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Showing posts from November, 2016

काश ! मोदी जी के समाजवाद का सपना सच हो जाए...??

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देश के शहर दर शहर घूम लीजिये। बाजारों में चकाचौंध है। दुनिया भर के ब्रांडेड उत्पाद से भरी दुकान\मॉल हैं। देखते देखते बीते 20 बरस में भारत का बाजार इतना ब़डा हो गया कि दुनिया के बाजार में भारत के बाजार की चकाचौंध की धूम तले हिन्दुस्तान का वह अंधेरा ही छुप गया जो बाजार में बदलते भारत से कई गुना ज्यादा बड़ा था। लेकिन सच यही है हिन्दुस्तान के अंधेरे की तस्वीर कभी संसद को डरा नहीं सकी। नेताओं के ऐश में खलल डाल नहीं सकी। अंधेरे में समाया हिन्दुस्तान अपनी मौत लगातार मरता रहा। और इनकम और कैलोरी की लकीर पर खड़ा होकर गरीबी की रेखा को पार करने के लिये ही छटपटाता रहा। तो हिन्दुस्तान की इस दो तस्वीरों को पाटने के लिये ही क्या नोटबंदी का जुआ प्रदानमंत्री मोदी ने चला है। या फिर उस राजनीति को साधने के लिये यह जुआ खेला, जिसमें वोटबैक जाति-धर्म की लकीर को छोड़ दें। यानी एक तरफ 45 करोड उपभोक्ता। जो दुनिया के किसी भी विकसित देश से कहीं ज्यादा। दूसरी तरफ 80 करोड भूख से बिलबिलाते नागरिक। जो दुनिया के कई देशो को खुद में समा लें। तो पहली बार खरीदारों या कन्ज्यूमर के हाथ बंध गये हैं। चकाचौंध बाजार की रईसी थम…

भ्रष्ट सिस्टम और ब्लैक मनी पर टिकी राजनीति से सफाई कैसे होगी ?

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पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने गुरुवार के दिन राज्यसभा मेंप्रधानमंत्री मोदी को नोटबंदी पर चेतावनी दी। और मौजूदा प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी कभी गंभीर हुये कभी मुस्कुराये। और भोजनावकाश के बाद विधान पर टिके राज्यसभा का ही डिब्बा गोल हो गया क्योंकि सदन में पीएम नहीं पहुंचे। तो ऐसे में पूर्व पीएम ने भी नहीं सोचा कि सदन में आलथी पालथी मारकर तबतक बैठ जाये जब तक संकट में आये देश के निकलने का रास्ता पीएम मोदी आकर ना बताये। एक ने कहा। दूसरे ने सुना। और संसद ठप हो गई । तो 62 करोड़ नागरिक जो गांव में रहते है और करीब 29 करोड नागरिक जो शहरों की मलिन बस्स्तियों और झोपडपट्टियों में रहते हैं, उनकी जिन्दगी से तो जीने के अधिकार शब्द तक को छीना जा रहा है उस पर कब कहां किसी पीएम ने बात की। और 90 करोड़ नागरिकों से ज्यादा के इस हिन्दुस्तान का सच तो यही है कि न्यूनतम की जिन्दगी भी करप्शन और नाजायज पैसे पर टिकी है। गांव में हैडपंप लगाना हो। घर खरीदना हो । रजिस्ट्री करानी हो। सरकार की ही कल्याणकारी योजनाओं का पैसा ही बाबुओं से निकलवाना हो। बैंकों के जरीये सरकार के पैसे को बांटना हो। यानी जहां तक जिसकी सोच …

"प्रधानमंत्री जी हाज़िर हों "$$$$$ !!- लेखक-विश्लेषक-विचारक(पीताम्बर दत्त शर्मा)मो.न. +9414657511

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भारतीय संसद की सभी रीतियों व परम्पराओं को तोड़ते हुए विपक्षी नेता शिकारी कुत्तों की तरह कल से संसद को चलने नहीं दे रहे !बारी-बारी से वे राज्यसभा और लोक सभा अध्यक्ष एवम अध्यक्षा की आज्ञा के बिना खड़े होकर अपने आदेश सदन की "चेयर"को सुनाने लग पड़ते हैं !एक चुप होता है तो दूसरा खड़ा हो जाता है और दूसरा चुप होता है तो तीसरा अपनी "काँव -काँव"शुरू कर देता है !बहाना तो ये है कि भारत की जनता परेशान है लेकिन कॉमरेडों और कोंग्रेसियों की यूनियनें सहकारी बैंकों में हड़ताल भी करवा रहीं हैं क्यों ?केवल एक ही रट लगाए बैठे हैं की दोनों सदन तब चलने देंगे अगर प्रधानमंत्री जी दोनों सदनों में दोनों जगह पूरी बहस में हाज़िर रहें !
                       कोई इन मूर्खों से पूछे कि एक प्रधानमंत्री एक ही समय में दोनों सदनों की बहस कैसे सुन सकता है ?सभी प्रकार के आश्वासन राज्यसभा के नेता और उपाध्यक्ष द्वारा दिए जा चुके हैं !फिर भी ये विपक्षी बहस नहीं चलने दे रहे हैं !इनकी एक और "चालाकी"  भी सामने आ रही है , वो ये कि विपक्षी लीडर तो अपना भाषण दे चुके लेकिन सत्तापक्ष के भाषण के समय व्यवधान ड…

पंडारा बॉक्स तो मोदी ने खोल ही दिया है....!!

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प्रधानमंत्री मोदी चौतरफा घिरे हैं और यही उनकी सफलता है। क्योंकि जिस नेता को केन्द्र को रखकर समूची राजनीति सिमट गई है। वह नेता जनता की नजर में भारतीय राजनीति की खलनायकी में खलनायक होकर भी नायक ही दिखायी देगा। क्योंकि राजनीतिक सत्ता को चुनौती देने की स्थिति में जनतंत्र है नहीं और राजनीतिक लोकतंत्र अपने गीत गाने के लिये वक्त-दर वक्त नायक खोज कर खुद को पाक साफ दिखाने से चूका नहीं है। तो सवाल यह नहीं है कि कांग्रेस हो या वामपंथी या फिर मुलायम या मायावती, संसद में सभी की जुबां पर मोदी हैं तो सड़क पर ममता और केजरीवाल के निशाने पर भी मोदी हैं। तो मोदी का कद झटके में सियासी पायदान पर सबसे उपर है। और जो दबाव धंधे वालों से लेकर गांव-खेत में दिखायी दे रहा है, उसकी बदहाली के लिये वही राजनीति जिम्मेदार है, जिसे मोदी डिगाना चाहते हैं। तो क्या पहली बार सत्ता ही जनवादी सोच लिये भ्रष्ट पारंपरिक राजनीति को ही अंगूठा दिखा रही है। यानी इतिहास के पन्नों को पलटें तो जेपी चाहे संपूर्ण क्रांति का नारा देकर चूक गये। अन्ना हजारे चाहे जनलोकपाल की गीत गाकर चूक गये। लेकिन मोदी कालाधन का राग गाते हुये चूकेंगे नहीं…

संसद से नहीं बैंक से निकलेगा लोकतंत्र का नया रागsaabhaar

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जब संसद सड़क के सामने छोटी लगने लगे तो फिर नेताओं का रास्ता जाता किधर है। सड़क के हालात बताते हैं कि 2014 के लोकसभा चुनाव में देश के करीब 55 करोड़ लोगों ने वोट डाले लेकिन आज की तारीख में शहर दर शहर गांव दर गांव 55 करोड़ से ज्यादा लोग सड़क पर उस नोट को पाने के लिये जद्दोजहद कर रहे हैं जिसका मूल्य ना तो अनाज से ज्यादा है और ना ही दुनिया के बाजार में डॉलर या पौंड के सामने कहीं टिकता है। फिर भी पहले वोट और अब नोट के लिये अगर सड़क पर ही जनता को जद्दोजहद करनी है तो क्या वोट की तर्ज पर नोट की कीमत भी अब प्रोडक्ट नहीं सरकार तय करेगी। क्योंकि मोदी सरकार को 31 फिसदी वोट मिले। यानी खिलाफ के 69 फिसदी वोट का कोई मूल्य संसदीय राजनीति में कोई मायने रखता ही नहीं है। ठीक इसी तरह 84 फीसदी मूल्य के नोट के खत्म होने के बाद 16 फिसदी मूल्य की रकम महत्वपूर्ण हो गई। यानी रोजाना चार हजार रकम के खर्च करने का समाजवाद सड़क पर आ गया। तो क्या समाजवाद के इस चेहरे के लिये देश तैयार हो चुका है या फिर जिस संसद की पीठ पर सवार होकर लोकतंत्र का राग देश में गाया जा रहा है, पहली बार संसदीय लोकतंत्र को ही सडक का जनतंत्र ठे…

मोदी जी की "कड़क चाय"का स्वाद !? - पीताम्बर दत्त शर्मा (लेखक-विश्लेषक-विचारक) मो.न. +9414657511

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मित्रो ! जैसे ही मोदी जी ने उस दिन रात आठ बजे राष्ट्र के नाम अपने सन्देश में देश भक्तों और  दुश्मनों  को बताया कि "भारत में 500 और 1000 रूपये के नोट आज से बन्द हो गए हैं तो सारा देश सहम सा गया !लोग कई देर तलक अचंभित से एक दुसरे से पूछते रहे कि क्या सच में ऐसा हो ही गया है ? जब भारत के छोटे से छोटे भ्रष्ट नागरिक को ये पता चला कि ये सच्च है तो उसने तभी से अपना दिमाग केवल इसी बात पर लगाना चालु कर दिया कि मैं कैसे अपना "काला -धन"खपाऊँ या बदलवाऊँ ?क्योंकि "कोंग्रेस के शासन चलाने की एक विशेष संस्कृति"है इसलिए हर आदमी इस देश का " भ्रष्ट व्यवस्था "का हिस्सा बन चुका है !केवल स्तर का ही अंतर है !कोई छोटा है तो कोई बड़ा है !
                           देश के सभी राजनितिक दलों के नेता 24 घण्टे तो अपनी और अपने मित्रों की व्यवस्था बिठाने में लगे रहे , फिर हमारे देश के "तथाकथित युवा नेता राहुल गांधी"केवल एक दिन 4000/-रूपये बदलवाने हेतु बैंक की लाईन में लगे और सारी ,उनके मुताबिक दुःखी जनता का दुःख "दूर"कर गए ! क्या उनके पास केवल इतने ही रूपये थे ?…
चकाचौंध की व्यवस्था से अब तो सचेत हो जायें ! जब जिन्दगी पर बन आई तो हंगामा मच गया। हवा जहरीली हुई तो सांसें थमने लगीं। आंखों में जलन शुरु हुई तो गैस चेंबर की याद आ गई। लेकिन क्या वाकई जिन्दगी की परवाह किसी को है। मौजूदा वक्त में जो सवाल देश के है उन्हीं के आसरे जिन्दगी को टोटल लें तब हवा में जहर क्यों और दूर हो कैसे इसपर भी बात होगी। क्योंकि जिस दौर में देशभक्ति जवानों की शहादत पर जा टिकी है, उस दौर में इसी बरस 93 जवान सीमा पर शहीद हो गये। जिस वक्त फसल की जड़ यानी खूंटी के जलने से फैलते जहरीले धुयें में मौत दिखायी दे रही है, तब इसी बरस 1950 किसान खुदकुशी कर चुके हैं। जब दिल्ली की सडक पर जेएनयू के छात्र नजीब के गायब होने पर हंगामा मचा है। तब देश में 26 हजार से ज्यादा बच्चे इसी बरस लापता हो चुके हैं। जिस दौर में सफाई और विकास पर जोर है उसी दौर में फैंके जाते कचरे में लगती आग। कच्चे उघोगों से निकलता धुआं और सडक निर्माण के लिये सीमेंट,लोहा, ईंट, कोलतार से निकलने वाला धुआं 22 फीसदी बढ़ चुका है। और इस कतार में डिजल के ट्रक-एसयूवी का इस्तेमाल 12 फिसदी बढ़ गया। लकडी-कोयले से निकलने वाले धुये …

सिर्फ सियासत की...कोई चोरी नहीं की..........!!"5th पिल्लर करप्शन किल्लर" "लेखक-विश्लेषक पीताम्बर दत्त शर्मा " वो ब्लॉग जिसे आप रोजाना पढना,शेयर करना और कोमेंट करना चाहेंगे ! link -www.pitamberduttsharma.blogspot.com मोबाईल न. + 9414657511

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दिल्ली से एलओसी तक हवा में घुलता जहर दो सौ करोड़ । ये बच्चों का आंकडा है। दुनियाभर के बच्चो की तादाद। जिनकी सांसों में जहर समा रहा है ।  हवा में घुलते जहर को दुनिया में कहीं सबसे ज्यादा बच्चे प्रभावित हो रहे हैं तो वह उत्तर भारत ही है । तो जो सवाल दीपावली के बाद सुबह सुबह उठा कि दिल्ली में घुंध की चादर में जहर घुला हुआ है और बच्चों की सांसों में 90 गुना ज्यादा जहर समा रहा है । तो ये महज दीपावली की अगली सुबह का अंधेरा नहीं है। बल्कि यूनिसेफ की रिपोर्ट के मुताबिक दिल्ली समेत उत्तर भारत में 8 करोड़ बच्चों की सांसो में लगातार जहर जा रहा है । और दीपावली का मौका इसलिये बच्चो के लिये जानलेवा है क्योंकि खुले वातावरण में बच्चे जब सांस लेते है तो प्रदूषित हवा में सांस लेने की रफ्तार सामान्य से दुगुनी हो जाती है । जिससे बच्चों के ब्रेन और इम्युन सिसंटम पर सीधा असर पडता है । ये कितना घातक रहा होगा क्योंकि दीपावली की रात से ही 30 गुना ज्यादा जहर बच्चों की सांसों में गया । लंग्स, ब्रेन और दूसरे आरगन्स पर सीधा असर पड़ा । तो क्या दीपावली की रात से ही दिल्ली जहर के गैस चैबंर में बदलने लगी । क्योंकि यू…

"मुर्दा बोले !! कफ़न फाड़े"!!- पीताम्बर दत्त शर्मा !(लेखक-विश्लेषक-विचारक)मो.न.+9414657511

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क्या कोंग्रेस राज में कभी कोई कैदी जेलों से नहीं भागे ? क्या कोंग्रस राज में कभी कोई एनकाउंटर नहीं हुआ ?क्या यू.पी.ऐ.के राज में प्रशासन से कोई गलती नहीं हुई?क्या कभी कोई उपकरण बन्द नहीं हुए ? अगर हुए तो जनता ने उन्हें भी तो सहा ना ! तो फिर आज अगर जेल से कोई कैदी भागते हुए एक सिपाही का कत्ल करते हुए भाग जाते हैं और मध्य प्रदेश की जागरूक पोलिस उनका पीछा करते हुए उनका "एनकाउंटर"कर देती है तो,कॉमरेडों-कोंग्रेसियों और upa के नेताओं की "माँ"क्यों मर जाती है ?बड़ी अजीब बात नहीं लगती आपको कि ये सब शहीदों की मृत्यु पर  आंसू भी नहीं बहाते ? क्यों उनके घरों में जाकर अपनी संवेदनाएं प्रकट नहीं करते ?
"मुर्दा बोले !! कफ़न फाड़े"!!वाली कहावत ऐसे नेताओं पर एकदम सटीक बैठती है !ना जाने क्यों जनता ऐसे "कमीनों"को चुनावों में अपना "अनमोल-वोट"दे देती है ?बहिष्कार करना ही इनका एकमात्र इलाज है !ये जनता को कब समझ में आएगा ?जितनी जल्दी जांच कराने की बात माननीय शिवराज सिंह जी ने कह दी उतनी जल्दी तो कोंग्रेस के नेता उठते ही नहीं है किसी घटना पर बात करने हेतु !धिक्…