Tuesday, June 7, 2011

" GHAGH " MANTRI MANDAL KA " CHATUR " P.M. OR " SANCHALIKA "


भारत के अचंभित देश वासिओ , नमस्कार ! जून का महिना देश के लिए मुसीबतों से भरा ही होता है | गर्मी से बेहाल जनता को जलभुन जानेवाली ख़बरें ही मिलती हैं ,जैसे : खाने पीने और रोज़मर्रा की चीजों के दाम बढ़ना,पेट्रोल,डीजल,और गैस के दामों में बढ़ोतरी आदि - आदि | लकिन ताज़ा रिसर्च ये हुई है कि देश के लिए जून का महिना हमेशां बुरा रहा है !जैसे देश का बंटवारा ,संजय गाँधी कि मृत्यु ,गोल्डेन टेम्पल पर सैनिक कार्यवाही और अब बाबा रामदेव और अन्ना हजारे का आन्दोलन और " राम लीला " सब जून मैं ही हुआ ? लेकिन मेरा मानना ये है कि इस देश मैं आज़ादी से पहले से गड़बड़ चल रही है | हिन्दुस्तानी सीधे सादे और धर्म के अनुसार चलने वाले लोग ज्यादा हुआ करते थे | चोर, कमीने,मक्कार,घाघ और गद्दार लोगों की संख्या कम हुआ करती थी | जैसे - जैसे समय बीता, वैसे - वैसे ये अनुपात बदलता गया | कारन "टोडी बच्चे " बढ़ते गए |पुराने लोग टोडी बच्चों का मतलब समझते हैं |चलिए आपको भी बता देता हूँ | पुराने जमाने में केवल राज घरानों और अमीरों में ही एक से ज्यादा शादियाँ रिवाज़ था | लेकिन आज़ादी से पहले १०० सालों तक अंग्रेजों का शासन रहा तो मिश्रित नस्लें पैदा होने लगीं तो उन बच्चों को " टोडी बच्चे " कहा जाने लगा | इनकी पहचान " बिल्ली आँखें हुआ करतीं थीं | इस तरह से अनुपात बदल गया | अब हालत ये हो गयी है उस रिवाज को अनोपचारिक रूप से ज्यादातर लोगों ने अपना लिया है | इसी लिए जब बाबा रामदेव ये कहते हैं कि मेरे साथ २० करोड़ लोग हैं तो मुझे मन ही मन हंसी आ जाती है |में सोचता हूँ कि कितना भोला है बाबा ?अकेला बाबा ही नहीं ऐसे लोगों कि संख्या अब भी हजारों में है जो कहते हैं कि देश सिधान्तों के अनुसार चलना चाहिए | " राम - राज्य " चाहने वाले तो लाखों में पाए जाते हैं | कितनी भोली है जनता | दुर्भाग्य से राजनीती में " टोडी बच्चे "ज्यादा पाए जाते हैं और कांग्रेस पार्टी में तो भरमार है | वैसे आजकल "टोडी बच्चे " अपने आपको "सेकुलर "कहलाना ज्यादा पसंद करते हैं | आजकल यु.पी.ऐ. सरकार का नेतृत्व ऐसे ही ज्यादातर लोग कर रहे हैं |जिसमे घाघ,मक्कार और चतुर मंत्री भरे पड़े हैं ,कुछ चोर मंत्री तो इसी सरकार ने जेल में डाले हैं |ससुरे ,इस बात को भी बड़ी शान से बताते हैं कि देखो हम कितने शरीफ प्रधानमंत्री के राज में रह रहे हैं ?पत्रकारों से वार्ता करते वक्त कपिल सिब्बल कि मक्कारी साफ - साफ दिखाई देती है |श्रीमती इंदिरा गाँधी ने जब एमरजेंसी लगायी तब से ये हरम ज़दगी दिखनी शुरू हुई ,और आजकल तो कई नेताओं में भरपूर मात्रा में पाई जाती है |" कलयुग है भाई " इसके इलावा और कहाँ जाकर बात ख़तम कर सकते हैं ? ये तो होना ही है |" प्रलय " आ जाये तो अच्छा है !!!

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