Wednesday, February 13, 2013

" मेरा रंग दे बासन्ती चोला.....माये "....!!!

कामदेव का पूजन होता था वसन्तोत्सव के दिन

आज हम वसन्त ऋतु में वसन्त पंचमी और होली त्यौहार मनाते हैं किन्तु प्राचीन काल में वसन्तोत्सव मनाया जाता था। वसन्तोत्सव, जिसे कि मदनोत्सव के नाम से भी जाना जाता है, मनाने की परम्परा हमारे देश में अत्यन्त प्राचीनकाल से ही रही है। संस्कृत के प्रायः समस्त काव्यों, नाटकों, कथाओं में कहीं न कहीं पर वसन्त ऋतु और वसन्तोत्सव या मदनोत्सव का वर्णन अवश्य ही आता है। वसन्त को ऋतुराज माना गया है क्योंकि यह मानव की मादकता एवं कोमल भावनाओं को उद्दीप्त करता है। वसन्त पंचमी से लेकर रंग पंचमी तक का समय वसन्त की मादकता, होली की मस्ती और फाग का संगीत से सभी के मन को मचलाते रहता है। टेसू और सेमल के रक्तवर्ण पुष्प, जिन्हें कि वसन्त के श्रृंगार की उपमा दी गई है, सभी के मन को मादकता से परिपूर्ण कर देते हैं। शायद यही कारण है वसन्तोत्सव मनाने की।

वसन्तोत्सव का दिन कामदेव की पूजा की जाती थी। महाकवि “भवभूति” के ‘मालती-माधव’ संस्कृत नाटक के अनुसार एक विशेष मदनोद्यान का निर्माण करके वहाँ पर मदनोत्सव मनाया जाता था।

“मदनोद्यान- जो विशेष रूप से इस उत्सव के लिए ही बनाया जाता था – इसका मुख्य केन्द्र हुआ करता था। उसमें कामदेव का मन्दिर हुआ करता था। इसी उद्यान में नगर के स्त्री-पुरुष एकत्र होकर भगवान कन्दर्प की पूजा करते थे। यहाँ पर लोग अपनी-अपनी इच्छा के अनुसार फूल चुनते, माला बनाते, अबीर-कुंकुम से क्रीडा करते और गीत-नृत्य आदि से मनोविनोद किया करते थे। इस मंदिर में प्रतिष्ठित परिवारों की कन्याएँ भी पूजनार्थ आया करती थीं और मदनोत्सव की पूजा करके मनोवांछित वर की प्रार्थना करती थीं।” (लिंक)

उल्लेखनीय है कि कामदेव प्राणीमात्र की कोमल भावनाओं के देवता हैं और उन्हें मदन, मन्मथ, प्रद्युम्न, मीनकेतन, कन्दर्प, दर्पक, अनंग, काम, पञ्चशर, स्मर, शंबरारि, मनसिज (मनोज), कुसुमेषु, अनन्यज, पुष्पधन्वा, रतिपति, मकरध्वज तथा विश्वकेतु के नाम से भी जाना जाता है।

साभार- Gauri Rai जी !!

                                    हमारी सांस्कृतिक परम्परा में कौमुदी महोत्सव यानि "बसंत-पंचमी" एक अत्यंत लोकप्रिय उत्सव था लेकिन समय और काल-गति में विश्व के दूसरे देश हम से आगे बढे और उनके उत्सव भी हम से अधिक स्वीकार्य हो गए ! मेरे लिए प्रेम जैसी ईश्वरीय अनुभूति को एक दिन में बाँधने का विचार ही बेहद अप्रासंगिक हैं लेकिन फिर भी जो दोस्त आज के दिन को अपने लिए अहम् समझते हैं उन सब को, कुंवारों की ये "आखा-तीज" ,"प्रेम चतुर्दशी" की बधाई ...!
                                          आज इन so called धर्मरक्षक पहरेदारों / चौकीदारों / ठेकेदारों का दिन है । जिस तरह सालाना परेड के दिन कोई भी पुलिसवाला वर्दी को धोकर, कलफ़ चढ़ा कर, कड़क प्रेस करता है; उसी तरह हमारी 'संस्कृति' की रक्षा के नाम पर आज ये पहरेदार कुर्तें की आस्तीन चढ़ाए आर्चीस की गैलेरी से लेकर पार्कों और रेस्टरॉ में धमकाते / उठक-बैठक कराते नजर आएंगे .!!! गोकि भारत का समाज और संस्कृति एक संत वेलेन्टाइन से खौफ खाया हो और प्रणय-निवेदन से संस्कृति की चूलें हिल जाएगी .!!!



. . . ये कैसी अप'संस्कृति है ? जहाँ धर्म, अर्थ, काम, मोक्ष का वर्णन चार पुरुषार्थों के रूप में किया जाता हो ! जहाँ राधा-कृष्ण के महामिलन का दिन बसंतोत्सव के रूप में मनाया जाता हो ! जहाँ मदनोत्सव, कौमुदी महोत्सव और रास की शानदार परम्परा रही हो ! वहाँ, इटली के एक विवाह कराने वाले संत की याद का दिन हमारे धर्म-रक्षकों को भारतीय संस्कृति का विरोधी लगता है ? क्या सोच है, इस लठैत-संस्कृति की .!!! 

. . . भारत की आदि संस्कृति विविधतापूर्ण सोच-समझ, आस्था-विश्वास के होते हुए भी बैसिकली सामासिक चरित्र की संस्कृति है, जो परस्पर समन्वय और सम्मिश्रण में भरोसा करती है । हमारी सभ्यता कभी किसी अन्य धर्म या संस्कृति को अतिक्रमित या डिक्टेट करने वाली नहीं रही है । तो फिर, इतने बड़े सांस्कृतिक समाज का प्रतिनिधित्व करने का ठेका कोई एक संगठन कैसे ले सकता है ! हमारी सामुहिक धार्मिक और सांस्कृतिक पहचान का एकमैव प्रवक्ता बनने का दावा भी कोई नहीं कर सकता ! और हम ऐसे किसी भी संगठन या आवाज को अपना समर्थन भी नहीं दे सकते ।

. . . हम भास, कालिदास, भृतहरी के खुले विचारों को पढ़े लोग है । हम खजुराहो के मंदिर बनाने और संजोने वाले लोग है । हम उस देवता के पूजक लोग है, जो नहाती गोपियों के वस्त्र चुराकर अटखैलियां करता हैं । हमारे वात्सायनरचित कामसूत्र को पांचवा वेद माना जाता है । और हम डरेंगे - प्रेम के इजहार से ..!!! कहा कैफ़ी आज़मी ने कि, "यारो ! सितम अब न सहो, खोलो ज़बाँ चुप न रहो .." वेलेन्टाइन-डे और बंसतोत्सव की शुभकामनाएँ ।।

                            क्यों मित्रो !! आपका क्या कहना है ,इस विषय पर...??
प्रिय मित्रो, ! कृपया आप मेरा ये ब्लाग " 5th pillar corrouption killer " रोजाना पढ़ें , इसे अपने अपने मित्रों संग बाँटें , इसे ज्वाइन करें तथा इसपर अपने अनमोल कोमेन्ट भी लिख्खें !! ताकि हमें होसला मिलता रहे ! इसका लिंक है ये :-www.pitamberduttsharma.blogspot.com.

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