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"निराशा से आशा की ओर चल अब मन " ! पीताम्बर दत्त शर्मा (लेखक-विश्लेषक)
प्रिय पाठक मित्रो ! सादर प्यार भरा नमस्कार !! ये 2020 का साल हमारे लिए बड़ा ही निराशाजनक और कष्टदायक साबित ह...
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कई लोग मन और दिल को एक ही मानते हैं , लेकिन मैं और मेरा सनातन धर्म एक नहीं मानते क्योंकि डाक्टर लोग दिल का तो ऑपरेशन कर सकते हैं लेकिन मन क...
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राजनीति के साथ-साथ अध्यापन,लेखन,समाज-सेवा,कर्म,कर्तव्य,धर्म और मनुष्य का चरित्र आज जिस स्तर तलक पहुँच चुका है , ये आप सब भली-भाँती जानते है...

आपकी इस प्रविष्टि् के लिंक की चर्चा कल रविवार (13-12-2015) को "कितना तपाया है जिन्दगी ने" (चर्चा अंक-2189) पर भी होगी।
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सूचना देने का उद्देश्य है कि यदि किसी रचनाकार की प्रविष्टि का लिंक किसी स्थान पर लगाया जाये तो उसकी सूचना देना व्यवस्थापक का नैतिक कर्तव्य होता है।
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चर्चा मंच पर पूरी पोस्ट नहीं दी जाती है बल्कि आपकी पोस्ट का लिंक या लिंक के साथ पोस्ट का महत्वपूर्ण अंश दिया जाता है।
जिससे कि पाठक उत्सुकता के साथ आपके ब्लॉग पर आपकी पूरी पोस्ट पढ़ने के लिए जाये।
हार्दिक शुभकामनाओं के साथ।
सादर...!
डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक'
सच को जोरदार तरीके से बयान करती है आपकी रचना।
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