Friday, July 1, 2011

" CHATUR - NETAAON - KA - DO - DHARI - "HATHIYAR"----" VOTE" ---? ? "

भोले  - भाले दोस्तों , नमस्कार ! इस देश में हर वक्त कोई देश में कानून व्यवस्था ठीक नहीं होने के कारन "रो" रहा है ,कोई विधायिका ठीक नहीं होने का रोना रो रहा है ,तो कोई प्रशासन व्यवस्था ठीक नहीं होने का ? कंही भ्रष्टाचार है तो कंही अत्याचार ? कोई आदर्शों का रोना रो रहा है तो कोई नियमों का ? सब बेबस नज़र आ रहे हैं !" सिविल सोसाइटी " और बाबा राम देव सर्कार की मार खाए चुप हुए और इज्जत बचाए बैठे हैं ? सर्कार उनकी भी जाँच करवा रही है ?कौन जनता का हितेषी है और कौन दुश्मन पता ही नहीं चल रहा ??देश की अस्मत तक को खतरा हो गया है ?? हर आदमी परेशां सा है | " नानक दुखिया सब संसार " लगता है जैसे भारी कलयूग आ गया है ? बस अब प्रलय आने वाली है ?? कुछ भी सूझता नहीं है | न हमें सरकार के मंत्रियों पर भरोसा है ?न हमें विपक्ष पर और न ही प्रशासन तथा मिडिया पर ? केवल न्यायव्यवस्था ही एक रौशनी की किरण दिखाई पड़ती है |वो भी धुंधली सी ? क्या सचमुच सारे रास्ते बंद हो गए हैं ?क्या ऐसा ही चलता रहेगा ? बुधिजन ,पंडित लोग किस मर्ज़ की दवा हैं ? भगवान श्री कृषण ने गीता में कहा है कि " यदा - यदा ही धर्मस्य ग्लानिर भवती भारत ,अभुथान्मधर्मस्य तदात्म्नम सृजीयम्य्हम " |अर्थात  जब कभी भी भारत में धर्म कि हानी होती या ग्लानी होती है , तब - तब परमात्मा किसी ऐसी आत्मा कि संरचना करता है जो उस समय के पापियों   का संहार करता है | अब यहाँ कई सवाल पैदा हो जाते हैं ,१.क्या अब तक भारत में इतने पाप नहीं हुए जितने परमात्मा के अवतार हेतु वांछित हैं | या फिर पापी ज्यादा हो गए हैं भगवान से इतने पापी मारे नहीं जायेंगे ??? इस्ल्ये ऊपर वाला सोच रहा होगा कि पहले इन्हें आपस में लड़ - लड़ के मर लेने दो , जब गिनती कम हो जाये गी तब अवतार ले लेंगे ?? जल्दी क्या है ? तो क्या करे जनता , कंहाँ जाये ?? -------!!!!!!! तो लीजिये मेहरबान - कदरदान ,कर लो इधर ध्यान !!!! आज में आपको बताने वाला हूँ एक ऐसा तरीका, जिस से न खून बहेगा न ही लड़ाई मर कुटाई होगी ?? आप कि सारी समस्याओं का हल ,संवेधानिक तरीके से निकलेगा ??? केवल पांच बातों का ध्यान करना होगा | १. अपने मोहल्ले,कसबे और जिले में ऐसे आदमियों को ढूंढें जो निहायत इमानदार हों | चाहे वो गरीब हों ,लकिन ज्ञानवान हों | २.फिर सब मिलकर उन्हें विश्वास दिलाएं कि हम सब उनके साथ हैं | ३. फिर स्वयं प्राण लें कि हम किसी लालच में नहीं आयेंगे, जाती और पार्टियों के पीछे नहीं भागेंगे | ४.जो पहले से राजनीती में है उसके पास भी नहीं फटकेंगे |५.और अंत में उन भाले मानुषों ,ज्ञानी और शरीफ लोगों को " वोट " दे कर , डायरेक्टर ,पञ्च,सरपंच ,जिला प्रमुख,पार्षद ,नगर पालिका अध्यक्ष , विधायक,और संसद सदस्य बनायेंगे | ऐसा बीस साल तक करना पड़ेगा ? तब कंही जाकर  देश में कुछ - कुछ सुधार होना शुरू होगा |इसके सिवाय और कोई रास्ता शांति पूर्वक तो है नहीं , एक रास्ता क्रांति वाला है ? जिसमे खून बहेगा लेकिन लम्बे समय तक फिर बुराई नहीं दिखेगी | यानि "आपरेशन " अब कौन सा रास्ता चुनना है ये फैसला जनता को करना है | अब तक हम चतुर नेताओं के बहकावे में आकर " वोट " नामक हथियार को अपने ऊपर ही चला लेते हैं और स्वयं जनता ही दुःख प् रही है |नेता लोग चुनावों के समय पर ऐसे - ऐसे नाटक रचते हैं कि हम धोखे में आ जाते हैं | उनकी माया फ़ैलाने में "प्रिंट और इलेक्ट्रोनिक मिडिया "महत्वपूरण भूमिका निभाते हैं ??? पैसा हर आदमी के सर चढ़ कर बोलने लगता है | लालच हमारी सोच को ख़तम कर देता है | इसलिए ------ जागो ------जागो ---------जागो -------- जागो ---------जा--------------गो------!!!!!!!!!!!!!!

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