दंगाइयों का नहीं मानसिकता का दोष है--! क्या हम उस मानसिकता को समाप्त करने की इक्षा शक्ति रखते हैं---? ''मुज़फ्फरनगर दंगा''


शनिवार, 12 अक्तूबर 201


  आखिर दंगे होते क्यों है--? क्या हमने इसपर विचार किया अथवा करने का सहस कर सकते हैं ! अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति जूनियर बुश ने कहा कि हज़ार वर्ष तक भारत को इस्लाम ने रौदा (हिन्दू बहन बेटियों से साथ बलात्कार) फिर भी भारतीय इस्लाम को समझ नहीं पाए, बंगलादेशी लेखिका ने कहा की लगता है की भारत की सेकुलर नीति हिन्दू समाज को समाप्त कर देगा उस इतिहास को लिखने वाला कोई नहीं बचेगा--! यह कौन सी मानसिकता है और उसे कौन बढ़ावा दे रहे हैं इस पर विचार करने की आवस्यकता है, 

         जब हम विचार करते हैं तो दिखाई पड़ता है की सारे के सारे इस्लामिक देश भी आतंकवाद से जूझ रहे हैं फिर यह विचार अवश्यक हो जाता है की आखिर दंगे क्यों ? इसका ग्रन्थ और प्रेरणा श्रोत क्या है ? बहुत गहराई से विचार करने से पता चलता है की ये तो कुरान और मुहम्मद ही इसका मूल श्रोत है क्योंकि एक हाथ में तलवार दुसरे हाथ में कुरान लेकर विश्व की बहुत सारी महान संस्कृतियाँ और देश समाप्त किया गए,  आज इस्लामिक देशों में कुरान की परिभाषा अपने -अपने हिसाब से कर रहे हैं इस्लामिक देशों को भी कुरान के आधार पर चलाने के लिए संघर्ष कर रहे हैं प्रतिदिन आतंकवादी हामले में सैकड़ो निरीह मारे जा रहे हैं सभी इस्लाम मतावलंबी ही फिर भी दंगे क्यों ? लगता है की इस इस्लामिक आंधी में अरबियन देश भी टूटने से नहीं बचेगे फिर अमेरिका को अपनी भूमिका भी तय करनी पड़ेगी.

             भारत में हमेसा सभी धर्मों का आदर रहा है फिर यहाँ दंगे क्यों ? इसे समझने की आवस्यकता है भारत हिन्दू मतावलंबी देश होने के कारन सभी को यहाँ सम्मान है पूजा कार्नर व पूजा स्थल बनाने की छूट है लेकिन जब-जब हिन्दू समाज कमजोर हुआ है तब-तब दंगे ही नहीं हुए बल्कि देश भी टूट गया इस नाते कारण ढूढ़ना होगा की दंगे क्यों होते है तो दंगों की अपनी मानसिकता होती है, जब हम यह विचार करते हैं की केवल मेरा धर्म मेरा धर्किम ग्रन्थ ही सही उसी प्रेरणा से नालंदा-तक्षशिला जैसे विश्व विद्यालय जला दिए गए और हम देखते रहे, फिर मेरा ही धार्मिक स्थल पवित्र है हजारों मंदिरों को तोड़ डाला मेरा अनुयायी ही सही है सैकड़ों करोण सनातन धर्मियों को अन्याय पुर्बक धर्म के नाम पर मार डाला.
              इस्लाम मतावलंबियों की आज भी वही मानसिकता बनी हुई है वे अब हिन्दू समाज को स्वीकार करने को तैयार नहीं वे अब हिन्दू समाज के साथ नहीं रहना चाहते वे हिन्दू समाज पर सासन करना चाहते है इसलिए आये दिन हिन्दू बहन बेटियों का अपरहण 'लव जिहाद' आम बात हो गयी है जहाँ मक्का में किसी हिन्दू को प्रवेश नहीं वही अयोध्या में श्रीरामजन्म भूमि पर बाबरी मस्जिद हिन्दू क्या करे ? वास्तव में इसकी जड़ में कुरान है जब-तक में संसोधन नहीं होगा तब-तक दंगे बंदी नहीं होगा क्यों की कुरान उनका धार्मिक ग्रन्थ और मुहम्मद उनका प्रेरणा श्रोत कुरान ने दुनिया को बाट कर रख दिया है या तो इस्लाम को स्वीकार करो अथवा स्वर्ग सिधारो इनका इतिहास तो यही बताता है.

         क्या हम इसके लिए तैयार हैं ? क्योंकि मुहम्मद को आदर्श नहीं माना जा सकता उनके कर्म हो सभ्य समाज के लिए स्वीकार नहीं, कुरान बिना संसोधन के यदि भारत रही तो दंगे होते ही रहेगे और भारत बटेगा भी कोई भी उसे रोक नहीं सकता, सेकुलर के नाम पर देशद्रोही कदम, सेकुलर, कुरान और इस्लाम की प्रबृति ही यही है लगता है की हमारी नियति भी.  

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