" AMAR SINGH " ------------- " BOL - BABY - BOL-------!!!!!!

दलाल मानसिकता वाले दोस्तों  ! , कमीशन भरा नमस्ते !जी हाँ दोस्तों,ये एक प्रकार की मनसिकता ही होती है कि कोई व्यक्ति सेवा करते - करते अपना मेहनताना लेने लग जाता है या फिर कोई चतुर व्यक्ति अपना हित साधने हेतु उस सेवा भावी को मेहनताना देना शुरू कर देता है , तो उस कमाई से जलने वाले लोग उस " मेहनताने " को दलाली और लेने वाले को दलाल कहने लग जाते हैं . पहले जब श्री - श्री १०८ श्री नरसिम्हा राव जी की सरकार अल्पमत में थी ,तब भी दलाल टाइप के लोगों ने बचाया था , और जब अपने " सरदार शरिफां दा" मन मोहन सिंह दी सरकार खतरे में आ गयी तो भी इन्ही सेवा भावी ,"दलाल टाइप " के अपने "अमर सिंह " ने अपनी फोज से बचाया | पता चल गया , शोर मच गया , लेकिन अपने अमर जी का कुछ नहीं बिगड़ा , क्योंकि वो उस समय समाजवादी पार्टी के सर्वे सर्वा थे ,और सरकार उस पार्टी के समर्थन पर टिकी थी और टिकी है , लेकिन आज अपने अमर जी महा सचिव नहीं हैं | तो हो गया " इशारा " और पुलिस जी ने बुला लिया ,परन्तु वह हमारे समाजसेवी " अमर सिंह " जी ,इसे कहते हैं " मालिक भक्ति " पठ्ठे  ने मुंह नहीं खोला ? " मुझे नहीं पता " की माला जपनी शुरू कर दी , पता है पुलिस तीसरी श्रेणी तो अपनाएगी नहीं ,फिर डर किस बात का , भगवान न करे अगर पुलिस ने तीसरा नेत्र खोलना भी चाहा तो " मानवीय अधिकारों के रक्षक "किस दिन काम आयेंगे जी | अभी तक तो पिछले बैगों का ही पता नहीं चला ,जांच चलती है तो चलती रहे नरसिम्हा राव जी ने तो राज चला लिया न ,? लेने वाले आज भी राज भोग रहे हैं  क्या तकलीफ है भला उनको जी | ऐसे ही अमर जी " अमर " हो जायेंगे ? और वो स्वर्गों में बैठ कर ये गाना गायेंगे कि " जनता की तो टायं - टायं फिस -फिस - फिस " जय राम जी की बोलना पड़ेंगा जी ???????

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