालांकि कुछ कहते नहीं मगर समझ में आही जाता है, इशारों को अगर समझो । और तो और ये भी बच्चों से कहती ही है बेटा तेरे पापा तो शुरु से ही गवांरों जैसा बोलते है भले आदमियों के बीच बिठादो तो नाक कट जाती है। वाह एक न शुद दो शुद .

एक दिन पुत्र रत्न ने कह ही दिया आपकी बोली और लहजे पर मेरे मित्र हंसते है उसी दिन मैने तय किया कि बोलूंगा तो शुध्द हिन्दी ही बोलूँगा नहीं तो नहीं बोलूँगा । की प्रतिज्ञा । पुराने जमाने में लोग प्रतिज्ञा करते ही रहते थे उस समय जब हाथ उठा प्रतिज्ञा कर करते थे तब वादल गरजने लगते थे ,हवा की रफतार तेज हो जाती थी ,विजलियां कडकने लगती थी ,मगर ऐसा कुछ नहीं हुआ ।

एक दिन घर में मित्र मंडली जमी थी ,मैने पुत्र से जाकर कहा भैया मेरे व्दिचक्र बाहन के पृष्ठचंक्र से पवन प्रसारित होगया है शीघ्रतिशीध्र वायु प्रविष्ठ करवा ला ताकि मुझे कार्यालय प्रस्थान में अत्यधिक विलम्ब न हो। मै तो कह कमरे से चला आया किन्तु मैने सुनली- पुत्र का एक मित्र कह रहा था क्यों रे तेरे पापा का एकाध पेंच ढीला तो नहीं होगया ।

मेरे पडौस में एक बहिनजी रहती है ठेठ देहाती ,प्रायमरी स्कूल में बहिनजी की नौकरी लग गई तो परिवार यहां आगया। एक दिन बहिन जी के स्कूल की अध्यापिकाऐं उनके घर आई तो तो बहिन जी बोलने का लहजा, शब्द सब बदले , बोली बिल्कुल शहरी हो गई, बहिन जी के छोटे भाई बहिन भोचक्के होकर दीदी को देखने लगे । आखिर सबसे छोटी से न रहा गया तो बोल ही उठी काये री जीजी आज तोय का हो गओ आज तू कैसे बोल रई है

मजा तो अब है रोमन भी और शार्टकट भी
लिखा_ चाचा जी अजमेर गया है
पढा _ चाचाजी आज मर गया है

Tuesday, March 5, 2013

***भारत को कब तक इंडिया कहेंगे ?***



जो भारत को इंडिया कहते है वे मात्र लॉर्ड मैकाले के दिये वचनो का पालन कर रहे है इंडिया बोलने से पहले विचारे : क्या अर्थ है इंडिया का ? .. कुछ नहीं ... हर भारतीय के नाम का अर्थ है .... हमारे यहाँ बिना भावार्थ के नाम रखने की असांस्कृतिक परंपरा नहीं है।

अंग्रेज़ो को भारत नाम बोलने मे परेशानी होती थी -अंग्रेज़ 'इंडियन' उस व्यक्ति को कहते है जो उनके हिसाब से जाहिल माना जाता है, अंग्रेज़ इंडियन उस व्यक्ति को कहते थे जो पाषाण कालीन जीवन जीता है Remember the old British notorious signboard 'Dogs and Indians not allowed'. लेकिन हमारे भारत नाम का अर्थ है
भारत : भा = प्रकाश + रत = लीन ( हमेशा प्रकाश, ज्ञान मे लीन )
इतना महान अर्थ से परिपूर्ण देश का नाम है !

(लॉर्ड मैकाले जिसका पूरा नाम 'थॉमस बैबिंगटन मैकाले' था ! मैकाले 1834 ई. में गवर्नर-जनरल की एक्जीक्यूटिव कौंसिल का पहला क़ानून सदस्य नियुक्त होकर भारत आया।)

*******कैसे पड़ा भारत का नाम ? *********

इस देश का नाम प्रथम तीर्थंकर दार्शनिक राजा भगवान ऋषभदेव के पुत्र भरत के नाम पर भारतवर्ष पड़ा। महाभारत (आदि पर्व-2-96) का कहना है कि इस देश का नाम भारतवर्ष उस भरत के नाम पर पड़ा जो दुष्यन्त और शकुन्तला का पुत्र कुरूवंशी राजा था। पर इसके अतिरिक्त जिस भी पुराण में भारतवर्ष का विवरण है वहां इसे ऋषभ पुत्र भरत के नाम पर ही पड़ा बताया गया है।

जहाँ "भारत" अपने स्वाभिमान का प्रतीक है वहीँ "India" आज भी अंग्रेजों की गुलामी की निशानी | इसलिए मेरा मानना है कि हमें अपने देश को अपनी संस्कृति से जोड़कर देखना चाहिए क्यूंकि यह महान है |

यह दुखद है कि स्वतंत्रता प्राप्ति के बाद यहाँ अनेक प्रांतों और शहरों के नाम तो बदले, किंतु देश का नाम यथावत विकृत बना हुआ है। समय आ गया है कि जिन लोगों ने ‘त्रिवेन्द्रम’ को तिरुअनंतपुरम्, ‘मद्रास’ को तमिलनाडु, ‘बोंबे’ को मुंबई, ‘कैलकटा’ को कोलकाता या ‘बैंगलोर’ को बंगलूरू, ‘उड़ीसा’ को ओडिसा तथा ‘वेस्ट बंगाल’ को पश्चिमबंग आदि पुनर्नामांकित करना जरूरी समझा – उन सब को मिल-जुल कर अब ‘इंडिया’ शब्द को विस्थापित कर भारतवर्ष कर देना चाहिए। क्योंकि यह वह शब्द है जो हमें पददलित करने और दास बनाने वाली संस्था ने हम पर थोपा था।

जय हिन्द, जय भारत !!
भारत हमको जान से प्यारा है.....!!
भा + रत = भारत
(संस्कृति का सन्देश, स्वाभिमान का प्रतीक)

भारत उस देश का नाम है, जो अपने में एक विशिष्ट आध्यात्मिक संस्कृति को संजोए हुए है।
भारत : भा= 'प्रकाश और ज्ञान' + रत= 'लीन'
अर्थात जो देश प्रकाश, ज्ञान और आनंद की साधना में संलग्न रहा है, उसी का नाम है भारत।

भारत विश्वगुरु रहा है उसी ने बहुत पहले यह उदघोष किया -

॥ असतो माँ सदगमय, तमसो माँ ज्योतिर्गमय, मृत्योर्मा अमृतं गमय ॥
अर्थात असत्य से सत्य की ओर, अंधकार से प्रकाश की ओर और मृत्यु से अमरत्व की ओर बढ़ना।

"अंग्रेजो ने भारत को इंडिया नाम दिया"
इस शब्द में वह शक्ति नहीं है, जो भारत के उपरोक्त गुणों को ध्वनित और व्यंजित कर सके, भारत के इंडिया शब्द का प्रयोग स्पष्ट करता है की भले ही अंग्रेजो की गुलामी से हम स्वतंत्र हो गए हैं, पर मानसिक दासता से अभी भी मुक्त नहीं हो सके हैं।

हमें इंडिया और अंग्रेजी, दोनों से ही अपने को मुक्त करना है तथा भारत, भारतीय संस्कृति और अपनी मातृभाषा से जुड़ना है, तभी हम सच्चे अर्थों में भारतीय कहलाने के अधिकारी होंगे।


# ::: इंडिया बनाम भारत ::: #

* इंडिया Competition पर चलता है और भारत Cooperation पर।
* इंडिया की theory है Survival of the Fittest और भारत की theory है Survival of all including the Weakest.
* इंडिया में ज्ञान डिग्री से मिलता है और भारत में ज्ञान सेवा से मिलता है।
* इंडिया में Nuclear Family चलती है और भारत में Joint Family.
* इंडिया में सिद्धांत है "स्व हिताय स्व सुखाय" और भारत में सिद्धांत है "बहुजन हिताय बहुजन सुखाय"।
* इंडिया में "I " "मैं" पर चलता है और भारत में "हम" पर चलता है।
* इंडिया मतलब इंडियन शहरों का समूह और भारत मतलब भारतीय गावों का समूह।
* इंडिया/इंडियन मतलब अंग्रेजी संस्कृति को बढ़ावा देना तथा भारत और भारतीय संस्कृति को भूलना।
* इंडिया/इंडियन मतलब विलासिता और शक्तिशाली लोग हैं जो भारत और भारतीयों पर राज करें।
* इंडियन सरकार ने भारतीय लोगों से जाति और धर्म क्यों पूछते हैं क्योंकि वे भारत/भारतीय लोगों पर शासन "फूट डालो और नियम" का पालन करते हैं।
* इंडियन मतलब साक्षर है और भारतीय मतलब शिक्षाविद् है।
* इंडियन अपने बच्चों के लिए सेक्स शिक्षा और भारतीय अपने बच्चों के लिए योग शिक्षा मांगते हैं।


भारत नाम हमारे देश में स्वीकार किया जाता है, विभिन्न सरकारी और सामाजिक क्षेत्रों, लेकिन अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर क्यूँ नहीं ?
जो निम्न उदाहरण से स्पष्ट है: -

1. हमारा राष्ट्रीय गान:
जन गण मन अधिनायक जय हे भारत भाग्य विधाता ( ना की इंडिया भाग्य विधाता)

2. हमारा राष्ट्रीय प्रतिज्ञा: पहली पंक्ति है...!!
"भारत मेरा देश है" (ना की इंडिया मेरा देश है)

3. सर्वोच्च नागरिक सम्मान, जो हमारे देश में दिया जाता है: "भारत रत्न" है (ना की 'इंडिया रत्न')

4. Indian penal code के लिए शब्द "भारतीय दंड संविधान" प्रयोग किया जाता है।

5. 'दूरदर्शन राष्ट्रीय नेटवर्क' पर दैनिक हिन्दी समाचार में हमेशा शब्द इंडिया के लिए भारत का उपयोग करता है। उदाहरणार्थ: 'इंडिया और इंग्लैंड" के बीच के क्रिकेट मैच को "भारत और इंग्लैंड" के बीच।

6. हम कहते हैं "भारत माता की जय" (ना की इंडिया माता की जय)


"Incredible India" का मतलब "अविश्वासी इंडिया" होता है, तभी क्रिकेट के मैदान पर लिखा होता है, जिसे हमारे महान खिलाडी अपने जूते भरे पैरो से रोंदते है और इंडिया की जनता ताली बजाकर खुश होती है और भारत की जनता रोती है ? क्या हम अपने माता पिता का नाम किसी खेल के मैदान या सड़क पर लिख सकते है ?

इंग्लिश सीखो, लिखो, बोलो लेकिन सोचो....

"आंसू टपक रहे हैं, भारत के हर बाग से,
शहीदों की रूहें लिपट के रोती हैं, हर खासो आम से,
अपनों ने बुना था हमें, भारत के नाम से,
फिर भी यहाँ जिंदा है हम, गैरों के दिए हुए नाम इंडिया से"

क्या सोच रहे है आप ? बचाइए स्वाभिमान का प्रतीक अपने देश का नाम "भारत"

"हमारे देश का नाम हिंदी में भारत है, इंग्लिश में भी 'BHARAT' ही होगा ना की INDIA."

अधिक से अधिक शेयर करो और "इंडिया छोड़ो भारत बोलो"....!! *


आर्यावर्त भरतखण्ड संस्कृति


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                                    * * प्रेस - विज्ञप्ति * *
                                   इंटरनेट- सोशियल मीडिया ब्लॉग-प्रेस " 5th pillar corruption killer " की तरफ से सूरतगढ़ विधानसभा क्षेत्र में जो " योग्य एवं लोकप्रिय विधायक चुनाव हेतु सर्वे और मतदाता जगुरुकता अभियान चलाया जा रहा है,उसकी टीम के सदस्य आज सूरतगढ़ विधानसभा के ग्रामीण क्षेत्रों में गए ,गाँव मानकसर ,अमरपुरा,जानकीदास्वाला , सील्वानी,जैतसर                                    , हरिसिघवाला , लडाना और पिपेरण के निवासियों ने अभूतपूर्व स्वागत-सत्कार किया ! सबने " 5th pillar corruption killer टीम द्वारा कराये जा रहे इस सर्वे और मतदाता जागुरुक्ता अभियान को एक " पुन्य-कार्य " बताया ! कई लोगों ने तो ये भी कहा की ये काम तो सरकार को हर चुनाव से पहले करवाना चाहिए ! राजनितिक दलों को भी ऐसा सर्वे करवाकर ही प्रत्याशी निर्धारित करने चाहिएँ !! 
                         इससे पहले ये टीम  वशिष्ठ पोलेटेक्निक कोलेज , टेगोर शिक्षक प्रशिक्षक संस्थान पंहुची  । फिर  अंजना पब्लिक स्कूल गए    । वहाँ इस टीम के संयोजक पीताम्बर दत्त शर्मा ने इस अभियान की पूरी जानकारी ग्रामीणों को दी ! उन्होंने कहा कि          सरकार और राजनितिक दल  सर्वे कराते तो हैं किन्तु " गुप्त " तरीके से , वो जनता की पसंद का नहीं केवल अपनी पसंद का नेता तलाशते हैं !!
                               विद्यालयों में जाकर  विद्यार्थियों और शिक्षकों को भी इस अभियान के बारे में सम्पूरण जानकारी दी !! इस अभियान की आवश्यकता क्यों पड़ी ,तथा इसके क्या उद्देश्य हैं इस बारे में भी विस्तार से समझाया !!
                            इस से पहले ये अभियान हनुमान जी के खेजड़ी मंदिर, बाबा रामदेव जी के मेले में और महाराजा अग्रसेन I.T.I. कोलेज में भी चलाया गया !! सबने इसको एक महत्वपूर्ण आवश्यक कार्य बताया और टीम के सदस्यों की प्रशंसा भी की गयी विद्यालय और कोलेज प्रबंधकों द्वारा ! इस अभियान के पत्रक सूरतगढ़ के विभिन्न क्षेत्रों और मानकसर व डेयरी फ़ार्म में वितरित किये गए !!
                                   इस अवसर पर श्री अरविन्द कौल, श्री राजिंदर पटावरी, श्री विजय स्वामी,श्री तुलसीराम शर्मा,श्री परसराम भाटिया,डा हरप्रीत सिंह,श्री पी   के मिश्रा और श्री परसराम भाटिया जी भी पीताम्बर दत्त शर्मा के साथ थे !! " 5TH PILLAR CORRUPTION KILLER " की पूरी टीम , इस अभियान को पहले नगर के हर वार्ड , फिर हर गाँव और फिर सूरतगढ़ विधानसभा के हर कसबे में चलाया, फैलाया और समझाया जायेगा , ताकि इस बार सूरतगढ़ की जनता को जो विधायक मिले वो लोकप्रिय व योग्य हो !! यही इस टीम की इच्छा   है  !!
                                 सभी पत्रकार मित्रों से अनुरोध है कि वो अपना सहयोग इस पवित्र मिशन को अवश्य प्रदान करें !! इसे प्रकाशित तो करें ही , साथ में अपनी विशेष और ज्ञानवर्धक टिप्पन्नी भी जोड़ें !! सधन्यवाद सहित आपकी सेवा में सादर प्रकाशनार्थ...... श्री मान………………………… जी !!!!
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Posted by PD SHARMA, 09414657511 (EX. . VICE PRESIDENT OF B. J. P. CHUNAV VISHLESHAN and SANKHYKI PRKOSHTH (RAJASTHAN )SOCIAL WORKER,Distt. Organiser of PUNJABI WELFARE SOCIETY,Suratgarh (RAJ.)

Saturday, March 2, 2013

" भाजपा में उग - आई ,खर-पतवार को कौन उखाड़ेगा "….???

                      हिंदुस्तान  के सभी असली किसानों को मेरा सादर प्रणाम !! मित्रो !! कांग्रेस के चिंतन के बाद अब भाजपा का " मंथन " नयी दिल्ली में कल से चल रहा है ! हर भारतवासी इस मंथन से अपने अनुकूल " अमृत " निकलता हुआ देखना चाहता है !! इनडोर स्टेडियम में बैठे कार्यकर्त्ता - कम - नेता सिर्फ देख और सुन रहे हैं ! लेकिन बोल नहीं पा रहे ……. क्यों ?? केवल " तालियाँ बजा रहे हैं !! अनुभवी पत्रकारों ने अपने एडिटोरियल में अपनी आशंकाएं भी आज प्रकट कर दी हैं !!
                  पार्टी के साधारण कार्यकर्त्ता से कुछ भी नहीं पूछा जाता क्यों…?? देश का आम आदमी चाहता है की भाजपा को शासन सौंपा जाए,लेकिन पार्टी गंदे नेताओं की खरपतवार से  भरी पड़ी है !! " अनुशासित,निष्ठावान,इमानदार और मेहनती कार्यकर्त्ता " तो नज़र ही नहीं आ रहे !! उनको तो दरकिनार कर दिया गया है !! 

                   किसी का कोई बंधुआ मजदूर तो कोई कार्यकर्त्ता है नहीं ……. इसलिए " खुद्दार " किस्म के कार्यकर्ताओं ने पार्टी के अन्दर रहते हुए ऐसे बेईमान-चालबाज़ नेताओं को अपना समर्थन ना देने का निर्णय कर लिया है !! नेताओं को इस मंथन में कड़े अनुशासन का सन्देश मिलेगा और पाई-पाई का हिसाब देने का वायदा मिलेगा तो कार्यकर्त्ता पार्टी हेतु काम करेगा !! प्रत्याशी भी साधारण कार्यकर्ताओं से चर्चा कर निर्धारित किये जाएँ तो बेहतर होगा !! साधारण निमंत्रण पर कार्यकर्त्ता पार्टी कार्यक्रम में आनेवाला नहीं , अबतो वो किसी गंदे नेताओं को अपने बूते पर वोट दिलाने वाला नहीं क्योंकि बड़े नेताओं ने ही पार्टी का " अनुशासन " भंग किया है " कार्यकर्ताओं ने नहीं…। 
                                    

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"निराशा से आशा की ओर चल अब मन " ! पीताम्बर दत्त शर्मा (लेखक-विश्लेषक)

प्रिय पाठक मित्रो !                               सादर प्यार भरा नमस्कार !! ये 2020 का साल हमारे लिए बड़ा ही निराशाजनक और कष्टदायक साबित ह...