Wednesday, September 6, 2017

" विचारधारा के नाम क्यों लगाए हमारे अपराध और कत्ल"? - पीताम्बर दत्त शर्मा (लेखक-विश्लेषक)

कर्नाटका में एक प्रसिद्ध पत्रकार महिला "गौरी लंकेश जी की निर्मम हत्या कर दी गयी कल रात को !वे एक कन्नड़ पत्रिका की सम्पादक थीं ! उन्हें मैं अपनी संवेदनाएं प्रकट करते हुए श्रद्धा-सुमन अर्पित करता हूँ !बड़े ही दुःख के साथ मैं ये लिख रहा हूँ कि वहां की सरकार कानून-व्यवस्था को दुरुस्त नहीं रख पायी ! जो हमला योजना बनाकर ,सोच-समझ कर किया जाता है ,उसे रोक पाना किसी भी सरकार के लिए मुश्किल ही होता है ,ये भी हमें मान लेना चाहिए !गौरी जी ने अपने पत्रकारिता के जीवन में ना जाने कितने बेईमानों के खिलाफ संघर्ष किया !ख़बरें छापीं ,स्टोरियां लिखीं,भेद खोले और केस भी लडे ! हार-जित जीवन का अंग होता है सो हारीं भी और जीतीं भी !एक विशेष विचारधारा के लोगों को लगता था कि वो उनकी पक्षधर हैं ,उन्हीं लोगों को ये भी लगता था कि वे तथाकथित "कटटर दक्षिण-पंथी विचार-धारा"की विरोधीं थीं क्योंकि वे लोग विरोधी थे !
                समस्या यहीं से शुरू होती है हमेशां ही ,जब हम किसी का उत्तर या विचार जाने बिना ही अपने दिमाग से किसी दूसरे का उत्तर या विचार अपने दिमाग में न केवल तैयार कर लेते हैं बल्कि निर्णय भी सुना देते हैं !लिखे होंगे उन्होंने आरएसएस और भाजपा के खिलाफ कई लेख ,खोले होन्गे कई घोटालों के राज़ और दिए होने कई वक्तव्य या भाषण ,तो ये कैसे मान लिया जाए कि वो भाजपा की विरोधी थीं जन्म से ही या अंत तलक विरोधी ही रहतीं !?ऐसे ही भाजपा या आरएसएस कैसे उनकी इतनी विरोधी हो गयी कि उनका कत्ल ही करवा दिया जाए !?ना केवल उनका कॉमरेड और कोंग्रेसियों की मानें तो सभी पत्रकारों और गांधी जी का कत्ल भी भाजपा ने ही करवाया है ,ऐसा कैसे हो सकता है ?विरोध करना या होना अलग बात है और कत्ल जैसा जघन्य अपराध करना अलग बात है ! इसलिए मैं नहीं मानता की ये कत्ल किसी राजनितिक दल या संगठन ने करवाए हैं !
                     वो ज़माना गया जब 1947 में कांग्रेस,मुस्लिम लीग और कम्युनिस्टों ने हिन्दुओं को मरवाया था !क्योंकि इनकी विचारधारा विदेशी सभ्यता पर टिकी हुई है !कांग्रेस ने अंग्रेज़ों से और कम्युनिस्टों ने लेनिन आदि विदेशी नेताओं को पढ़कर हत्याएं करना सीखा था !इसीलिए केरल और बंगाल में ऐसी घटनाएं आज भी होती रहती हैं !आजकल का मीडिया भी अपने चेनेल चलने के चक्क्र में राहुल गांधी और छुटभैये नेताओं के बेवकूफियों से भरे बयान और बहस ऐसे दिखता है जैसे ये बड़ी पंहुची हुई चीज़ हों ! आज राहुल गांधी को भला कौन महत्त्व देता है ?लेकिन कल से वामपंथी और कोंग्रेसी विचारधारा से पैदा हुए चेनेल और एंकर निर्णय सुना रहे हैं !जैसे सारी जांच हो गयी हो सर्वोच्च न्यायालय का फैसला आआ गया हो ! हद्द है बेवकूफियों की भी यारो !पिछले 7 सालों में बारह पत्रकार मारे गए हैं जिनमे से दस किसी ना किसी गैंग से दुश्मनी की वजह से मारे गए !लेकिन ये आरोप लगाकर भाजपा विरोधी माहौल बनाये जा रहे हैं !गंदी और पक्षपाती पत्रकारिता ही भारत में आधे से ज्यादा अपराधों की जननी है ! कानून अपना काम करेगा ,जो दोषी होगा सजा पायेगा !लेकिन अभी कई दिन ndtv का रविश कुमार अवश्य रोयेगा क्योंकि अगर वो कन्हैया की मम्मी जैसी थी तो उनकी भी बहन होगी ही !मेरी भी बहन ही थी !लेकिन मेरे रोनर और उनके रोनर में फ़र्क़ साफ़ दिखेगा आपको !क्योंकि मैं jnu जैसी यूनिवर्सिटी में नहीं पढ़ा !मैं समझता हूँ की कातिल कोई विचारधारा नहीं केवल अपराधी व्यक्ति ही होता है जो पाप करता है !अंत में एकबार फिर श्रद्धांजलि अर्पित करता हूँ !








प्रिय मित्रो ! सादर नमस्कार ! कुशलता के आदान-प्रदान पश्चात् समाचार ये है कि हमारे इस ब्लॉग में ज्वलन्त विषयों पर लेख-टिप्पणियां होती हैं।जो मित्र पढ़ने में रूचि रखते हों,अवश्य पढ़ें,फिर अपने मित्रों को शेयर करें और अपने अनमोल कॉमेंट्स भी रोज़ाना लिख्खा करें।इसका लिंक ये है - www.pitamberduttsharma.blogspot.com. मुझसे संपर्क करने हेतु मेरा ई मेल एड्रेस ये है - pitamberdutt. sharma@gmail. com. मेरा मोबाईल नम्बर ये है - 9414657511. सधन्यवाद ! आपका अपना मित्र पीताम्बर दत्त शर्मा,1/120,आवासन मंडल कालोनी,वार्ड नम्बर 10,सूरतगढ़।जिला श्रीगंगानगर,राज. भारत 

1 comment:

  1. आपकी इस प्रविष्टि् के लिंक की चर्चा कल शुक्रवार (08-09-2017) को "सत्यमेव जयते" (चर्चा अंक 2721) पर भी होगी।
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    सूचना देने का उद्देश्य है कि यदि किसी रचनाकार की प्रविष्टि का लिंक किसी स्थान पर लगाया जाये तो उसकी सूचना देना व्यवस्थापक का नैतिक कर्तव्य होता है।
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    चर्चा मंच पर पूरी पोस्ट अक्सर नहीं दी जाती है बल्कि आपकी पोस्ट का लिंक या लिंक के साथ पोस्ट का महत्वपूर्ण अंश दिया जाता है।
    जिससे कि पाठक उत्सुकता के साथ आपके ब्लॉग पर आपकी पूरी पोस्ट पढ़ने के लिए जाये।
    हार्दिक शुभकामनाओं के साथ।
    सादर...!
    डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक'

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