Saturday, February 9, 2013

" खत्म हुआ - अफज़ल-गुरु का " फ़साना "...???

" खत्म हुआ - अफज़ल-गुरु का " फ़साना "...???
 अफजल गुरू को फांसी पर लटकाया 
नई दिल्ली। लोकतंत्र के सबसे बड़े मंदिर पर हमले के गुनहगार अफजल गुरू को आज सुबह फांसी के फंदे पर लटका दिया गया। जैश-ए-मोहम्मद के आतंकी अफजल गुरू को मुंबई हमले के गुनहगार अजमल आमिर कसाब की तरह ही फांसी दी गई। गृह सचिव आरके सिंह ने बताया कि अफजल को सुबह 8 बजे दिल्ली की तिहाड़ जेल में फांसी दी गई। अफजल को फांसी दिए जाने के बाद जम्मू कश्मीर में अलर्ट जारी कर दिया गया है। 

अफजल को फांसी पर लटकाए जाने की सिफारिश 23 जनवरी को राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी को भेजी गई थी। 26 जनवरी को राष्ट्रपति ने अपनी सहमति दे दी। 13 दिसंबर 2001 को संसद पर हमला किया गया था। इसमें 9 सुरक्षाकर्मी शहीद हो गए थे। इनमें पांच पुलिस कर्मी शामिल थे। 

अफजल गुरू को इस मामले में दोषी करार दिया गया। 18 दिसंबर 2002 को दिल्ली की एक कोर्ट ने अफजल को फांसी की सजा सुनाई। 29 अक्टूबर 2003 को दिल्ली हाईकोर्ट ने फांसी की सजा को बरकरार रखा। सुप्रीम कोर्ट से भी अफजल को कोई राहत नहीं मिली। 4 अगस्त 2005 को सुप्रीम कोर्ट ने भी फांसी की सजा को बरकरार रखा। 

अफजल को 20 अक्टूबर 2006 को ही फांसी होने वाली थी लेकिन उसकी पत्नी ने राष्ट्रपति के पास दया याचिका दाखिल कर दी। इसके बाद फांसी दिए जाने पर रोक लग गई। इस बीच कुछ राजनीतिक दलों और मानवाधिकार संगठनों ने कहा कि अफजल गुरू का सही ट्रायल नहीं हुआ है। इसलिए उसकी सजा को कम किया जाए लेकिन मुंबई हमले के दोषी कसाब को फांसी दिए जाने के बाद अफजल को फांसी पर लटकाने की मांग तेज होने लगी। 

भाजपा ने उसे जल्द से जल्द फांसी पर लटकाने की मांग की। अगस्त 2011 में गृह मंत्रालय ने उसकी दया याचिका की सिफारिश भेजी। 10 दिसंबर 2012 को गृह मंत्री सुशील कुमार शिंदे ने कहा कि 22 दिसंबर को संसद का शीतकालीन सत्र समाप्त होने के बाद वह अफजल की फाइल की समीक्षा करेंगे।
                                             यदी आतंकवादियों का कोई धर्म नहीं होता, तो अफजल गुरू ने अपनी अंतिम इच्छा में "कुरान" क्यों मांगा ??
यदी आतंकवादियों का कोई धर्म नहीं होता, तो अफजल गुरू को फाँसी के बाद इस्लामिक रीति रिवाज से क्यों दफनाया गया ??
यदि मुस्लिम आतंकवादियों का विरोध करते हैं तो श्रीनगर में कर्फ्यु क्यों लगाना पड़ा ।
अब कहाँ गये शिंदे, दिग्विजय और मणिशंकर ??
और केजरीवाल ! इस बात का खुलासा कौन करेगा ??
                                                                      
संसद पर हमले के मास्टरमाइंड अफजल गुरु को शनिवार सुबह फांसी पर लटका दिया गया। अफजल गुरु की फांसी की खबर आने के बाद से ही तमाम तरह के सवाल ट्वटिर और फेसबुक पर उठाए जा रहे हैं। 
 
खबर आने के बाद से ही अफजल गुरु ट्विटर पर ट्रेंड्स में टॉप पर है। पढ़िए कुछ चुनिंदा टिप्पणियां..
 
 
Rajdeep Sardesai ‏
कसाब को शीत सत्र से पहले लटकाया गया था और अफजल गुरु को बजट सत्र से पहले। क्या यह संगोग मात्र है?
 
 
Ramesh Srivats 
अफजल गुरु को लटकाया गया। उसका करियर संसद में शुरू हुआ और तिहाड़ में खत्म हो गया। यह तो जाना पहचाना रास्ता है।
 
Kanchan Gupta ‏
अफजल गुरु को 8 साल पहले ही लटका दिया जाना चाहिए था। लेकिन कांग्रेस राजनीतिक कारणों से इसे टालती रही। और अब राजनीतिक कारणों से ही सरकार ने उसे फांसी पर टांग दिया। 
 
Hamid Mir 
'अफजल गुरु के बारे में अरुंधति रॉय की कुछ अंतिम लाइनें पढ़ी, मुझे लगता है कि वह बेगुनाह था। तिहाड़ जेल में दिए गए अपने अंतिम साक्षात्कार में अफजल गुरु ने कहा था कि कश्मीरी शांत नहीं बैठेंगे, और यही हुआ। भारत में मेरे कुछ मित्रों के मुताबिक कांग्रेस की सरकार पाकिस्तान के साथ तनाव और बढ़ाएगी ताकि आगामी चुनावों में फायदा उठाया जा सके।'
 
भारत सरकार अफजल गुरु की फांसी से डरी हुई है। उसे दिल्ली की तिहाड़ जेल में ही दफना दिया गया है। गुरु हीरो बन गया है। जियो न्यूज के ताजा सर्वे के मुताबिक 58 प्रतिशत पाकिस्तानी मानते हैं कि भारत के साथ रिश्ते अब नहीं सुधर सकते जबकि 29 प्रतिशत मानते हैं कि तनाव कम हो सकता है।
 
 
Akil Bakhshi 
अफजल गुरु को लटका दिया गया। साबित हो गया कि भारत की संसद पर हमला करके बचा नहीं जा सकता। राष्ट्रपति को बधाई।
 
Agnivo
लड़कियों के म्यूजिक बैंड का मामला सिर्फ इसलिए ही उठाया गया था ताकि अफजल गुरु से ध्यान हटाकर उसे चुपके से लटकाया जा सके।
 
Sathya Anand 
अफजल गुरु से सहानुभूति रखने वाले लोगों को पाकिस्तान भेज दिया जाना चाहिए। आतंकवादी राष्ट्र का दुश्मन होता है, शहीद नहीं।
 
Malini Parthasarathy
अफजल गुरु मामले की न्यायिक प्रक्रिया पर उठे सवालों और कश्मीर के संवेदनशील हालातों के मद्देनजर यह कहा जा सकता है कि सरकार को इसकी बड़ी राजनीतिक कीमत चुकानी पड़ेगी।
 
Abhijit Majumder ‏
कम से कम चुनाव हार के डर ने कांग्रेस को यह तो बता कि संसद पर हमला करने वालों को फांसी पर लटकाना जरूरी है।
 
Kiran Kumar S ‏
जब अफजल गुरु ने संसद पर हमला करवाया था तब हमारे देश के 7 जवानों ने सांसदों को बचाने के लिए अपनी जान दे दी। क्या किसी भी राजनेता ने शहीदों के परिवारों के प्रति संवेदना व्यक्त की है।
 
Amrit Hallan ‏
सरकार ने गुपचुप तरीके से अफजल गुरु को लटका दिया और कुछ लोग इसे ऐतिहासिक दिन बता रहे हैं। यह हमारे समाज के बारे में बहुत कुछ कहता है।
                                                                     
 क्यों मित्रो !! आपका क्या कहना है ,इस विषय पर...??
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1 comment:

  1. यह तो दे-सबेर होना ही था।
    मगर फिर बी बहुत समय लगाया!

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