Tuesday, March 8, 2016

कहाँ गए वो लोग (शरणार्थी-यात्री और गैर कानूनी मेहमान)?? - पीताम्बर दत्त शर्मा मो.न. - +9414657511

1947 को जब देश आजाद हुआ तो देश का बंटवारा भी हुआ था !करोड़ों रुपये और अपनी ज़मीन देकर हमने आज के पाकिस्तान और बांगला देश को बसाया था !उससे पहले भी इस देश के कई टुकड़े हुए थे तब भी हमने ही सब तरह का घाटा सहा था ! लाखों लोग मारे,लुटे गए !लाखों बेघर कर दिए गए !हज़ारों माताओं बहनों की इज़्ज़त भी लूटी गयी !धन की लूट तो होनी ही थी !इसके बावजूद वो तो पाकिस्तान बन गया लेकिन हमारा भारत आजतक हिन्दुस्तान नहीं बन पाया , बेचारा "इण्डिया"बनकर रह गया !
                पहले तो सिर्फ अँगरेज़ ही हमारे शासक थे लेकिन आज हर कोई हमारा शासक बन सकता है जिसके पास ज्यादा लोगों का "बहुमत"हो ! फिर चाहे वो लोग चोर,डाकू,बेईमान या विदेशी ही क्यों ना हों ??देश आजाद होने के बाद जिन्होंने शासन संभाला उनमें ज्यादातर लोग अंग्रेजों के "पिठ्ठू"रह चुके थे !इसीलिए उन्होंने ऐसा क़ानून ,इतिहास और सिस्टम बनाया जिससे आम जनता उनके शिकंजे में निकलने की बजाये फंसती ही चली गयी !लगातार 55 सालों तक भारत में शासन करने में एक विशेष दल का कामयाब होना भी देश की आम जनता हेतु नुकसानदायक रहा !
                        अन्य नुकसानों के साथ-साथ हमें जिस बड़ी समस्या से आज भी जूझना पड़ रहा है , वो है भारत में वाज़िब और गैर वाजिब तरीके से भारत में बसे लोगों द्वारा भारत में जन्मे लोगों के अधिकारों पर डाका डाला जाना !1947 से लेकर आज तक हम इस समस्या से निजात नहीं पा सके हैं ! ना जाने कितने लोग ना जाने किस-किस जगह से आकर हमारे बीच में घुल-मिल गए हैं कि आज अगर हम चाहें भी तो उनको अलग नहीं "चिन्हित"कर पाएंगे ! पहले तो वो लोग शहरों के बाहर झोंपड़ियां बनाकर रहते हैं फिर हमारे नेता लोग उनके वोटों के लालच में राशन-कार्ड और वोट बनाते हैं फिर वो लोग हामरे देश में जन्मे लोगों को मिलने वाली रियायतों पर हाथ साफ़  ! नौकरियां पाना और अफसर बनना भी उनके लिए आसान काम हो जाता है !
                                जब हम एक राज्य के वासी को दुसरे राज्य में नौकरियां नहीं देते हैं तो भला दुसरे देश से आये लोगों को हम अपना हक़ कैसे दे सकते हैं ! इसलिए भारत के सभी नागरिकों और सुरक्षा एजेंसियों के सिपाहियों से मेरी हार्दिक प्रार्थना है कि कृपया ऐसे लोगों को पहचानिये और उन्हें केवल मूलभूत जरूरतों तक ही सीमित रखिये अन्यथा वो दिन दूर नहीं जब उत्तर-प्रदेश, बिहार पश्चिम बंगाल, मणिपुर, केरल, आदि सीमान्त प्रदेशों में शरणार्थियों की सरकारें बनने लग जाएँ !और हमारे देश में जन्मे नेता और वोटर हाथ मलते ही रह जाएँ ! देश की सुरक्षा के लिए भी ऐसे लोगों को पहचाना जाना आवश्यक है जी !
                     जय-हिन्द !!
                  " 5TH PILLAR CORRUPTION KILLER " THE BLOG .

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