Thursday, June 9, 2011

" SENA SHANTI HETU YA ASHANTI KE LIYE "

राम - राम मित्रो !अब आप बताइए मैं साम्प्रदायिक हूँ या सेकुलर हूँ ?अगर मैं नमस्कार,नमस्ते हाय या फिर हेलो कंहूँ तो सेकुलर और राम- राम ,जय श्री क्रिशन या ऐसा ही कोई और अभिवादन करूं तो मैं साम्प्रदायिक हूँ | ऐसा ही कांग्रेसियों और अन्य तथाकथित सेकुलरों का मानना है |सेकुलर और सम्प्र्दयिकता की परिभाषा क्या है ?इसका नाप दंड क्या है ? कोई नहीं जानता | कुछ रानीतिज्ञ  लोगों ने अपनी सुविधा के लिए कुछ मनगढंत शब्द बना लिए हैं |देश में पिछले कई दिनों से हडकंप मचा हुआ है ,परन्तु कम्युनिस्ट पार्टिया आश्चर्यजनक रूप से अपना मुंह बंद किये बैठी हैं ?कोई नहीं पूछता क्यों ?शांति पूर्वक अनशन पर बैठे बाबा रामदेव से मिलने चंद ऐसे लोग मिलने पहुंच गए जो आर.एस.एस.,बी.जे.पी. या विश्व हिन्दू परिषद् के भी सदस्य हैं तो क्या पहाड़ टूट पड़ा ?ऐसे महत्वपूर्ण प्रश्नों को पूछने के लिए न तो मिडिया के पास समय है और ये "साले"सेकुलर नेता तो यही चाहते हैं की भ्रम की स्थिति बनी रहे |सेंकडों लोगों के साथ बाबा और उनके सहयोगी बालक्रिशन की सरकार  के सिपाहियों ने पीट - पीट कर अधनंगा कर दिया तो बाबा ने अपनी घोषणा में कहा कि " अब शांति पूर्वक अनशन ११००० शांति सैनिकों की छत्रछाया में किया जायेगा | तो सरकार सहित सभी "साले" सेक्युलर भड़क गए ,कहने लगे देश को खतरा हो गया है |और बाबा सफाई देने लगे और अपना निर्णय वापिस भी ले लिया |इसी से पता चलता है कि बाबा अनाडी और भोला संत है, कोई देश को नुकसान पहुँचाने वाली पूर्व योजना के तहत  नहीं बल्कि देशहित के लिए अनशन पर बैठा है |लेकिन मिडिया को समय ही कंहाँ है कि पहले किसी विषय पर अनुसन्धान करे फिर उसे प्रसारित करे ? उसे तो हर बात को " ब्रेकिंग न्यूज़ "बनाकर अपने चेनल की टी. आर.पी. बढ़नी है ? अभी कल रात को एक चेनल पर कोई पूछ रहा था कि ये "सिविल सोसाइटी " क्या चीज़ है ? ये कब बनी ? कोई अन्ना जी और बाबा के अनशन की  तुलना कर रहा है ?मैं भी किन्किर्ताव्याविमुध सा खड़ा हूँ कि किसे कंहूँ अपने दिल कि बात ? कोन है देश का शुभचिंतक ? कौन है शरीफ ?कृपया सभी देश भक्तों और शरीफ राजनीतिज्ञों एक मंच पर एकत्रित हो जाएँ | सभी तरह के बन्धनों को तोड़ दें  और करदें एक शंखनाद !सभी तरह कि देश में व्याप्त बुराइयों के खिलाफ !!!!! अब समय आ गया है !!!!!! जाग जाओ !!!!!!!!!!देश - वासियों !!!!" सेना "चाहे किसी देश की हो या कई देशों की मिलकर बनाई गयी हो और चाहे किसी संत की सेना हो ,वो लोगों की जाने ही लेती है | जब हजारों की संख्या में लोग मर जाते हैं तो " शांति " आ ही जाती है |वो चाहे देवताओं और राक्षसों का युद्ध हो | या महाभारत का कोरवों और पांडवों का युध हो | वो चाहे नाटो की सेनाएँ हों या भारत की श्री लंका में शांति सेना |साडी सेनाओं ने पहले जानें लीं फिर शांति स्थापित हुई |५,जून को पुलिस ने भी तो विध्वंस से " शांति " स्थापित की ?ओउम शांति - शांति - शंतिही !!!!!!     

2 comments:

  1. आदरजोग पिताम्बर दत्त जी,
    जय राजस्थान -जय राजस्थानी !
    आपरो ब्लोग देख्यो ! समूळै ब्लोग माथै घूम्यो !
    भोत ई सांतरो अनै ऊरमावान ब्लोग है आपरो !
    सांतारा विचार-विचार मंथन-अनै सटीक चिन्तावां !
    देस-समाज रा हालत माथै गैरी दीठ अनै सांवठा सुझाव !
    आप ठावका निगहैबान हो सा !
    बधायजै !
    आपरी हज़ारी उमर हुवै !
    www.kavikagad.blogspot.com
    www.omkagad.blogspot.com
    www.ompurohit.blogspot.com

    ReplyDelete
  2. आदरजोग पिताम्बर दत्त जी,
    जय राजस्थान -जय राजस्थानी !
    आपरो ब्लोग देख्यो ! समूळै ब्लोग माथै घूम्यो !
    भोत ई सांतरो अनै ऊरमावान ब्लोग है आपरो !
    सांतारा विचार-विचार मंथन-अनै सटीक चिन्तावां !
    देस-समाज रा हालत माथै गैरी दीठ अनै सांवठा सुझाव !
    आप ठावका निगहैबान हो सा !
    बधायजै !
    आपरी हज़ारी उमर हुवै !
    www.kavikagad.blogspot.com
    www.omkagad.blogspot.com
    www.ompurohit.blogspot.com

    ReplyDelete

"मीडिया"जो आजकल अपनी बुद्धि से नहीं चलता ? - पीताम्बर दत्त शर्मा {लेखक-विश्लेषक}

किसी ज़माने में पत्रकारों को "ब्राह्मण"का दर्ज़ा दिया जाता था और उनके कार्य को "ब्रह्मणत्व"का ! क्योंकि इनके कार्य समाज,द...