Saturday, September 2, 2017

"फन्दे में भगवान और आम इन्सान" ! - पीताम्बर दत्त शर्मा (लेखक-विश्लेषक)

भगवान ने कहा था कि मैं तो भक्त के वश में रहता हूँ ! तो "भस्मासुर"ने योजना बनाई कि क्यों न सच में भगवान को अपने वाश में कर लूँ ? उसने तपस्या की और वरदान में ये मांग लिया कि "मैं जिसके भी सिर पे अपना हाथ रख दूँ ,वो भस्म हो जाए"!भगवान भोलेनाथ ने तथास्तु बोल दिया ! तो उस राक्षस ने सोचा कि क्यों न इस वरदान को परख लिया जाए !! कहीं ये झूठ ही ना हो !तो उसने बिना कोई देर किये शंकर जी के सर पे ही अपना हाथ रखना चाहा तो भोलेनाथ भागे अपनी जान बचाने हेतु !भगवान विष्णु ने चतुराई से सुंदर स्त्री का रूप धरा और नृत्य की भंगिमाओं में उलझाकर उसे भस्म किया !तब कहीं भोले नाथ की सांस में सांस आयी !
            लेकिन ऐसा समय समय पर देखने को मिलता रहता है कि भगवान आज तलक कई बार इंसान रूपी राक्षस के फंदे में फंसते रहते हैं और फिर विष्णु कोई रूप धारण कर उन्हें निकालता है ! बड़ी लम्बी लिस्ट है ऐसे कुकर्मियों की !आज के इंसान और प्रशासन  का इनके झांसे में आ जाना तो मामूली बात है !भगवान के नियमों को धत्ता बताकर अपने नियम क़ानून बना लेते हैं ये लोग ! रावण ,कंस,हरिण्यकश्यप से लेकर आसाराम,रामपाल और बाबा गुरमीत सिंह तक सब अपने आपको खुदा बना लेते हैं और इनके "विशेष चेले"इनकी जो कहानियां सुनते हैं कि पूछिए मत!इंसान "सम्मोहित"सा वैसा ही करने लग जाता है ,जो उसे फिर कहा जाने लगता है !उसकी तंद्रा तब टूटती है जब बहुत अनर्थ हो चुका होता है ! जन-धन का नुकसान हो चुका होता है !
            सनातन धर्म के ग्रंथों ने जो कहा ,देवी-देवताओं ने जो कहा और उनके जीवन से जो शिक्षा मिली,वैसा इस इंसान ने बिलकुल भी नहीं किया ! जैसा अल्लाह,ईसामसीह,जैन,बुद्ध,पारसी,और सिक्ख गुरओं ने कहा ,वैसा तो इनके अनुयायियों ने बिलकुल नहीं किया व ना ही वैसा जीवन जीने की कोई इनकी संभावना है !आज का इंसान तो हर बात में अपना फायदा ढूंढता है !हर बात को वैसे ही तोड़-मरोड़ लेता है जिधर उसका फायदा होता हो !तो दोषी केवल वो ठग गुरु ही नहीं हैं ,बल्कि दोषी वे लोग भी हैं जो काम मूल्य में भौतिक वस्तुओं का "पान" करने वहा बार बार जाते हैं !लालच ही हर बुराई की जड़ में होता है !
         नेता हो या संत ,परिवार हो या मोहल्ला ,जब आपने अपने कर्तव्य स्वयं पुरे ना करके दूसरों पर भरोसा करना शुरू करते हैं !बस !!तभी से आप ने अपने पैरों पर कुल्हाड़ी समझो मार ली !आपके दुर्दिन बस तभी से शुरू हो जाते हैं !आपको तब कोई नहीं बचा सकता ! कोई क़ानून या कोई सरकार तब आपके आड़े नहीं आता !यही कारण है की हम जीवन के ज्यादातर हिस्से में दुखी ही रहते हैं !हमारा मीडिया तो एक गन्दा व्यवसाय बनकर रह गया है !इसको ना तो किसी के दुक्ख से कोई मतलब है और ना ही किसी के सुख से !इसने तो वही दिखाना और छापना है जिससे इसके मालिक को करोड़ों रुपया बने !किसी धर्म,कर्तव्य और न्याय की आस इनसे भी मत रखना !वो जमाना गया जब पत्रकार लोग सच के लिए कुर्बान हो जाय करते थे !फिर भी हम सबको जय हिन्द जय भारत और वनडे मातरम तो बोलना ही पड़ेगा !! क्योंकि आस पर ही जहां टिका है !कोई आएगा.....!!ये लीजिये मैं भी दूसरे पर आश्रित होने का कह रहा हूँ यारो !हूँ ना मैं भी ......!!     





                                                         प्रिय "5TH पिल्लर करप्शन किल्लर"नामक ब्लॉग के पाठक मित्रो !सादर प्यारभरा नमस्कार ! वो ब्लॉग जिसे आप रोजाना पढना,शेयर करना और कोमेंट करना चाहेंगे !
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3 comments:

  1. आपकी इस प्रविष्टि् के लिंक की चर्चा कल रविवार (03-09-2017) को "वक़्त के साथ दौड़ता..वक़्त" (चर्चा अंक 2716) पर भी होगी।
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    सूचना देने का उद्देश्य है कि यदि किसी रचनाकार की प्रविष्टि का लिंक किसी स्थान पर लगाया जाये तो उसकी सूचना देना व्यवस्थापक का नैतिक कर्तव्य होता है।
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    चर्चा मंच पर पूरी पोस्ट अक्सर नहीं दी जाती है बल्कि आपकी पोस्ट का लिंक या लिंक के साथ पोस्ट का महत्वपूर्ण अंश दिया जाता है।
    जिससे कि पाठक उत्सुकता के साथ आपके ब्लॉग पर आपकी पूरी पोस्ट पढ़ने के लिए जाये।
    हार्दिक शुभकामनाओं के साथ।
    सादर...!
    डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक'

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  2. सारगर्भित एवं विचारणीय लेख।

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  3. विचारणीय प्रस्तुति
    जब अपने आप पर भरोसा नहीं रहता है तो उसका फ़ायदा ऐसे ढोंगी इंसान उठाने में कोई कोर बाकी नहीं छोड़ते

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"मीडिया"जो आजकल अपनी बुद्धि से नहीं चलता ? - पीताम्बर दत्त शर्मा {लेखक-विश्लेषक}

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