Tuesday, November 20, 2012

" कसाब " - हो गया - " हिसाब " !!

 प्रिय भारतवासियों, सादर नमस्कार !
                       आज सरकार ने जनता को समाचार दिया कि " कसाब " जनाब को फांसी देकर उसका हिसाब कर दिया है !! अब हम भारतीय लोग प्रधानमंत्री जी व सोनिया जी को इस महान कार्य करने की बधाई देने की बजाय " मीन-मेख " निकाल रहे हैं !! आदत से मजबूर जो ठहरे....!!
    

मुंबई हमले की चौथी बरसी से पहले कसाब को दी गई फांसी !!!


मुंबई। मुंबई हमले के एकमात्र दोषी आतंकी अजमल कसाब को मुंबई के आर्थर रोड जेल से पुणे की यरवडा जेल में शिफ्ट करने के बाद बुधवार सुबह करीब 7:36 बजे फांसी दे दी गई। डाक्टरों ने उसको मृत घोषित कर दिया गया है। महाराष्ट्र के गृहमंत्री आरआर पाटिल ने कसाब को फांसी दिए जाने की पुष्टि की है। इससे पहले उसको बेहद गोपनीय तरीके से पुणे की यरवडा जेल में शिफ्ट किया गया था। जेल प्रशासन ने राज्य के गृह सचिव को भी इसकी सूचना दे दी गई है। देश के आज़ाद होने के उपरांत किसी भी अपराधी को दी गयी ये 52 वीं फांसी है। 
आर्थर रोड जेल में फांसी देने की सुविधा नहीं है। यह सुविधा केवल पुणे की यरवडा जेल और नागपुर की जेल में ही है। लिहाजा उसको यहां शिफ्ट किया गया था। हालांकि कसाब को बेहद गोपनीय तरीके से शिफ्ट किया गया। एक अग्रेंजी अखबार के मुताबिक माना राष्ट्रपति कसाब 
की दया याचिका खारिज कर चुके थे। लेकिन अभी तक इसकी आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। दो माह पहले गृह मंत्रालय ने कसाब की दया याचिका को खारिज किया गया था। मंत्रालय की सिफारिश पर ही राष्ट्रपति ने उसकी दया याचिका खारिज कर दी है। आर्थर रोड जेल में केवल अंडरट्रायल कैदियों को ही रखा जाता है। लेकिन अब जब कि कसाब को फांसी लगनी काफी हद तक तय हो गई है तो प्रशासन ने इसकी तैयारी भी शुरू कर दी है।
कसाब को राष्ट्रपति द्वारा याचिका खारिज करने के तुरंत बाद मुंबई की आर्थर रोड जेल से यरवडा जेल में शिफ्ट किया गया। इसके कुछ देर बाद ही कसाब को फांसी दे दी गई। इसे बेहद गोपनीय तरीके से सरकार ने अंजाम दिया। वरिष्ठ वकील उजवल निगम ने कसाब को फांसी दिए जाने की पुष्टि करते हुए इसपर खुशी जताई।
इस बीच यरवडा जेल की सुरक्षा को और पुख्ता किया जा रहा है। 2611 के दोषी आतंकी को आर्थर रोड जेल की सबसे अधिक सुरक्षित सैल में रखा गया था। इस हमले में 166 लोगों की मौत हो गई थी। 27 नवंबर 2008 को कसाब को गिरफ्तार किया गया था। अभी तक कसाब के रखरखाव पर करोड़ों रुपये खर्च किए जा चुके हैं। उसके रखरखाव पर हुए खर्च को लेकर भी कई बार सवाल उठे थे। गौरतलब है कि 29 अगस्त 2012 को सुप्रीम कोर्ट ने फांसी की सजा सुनाई थी।
मुंबई हमले की चौथी बरसी से पहले कसाब को दी गई फांसी !!!

मुंबई। मुंबई हमले के एकमात्र दोषी आतंकी अजमल कसाब को मुंबई के आर्थर रोड जेल से पुणे की यरवडा जेल में शिफ्ट करने के बाद बुधवार सुबह करीब 7:36 बजे फांसी दे दी गई। डाक्टरों ने उसको मृत घोषित कर दिया गया है। महाराष्ट्र के गृहमंत्री आरआर पाटिल ने कसाब को फांसी दिए जाने की पुष्टि की है। इससे पहले उसको बेहद गोपनीय तरीके से पुणे की यरवडा जेल में शिफ्ट किया गया था। जेल प्रशासन ने राज्य के गृह सचिव को भी इसकी सूचना दे दी गई है। देश के आज़ाद होने के उपरांत किसी भी अपराधी को दी गयी ये 52 वीं फांसी है। 
आर्थर रोड जेल में फांसी देने की सुविधा नहीं है। यह सुविधा केवल पुणे की यरवडा जेल और नागपुर की जेल में ही है। लिहाजा उसको यहां शिफ्ट किया गया था। हालांकि कसाब को बेहद गोपनीय तरीके से शिफ्ट किया गया। एक अग्रेंजी अखबार के मुताबिक माना राष्ट्रपति कसाब की दया याचिका खारिज कर चुके थे। लेकिन अभी तक इसकी आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। दो माह पहले गृह मंत्रालय ने कसाब की दया याचिका को खारिज किया गया था। मंत्रालय की सिफारिश पर ही राष्ट्रपति ने उसकी दया याचिका खारिज कर दी है। आर्थर रोड जेल में केवल अंडरट्रायल कैदियों को ही रखा जाता है। लेकिन अब जब कि कसाब को फांसी लगनी काफी हद तक तय हो गई है तो प्रशासन ने इसकी तैयारी भी शुरू कर दी है।
कसाब को राष्ट्रपति द्वारा याचिका खारिज करने के तुरंत बाद मुंबई की आर्थर रोड जेल से यरवडा जेल में शिफ्ट किया गया। इसके कुछ देर बाद ही कसाब को फांसी दे दी गई। इसे बेहद गोपनीय तरीके से सरकार ने अंजाम दिया। वरिष्ठ वकील उजवल निगम ने कसाब को फांसी दिए जाने की पुष्टि करते हुए इसपर खुशी जताई।
इस बीच यरवडा जेल की सुरक्षा को और पुख्ता किया जा रहा है। 2611 के दोषी आतंकी को आर्थर रोड जेल की सबसे अधिक सुरक्षित सैल में रखा गया था। इस हमले में 166 लोगों की मौत हो गई थी। 27 नवंबर 2008 को कसाब को गिरफ्तार किया गया था। अभी तक कसाब के रखरखाव पर करोड़ों रुपये खर्च किए जा चुके हैं। उसके रखरखाव पर हुए खर्च को लेकर भी कई बार सवाल उठे थे। गौरतलब है कि 29 अगस्त 2012 को सुप्रीम कोर्ट ने फांसी की सजा सुनाई थी।
                               
                                   नवंबर 26, 2008 से नवंबर 21, 2012 को सुबह 7.36 बजे तक का पूरा घटनाक्रम ::


26 नवंबर, 2008 को मुंबई में हुए हमले से लेकर 21 नवंबर, 2012 को कसाब को हुई फांसी तक का पूरा घटनाक्रम जानें:

26 नवंबर 2008: अजमल कसाब और नौ आतंकवादियों ने मुंबई पर हमला किया, जिसमें 166 लोगों की जान गई.

27 नवंबर 2008: अजमल कसाब गिरफ्तार.

30 नवंबर 2008: कसाब ने पुलिस के सामने अपना गुनाह कुबूल किया.

27/28 दिसंबर 2008: आइडेंटीफिकेशन परेड हुई.

13 जनवरी 2009: एम एल तहलियानी को 26/11 मामले में विशेष जज नियुक्त किया गया.

16 जनवरी 2009: ऑर्थर रोड जेल को कसाब का ट्रायल के लिए चुना गया.

22 फरवरी 2009: उज्ज्वल निकम को सरकारी वकील नियुक्त किया गया.

25 फरवरी 2009: मेट्रोपॉलिटिन कोर्ट में कसाब के खिलाफ चार्जशीट दायर.

1 अप्रैल 2009: स्पेशल कोर्ट ने अंजलि वाघमारे को कसाब का वकील नियुक्त किया.

20 अप्रैल 2009: अभियोजन पक्ष ने 312 मोर्चों पर कसाब को आरोपी बनाया.

29 अप्रैल 2009: कसाब नाबालिग नहीं है. विशेषज्ञों की राय पर अदालत ने फैसला सुनाया.

6 मई 2009: मामले में आरोप तय किए गए. कसाब पर 86 आरोप तय,लेकिन आरोपों से कसाब का इंकार.

23 जून 2009: हाफिज सईद, जकी-उर-रहमान लखवी समेत 22 लोगों के खिलाफ गैर-जमानती वारंट जारी किए गए.

16 दिसंबर 2009: अभियोजन पक्ष ने 26/11 के मामले में आर्ग्यूमेंट पूरा किया.

9 मार्च 2010: अंतिम बहस शुरू.

31 मार्च 2010: फैसला 3 मई के लिए सुरक्षित रखा गया.

3 मई 2010: कोर्ट ने कसाब को मुंबई हमले का दोषी ठहराया. सबाउद्दीन अहमद और फहीम अंसारी आरोपों से बरी.

6 मई 2010: कसाब को विशेष अदालत ने मौत की सजा सुनाई.

18 अक्टूबर 2010: बॉम्बे हाईकोर्ट में मामले की सुनवाई शुरू. कसाब की वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए पेशी.

19 अक्टूबर 2010: कसाब ने निजी तौर पर अदालत में हिस्सा लेने की बात कही.

21 अक्टूबर 2010: कसाब ने निजी तौर पर अदालत में हिस्सा लेने की बात अपने वकील से दोहराई.

25 अक्टूबर 2010: हाई कोर्ट के जजों ने सीसीटीवी फुटेज देखी.

27 अक्टूबर 2010: वकील उज्ज्वल निकम ने निचली अदालत द्वारा दी गई कसाब को मौत की सजा को सही ठहराया.

29 अक्टूबर 2010: वकील उज्ज्वल निकम ने तर्क दिया कि कसाब ने बार-बार यू-टर्न लेकर निचली अदालत को गुमराह करने की कोशिश की.

19 नवंबर 2010: निकम ने अदालत को बताया कि 26/11 के हमलावर देश में मुसलमानों के लिए अलग राज्य चाहते थे.

22 नवंबर 2010: निकम ने कसाब को झूठा और साजिशकर्ता ठहराया.

23 नवंबर 2010: हाईकोर्ट के जजों ने एक बार फिर से कसाब के सीसीटीवी फुटेज देखें.

24 नवंबर 2010: निकम ने हाईकोर्ट में तर्क दिया कि निचली अदालत ने कसाब के इकबालिया बयान को स्वीकार करने में गलती की थी.

25 नवंबर 2010: कसाब के वकील अमीन सोलकर ने आर्ग्यूमेंट शुरू किया. निचली अदालत की कार्वायही को गलत ठहराते हुए 26/11 मामले पर दोबारा ट्रायल की मांग की.

30 नवंबर 2010: सोलकर ने तर्क दिया कि कसाब के खिलाफ "देश के खिलाफ युद्ध छेड़ने के आरोप नहीं बनते.

2 दिसंबर 2010: बचाव पक्ष के वकील ने अदालत में कहा कि कसाब पाकिस्तान से कश्ती से नहीं आया था क्योंकि कश्ती में सिर्फ दस व्यक्ति ही आ सकते हैं.

3 दिसंबर 2010: उसके वकील का तर्क था कि कसाब को फंसाने के लिए पुलिस ने झूठी कहानी बनाई.

5 दिसंबर 2010: बचाव पक्ष के वकील सोलकर ने तर्क दिया कि सबूतों को दबा दिया गया है. सिर्फ कुछ सीसीटीवी फुटेज अदालत में दिखाई गई.

6 दिसंबर 2010: सोलकर ने फुटेज में दिखी तस्वीरों को गलत बताया.

7 दिसंबर 2010: कसाब ने पुलिस अधिकारी हेमंत करकरे और दो अन्य पुलिस अधिकारियों की हत्या से इनकार किया. उसके वकील का तर्क था कि मारे गए पुलिस अधिकारियों के शरीर में मिली गोलियां कसाब की राइफल के साथ मैच नहीं होती.

8 दिसंबर 2010: सोलकर का कहना था कि पुलिस ने गिरगाम चौपाटी में 26 नवंबर, 2008 को झूठी मुठभेड़ का नाटक करके कसाब को फंसाया है. साथ ही मौके पर कसाब की मौजूदगी से इनकार करते हुए उसकी गिरफ्तारी को गलत ठहराया.

9 दिसंबर 2010: कसाब के वकील ने उसके खिलाफ पेश किए गए सबूतों को कमजोर बताते हुए पुलिस अधिकारी करकरे के मारे जाने से इंकार किया.

10 दिसंबर 2010: कसाब के वकील ने निचली अदालत में रखी कश्ती का निरीक्षण किया और उस कश्ती को 10 व्यक्तियों के आने के लिए नाकाफी बताया और दावा किया कि अभियोजन पक्ष का दावा गलत है.

13 दिसंबर 2010: कसाब ने खुद के किशोर होने की दलील देते हुए अदालत से अपनी मानसिक हालत के लिए चिकित्सा विशेषज्ञों के एक पैनल नियुक्ति करने का आग्रह किया.

14 दिसंबर 2010: अदालत ने कसाब की मांग को खारिज कर दिया.

21 दिसंबर 2010: अदालत ने 26/11 के मामले में फहीम अंसारी को बरी किए जाने के खिलाफ राज्य की अपील सुनी.

22 दिसंबर 2010: सरकारी वकील निकम ने तर्क दिया कि निचली अदालत ने फहीम अंसारी और सबाउद्दीन अहमद को बरी करने में गलती की थी.

21 फरवरी 2011: बॉम्बे हाईकोर्ट ने कसाब पर निचली अदालत के फैसले को सही ठहराया और उसकी अपील खारिज कर दी. मुंबई हमलों के मामले में फहीम अंसारी और सबाउद्दीन अहमद को बरी कर दिया गया.

29 जुलाई 2011: कसाब ने फांसी की सजा के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में अपील की.

10 अक्तूबर 2011: सुप्रीम कोर्ट ने कसाब की फांसी की सजा पर रोक लगाई थी.

31 जनवरी 2012: सुप्रीम कोर्ट में शुरू हुई मामले की सुनवाई. कसाब का पक्ष रखने के लिए वरिष्ठ वकील राजू रामचंद्रन को एमिकस-क्यूरी नियुक्त किया गया.

25 अप्रैल 2012: कसाब की अपील पर कोर्ट ने सुनवाई पूरी की और फैसला सुरक्षित रखा.

28 अगस्त 2012: मुंबई हमले के दोषी आमिर अजमल कसाब को फांसी की सज़ा को सुप्रीम कोर्ट ने बरकरार रखा. फहीम अंसारी और सबाउद्दीन अहमद के बॉम्बे हाईकोर्ट की रिहाई के फैसले को भी बरकरार रखा है. इन दोनों पर भारत से मुंबई हमलावरों को मदद करने का आरोप था.

20 नवंबर, 2012: राष्‍ट्रपति के सामने दया के लिए भेजी गई कसाब की अर्जी खारिज.

21 नवंबर, 2012: कसाब को सुबह 7.36 बजे फांसी दी गई।
नवंबर 26, 2008 से नवंबर 21, 2012 को सुबह 7.36 बजे तक का पूरा घटनाक्रम ::


26 नवंबर, 2008 को मुंबई में हुए हमले से लेकर 21 नवंबर, 2012 को कसाब को हुई फांसी तक का पूरा घटनाक्रम जानें: 
 
26 नवंबर 2008: अजमल कसाब और नौ आतंकवादियों ने मुंबई पर हमला किया, जिसमें 166 लोगों की जान गई.
 
27 नवंबर 2008: अजमल कसाब गिरफ्तार.
 
30 नवंबर 2008: कसाब ने पुलिस के सामने अपना गुनाह कुबूल किया.
 
27/28 दिसंबर 2008: आइडेंटीफिकेशन परेड हुई.
 
13 जनवरी 2009:  एम एल तहलियानी को 26/11 मामले में विशेष जज नियुक्त किया गया.
 
16 जनवरी 2009:  ऑर्थर रोड जेल को कसाब का ट्रायल के लिए चुना गया.
 
22 फरवरी 2009: उज्ज्वल निकम को सरकारी वकील नियुक्त किया गया.
 
25 फरवरी 2009: मेट्रोपॉलिटिन कोर्ट में कसाब के खिलाफ चार्जशीट दायर.
 
1 अप्रैल 2009: स्पेशल कोर्ट ने अंजलि वाघमारे को कसाब का वकील नियुक्त किया.
 
20 अप्रैल 2009: अभियोजन पक्ष ने 312 मोर्चों पर कसाब को आरोपी बनाया.
 
29 अप्रैल 2009: कसाब नाबालिग नहीं है. विशेषज्ञों की राय पर अदालत ने फैसला सुनाया.
 
6 मई 2009: मामले में आरोप तय किए गए. कसाब पर 86 आरोप तय,लेकिन आरोपों से कसाब का इंकार.
 
23 जून 2009: हाफिज सईद, जकी-उर-रहमान लखवी समेत 22 लोगों के खिलाफ गैर-जमानती वारंट जारी किए गए.
 
16 दिसंबर 2009: अभियोजन पक्ष ने 26/11 के मामले में आर्ग्यूमेंट पूरा किया.
 
9 मार्च 2010: अंतिम बहस शुरू.
 
31 मार्च 2010: फैसला 3 मई के लिए सुरक्षित रखा गया.
 
3 मई 2010: कोर्ट ने कसाब को मुंबई हमले का दोषी ठहराया. सबाउद्दीन अहमद और फहीम अंसारी आरोपों से बरी.
 
6 मई 2010: कसाब को विशेष अदालत ने मौत की सजा सुनाई.
 
18 अक्टूबर 2010: बॉम्बे हाईकोर्ट में मामले की सुनवाई शुरू. कसाब की वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए पेशी.
 
19 अक्टूबर 2010: कसाब ने निजी तौर पर अदालत में हिस्सा लेने की बात कही.
 
21 अक्टूबर 2010: कसाब ने निजी तौर पर अदालत में हिस्सा लेने की बात अपने वकील से दोहराई.
 
25 अक्टूबर 2010: हाई कोर्ट के जजों ने सीसीटीवी फुटेज देखी.
 
27 अक्टूबर 2010: वकील उज्ज्वल निकम ने निचली अदालत द्वारा दी गई कसाब को मौत की सजा को सही ठहराया.
 
29 अक्टूबर 2010: वकील उज्ज्वल निकम ने तर्क दिया कि कसाब ने बार-बार यू-टर्न लेकर निचली अदालत को गुमराह करने की कोशिश की.
 
19 नवंबर 2010: निकम ने अदालत को बताया कि 26/11 के हमलावर देश में मुसलमानों के लिए अलग राज्य चाहते थे.
 
22 नवंबर 2010: निकम ने कसाब को झूठा और साजिशकर्ता ठहराया.
 
23 नवंबर 2010: हाईकोर्ट के जजों ने एक बार फिर से कसाब के सीसीटीवी फुटेज देखें.
 
24 नवंबर 2010: निकम ने हाईकोर्ट में तर्क दिया कि निचली अदालत ने कसाब के इकबालिया बयान को स्वीकार करने में गलती की थी.
 
25 नवंबर 2010: कसाब के वकील अमीन सोलकर ने आर्ग्यूमेंट शुरू किया. निचली अदालत की कार्वायही को गलत ठहराते हुए 26/11 मामले पर दोबारा ट्रायल की मांग की.
 
30 नवंबर 2010: सोलकर ने तर्क दिया कि कसाब के खिलाफ "देश के खिलाफ युद्ध छेड़ने के आरोप नहीं बनते.
 
2 दिसंबर 2010: बचाव पक्ष के वकील ने अदालत में कहा कि कसाब पाकिस्तान से कश्ती से नहीं आया था क्योंकि कश्ती में सिर्फ दस व्यक्ति ही आ सकते हैं.
 
3 दिसंबर 2010: उसके वकील का तर्क था कि कसाब को फंसाने के लिए पुलिस ने झूठी कहानी बनाई.
 
5 दिसंबर 2010: बचाव पक्ष के वकील सोलकर ने तर्क दिया कि सबूतों को दबा दिया गया है. सिर्फ कुछ सीसीटीवी फुटेज अदालत में दिखाई गई. 
 
6 दिसंबर 2010: सोलकर ने फुटेज में दिखी तस्वीरों को गलत बताया.
 
7 दिसंबर 2010: कसाब ने पुलिस अधिकारी हेमंत करकरे और दो अन्य पुलिस अधिकारियों की हत्या से इनकार किया. उसके वकील का तर्क था कि मारे गए पुलिस अधिकारियों के शरीर में मिली गोलियां कसाब की राइफल के साथ मैच नहीं होती.
 
8 दिसंबर 2010: सोलकर का कहना था कि पुलिस ने गिरगाम चौपाटी में 26 नवंबर, 2008 को झूठी मुठभेड़ का नाटक करके कसाब को फंसाया है. साथ ही मौके पर कसाब की मौजूदगी से इनकार करते हुए उसकी गिरफ्तारी को गलत ठहराया.
 
9 दिसंबर 2010: कसाब के वकील ने उसके खिलाफ पेश किए गए सबूतों को कमजोर बताते हुए पुलिस अधिकारी करकरे के मारे जाने से इंकार किया.
 
10 दिसंबर 2010: कसाब के वकील ने निचली अदालत में रखी कश्ती का निरीक्षण किया और उस कश्ती को 10 व्यक्तियों के आने के लिए नाकाफी बताया और दावा किया कि अभियोजन पक्ष का दावा गलत है.
 
13 दिसंबर 2010: कसाब ने खुद के किशोर होने की दलील देते हुए अदालत से अपनी मानसिक हालत के लिए चिकित्सा विशेषज्ञों के एक पैनल नियुक्ति करने का आग्रह किया.
 
14 दिसंबर 2010: अदालत ने कसाब की मांग को खारिज कर दिया.
 
21 दिसंबर 2010: अदालत ने 26/11 के मामले में फहीम अंसारी को बरी किए जाने के खिलाफ राज्य की अपील सुनी.
 
22 दिसंबर 2010: सरकारी वकील निकम ने तर्क दिया कि निचली अदालत ने फहीम अंसारी और सबाउद्दीन अहमद को बरी करने में गलती की थी.
 
21 फरवरी 2011: बॉम्बे हाईकोर्ट ने कसाब पर निचली अदालत के फैसले को सही ठहराया और उसकी अपील  खारिज कर दी. मुंबई हमलों के मामले में फहीम अंसारी और सबाउद्दीन अहमद को बरी कर दिया गया.
 
29 जुलाई 2011: कसाब ने फांसी की सजा के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में अपील की.
 
10 अक्तूबर 2011: सुप्रीम कोर्ट ने कसाब की फांसी की सजा पर रोक लगाई थी.
 
31 जनवरी 2012: सुप्रीम कोर्ट में शुरू हुई मामले की सुनवाई. कसाब का पक्ष रखने के लिए वरिष्ठ वकील राजू रामचंद्रन को एमिकस-क्यूरी नियुक्त किया गया.
 
25 अप्रैल 2012: कसाब की अपील पर कोर्ट ने सुनवाई पूरी की और फैसला सुरक्षित रखा.
 
28 अगस्त 2012: मुंबई हमले के दोषी आमिर अजमल कसाब को फांसी की सज़ा को सुप्रीम कोर्ट ने बरकरार रखा. फहीम अंसारी और सबाउद्दीन अहमद के बॉम्बे हाईकोर्ट की रिहाई के फैसले को भी बरकरार रखा है. इन दोनों पर भारत से मुंबई हमलावरों को मदद करने का आरोप था.
 
20 नवंबर, 2012: राष्‍ट्रपति के सामने दया के लिए भेजी गई कसाब की अर्जी खारिज.
 
21 नवंबर, 2012: कसाब को सुबह 7.36 बजे फांसी दी गई।


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आपका अपना
पीताम्बर दत्त शर्मा
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1 comment:

  1. मीन मेख यूँ ही नहीं निकाल रहे क्योंकि इस वक्त फ़ांसी वो भी अचानक संदेह पैदा करती है इसके लिये ये पढिये

    http://redrose-vandana.blogspot.in/2012/11/blog-post_5358.html

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"कुछ नहीं ,है भाता ,जब रोग ये लग जाता".....!!! - पीताम्बर दत्त शर्मा (स्वतंत्र टिप्पणीकार) मो.न.+ 9414657511

वैसे तो मित्रो,! सभी रोग बुरे होते हैं !लेकिन कुछ रोग तो हमारा पीछा छोड़ देते हैं और कुछ आदमी की मौत तलक साथ देते हैं !पुराने जमाने में ऐसे ...