Tuesday, July 29, 2014

" कल शाम , जब मैं , मर गया "....??- पीताम्बर दत्त शर्मा ( लेखक-विश्लेषक-विचारक )

बिना कोई पेन्शन-टेन्शन लिए,बिना किसी दंगे की ज़द में आये, बिना आत्महत्या किये,बिना किसी डॉक्टर के पास गए , बिना किसी एनकाउंटर हुए और बिना अपनी पत्नी के सताए कल शाम को 4 बजे जैसे ही मैंने चाय पी , कप नीचे रख्खा और सोचने लगा कि अगर भगवान मुझे थोड़ा और धन दे दे तो मैं यात्रा कर आऊँ !! इतना सोचा ही था की मेरे सामने दो यमदूत आकर खड़े हो गए !! वो दहाड़ कर हँसे और बोले - कमबखत अभी योजना ही बना रहा है ?? चल अब हम तुम्हें फ्री की यात्रा करवाते हैं , सीधे यमलोक ही लिए चलते हैं !! मैं रोया - चिल्लाया , परन्तु उनपर कोई असर नहीं हुआ ! मैंने अपने ताल्लुकात भी गिनवाए और कुछ लेने - देने की बात भी करी ! परन्तु ना कोई असर होना था और ना ही हुआ !! मुझे रस्सी से बाँध कर दोनों ने , ज़ोर लगाके हईशा !! बोलते हुए उठाया और धम से भैंसे पर डालकर  वो चल पड़े !! मेरा रोना धोना कोई काम नहीं आया !!
              इधर मेरे घर में मुझे 2 घंटे तक तो किसी ने संभाला ही नहीं , तभी पत्नी आई और मुझे ओंधे मुंह पड़ा देख , मुझे हिलाया-डुलाया , कोई हरकत देख वो चिल्लाने लगी ! शोर सुनकर पुत्रवधु और आ गए ! फिर जिसे - जिसे सूचना मिलती गयी सब आते गए ! और मुंह पर कपडा लिए मेरे बारे में बतियाने लगे ! जैसे मैं कोई अभी से बदबू मार रहा हूँ !! आज मैं भी अपने मोहल्ले की " ब्रेकिंग-न्यूज़ " बन गया था !!आये हुए लोग पूछने लगे अंतिम संस्कार कब करोगे ?? मेरे परिवार वाले बोले सुबह करेंगे जी 10 बजे , जब सभी रिश्तेदार आ जाएंगे ! मेरे नेता मित्र बोले - यार कल भी आना पडेगा !! आज ही हो जाता तो बेहतर होता ! 
            अगले दिन मुझे बर्फ की सिल्लियों से निकालकर नहलाया गया और फिर बिना सिला हुआ कफ़न पहनकर मुझे मेरी  दिया गया ! परिवार और सभी रिश्तेदार अलग-अलग " अर्थ " लिए हुए अलग-अलग में रो रहे थे ! अड़ोसी-पडोसी और सभी मित्रगण दूर खड़े बस ! देखने की कोशिश भर करते नज़र आरहे थे ! मुझे नीचे देखता हुआ देख याम दूत बोले ! ज्यादा मत नीचे देख नहीं तो बहुत पछतायेगा !!  नाटक कर रहे हैं ! इन्हीं के लिए तूने अपना सारा जीवन खराब कर लिया पगले !! लेकिन मैं फिर भी अपने आप को देखने से नहीं रोक पाया ! क्योंकि मन में जिज्ञासा थी की देखूं तो सही कौन मेरा सच्चा मित्र या रिश्ते दार है ,  या था ??
            " राम - नाम सत्य है - सत्य बोले ही गत है " कहते हुए सब मुझे " शव-वाहन में लिटाकर शमशान-भूमि ले गए , क्योंकि कन्धों पर तो मैं जाने लायक नहीं था ना !! वहां जाकर पंडित जी ने मन्त्र पढ़े , " स्पेशलिस्टों " ने झगड़-झगड़ कर लकड़ियाँ जोड़ीं और फिर मुझे गलत-सही रिवाज़ों की बहस के चलते जला दिया गया ! " कपाल-क्रिया " के बाद मुझे अंतिम बिदाई देकर सब इकठ्ठा हुए और फिर लगे सलाह करने कि कितने दिनों बाद " शोक-सभा " करनी है ? सभी एक मत थे की जितनी जल्दी रविवार आये तभी करदो ! तभी एक भाई बोला रविवार तो परसों ही है ! तो सभी बोले तो बस ठीक है , जो रिश्तेदार आये हुए हैं , वो परसों शोक सभा के बाद ही जाएँ ! इस तरह से मेरा अंतिम साँस कार हुआ ! फिर जो मित्रों ने आपस में तरह-तरह के प्रसंग सुनाये हैं की पूछिये मत , रिश्तेदारों ने तो उन्हें भी पीछे छोड़ दिया , वो तो हस-हस कर बातें करते जा रहे थे !! घरजाकर सबने बढ़िया भोजन किया और फिर ऐसे ही बतियाते हुए परसों यानी हमारी अंतिम शोक सभा का दिन भी आ गया ! रसम पगड़ी हुई , शोक सन्देश पढ़े गए और फिर भाषण हुए ! तरह-तरह की बातें करने वालों ने जो भाषण दिए , मैं कहता हूँ ट्रेजडी-किंग दलीप कुमार जी को भी मात दे गए वो तो !! मेरे पुत्र-पुत्री के  ससुराल वाले उन्हें समझाकर गए की अगर सम्पत्ति के बंटवारे में तुम्हारे साथ कोई अन्याय हो तो बस एक फोन कर देना " बेटा " जी !! बस !! हम पंहुच जाएंगे !!
             विदाई पश्चात मेरी अस्थियों को विसर्जित कर दिया गया हरिद्वार में ! वंहा के पंडितों ने भी जो नहीं दान करवाना था , वो भी करवा लिया ! ये सब देख मैंने यमदूतों से कहा कि अच्छा हुआ ! जो आप मुझे यहां ले आये !! चलो अब कुछ दिन स्वर्ग में रहने को तो मिलेगा !!याम दूत बोले !- दुष्ट तुम्हें स्वर्ग कैसे नसीब होगा ?? यही सब कुछ तो तू किया करता था ?????
              मैंने रोते हुए कहा माईबाप मुझे माफ़ करो !! अब मैं  सच , लिखूंगा भी सच , और यात्रा भी सच में करके आऊंगा !!  मुझे एक बार और जीवन देदो !! तभी मुझे मेरी पत्नी की आवाज़ सुनाई पड़ी और मुंह पर पानी के छींटे पड़े ! मुझे होश आया तो देखा कि मैं अपने बिस्तर से नीचे गिरा पड़ा हूँ और मेरी पत्नी -बच्चे और पडोसी सब घेरे खड़े हैं ! मैंने पुछा कि मुझे क्या हुआ था !! तभी पीछे खड़े मेरे डॉक्टर मित्र की आवाज़ आई की आप बेहोश हो गए थे ! सेहत का ध्यान रख्खो कंही हिल-स्टेशन पर घूम आओ !! मैं  बोला हाँ यार मैं अमर-नाथ बाबा के दर्शन करके आऊंगा !! 
           बोलिए !! जय शंकर की !! इस से पहले की देरी हो जाये !! आप सब मित्र मेरे नाम का " शोक सन्देश मेरे नीचे लिखे पते पर आज ही भिजवा दें !! हां !!राम - राम !!

            
               " इन्टरनेट सोशियल मीडिया ब्लॉग प्रेस "
" फिफ्थ पिल्लर - कारप्शन किल्लर "
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हार्दिक बधाई और ढेर सारी शुभकामनाएं !!नए बने मित्रों का हार्दिक स्वागत-अभिनन्दन स्वीकार करें !
जिन मित्रों का आज जन्मदिन है उनको हार्दिक शुभकामनाएं और बधाइयाँ !!
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सधन्यवाद !!
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पीताम्बर दत्त शर्मा,
हेल्प-लाईन-बिग-बाज़ार,
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जिला-श्री गंगानगर।
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Posted by PD SHARMA, 09414657511 (EX. . VICE PRESIDENT OF B. J. P. CHUNAV VISHLESHAN and SANKHYKI PRKOSHTH (RAJASTHAN )SOCIAL WORKER,Distt. Organiser of PUNJABI WELFARE SOCIETY,Suratgarh (RAJ.)

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