Sunday, September 25, 2011

" YE - NATIKTA - VATIKTA - KYA HAI ..? HIMMAT HO TO 2014 MAIN HRAA DENA ..?? "

बेशर्म दोस्तों , शर्म भरा नमस्कार ! आजकल इसी गुण की भारी कमी है विशेषकर हिन्दुस्तान में ,पहले तो लोग " चुल्लु भर पानी में डूब कर मर जाते थे ?? अब तो समुद्र भी छोटा पड़ता है , उसमे से भी ससुरे नेता लोग तैर कर वापिस आ जाते हैं और फिर बे - शर्मी से आकर जनता को बोलते हैं कि " हमें तो २०१४ तक राज करने का अधिकार है ??  जिसे हम पसंद नहीं वो २०१४ में हमारे मुकाबले चुनाव लड़ले ? " लो करल्यो बात ? ये बात जोर शोर से वो इसलिए कहते हैं क्योंकि वो जानते है कि जो शरीफ होगा वो एम्.पी. का चुनाव लड़ ही नहीं पायेगा ? अगर फिर  भी अगर शरीफ आदमी चुनाव लड़ता है  तो , धन कंहा से लायेगा , वो भी अगर उसे कंही से मिल गया तो , जाती , धरम और इलाके के चक्कर में तो फंस ही जायेगा ....???? इन्ही बातों पर बेईमान नेता ताल ठोक कर चुनावों में मुकाबला करने का चेलेंज दे रहे हैं आम आदमी को ??? मगर ये यह नहीं जानते कि चाहे " रावण " हो या " कंस " " हिटलर "  हो या " मुसोलिनी " सबको इसी " आम " सी दिखने वाली जनता ने ही धूल चटाई है ?? जनता ने अगर सोच लिया तो दुनिया ने पहले भी देखा है और भविष्य में भी देखेगी कि कोई आम जनता में से नया नायक निकल कर आएगा और इन निक्कमे नेताओं का भ्रम तोड़ेगा , गर्व नष्ट करेगा और जनहित में सरकार चलाएगा ?? चाहे मोहम्मद गौरी हो या ओरंगजेब , मुग़ल हो या अंग्रेज सब को इस जनता ने भगाया है , भारत - माता कि जय बोल कर या  वन्दे - मातरम् बोल कर ! ??   

3 comments:

  1. "जनता ने अगर सोच लिया तो दुनिया ने पहले भी देखा है और भविष्य में भी देखेगी कि कोई आम जनता में से नया नायक निकल कर आएगा और इन निक्कमे नेताओं का भ्रम तोड़ेगा"

    जोश और आशा का संचार करती आपकी यह प्रस्तुति अच्छी लगी ....शुभकामनायें

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  2. आगे आगे देखिए होता है क्‍या?

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  3. उम्मीद पे कायम है दुनिया…देखें वह वक्त आता कब है…कब खिलता गुल है नया नया……मगर एक बात है लेखनी ही है जिसमे ताकत है तलवार से ज्यादा………हार्दिक शुभकामनायें।

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