Saturday, August 6, 2011

" D A D A - K I - S A Z A - P O T E - K O - - - " AARAKSHANN "..? ? ? ?

" आरक्षण का प्रसाद पाए , या मार खाए दोस्तों " !!नमस्कार !!! इस देश दुनिया में बहुत से मानवाधिकार आयोग बने हुए हैं , और न जा ने कितनी एन.जी.ओ. संस्थाएं हैं जो ये दावा करती हैं की वो मानव जाति के मूल अधिकारों हेतु लड़ रही हैं | लेकिन फिर भी देश - दुनिया में अन्याय होता ही जा रहा है | जिसमे से एक है " आरक्षण " | १९४७ में जब देश आज़ाद हुआ तब ये महसूस किया गया कि भूतकाल में छोटे " काम " करने वाली कई जातियां इस वजह से पिछड़  गयी हैं | इसलिए इन्हें कुछ समय हेतु "आरक्षण " दिया जाए , ताकि ये बड़ी जातियों के बराबर आ सकें | लेकिन वो " कुछ देर " आज तक ख़तम नहीं हुई |क्योंकि बीच में " राजनीती " जो आ गयी | नतीजा ये हुआ कि " जो पाप दादा - पड़दादा  ने किया या नहीं किया पता नहीं " लेकिन उस कि सजा उसके " पोतों - पड़पोतो " को दी जा रही है | न कोई न्यायालय बोल रहा है , और नाही कोई " मानवाधिकार आयोग " | सारे एन.जी .ओ. भी चुप है , और " साले "सारी , सारे नेता तो वोट बैंक बना रहे हैं | कोई क़त्ल भी कर देता है तो उसकी सज़ा उसके बच्चों को कभी न ही मिलती | लेकिन यंहा तो आज कि सारी स्वर्ण जातियों के बच्चों के भविष्य के साथ खेला जा रहा है | उन्हें ऐसे अपराध कि सजा दी  जा रही है जो उन्हों ने तो निश्चित रूप से न ही किया , उनके दादा - पड़दादा ने भी किया है या न ही किया पता नही ? लेकिन क्योंकि वो स्वरण जाती के बच्चे हैं इस लिए उन्हें ये " आरक्षण " का दंड भोगना ही पड़ेगा | किसी जाति विशेष में पैदा होना क्या किसी के बस कि बात है | अगर नही तो उसे ये " आरक्षण " का दंड क्यों ????? क्या कोई बताएगा ????६५ साल से हम " आरक्षण " के द्वारा एक " गढ्ढा " भरने कि नाकाम कोशिश किये जा रहे हैं ,लेकिन जो पास में जो दूसरा "स्वर्ण जातिका गढ्ढा " हो रहा है उसे कौन भरेगा ??????? है किसी के पास इसका जवाब ??? या स्वर्ण जाति के युवाओं कि "लाशों " से भरोगे इसे ????"उस " क्रांति से हुए नुकसान का कौन जिम्मेदार होगा ??? इसी लिए में कहता हूँ संभल जाओ देश के कर्णधारो !!!!!!! ये " आरक्षण " आतंकवाद से भी बड़ा " बोम्ब " है | ये फटेगा तो प्रलय आ जाएगी ??? यही समस्या है हमारी " जब कोई समस्या गर्भ में पल रही होती है " तब हम उसकी और ध्यान ही नही देते | और जब वो बड़ी हो कर एक कैंसर के रूप में फट पड़ती है तो हम कहते है कि ये कंहा से आ गयी ????? अब चाहे वो "आतंकवाद हो या नक्सलवाद " " असम समस्या हो या चीन समस्या " सब हमारे सोते रहने कि वजह से ही पैदा हुई हैं | ? ? ? ? ? ? ? पुराने नेता तो पुराणी प्रकीर्ति के ही हैं और रहेंगे | कृपया सभी आतंकवादी संगठनों से प्रार्थना है कि वो एक बार फिर हमारी संसद पर हमला करें , और सारे पुराने नेताओं से हमारा "पिंड " छुड़ा देवें | और हम देश हित में " नए - नेताओं " का चुनाव कर सकें ? हमें तो इस " व्यवस्था " ने " नपुंसक " जो बना दिया है | ? ? ?  " बोलो - जय - श्री - राम !!!  ------- हो गया ----- काम ??////????????///////???????//////??????

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