Monday, September 18, 2017

" परेशान है हर कोई " क्यों ? - पीताम्बर दत्त शर्मा {लेखक-विश्लेषक}

भारत ,जिसकी संस्कृति में ही ये सिखाया जाता है कि अपने आप से ज्यादा दूसरों की चिंता करो ! दूसरों पर दया करो !अपने हिस्से के भोजन में से किसी दूसरे नर,पशु पक्षी मेहमान,पीड़ित और संत को पहले भोजन कराओ ! वनस्पतियों को बचने हेतु उन्हें जल व खाद दो ! आदि आदि ! लेकिन पाश्चात्य संस्कृति ये सिखाती है की कुछ भी हो जाए पहले स्वयं का "स्वार्थ"पूरा करो ,बाद में अगर तुम्हारे पास समय,धन और दूसरे स्रोत ज्यादा हैं और उसमे कोई फायदा भी है तो उसे जता-जता कर थोड़ा थोड़ा दो ! एक संस्कृति तीसरी भी है,जिसे राक्षसी सभ्यता कहा जाता है , उसके अनुसार अपने फायदे हेतु हर वस्तु को छीनलो ,चुरालो या लूटलो ,सब जायज़ है चाहे किसी का कत्ल ही क्यों ना करना पड़े !?
                        आज हर शख्स परेशान सा नज़र आता है ,लेकिन उसकी परेशानी के ऐसे ऐसे कारण हैं कि जैसे लगता है कि परेशां रहना उसका शुगल है !कइयों को परेशां रहने और दूसरों को परेशान करने में भी मज़ा आता है !जैसे हमारा मीडिया ! अख़बार हों या इलेक्ट्रॉनिक मीडिया ,सोशल मीडिया हो या लेखक,कवि ,सब सुबह से लेकर परेशां करने वाली बातें ही बताएँगे! ना जाने किस गधे ने इन्हें ये पढ़ाया है कि नकरात्मक विषय ही जनता को भाते हैं ? फिर ऊपर से तुर्रा ये कि बार बार महीनों तलक विषय को नहीं छोड़ते !
                  दूसरी तरफ देखो तो हम अपने दुःख से ज्यादा दूसरे के सुख से दुखी रहते हैं ! या फिर एक दूसरे से !नेता से जनता परेशान ,तो जनता से अफसर परेशां,अफसरों से बाबू परेशान तो बाबुओं से अध्यापक-कर्मचारी परेशान ,अध्यापकों से छात्र परेशान तो छात्रों से छात्राएं परेशान !छात्राओं से अभिभावक परेशान !मतलब जिधर देखो परेशान लोग ही दिखाई देंगे आपको !सभी किसी बड़े सुख की तलाश में भटक रहे हैं !इस बड़े सुख के चक्कर में इंसान छोटे छोटे सुखों का मज़ा लेना भूल जाता है ! जैसे कोई रोमांटिक गाना गाकर भी आनंदित हुआ जा सकता है ,लेकिन नहीं गाएंगे !डिप्रेशन में चले जाएंगे हज़ारों की दवाइयां खा जायेंगे ,लेकिन दूसरों को चुटकुले नहीं सुनाएंगे !एक ग़ज़लकार ने क्या खूब लिखा है कि -"इस शहर में हर शख्स परेशां सा क्यों है....!? आईना हमें देखकर हैरान सा क्यों है....!
                     सभी से निवेदन कृपया आनंद से रहें और रहने दें !जय हिन्द कहें या वन्दे -मातरम !!

प्रिय मित्रो ! 
                    सादर नमस्कार !
                                       कुशलता के आदान-प्रदान पश्चात् समाचार ये है कि हमारे इस ब्लॉग में ज्वलन्त विषयों पर लेख-टिप्पणियां होती हैं।जो मित्र पढ़ने में रूचि रखते हों,अवश्य पढ़ें,फिर अपने मित्रों को शेयर करें और अपने अनमोल कॉमेंट्स भी रोज़ाना लिख्खा करें।इसका लिंक ये है - www.pitamberduttsharma.blogspot.com. मुझसे संपर्क करने हेतु मेरा ई मेल एड्रेस ये है - pitamberdutt.sharma@gmail.com. मेरा मोबाईल नम्बर ये है - 9414657511. सधन्यवाद ! आपका अपना मित्र पीताम्बर दत्त शर्मा,1/120,आवासन मंडल कालोनी,वार्ड नम्बर 10,सूरतगढ़।जिला श्रीगंगानगर,राज. भारत 

2 comments:

  1. आपकी इस प्रविष्टि् के लिंक की चर्चा कल बुधवार (20-09-2017) को बहस माता-पिता गुरु से, नहीं करता कभी रविकर : चर्चामंच 2733 पर भी होगी।
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    सूचना देने का उद्देश्य है कि यदि किसी रचनाकार की प्रविष्टि का लिंक किसी स्थान पर लगाया जाये तो उसकी सूचना देना व्यवस्थापक का नैतिक कर्तव्य होता है।
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    चर्चा मंच पर पूरी पोस्ट अक्सर नहीं दी जाती है बल्कि आपकी पोस्ट का लिंक या लिंक के साथ पोस्ट का महत्वपूर्ण अंश दिया जाता है।
    जिससे कि पाठक उत्सुकता के साथ आपके ब्लॉग पर आपकी पूरी पोस्ट पढ़ने के लिए जाये।
    हार्दिक शुभकामनाओं के साथ।
    सादर...!
    डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक'

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  2. इस शहर में हर शख्स परेशान सा क्यूँ है

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